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सोच से बनते है अमीर // Best Motivational Story in Hindi

एक बार की बात है। भारत के एक बड़े और व्यस्त शहर में एक आलीशान कोठी के बाहर एक भिखारी कई दिनों से बैठा हुआ था। उसके कपड़े फटे हुए थे। चेहरा थका हारा और आंखों में मायूसी साफ झलक रही थी। वह दो दिन से लगातार उसी जगह बैठा था। बिना कुछ खाए पिए। बस लोगों से रोटी के कुछ टुकड़े मांगकर पेट भर रहा था। उस आलीशान बंगले का मालिक एक बहुत

अमीर उद्योगपति था। तीसरे दिन जब वो अमीर आदमी अपने घर से बाहर निकला तो उसकी नजर भिखारी पर पड़ी। उसने उस भिखारी को गौर से देखा और उसके पास जाकर बोला अरे तुम तो एकदम लंबे चौड़े लगते हो। फिर क्यों भीख मांग रहे हो? मेहनत मजदूरी से अपना पेट क्यों नहीं भरते? भिखारी ने जवाब दिया, “साहब, मेरे पास कोई भी काम नहीं है। कोई मुझे

नौकरी देने को तैयार नहीं होता। अगर आप मुझे कोई नौकरी दे दे, तो मैं अभी भीख मांगना बंद कर दूंगा।” भिखारी की यह बात सुनकर अमीर आदमी मुस्कुराया। उसने कुछ पल सोचा फिर बोला, नौकरी तो मैं तुम्हें नहीं दे सकता, लेकिन अगर तुम सच में मेहनत करने को तैयार हो, तो मैं तुम्हें अपना बिजनेस पार्टनर बना सकता हूं। मेरे पास एक साबुन की फैक्ट्री है। मैं चाहता हूं कि

तुम साबुन को बाजार में सप्लाई करो और महीने के अंत में जो भी मुनाफा होगा, उसका एक हिस्सा मुझे दे देना। भिखारी ने हैरानी के साथ पूछा। मतलब आप 80% लोगे और मुझे 20% दोगे। अमीर आदमी हंस पड़ा और बोला नहीं मुझे सिर्फ 10% देना। बाकी पूरा 90% तुम्हारा होगा। इस तरह तुम ज्यादा मेहनत करोगे और जल्दी-जल्दी तरक्की करोगे। भिखारी को अपनी किस्मत पर यकीन ही नहीं हुआ। उसे लगा जैसे उसकी

जिंदगी अचानक बदल गई हो। उसने तुरंत हामी भर दी। अगले दिन वह भिखारी उस अमीर आदमी की फैक्ट्री में गया और मेहनत के साथ काम शुरू कर दिया। वह सुबह से रात तक दुकानों पर साबुन सप्लाई करता, ग्राहकों से बातें करता और नए-नए ऑर्डर्स लेकर आता। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई। महीने के अंत तक उसने ₹1 लाख का मुनाफा कमा लिया था। शाम को जब वह

अपने कमरे में बैठा था तो वह सोचने लगा। सारा काम तो मैंने ही किया है। फैक्ट्री वाला तो बस आराम से बैठा था। अब मैं क्यों अपनी मेहनत का 10% उसे दूं? यह तो मेरे साथ नाइंसाफी होगी। लालच उसके मन में डेरा जमा चुका था। महीने के अंत में जब अमीर आदमी आया और उसने बड़े आराम से पूछा। तो बताओ इस महीने कितना मुनाफा हुआ? भिखारी झूठे आंसू बहाते हुए बोला। अरे साहब इस महीने तो मुझे एक भी रुपए का मुनाफा नहीं हुआ। उल्टा मेरे ऊपर कर्ज हो गया है।

अमीर आदमी उसकी आंखों में देखते ही समझ गया कि वह झूठ बोल रहा है। मगर उसने कुछ नहीं कहा। बस मुस्कुराया और चुपचाप वहां से चला गया। भिखारी अंदर ही अंदर बहुत खुश होने लगा। उसने सोचा देखा मैंने उसे मूर्ख बना दिया। अब यह सारा मुनाफा सिर्फ मेरा है। अगले कुछ हफ्तों में वो नया-नया अमीर बना भिखारी उन पैसों को मौजमस्ती में उड़ाने लगा। महंगे कपड़े, शराब, दोस्तों पर खर्च। उसने उस पैसे को पानी की तरह बहा दिया। लेकिन उसने यह नहीं सोचा कि

असली तरक्की मेहनत और ईमानदारी से होती है। मौजमस्ती और धोखे से नहीं। कुछ ही महीनों में वह ₹1 लाख खत्म हो गए। जो दोस्त उसके आसपास मंडराते थे, वही दोस्त अब उससे दूर चले गए। अब उसके पास ना पैसा बचा, ना काम, ना ही इज्जत। आखिरकार मजबूरी में वह उसी जगह लौट आया। उसी आशान बनने के बाद जहां उसे इतना अच्छा मौका मिला था और वहीं बैठकर दोबारा भीख मांगने लगा। जब उस अमीर आदमी ने उस भिखारी को दोबारा वहीं बैठे देखा तो मन

ही मन सोचने लगा यही फर्क है गरीब की सोच में और अमीर की सोच में। अमीर इंसान यह सोचता है कि दूसरों के साथ मैं अपना मुनाफा कैसे करूं। पर गरीबी की सोच वाला इंसान सोचता है सारा मुनाफा मैं अकेले ही रख लूं। दोस्तों अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो आपको यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

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