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कोशिश करने से मत डरो – Story of a Little Bird Motivational Story in Hindi

भारत के किसी गांव के पास एक घना और रहस्यमई जंगल था। उस जंगल में एक बहुत ही पुराने पीपल के पेड़ पर एक नन्ही सी गौरैया रहती थी। मिनी, मिनी छोटी थी। मासूम थी और सपनों से भरी हुई थी। लेकिन वो उड़ नहीं पाती थी। जंगल के बाकी पक्षी सुबह होते ही आसमान में ऊंचा उड़ते। कलाबाजियां मारते, बादलों के ऊपर निकल जाते। लेकिन मिनी वो हर किसी को

देखकर चुपचाप अपने घोंसले के कोने में बैठ जाती। उसके दिल में भी यही इच्छा थी। काश मैं भी उड़ पाती। काश मैं भी उन बादलों को छू पाती और सूरज की किरणों में नहा पाती। लेकिन जब भी वह कोशिश करने जाती उसका दिल डर से कांप उठता। जैसे ही वह अपने पंख उठाती और कूदने की हिम्मत जुटाती। तभी उसका संतुलन बिगड़ जाता और वह सीधे जमीन पर आ गिरती। जंगल के बाकी पक्षी उस पर हंसते और उससे कहते अरे तू तो उड़ ही नहीं सकती। डरपोक है तू मिनी। उनकी हंसी से मिनी की आंखों में आंसू आ जाते।

लेकिन वो कभी भी पलट कर कुछ नहीं कहती। चुपचाप सुन लेती। रात को अकेले में मिनी आसमान की ओर देखती और अपने आप से कहा करती शायद मैं कमजोर हूं। लेकिन मेरे इरादे मजबूत हैं और मुझे अपने आप पर यकीन है। अगले दिन एक रंग बिरंगी तोता उसी पेड़ पर आया। उसकी आंखों में चमक और आवाज में आत्मविश्वास झलक रहा था। उसने मिनी से कहा, गिरने से उड़ान नहीं रुकती। असली उड़ान कभी भी पंखों से नहीं होती। वो हमारे हौसलों से होती है और तेरे अंदर

वह हौसला है। याद रख असली जीत उसी की होती है जो हर बार गिरकर भी उठता है। तोते की बातों ने मिनी के दिल में एक उम्मीद की आग जलाई। उस रात वो मुस्कुराई। पहली बार उसके होठों पर विश्वास की मुस्कान थी। उसने अपने आप से कहा हां मैं फिर दोबारा कोशिश करूंगी क्योंकि मुझे अपने आप पर यकीन है। अगली सुबह ना कोई हति की आवाज थी ना ही कोई दूसरा पक्षी था। बस मिनी और उसकी इच्छा। उसने बिना किसी की परवाह किए पंख उठाए और नीचे कूद

गई। इस बार कुछ अलग हुआ। वो कुछ देर तक हवा में टिकी रही। फिर भले ही वह नीचे गिर गई लेकिन वो मुस्कुरा रही थी। उसने महसूस किया हां अब मैं उड़ रही हूं। भले ही चाहे कुछ देर दिन बीतते गए। हर दिन मिनी गिरती उठती और फिर दोबारा उड़ने की कोशिश करती। धीरे-धीरे उसकी उड़ान लंबी होने लगी। हंसी की जगह अब लोग उसकी हिम्मत देखने लगे। फिर एक दिन जंगल में तेज आंधी आई। जंगल के सारे पक्षी अपने-अपने घोंसले में छुप गए। सब डरे हुए थे। लेकिन मिनी उसने सोचा यही वो पल है जब मैं अपने आप को

साबित कर सकती हूं। वो अपने घोंसले से निकली। पंख उठाए और आंधियों के बीच उड़ चली। हवाओं से टकराई। शाकाओं से भिड़ी। कभी नीचे गिरी लेकिन हर बार ऊपर उठ खड़ी हुई। उसका हौसला डगमगाया नहीं। जब आंधी रुकी आसमान निखरा तो हर किसी ने देखा। मिनी अब आसमान के ऊपर उड़ रही थी। वही पक्षी जो कभी उसे डरपोक समझते थे। अब उसकी उड़ान देखकर चुप थे। उनकी आंखों में हैरानी और इज्जत दोनों थी। उसी तोते ने मिनी को देखा और उससे बोला, मिनी तूने अपने आप पर भरोसा किया और यही तेरी

सबसे बड़ी ताकत है। याद रख डर हर किसी को लगता है पर उड़ता वही है जो कोशिश करना नहीं छोड़ता। सालों बाद एक नन्ही चिड़िया उड़ने से डर रही थी। उसने मिनी से कहा, मैं गिर जाऊंगी इसलिए कोशिश नहीं कर रही। मिनी मुस्कुराई और उससे बोली डर तो सबको लगता है पर उड़ता वही है जो नीचे गिरने के बाद भी हार नहीं मानता। कोशिश करने से मत डरो क्योंकि कोशिश ही तुझे तेरी असली उड़ान देगी। दोस्तों गिरने से मत

डरो। तानों से अपनी हार मत मानो क्योंकि कोशिश करने वाला ही एक दिन आसमान की ऊंचाई तक

पहुंचता है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको यह दूसरी कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

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