नई दिल्ली | ताजा अपडेट
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले सोनम वांगचुक को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अहम सवाल किया है। अदालत ने कहा है कि यदि उनकी सेहत ठीक नहीं है और मेडिकल रिपोर्ट में स्थिति गंभीर बताई जा रही है, तो मेडिकल आधार पर उनकी हिरासत पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से स्पष्ट तौर पर कहा कि किसी भी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब वह हिरासत में हो और इलाज की जरूरत हो।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
- अगर सोनम वांगचुक की तबीयत खराब है
- मेडिकल रिपोर्ट में इलाज की जरूरत बताई गई है
- और हिरासत में रहने से उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है
तो केंद्र सरकार को मानवीय आधार पर उनकी हिरासत के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि हिरासत में बंद किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की होती है।
मेडिकल आधार पर राहत क्यों जरूरी मानी जाती है?
भारत के कानून और न्यायिक प्रक्रिया में यह माना जाता है कि:
- किसी आरोपी या हिरासत में रखे व्यक्ति को उचित इलाज मिलना चाहिए
- गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य संकट में मेडिकल बेल या राहत पर विचार हो सकता है
- मानवाधिकार और संविधान के तहत जीवन का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है
इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि मामले में मेडिकल पहलू को प्राथमिकता दी जाए।
केंद्र सरकार से क्या उम्मीद की जा रही है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार:
- सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट को गंभीरता से देखेगी
- जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल या विशेष इलाज की सुविधा दे सकती है
- हिरासत की शर्तों में बदलाव या अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती है
क्यों चर्चा में हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लंबे समय से:
- पर्यावरण संरक्षण
- शिक्षा सुधार
- पहाड़ी क्षेत्रों के अधिकार
- और जनहित से जुड़े मुद्दों
पर आवाज उठाते रहे हैं। इसी वजह से उनका नाम कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि:
- केंद्र सरकार मेडिकल रिपोर्ट पर क्या निर्णय लेती है
- अदालत के निर्देश के बाद हिरासत में कोई बदलाव होता है या नहीं
- अगली सुनवाई में सरकार क्या जवाब पेश करती है
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम बताता है कि अदालत स्वास्थ्य और मानवीय आधार को गंभीरता से ले रही है। यदि सोनम वांगचुक की तबीयत वास्तव में खराब है, तो कानून के तहत उन्हें इलाज और राहत मिलना जरूरी माना जाएगा।
