
एक ऐसा लड़का जो जिंदगी से हार चुका था जो आत्महत्या करने के लिए फांसी के फंदे को गले लगाने वाला था। वो कैसे एक आईएएस ऑफिसर बना और जवाब दिया उन लोगों को जिसने उसे दर्द पहुंचाया। आइए जानते हैं अर्जुन की कहानी। दिल्ली के एक मिडिल क्लास घर में रहता था अर्जुन। पढ़ाई में वो ज्यादा अच्छा नहीं था, लेकिन अपने मां-बाप का
लाडला था। अर्जुन के पिता एक दुकान चलाते थे और उसकी मां ग्रहणी थी। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब अर्जुन कॉलेज जाने लगा था। अर्जुन हमेशा से बस यही सोचता कि पढ़ाई करके कोई छोटी-मोटी सरकारी नौकरी मिल जाए तो जिंदगी बन जाएगी। लेकिन वो यह नहीं जानता था कि जिंदगी ने उसके लिए कुछ और ही सोच रखा है। अर्जुन को कॉलेज
जाते हुए कई महीने बीत चुके थे और एक दिन उसकी मुलाकात हुई अनन्या से। अनन्या अर्जुन की ही क्लास में थी। लेकिन आज उसने उसे पहली बार देखा था। दोनों को साहित्य और कविताओं में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट था। धीरे-धीरे उन दोनों के बीच बातें बढ़ने लगी और देखते ही देखते वक्त पंख लगाकर उड़ गया। एक दिन लाइब्रेरी में अनन्या ने कहा, “अर्जुन, मैं
बचपन से आईपीएस अफसर बनने का सपना देखती आई हूं।” विवेक मुस्कुराया और बोला, वाह, बहुत ही बड़ा सपना है। अनन्या ने जवाब दिया और तुम्हारा सपना? अर्जुन ने हंसते हुए कहा, “अभी तक तो कोई नहीं है।” अनन्या बोली, तो फिर आज से तुम्हारा सपना मेरा साथ देना होगा। तुम्हें भी यूपीएससी की तैयारी करनी चाहिए। अर्जुन अनन्या ने जिस तरह
अर्जुन को यूपीएससी की तैयारी करने के लिए बोला था, अर्जुन बिल्कुल मना नहीं कर पाया। अर्जुन को उसका आत्मविश्वास अच्छा लगा और उसने भी मन बना लिया कि अब उसका लक्ष्य यूपीएससी पास करके अफसर बनना है। लेकिन वो यह नहीं जानता था कि यूपीएससी की परीक्षा उसकी जिंदगी की सबसे मुश्किल परीक्षा होने वाली है। दोनों ने एक साथ पढ़ाई शुरू की। लाइब्रेरी में दिन रात एक कर
दिए। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती एक अच्छे रिश्ते में बदल गई। और एक दिन अर्जुन ने हिम्मत जुटाकर अनन्या से कहा, “न्या, मुझे तुमसे प्यार हो गया है।” अनन्या मुस्कुराई। उसकी आंखों में भी वही फीलिंग्स थी जो अर्जुन की आंखों में थी। दोनों का रिश्ता अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके सपनों तक फैल गया। कॉलेज खत्म हुआ। अर्जुन और अनन्या दोनों उस कॉलेज के टॉप स्टूडेंट रहे। बस अब उनकी एक मंजिल थी यूपीएससी। उन्होंने तीनों
एग्जाम्स, प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू की तैयारी एक साथ की। दिनरा पढ़ते, नोट्स बनाते और एक दूसरे का हौसला बढ़ाते। तीनों एग्जाम हो चुके थे। अर्जुन को पूरा विश्वास था कि अनन्या एक बार में ही यह एग्जाम क्लियर कर देगी और इसी विश्वास के बीच वो अपने आप पर विश्वास करना भूल गया था। रिजल्ट का दिन आया। दोनों के दिल जोर से धड़क रहे थे और हाथ कांप रहे थे। पर किस्मत का खेल देखिए। अनन्या ने टॉप रैंक हासिल की और अर्जुन कुछ नंबर से फेल हो गया। वो पल अर्जुन के लिए सबसे भारी था। लेकिन अनन्या ने उसका हाथ पकड़ कर कहा,
अर्जुन एक बार की हार से कुछ नहीं होता। तुम्हें एक बात और कोशिश करनी चाहिए। मैं हूं तुम्हारे साथ। यह शब्द अर्जुन के अंदर आग की तरह उतर गए। उसने मन बना लिया कि अब उसे या तो मर जाना है या यूपीएससी क्लियर करना है। अर्जुन अपनी पढ़ाई में और डूब गया। दुनिया से यहां तक कि अनन्या से भी दूर हो गया। वह दिन रात बस किताबों में घुल
