
प्रधानमंत्री की अगुवाई में पिछले 12 सालों में दिल्ली देखते ही देखते गैस चेंबर बन गई है। सांस लेना मुश्किल हो गया है। लेकिन संसद सत्र के पहले दिन जब मोदी बोलने के लिए आए तो बोले आप मौसम का मजा लीजिए। आप भी मौसम का मजा लीजिए। प्रधानमंत्री के घर पर तो एयर प्यूरीिफायर लगा होगा। प्रधानमंत्री तो हफ्ते दो हफ्ते विदेश निकल जाते हैं। वहां से ताजी सांस लेकर के वापस आ जाते हैं। प्रधानमंत्री तो रैली करने
दूसरे राज्य निकल जाते हैं। वहां से मौसम का मजा लेकर के वापस आ जाते हैं। दिल्ली वालों को गैस की भट्टी में झोंक कर बोल रहे हैं मौसम का मजा लीजिए। आप भी मौसम का मजा लीजिए। ना जाने ऐसी क्या आफत आ रही है। एसआईआर करने वालों की जान जा रही है। मरने वालों के लिए मोदी दो शब्द नहीं बोले। कहते हैं मौसम का मजा लीजिए। आप भी मौसम का मजा लीजिए। जब तक दिल्ली में भाजपा की सरकार
नहीं थी तब तक पोल्यूशन पर ज्ञान की ऐसी गंगा बहाते थे, ऐसी गंगा बहाते थे जैसा लगता था कि इन सारी समस्याओं का हल प्रधानमंत्री के पास ही है। दिल्ली फिर से गैस चेंबर बन गई है। लोग दिल्ली छोड़कर भाग रहे हैं। प्रधानमंत्री के पास इस पोल्यूशन का इलाज में सिर्फ दो शब्द हैं। मौसम का मजा लीजिए। आप भी मौसम का मजा लीजिए। लेकिन हाफ सांसों के साथ जी रहे दिल्ली के लोग नहीं डॉक्टर्स कह रहे हैं कि अगर अपने बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित रखना चाहते हैं तो दिल्ली
एनसीआर छोड़ दीजिए। लेकिन नरेंद्र मोदी मौसम के मजे लेने की बात कर रहे हैं। जिन लोगों की जान यह एसआईआर ले रहा है वो कैसे मौसम का मजा लें? 26 नवंबर को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में बीएलओ ड्यूटी पर तैनात लेखपाल सुधीर कुमार कोरी की शादी होनी थी। वो शादी की वजह से छुट्टी पर थे। मगर दो दिन पहले उनके ईआरओ यानी इलेक्शन रजिस्ट्रार ऑफिसर घर आकर के काम ना करने को लेकर के उन्हें डांटने लगे। 24 नवंबर की शाम ही सुधीर ने अपने कमरे में जाकर के फांसी लगा ली। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश,
गुजरात हर जगह से इस तरह की खबरें आ रही हैं। जब विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में बहस चाहता है तो प्रधानमंत्री कहते हैं कि संसद ड्रामा करने की जगह नहीं है। बिल्कुल सही बात है भाई। संसद ना रोने की जगह है, ना ही मिमिक्री करने की जगह है, ना ही विपक्षी सांसदों को नीचा दिखाने की जगह है। संसद बहस करने की जगह है जहां पर मुद्दों पर बात होनी चाहिए। विपक्ष भी तो यही कह रहा है। इसीलिए हंगामा कर रहा है कि एसआईआर पर बात कीजिए। बताइए कि आखिर यह
सब कुछ हो क्यों रहा है? देखिए मेरे पत्रकार साथियों ड्रामा तो आप भी जानते हो कौन करता है? ये मुस्कुराहट बता रही है कि ड्रामा कौन करता है? ड्रामा डेमोक्रेसी केवल इसलिए ड्रामा शब्द का इस्तेमाल करना क्योंकि डी से डेमोक्रेसी है। हम यह चाहते हैं कि सिंसियरिटी से काम हो ऐसा और कोई भी मतदाता छूटे नहीं जो यह जान जा रही है ये भी ड्रामा है क्या हमारे साथियों ये बताइए जो बीएलओ ये जान चली गई
