
कहानी की शुरुआत एक साधारण परिवार से होती है। उस परिवार की एक बेटी थी जिसने अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना देखा था। यूपीएससी पास करना। उसने दिन रात मेहनत की। किताबों में डूब कर पढ़ाई की। बस एक ही ख्वाहिश के साथ किसी भी तरह से एग्जाम में सफल होना है। लेकिन जब रिजल्ट आया तो वह परीक्षा पास नहीं कर पाई। यह खबर उसके लिए
किसी तूफान से कम नहीं थी। उसका आत्मविश्वास हिल गया। वह दिन रात उदास रहने लगी। अक्सर अकेले बैठकर सोचती क्या मैं वाकई इस काबिल नहीं हूं? बेटी की यह हालत देखकर उसके पिता का दिल टूट गया। वह अपनी बेटी को इस स्थिति में नहीं देख सकते थे। उन्होंने सोचा कि इसे हिम्मत देनी होगी। एक दिन पिता ने अपनी बेटी को बुलाया और कहा, बेटा चलो मेरे साथ किचन में। बेटी को समझ नहीं आया कि पापा अचानक किचन में क्यों बुला रहे हैं। लेकिन वह चुपचाप उनके
साथ चली गई। किचन में पहुंचकर उसने देखा कि गैस स्टो पर तीन बर्तन रखे हुए हैं। पहले बर्तन में पानी और अंडे थे। दूसरे बर्तन में पानी और आलू और तीसरे बर्तन में मेन पानी और कुछ कॉफी बींस। पिता ने गैस ऑन की और तीनों बर्तनों को उबलने के लिए छोड़ दिया। 5 मिनट बीते फिर 10 और फिर 20 मिनट। बेटी को अजीब लग रहा था। उसने झुंझुला कर पूछा पापा यह सब क्या कर रहे हो आप? पिता मुस्कुराए और बोले,
बस एक मिनट और फिर सब समझ आ जाएगा। थोड़ी देर बाद पिता ने गैस बंद कर दी। अब उन्होंने पहले बर्तन से आलू निकाले और एक प्लेट में रख दिए। दूसरे बर्तन से अंडे निकाले और दूसरी प्लेट में रखे। तीसरे बर्तन की कॉफी को छानकर एक कप में भर दिया। अब तीनों चीजें सामने थी। आलू, अंडे और कॉफी। पिता ने बेटी से कहा, “बताओ तुम्हें क्या दिख रहा है?” बेटी ने थोड़े गुस्से में कहा, “इसमें देखने जैसा क्या है? यह आलू है, यह अंडे हैं और यह कॉफी है। पिता ने धीरे से कहा, जरा गौर से देखो। बेटी ने आलओं को छुआ तो पाया कि वे
बिल्कुल नरम हो चुके थे। फिर अंडों को तोड़ा तो देखा कि वे अंदर से सख्त हो गए थे। अंत में जब उसने कॉफी को सूंघा तो उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। पिता ने समझाया देखो बेटा यह तीनों चीजें एक जैसे हालात में थी। तीनों को गर्म पानी यानी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन प्रतिक्रिया अलग-अलग रही। आलू पहले मजबूत थे लेकिन गर्म पानी में पड़कर कमजोर हो गए। अंडे पहले नाजुक थे लेकिन मुश्किलों
ने उन्हें अंदर से सख्त और मजबूत बना दिया और कॉफी उसने तो कमाल ही कर दिया। उसने मुश्किल हालात को बदलकर उन्हें अपने रंग और खुशबू में ढाल दिया। बेटी ध्यान से सुन रही थी। पिता ने आगे कहा, जिंदगी भी बिल्कुल ऐसी ही है। मुश्किलें हर किसी की जिंदगी में आती है। अब यह तुम्हारे ऊपर है कि तुम किसकी तरह बनना चाहोगी। आलू की तरह जो कठिनाइयों में टूट जाता है। अंडे की तरह जो मुश्किलों से और मजबूत हो जाता है या फिर कॉफी की तरह जो मुश्किलों का सामना ही नहीं करता बल्कि माहौल को बदल देता है। बेटी के
चेहरे पर अब आत्मविश्वास लौट आया था। उसने पिता की ओर देखते हुए कहा पापा अब मुझे समझ आ गया है मैं मुश्किलों के सामने कभी हार नहीं मानूंगी बल्कि उनसे सीखकर और मजबूत बनूंगी और जहां जरूरत होगी मैं कॉफी की तरह अपने हालात को ही बदल दूंगी। उस दिन के बाद से उसकी सोच बदल गई। उसने अपनी असफलता को एक सीख की तरह लिया और और भी
मेहनत करने लगी। मुश्किलें कभी हमें रोकने के लिए नहीं आती बल्कि हमें यह सिखाने आती है कि हम अंदर से कितने मजबूत हैं। अगर आलू मत बनो, अंडे मत बनो बल्कि कॉफी बनो जो अपने हालात को ही बदल देते।
