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कुछ तो लोग कहेंगे | Everyone Judges You – Real moral in hindi kahani

किसी ने सही कहा है। कुछ तो लोग कहेंगे। यह कहानी इन्हीं पंक्तियों की सच्चाई दिखाती है। बहुत समय पहले एक बूढ़े आदमी ने नया घोड़ा खरीदा था। वो और उसका बेटा अक्सर इसी घोड़े पर सवार होकर गांव-गांव जाया करते थे। एक दिन उसने अपने बेटे के साथ उस गांव से दूर लंबी यात्रा पर जाने का फैसला किया। बूढ़ा आदमी होने के कारण उसने खुद घोड़े की सवारी की और अपने

बेटे को बगल में चलने को कहा। कुछ दूर चलने के बाद रास्ते में उन्हें एक युवक मिला। युवक ने कहा, यह आदमी अपने बेटे से प्यार नहीं करता। खुद तो घोड़े पर सवार है और बेचारे बेटे को पैदल चला रहा है। यह सुनकर बूढ़ा आदमी घोड़े से उतर गया और अपने बेटे को उस घोड़े पर बैठा दिया और खुद घोड़े के बगल में चलने लगा। कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक बूढ़ी औरत मिली। बूढ़ी औरत ने उन्हें देखा और उस बेटे की

आलोचना करते हुए कहा, “यह लड़का कितना निर्दयी और असभ्य है। यह घोड़े पर सवार है और अपने बूढ़े पिता को पैदल चला रहा है। बाप बेटे को लगा कि दोनों का साथ में सवारी करना ही उचित रहेगा। इससे यह धारणा बनेगी कि वह एक दूसरे की परवाह करते हैं। इस तरह दोनों घोड़े पर सवार होकर अपनी यात्रा पर निकल पड़े। कुछ समय बाद वो नजदीक के गांव से गुजरे। उस गांव में एक बड़े अस्तबल के पास कुछ लोग बैठे थे।

अस्तबल के आसपास बैठे उन लोगों ने जब दोनों को उस घोड़े की सवारी करते हुए देखा तो वह हंसने लगे। उनमें से एक आदमी उनके पास आया और बोला तुम दोनों इस घोड़े पर सवार होकर इसे क्यों तड़पा रहे हो? तुम दोनों ने इस पर इतना वजन क्यों डाल रखा है? बाप बेटे को यह सुनकर दुख हुआ। तो बेटे ने कहा, अब हम इस घोड़े को आराम देंगे और बिना सवारी किए ही इसे ले जाएंगे। इतना कहकर वह दोनों उस घोड़े से उतर गए और पैदल चलने लगे और उनका घोड़ा उनके पीछेछे

आने लगा। कुछ दूर आगे जाकर उन्हें आदमियों का एक और समूह मिला। उस आदमी और उसके बेटे को बिना सवार हुए जाता देखकर वह आदमी हंसने लगे। उन आदमियों में से एक आदमी उनके पास आया और यह बोला, “तुम दोनों कितने मूर्ख हो। इतना अच्छा घोड़ा होने के बावजूद भी पैदल चल रहे हो। यह सुनकर वह आदमी और उसका बेटा असमंजस में पड़ गए। अब वह इस घोड़े का क्या करें? आगे चलकर एक ऋषि रहते थे। उस व्यक्ति ने उनसे सलाह लेने का निर्णय लिया। ऋषि

से मिलने पर उसने सारी घटना बताई तो ऋषि ने मुस्कुराते हुए उस व्यक्ति से कहा तुम्हें दूसरों की टिप्पणियों की चिंता नहीं करनी चाहिए। लोग हर चीज को अपने अनुभव के आधार पर देखते हैं। जब आप घुड़सवारी कर रहे थे और आपका बेटा पैदल चल रहा था तो उस युवक ने आपको दोषी ठहराया। इस युवक को उसके पिता ने बहुत मेहनत करवाई थी। इसलिए उसे आपके बेटे पर भी दया आई। जब आपका बेटा घोड़े पर सवार था और आप पैदल चल रहे थे तो बूढ़ी औरत ने

आपके बेटे पर आपको पैदल चलाने का आरोप लगाया। इस औरत का अपना बेटा आज्ञाकारी नहीं था। इस कारण उस बूढ़ी औरत को लगा कि आपका बेटा भी उसके अपने बेटे जैसा ही निर्दयी है। अस्तवल के पास खड़े लोग जिन्होंने आप दोनों पर घोड़े पर वजन डालने का आरोप लगाया था। वह सारे लोग घोड़े के व्यापारी थे। उन्हें लगा कि आपका घोड़ा ज्यादा वजन के कारण मर जाएगा। और वह लोग जिन्होंने घोड़े पर सवार ना

होने के लिए आपका मजाक उड़ाया था वे सब कसाई थे। वह जानवरों के प्रति बहुत ही क्रूर थे। शिक्षा इसलिए आपको अपने आसपास के लोगों की राय पर विश्वास नहीं करना चाहिए। जब भी आपको संदेह हो तो अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके यह सोें कि आप सही हैं या गलत। यदि आपका विचार, आपकी वाणी और आपका कार्य किसी इंसान के लिए मददगार है तो आप बिल्कुल सही हैं। और यदि आपका कार्य किसी को शारीरिक या मानसिक रूप से चोट पहुंचाता है तो आप गलत हैं।

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