गया। उसे नहीं पता था कि अब जिंदगी एक और इम्तिहान लेने वाली है। कुछ महीनों बाद अर्जुन ने सोचा कि अब मुझे अनन्या से मिलना चाहिए। वो उसके घर पहुंचा। दिल में खुशी थी कि अब दोनों एक साथ बैठकर आगे की तैयारी पर बात करेंगे। लेकिन अर्जुन यह नहीं जानता था कि उसकी जिंदगी कोई और मोड़ लेने वाली है। जब वो अनन्या के घर पहुंचा, वहां जो उसे पता चला वो सुनकर वह जैसे पत्थर बन गया। अनन्या के माता-पिता ने बताया कि 2 महीने
बाद अनन्या की शादी है। अर्जुन के पैरों तले जैसे जमीन ही खिसक गई। वो भागता हुआ अनन्या के कमरे में पहुंचा। अनन्या वहीं थी। पर उसकी आंखों में अब वो चमक नहीं थी जो कभी हुआ करती थी। अर्जुन ने कांपती आवाज में उससे पूछा, “यह सब क्या है अनन्या? शादी?” अनन्या ने शांत आवाज में कहा, हां अर्जुन, मैं अरुण से शादी कर रही हूं। मैं तुम्हें अपनी शादी में जरूर बुलाऊंगी। अनन्या के चेहरे पर ना कोई शर्म थी, ना ही पछतावा। अर्जुन की आंखें नम हो चुकी थी। वो कुछ बोले बिना वहां से चला
गया। अब तक जो सपना उसके जीने का मकसद था, वो अब उसके लिए बोझ बन चुका था। दिन भर सन्नाटा, रात भर जागना, नदी किनारे बैठकर भी वह अपने आप को घुटा हुआ महसूस कर रहा था। हर बार अपने आप से बस एक ही सवाल करता। क्यों हुआ यह मेरे साथ? एक हफ्ते तक अर्जुन ने अपने आप को कमरे में बंद रखा और फिर एक दिन उसने वो किया जो किसी को नहीं करना चाहिए। वो पंखे से रस्सी बांधकर कुर्सी पर बैठ गया। आंखों में आंसू,
दिल में खालीपन, अर्जुन को लग रहा था कि वह हार चुका है। लेकिन जैसे ही उसने ऊपर देखा, दीवार पर टंगी अपने माता-पिता की तस्वीर दिखाई दी। उनकी मुस्कान ने जैसे उसे रोक लिया। वो तस्वीर जैसे उसे कुछ बता रही है। अर्जुन, यह जिंदगी सिर्फ तुम्हारी नहीं हमारी भी है। अर्जुन वहीं जमीन पर बैठ गया और जोर-जोर से रोने लगा। उसने रस्सी काठ फेंकी और यह फैसला किया कि अब वह अपने माता-पिता के लिए जिएगा और उन्हें गर्व महसूस कराएगा। उस दिन से उसकी जिंदगी बदल गई। वो अब वो अर्जुन नहीं था जो पहले था। अब उसके अंदर गम नहीं
जुनून जल रहा था। वो अपनी पढ़ाई में ऐसा डूब गया कि दिन रात एक कर दिए। हर दर्द का जवाब उसने अपनी मेहनत से दिया। दिन बीतते गए महीने गुजर गए और फिर आया वो दिन। यूपीएससी रिजल्ट का दिन। इस बार विवेक ने ना सिर्फ यूपीएससी क्लियर किया बल्कि टॉप रैंक हासिल की। वो अब एक आईएएस अफसर बन चुका था। जब उसने अपने
माता-पिता को यह खबर दी तो उनकी आंखों में खुशी और गर्व के आंसू थे। उनकी मुस्कुराहट को देखकर अर्जुन को लगा जैसे उसने पूरी दुनिया जीत ली। आज अर्जुन एक ईमानदार आईएएस अधिकारी है। उसकी कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो जिंदगी की मुश्किलों से हार मान लेते हैं। दोस्तों जब जिंदगी हमें दर्द देने पर आती है तो हमें उससे कोई रहम की
उम्मीद नहीं करनी चाहिए। जिंदगी जब तुम्हें गिरा है तो उसे हार की तरह नहीं सबक की तरह समझो। क्योंकि असली जीत उन्हीं की होती है जो हारने के बाद भी कोशिश करना नहीं छोड़ते। और अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको एक बच्चे की यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।