जिनकी ठीक है ड्रामा था कि जान जाना तो ये ये शब्दों पर मत खेलिए इधर उधर मत जाइए इलेक्शन कमीशन की जिम्मेदारी ये बनती है कि सभी का वोट बन जाए और बीजेपी तो ऐसा ड्रामा करती है पुलिस से मिलकर के रिवॉल्वर लगवा देती है वोट डालने जाओगे वो भी ड्रामा ही था शायद रिवॉल्वर लगाना मतदाता को रोकना वहां तस्वीर है नहीं मेरे पास लेकिन आपके पास सब होगी आकाई में तस्वीर संसद इसलिए भी नहीं है कि आप जीत हार की टिप्स दीजिए बिहार चुनाव खत्म हो चुका है नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि चुनाव की जीत हार किनारे रखिए मगर वो खुद विपक्ष को ज्ञान दे रहे हैं
प्रधानमंत्री को लगता है कि संसद में मुद्दों की बात हो तो एसआईआर पर चर्चा क्यों नहीं करवाते भाई देश में अगर पत्ता भी खड़कता है तो जिम्मेदार राजा ही होता है। इतने बीएलओ मारे गए राजा को कोई फर्क ही नहीं पड़ता। ये जो सुसाइड किया है क्या मामला है? मेरा नाम बबली है। और सुसाइड कराए एसआईआर वाले फॉर्म जो भरे जा रहे हैं फील करे हैं। या तो इन्हें ट्रेनिंग देनी चाहिए थी पहले। ट्रेनिंग नहीं दी इन्ह एकदम बीएलओ बना दिया। स्कूल के हेड मास्टर हैं। बीएलओ थोड़ी है
वो। या तो उन्हें ट्रेनिंग ट्रेन करते कि तुम्हें यह काम करना है। इतने सारे फॉर्म दे दिए उन्हें। 15 फोन दे दिए उन्हें फी करने के लिए आके लोग किसी का सपोर्ट तलक नहीं मिला उन्हें। अच्छा क्या कारण है जो इन्होंने सुसाइड किया है? दबाव के कारण सुसाइड करा है उन्होंने। किन लोगों का दबाव था? इतना प्रेशर है। रात के एक एक दोद बजे मैं काम करवा रही हूं। उनके साथ खुद काम कर रहे हैं। तो कह रहे बताओ मैं क्या करूं मैं? प्रधानमंत्री जी आप तो मौसम वैज्ञानिक भी हैं। नाले की गैस से चाय, बादलों में रडार सब ज्ञान तो आपके ही
पास है। अब आप ही बताइए कि ये लोग मौसम का मजा कैसे लेंगे? वैसे भी बीजेपी के लोग कितने संवेदनशील होते हैं, वह कई मौकों पर दिखता है। अब इस वीडियो को ही देख लीजिए। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम में एक सुरक्षाकर्मी बेचारा बेहोश होकर गिर गया। लेकिन नड्डा जी भाषण देते रहे। बीजेपी के लोग अपनी कुर्सियों पर ही जमे रहे। असल में बीजेपी को इन सब से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी का फोकस है कि कैसे अपना स्पीकर बनाकर बिहार में
नीतीश कुमार को और कमजोर किया जाए। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंद को कैसे पैदल करना है। आखिर बंगाल का भी तो चुनाव है। वो कैसे लड़ना है? ये एसआईआर, प्रदूषण, इतनी सारी बैलोंस की जाने इन सब से क्या लेना देना? विपक्ष चिल्लाता है तो चिल्लाता रहे। आप भी मौसम का मजा लीजिए। ऐसे ही लोगों का ध्यान भटकाया जाता है। जो जरूरी बातें हैं उनका जिक्र तक नहीं होता है। जब सवाल पूछे जाएं तो जवाब ही मत दो
और जनता को इवेंट दिखाते रहो। बस यही चल रहा है। दोस्तों मेरे साथ फिलहाल इस कहानी में इतना ही।
आपकी क्या राय है? कमेंट में बताइएगा। दोस्तों वैसे ले तो नहीं पाएंगे लेकिन मोदी जी कह रहे हैं तो मौसम का मजा लीजिए। नमस्कार।
