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आत्म विश्वास ने बचाई जिंदगी – Power of Self Confidence

अगर आप अपनी जिंदगी में कुछ हासिल करना चाहते हैं तो एक चीज है जो जरूर आपको अपने अंदर पैदा करनी होगी और वह है आत्मविश्वास। आत्मविश्वास से भरा इंसान वो सब कुछ कर दिखाता है जो किसी और इंसान के लिए असंभव होता है। आइए एक अच्छी

कहानी के माध्यम से आत्मविश्वास की अद्भुत शक्ति को पहचानते हैं। यह कहानी है दो छोटे बच्चों की जो एक मामूली से गांव में रहते थे। एक बच्चा था 11 साल का और दूसरा था सिर्फ 8 साल का। दोनों एक दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे। ऐसा कहा जाता था जैसे वह दोनों दो शरीर में एक जान हो। दोनों हर वक्त एक साथ रहते साथ खेलते, साथ खाना खाते और साथ

ही हंसते। कभी-कभी तो लगता जैसे दोनों एक ही मां की दो संताने हो। लेकिन वो दोनों दोस्त यह नहीं जानते थे कि उनके साथ क्या होने वाला है। एक दिन वो दोनों खेलतेखेलते गांव से कुछ दूर निकल गए। दोपहर का वक्त था। सूरज सिर पर था। खेलतेखेलते वह दोनों बच्चे गांव के पुराने कुएं के पास पहुंच गए। कुआं बहुत ही पुराना था लेकिन वह ज्यादा गहरा नहीं था।

खेलतेखेलते अचानक एक हादसा हो गया। वो बड़ा बच्चा जो 11 साल का था फिसल गया और सीधा कुएं में गिर पड़ा। वो घबराकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था। कुएं के पानी में हाथ-पांव मारते हुए वो डूबने लगा। अब वहां और कोई नहीं था। ना कोई बड़ा आदमी ना कोई मदद करने वाला। सिर्फ वो छोटा सात साल का बच्चा। उसने चारों तरफ देखा। किसी को आवाज दी पर कोई

जवाब नहीं मिला। फिर उसकी नजर पड़ी पास ही एक लोहे की बाल्टी पर जिसमें एक रस्सी बंधी हुई थी। उस सात साल के बच्चे ने एक भी सेकंड नहीं गवाया। वो भाग कर गया। उसने बाल्टी उठाई और उस बाल्टी को नीचे कुएं में फेंक दी और अपने दोस्त की तरफ कहा ले पकड़ जल्दी पकड़ ले। बड़ा बच्चा बाल्टी पकड़ लेता है। और अब शुरू होती है असली लड़ाई। 7 साल के बच्चे और असंभव के बीच वो छोटा

बच्चा पूरी शक्ति से बाल्टी को ऊपर खींचता है। उसके नन्हे हाथ दर्द से कांप रहे होते हैं। सांसे तेज चल रही होती है। लेकिन वो रुक नहीं रहा था। खींचता रहा खींचता रहा। इतनी देर के बाद आखिरकार उसने अपने दोस्त को कुएं से बाहर निकाल लिया। दोनों जमीन पर गिर पड़े। भीगे हुए लेकिन जिंदा। दोनों बच्चे गले लगकर रोने लगे। खुश भी थे और हल्का डर भी गए थे। उन्हें लगा अब तो घर जाकर बहुत डांट पड़ेगी।

लेकिन जब वह दोनों गांव लौटे और सबको बताया तो किसी ने विश्वास ही नहीं किया। लोगों ने कहा अरे कैसे हो सकता है? इतना छोटा सात साल का बच्चा और वो किसी को ऊपर खींच ले असंभव है। सभी को लगता था कि यह बच्चे कोई बहाना बना रहे हैं। उस वक्त गांव के सबसे समझदार और बूढ़े व्यक्ति थे रहीम चाचा। सब लोग उनके पास पहुंचे और बोले रहीम चाचा आप बताइए क्या यह सच हो सकता है? रहीम चाचा ने पूरी कहानी सुनी और दोनों बच्चों की तरफ मुस्कुरा कर देखा। फिर बोले बिल्कुल हो सकता है। गांव वाले हैरान रह गए और बोले लेकिन कैसे इस बच्चे में इतनी

ताकत आई कहां से? रहीम चाचा ने गहरी सांस ली और फिर बोले देखो सवाल यह नहीं है कि उसने यह कैसे किया? सवाल यह है कि उसने यह क्यों किया? सब हैरान रह गए। रहीम चाचा बोले उस वक्त वहां कोई नहीं था जो उसे यह कहे कि तू नहीं कर सकता। कोई नहीं था जो उसे डराए या रोक दे। यहां तक कि वह यह खुद भी नहीं सोच रहा था। उसको बस अपने दोस्त को बचाना था और उसने वही किया। रहीम चाचा आगे बोले जब इंसान के अंदर

आत्मविश्वास होता है तो वह कुछ भी कर सकता है। हमारी हदें बाहर के लोग नहीं बनाते हम अपने आप भी बनाते हैं। जिस दिन हम यह मान लेते हैं कि हम नहीं कर सकते उसी दिन हम हार जाते हैं। उस दिन उस बच्चे ने ना सिर्फ अपने दोस्त को बचाया बल्कि उस गांव को एक सबक भी सिखाया। अगर तुम अपने आप पर विश्वास रखते हो तो असंभव भी संभव बन जाता है।

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