
प्यार किसी तय जगह, समय या मौके का मोहताज नहीं होता। कभी कॉलेज में, कभी बस स्टैंड पर… और कई बार सब्ज़ी मंडी में सब्ज़ी खरीदते समय भी प्यार हो जाता है।
यह कहानी ऐसे ही एक साधारण पल की है, जो धीरे-धीरे दिल से दिल को जोड़ देता है।
🧺 सब्ज़ी मंडी का वो साधारण दिन
शाम का वक्त था। मार्केट में भीड़, आवाज़ें, ताज़ी सब्ज़ियों की खुशबू और मोल-भाव का शोर।
लड़का भी घर के लिए सब्ज़ी लेने आया था। लड़की भी थैले में टमाटर, आलू और हरी सब्ज़ी भर रही थी।
दोनों एक ही ठेले पर खड़े थे।
😊 पहली नज़र, पहली मुस्कान
सब्ज़ी वाला बोला – “भैया, आख़िरी किलो आलू है।”
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा। लड़के ने मुस्कुराकर कहा – “आप ले लीजिए।”
लड़की ने हल्की सी मुस्कान के साथ धन्यवाद कहा।
👉 यहीं से बात दिल तक पहुंच गई।
💬 छोटी-सी बातचीत, बड़ा-सा एहसास
- “आज सब्ज़ी महंगी है न?”
- “हाँ, हर चीज़ महंगी हो गई है।”
बस इतनी-सी बातचीत… लेकिन दिल ने कुछ महसूस कर लिया।
आवाज़, अंदाज़ और व्यवहार ने एक अलग-सा अपनापन जगा दिया।
❤️ बार-बार नज़र मिलना
सब्ज़ी तौलते समय, पैसे देते समय, थैला उठाते समय…
नज़रें बार-बार टकरा रही थीं। और हर बार एक नई मुस्कान साथ आ रही थी।
🧠 दिमाग नहीं, दिल फैसला करता है
लड़का सोच रहा था – “इतनी सादगी… इतनी अपनापन…”
लड़की के मन में भी वही हलचल थी। कभी-कभी दिल बिना पूछे फैसला कर लेता है।
🌱 प्यार ऐसे ही पनपता है
कोई फिल्मी सीन नहीं था। ना कोई लंबी बातचीत। फिर भी:
- सम्मान
- विनम्रता
- सच्ची मुस्कान
यही सब मिलकर प्यार बना देते हैं।
💖 सब्ज़ी मंडी से शुरू हुआ रिश्ता
अगले दिन, फिर वही समय, फिर वही ठेला…
अब पहचान हो चुकी थी। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी। और साधारण-सा रिश्ता खूबसूरत प्यार में बदल गया।
✍️ निष्कर्ष
प्यार बड़ी जगहों या खास मौकों का मोहताज नहीं होता। सब्ज़ी मंडी जैसी आम जगह पर भी दिल जुड़ सकते हैं।
जहाँ:
- सच्चाई हो
- इज्ज़त हो
- और दिल से मुस्कान हो
वहीं से प्यार शुरू हो जाता है।