
दोस्तों आज हम बात करेंगे रावण की उस महान विद्वान की जिसे वेद पुराणों का गहरा ज्ञान था। जो एक अद्वितीय राजा और असाधारण योद्धा था। लेकिन उसी रावण की तीन गलतियों ने उसका सर्वनाश कर दिया। दशहरे के इस अवसर पर जब हम रावण दहन देखते हैं तो हमें सिर्फ आतिशबाजी और
उत्सव नहीं देखना चाहिए। बल्कि यह समझना चाहिए कि रावण की इन तीन गलतियों से हमें क्या सीख मिलती है। क्योंकि बुद्धिमान वही है जो दूसरों की गलतियों से सीख ले। पहली गलती अहंकार। रावण जितना महान विद्वान था उतना ही बड़ा उसका अहंकार भी था। वह अपने ज्ञान और शक्ति पर इतना गर्व करने लगा कि उसने सोचना शुरू कर दिया। इस संसार में मेरे बराबर कोई नहीं है। यह अहंकार ही था
जिसने उसे अंधा कर दिया। उसने शिवजी को भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश की। उसने कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया और वहीं शिवजी के क्रोध से उसकी उंगलियां दब गई। सोचिए इतना ज्ञान, इतनी शक्ति लेकिन अहंकार ने उसकी सारी अच्छाइयों को मिटा दिया। यही हमारी पहली शिक्षा है। चाहे आपके पास कितना भी ज्ञान, पैसा या
शक्ति क्यों ना हो। अहंकार आपको पतन की ओर ले जाएगा। दूसरी गलती असयमित इच्छाएं। रावण की दूसरी गलती थी। उसकी बेकाबू इच्छाएं वह जानता था कि सीता श्री राम की पत्नी है। फिर भी उसने उन्हें हरण कर लिया। उसके मन की अनियंत्रित इच्छाएं ही उसका सबसे बड़ा जाल बन गई। सोचिए अगर उसने अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखा होता तो शायद
उसका अंत कभी ना होता। आज भी हमारी जिंदगी में यही होता है। एक छोटी सी गलती, एक गलत लालच हमें बर्बादी की ओर धकेल सकती है। इसीलिए याद रखिए सफलता पाने के लिए अपनी इच्छाओं और भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी है। तीसरी गलती अच्छी सलाह को ना मानना। रावण का छोटा भाई विभीषण बार-बार उसे समझाता रहा। भैया युद्ध मत करो। यह तुम्हारे साम्राज्य और जीवन के लिए
सही नहीं है। लेकिन रावण ने कभी उसकी सलाह नहीं मानी। उसका अहंकार और जिद इतनी बड़ी हो गई थी कि उसने अपने ही भाई को राज्य से निकाल दिया और यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। अगर उसने विभीषण की सही सलाह मानी होती तो शायद उसकी लंका आज भी सोने की होती। जीवन में हमें भी यही सीख मिलती है। कभी भी सही सलाह देने वालों की अनदेखी मत कीजिए। क्योंकि कई बार हमारे अपनों की बात ही हमें बड़े संकट से बचा
सकती है। तो दोस्तों, रावण का अंत सिर्फ राम जी के बाण से नहीं हुआ था। उसका असली विनाश हुआ था। उसके अहंकार से, उसकी अनियंत्रित इच्छाओं से और सही सलाह ना मानने की जिद से। आज जब दशहरे पर हम रावण का पुतला जलाते हैं, तो असली सवाल यह है क्या हम अपने भीतर बैठे अहंकार, लालच और जिद को भी जला पाते हैं? तो इस दशहरे
पर आइए हम संकल्प लें कि हम कभी भी इन तीन गलतियों को अपनी जिंदगी में जगह नहीं देंगे। यही है रावण की सबसे बड़ी शिक्षा। तीन गलतियां जो कभी नहीं करनी चाहिए
