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बच्चे दूर रहे, स्त्री को जोश कब आता है देने के लिए 🙏Mast Lovely Story Hindi quotes

नमस्कार दोस्तों आज हम एक ऐसे टॉपिक पर

बात करने वाले हैं जो आमतौर पर लोग खुल के

नहीं करते लेकिन समझना बहुत जरूरी है

टॉपिक है वुमेन को सेक्स कब चाहिए होता है

यह सवाल कई लोगों के दिमाग में होता है

लेकिन सही जवाब कम ही मिलता है तो चलिए

बात करते हैं साइंस इमोशंस और रियल लाइफ

के पर्सपेक्टिव से बिना किसी शर्म के

लेकिन पूरी इज्जत के साथ जैसे हर इंसान

अलग होता है उसी तरह हर औरत की जरूरत

इमोशंस और सेक्सुअल डिजायर भी अलग होती है

किसी को ज्यादा डिजायर होता है किसी को कम

किसी को रोज चाहिए होता है किसी को हफ्तों

में एक बार यह सब नॉर्मल है हर किसी का

अपना एक्सपीरियंस होता है औरत के सेक्सुअल

डिजायर में हॉर्मोंस का बड़ा रोल होता है

जैसे इस्ट्रोजन प्रोजेस्ट्रॉन

टेस्टोस्टरोन हां थोड़ा टेस्टोस्टरॉन औरथोन

में भी होता है इन हॉर्मोंस के लेवल हर

महीने चेंज होते हैं इसलिए मूड और डिजायर

भी बदलती रहती है ज्यादा डिजायर कब होता

है ज्यादा डिजायर ओवुलेशन के टाइम आता है

यानी जब औरत का शरीर प्रेगनेंसी के लिए

तैयार हो रहा होता है यह टाइम होता है

यूजुअली पीरियड के डैश से 4 दिन बाद इस

वक्त हॉर्मोनल पीक होती है और कई औरतें इस

टाइम ज्यादा फिजिकली कनेक्टेड फील करती

हैं कई बार लोग सोचते हैं कि सिर्फ फिजिकल

कांटेक्ट ही सब कुछ है लेकिन औरत के लिए

इमोशनल बॉन्ड भी बहुत इंपॉर्टेंट होता है

अगर उसका पार्टनर उसके साथ इमोशनली

कनेक्टेड है प्यार रिस्पेक्ट और समझदारी

दिखाता है तो वह ज्यादा ओपन फील करती है

यह होता है मेंटल फोर प्ले जो सिर्फ

फिजिकल से ज्यादा पावरफुल होता है जब औरत

टेंशन में होती है काम का प्रेशर घर का

लोड या इमोशनल स्ट्रेस तो उसका मूड

ऑटोमेटिकली लो हो जाता है ऐसे में

सेक्सुअल डिजायर भी कम हो जाती है इसका

मतलब यह नहीं कि उसमें कोई प्रॉब्लम है यह

नेचुरल रिस्पांस है जब एनवायरमेंट

रिलैक्स्ड और सपोर्टिव होता है तब डिजायर

वापस आ सकती है जिस रिलेशनशिप में ट्रस्ट

रिस्पेक्ट और अंडरस्टैंडिंग हो वहां

सेक्सुअल लाइफ भी हेल्थी होती है लेकिन

जहां झगड़ा इनसिक्योरिटी या डिसरिस्पेक्ट

हो वहां सेक्स की इच्छा कम हो जाती है औरत

के लिए सेफ फील करना बहुत जरूरी होता है

अगर किसी औरत को हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं

जैसे थायरॉइड डायबिटीज हार्मोनल इमंबैलेंस

या मेनोपॉज तो इसका असर सेक्सुअल डिजायर

पर पड़ता है इसलिए फिजिकल हेल्थ का ध्यान

रखना भी जरूरी है फिल्मों और मीडिया में

दिखाया जाता है कि सेक्स का मतलब सिर्फ

फिजिकल सेटिस्फेक्शन है लेकिन असली जिंदगी

में इंटिमेसी इमोशनल और मेंटल कनेक्शन से

शुरू होती है कई लोग सोचते हैं कि

लड़कियों को सेक्स पसंद नहीं होता जबकि यह

बिल्कुल गलत है लड़कियों को भी सेक्स उतना

ही पसंद हो सकता है जितना किसी लड़के को

बस उनका अप्रोच और टाइम अलग हो सकता है

कुछ कॉमन साइन होती हैं लेकिन ध्यान रहे

हर किसी के लिए यह अलग हो सकता है ज्यादा

टच और क्लोज होने की कोशिश रोमांटिक बातें

फ्लर्टिंग अपने पार्टनर के साथ अलोन टाइम

स्पेंड करना चाहना फिजिकल कांटेक्ट में

कंफर्ट फील करना लेकिन सबसे जरूरी बात कभी

भी कंसेंट के बिना कुछ नहीं होना चाहिए

आजकल काई औरतीन अपनी जरूरत और कंफर्ट के

बारे में ओपनली बात करने लगी हैं यह एक

हेल्थी चेंज है अगर आप एक मेले पार्टनर

हैं तो अपनी पार्टनर के इमोशंस और मूड को

समझने की कोशिश करें बिना प्रेशर डाले और

अगर आप एक फीमेल व्यूअर हैं तो अपने बॉडी

और माइंड को समझना सीखें अपनी नीड्स को

एक्सप्रेस करना नॉर्मल और हेल्थी है आखिर

में सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट बात करना सीखिए

जो चीज खुल के डिस्कस की जाए उसमें

प्रॉब्लम कम होती है जब आप अपनी पार्टनर

से प्यार से बिना जज किए बात करते हो तो

वह खुद को ओपन करने में कंफर्टेबल फील

करती हैं सेक्स सिर्फ एक फिजिकल एक्ट नहीं

यह एक इमोशनल और साइकोलॉजिकल कनेक्शन भी

है तो आज हम लोगों ने यह सीखा कि हर औरत

अलग होती है इसलिए सेक्सुअल डिजायर का

टाइम भी अलग होता है हॉर्मोंस इमोशंस

एनवायरमेंट और रिलेशनशिप क्वालिटी सब

मिलकर डिजायर को अफेक्ट करते हैं जब औरत

मेंटली इमोशनली और फिजिकली कंफर्टेबल होती

है तब वह ज्यादा इंटरेस्टेड फील करती है

कम्युनिकेशन और रिस्पेक्ट सबसे जरूरी है

उम्मीद है दोस्तों आपको यह कहानी समझने

लायक और रिस्पेक्टफुल लगा होगा अगर आप

चाहते हैं कि सोसाइटी में लोग इस टॉपिक को

समझें और बिना शराम के बात करें तो इसे शेयर करें और कमेंट जरूर करें

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