
हम अक्सर सुनते हैं कि “पृथ्वी गोल है”। लेकिन क्या यह सच में पूरी तरह गोल है? या इसमें कुछ विशेष आकार की खूबियाँ हैं? आज हम विस्तार से समझेंगे कि दुनिया का आकार वास्तव में कैसा है।
1. पृथ्वी का वास्तविक आकार
- पृथ्वी का वास्तविक आकार गोला (sphere) नहीं है।
- इसे वैज्ञानिकों ने ‘Oblate Spheroid’ कहा है।
- इसका अर्थ है कि ध्रुवों की दिशा में यह थोड़ा चपटा और भूमध्य रेखा के पास थोड़ा उभरा हुआ है।
उदाहरण:
- भूमध्य रेखा पर पृथ्वी का व्यास लगभग 12,756 किलोमीटर है।
- ध्रुवों के बीच व्यास लगभग 12,714 किलोमीटर है।
- इसका मतलब है कि पृथ्वी लगभग 42 किलोमीटर तक चपटी है।
2. क्यों पृथ्वी गोल नहीं बल्कि चपटी है?
- घूर्णन (Rotation): पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
- घूमने के कारण केंद्रीय बल (Centrifugal force) उत्पन्न होता है।
- यह बल भूमध्य रेखा पर अधिक होता है और ध्रुवों की तरफ कम, जिससे पृथ्वी थोड़ी सी चपटी हो जाती है।
3. पृथ्वी की सतह और गुरुत्वाकर्षण
- पृथ्वी पर हर जगह गुरुत्वाकर्षण लगभग समान होता है।
- लेकिन चपटी के कारण ध्रुवों पर गुरुत्वाकर्षण थोड़ी अधिक और भूमध्य रेखा पर थोड़ी कम होती है।
- यही कारण है कि उपग्रह और अंतरिक्ष यान पृथ्वी की सतह का सही माप लेते समय इन अंतर को ध्यान में रखते हैं।
4. प्राचीन लोगों का ज्ञान
- प्राचीन यूनानी और भारतीय वैज्ञानिकों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि पृथ्वी गोल है।
- अरस्तू, एराटोस्थनीज और भास्कराचार्य ने पृथ्वी के गोल आकार और व्यास का सही अनुमान लगाया।
5. आधुनिक विज्ञान
- आज हम सैटेलाइट और अंतरिक्ष मिशनों की मदद से पृथ्वी का सही आकार और आंकड़े जानते हैं।
- GPS, मौसम विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए पृथ्वी के वास्तविक आकार का ज्ञान बहुत जरूरी है।
निष्कर्ष
- दुनिया सच में गोल है, लेकिन पूरी तरह गोल नहीं।
- इसे ‘Oblate Spheroid’ कहा जाता है – थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी हुई।
- यह चपटीपन पृथ्वी के घूमने के कारण होता है।
- आधुनिक विज्ञान और उपग्रह तकनीक ने इसे प्रमाणित किया है।
यानी संक्षेप में: दुनिया गोल जरूर है, लेकिन बिल्कुल परफेक्ट गोला नहीं। यह वैज्ञानिक तथ्यों और अनुभव पर आधारित तथ्य है।
