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पत्नी (Patni) के नाम से ज़मीन रजिस्ट्री कराना सही है या गलत?(कानूनी जानकारी – भारत में लागू नियम)

भूमिका

भारत में ज़मीन या मकान खरीदते समय अक्सर यह सवाल उठता है कि पत्नी के नाम से रजिस्ट्री कराना सही होता है या गलत। कई लोग इसे टैक्स बचत, पारिवारिक सुरक्षा या भविष्य की योजना से जोड़कर देखते हैं। इस लेख में हम इसे कानूनी, आर्थिक और व्यावहारिक नजरिए से समझेंगे।

🏠 पत्नी के नाम ज़मीन रजिस्ट्री कराना – क्या यह कानूनी है?

हाँ, पत्नी के नाम से ज़मीन या मकान रजिस्ट्री कराना पूरी तरह कानूनी है। भारतीय कानून में महिला को संपत्ति खरीदने और रखने का पूरा अधिकार है।

👉 इसमें कोई गैरकानूनी काम नहीं माना जाता, बशर्ते:

✅ पत्नी के नाम ज़मीन कराने के फायदे

1️⃣ टैक्स में लाभ

2️⃣ पारिवारिक सुरक्षा

3️⃣ महिला सशक्तिकरण

4️⃣ बैंक लोन में सुविधा

❌ पत्नी के नाम ज़मीन कराने के नुकसान / जोखिम

1️⃣ पूर्ण मालिकाना हक

2️⃣ पारिवारिक विवाद की स्थिति

3️⃣ बेनामी लेन-देन का खतरा

हालाँकि पति-पत्नी के बीच लेन-देन को सामान्यतः बेनामी नहीं माना जाता, फिर भी दस्तावेज़ स्पष्ट होने चाहिए।

📝 क्या जॉइंट रजिस्ट्री बेहतर विकल्प है?

हाँ, कई मामलों में पति-पत्नी के संयुक्त (Joint) नाम से रजिस्ट्री सबसे सुरक्षित मानी जाती है।

जॉइंट रजिस्ट्री के फायदे:

⚖️ कानून क्या कहता है?

इन सभी के तहत पत्नी के नाम संपत्ति रखना कानूनी है, जब तक प्रक्रिया पारदर्शी हो।

📌 महत्वपूर्ण सावधानियाँ

🔚

पत्नी के नाम ज़मीन रजिस्ट्री कराना न तो गलत है और न ही गैरकानूनी। यह कई मामलों में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इससे जुड़े कानूनी अधिकारों और जोखिमों को समझना जरूरी है। सही निर्णय आपकी पारिवारिक स्थिति, आर्थिक योजना और भविष्य की जरूरतों पर निर्भर करता है।

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