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बीजेपी ने टूटे विधायकों पर ठोका दावा, JDU ने शपथ ग्रहण की तैयारी कर ली! आर-पार..

भारतीय जनता पार्टी का स्पीकर बनते ही भरे सदन में धमकी देने पर उतर आए नीतीश कुमार अचानक स्पीकर का चुनाव हुआ कैंसिल जेडीयू ने बीजेपी को खुला अल्टीमेटम दिया है तो आखिरकार वही हुआ है जिसका डर था खबरें हैं कि तोड़े गए विधायकों ने जैसे ही जेडीयू का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में

शामिल होने की तैयारी की है तो हड़कंप मच गया है। तो फिलहाल अमित शाह का ऑपरेशन लोटस एक्टिव होते ही कैसे नीतीश कुमार ने खुली जंग का ऐलान कर दिया है आपको बताएंगे लेकिन खबर में सबसे पहले तोड़े गए विधायकों ने कैसे पलटी मारी है बिग ब्रेकिंग देखिए खबर आप देखिए न्यूज़ 18 की देखिए इसमें लिखा हुआ है कि कांग्रेस के चार विधायक के महागठबंधन की

बैठक में नहीं पहुंचने पर सियासी कयास जारी कहा जा रहा है कि यह चारों नेता जेडीयू के साथ आने वाले चले हैं। तो खबरें एक तो पहले ही निकल कर सामने आ रही थी कि नीतीश कुमार बिहार में सिंगल लार्जेस्ट पार्टी या फिर कि विधानसभा में नंबर वन पार्टी बनने की तैयारी पूरी कर चुके हैं। लेकिन अब क्या ऐसा हो पाएगा? क्योंकि बीजेपी ने गृह विभाग के बाद स्पीकर पद भी जेडीयू से झटक लिया है। सूत्रों की मानें तो नीतीश

कुमार भी एकनाथ शिंद की तरह खत्म होने की कगार पर आ गए हैं। ऐसे हालातों में तोड़े गए विधायकों ने भी दल बदल लिया है तो हड़कंप मच गया है। मतलब कल तक जो कांग्रेस के तोड़े गए विधायक जेडीयू में शामिल होने की पूरी तैयारी कर चुके थे, वह अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले हैं। और यह कोई हवाहवाई बात नहीं है। बकायदा बयान भी निकल कर सामने

आया है कि कैसे रातोंरात खेल पलट गया है। खबर आप देखिए न्यूज़ 24 की। देखिए इसमें लिखा भी हुआ है कि बिहार में कई विपक्षी विधायक एनडीए के संपर्क में बने हुए हैं। वे पीएम मोदी के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं। तो चिराग पासवान ने दावा किया है कि अब तोड़े गए विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व चाहते हैं। मतलब साफ है कि स्पीकर का चुनाव होते ही बिहार सरकार का नेतृत्व भी बदल चुका है। खेल समझिए। पहले तो तोड़े गए

विधायकों ने खुद दावा किया कि वह जेडीयू के संपर्क में हैं और उनको जेडीयू की तरफ से मंत्री पद ऑफर किया गया है। लेकिन अब रातोंरात पूरा खेल पलट चुका है क्योंकि नीतीश कुमार की कुर्सी खुद सुरक्षित नहीं है तो वह दूसरों को क्या मंत्री बनाएंगे और कितने दिनों तक मंत्री बना पाएंगे सवाल खड़ा होता है। अगर भारतीय जनता पार्टी इसमें कामयाब हो गई स्पीकर बनाने में और उन्होंने पांच सात 10 एमएलए इधर से उधर से तोड़ लिए

और उन्होंने जाके चिराग पासवान के साथ मिलके एक स्टेबल सरकार बना ली तो फिर नीतीश कुमार के साथ जाने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन इसके लिए मुझे लगता है कि तब तक इंतजार करना होगा जब तक स्पीकर नहीं बन जाते। तो दैनिक भास्कर के वरिष्ठ पत्रकार केपी मलिक ने हमारे चैनल से बातचीत के दौरान पहले ही खुलासा कर दिया था कि कांग्रेस, एआईएमआईएम समेत बसपा और आईपी गुप्ता के विधायक खुद टूटने के लिए तैयार बैठे हैं। लेकिन वो

स्पीकर के चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। अगर स्पीकर जेडीयू से नहीं बना तो बड़ा उलटफेर हो सकता है। फिलहाल अब वही कुछ होता हुआ नजर भी आ रहा है। जाहिर है कि स्पीकर बीजेपी का है तो बीजेपी के विधायकों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। क्योंकि दल बदलने की स्थिति में स्पीकर की भूमिका काफी से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जेडीयू का विधानसभा में नंबर वन पार्टी बनने का सपना तो दूर की बात है। नीतीश कुमार के विधायक अगर जेडीयू के साथ कायम रह जाएं तो यह भी बड़ी बात होने वाली है।

क्योंकि भाजपा ने किस तरीके से महाराष्ट्र वाला फार्मूला बिहार में लागू कर दिया है और नीतीश कुमार को ठिकाने लगाने के लिए सम्राट चौधरी ने अमित शाह के साथ मीटिंग को किया है। ये किसी से छुपा हुआ नहीं है। फिलहाल भाजपा के खेल को नीतीश कुमार ने भी भाप लिया है और अचानक से कैबिनेट विस्तार करने का ऐलान कर दिया है तो तहलका मच गया है। मतलब कल तक खबरें थी कि 1 महीने के बाद कैबिनेट का विस्तार होगा। लेकिन अब नीतीश किसी तरह का कोई रिस्क

लेना नहीं चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी में टूट को बचाने के लिए स्पीकर पद तो छोड़ दिया है लेकिन अब वह समझौता करने की स्थिति में नहीं दिखाई दे रहे हैं। खबरें हैं कि बीजेपी नेता प्रेम कुमार को भी जेडीयू की तरफ से मंत्री पद ऑफर किया गया था। लेकिन भाजपा ने रातोंरात मंत्रियों की सूची ही बदल डाली। खबर भी मौजूद है। खबर आप देख सकते हैं। देखिए इस खबर में लिखा भी हुआ है कि स्पीकर बनते बनते मंत्री बन गए विधायक जी। बिहार

विधानसभा ने कर दिया खेला। तो स्पीकर के चुनाव के बीच विधानसभा सत्र की सूची में प्रेम कुमार का नाम मंत्री पद के लिए लगभग फाइनल कर दिया गया। रातोंरात सूची भी तैयार की गई। लेकिन जैसे ही यह सूची वायरल हुई, जैसे ही सूची को जारी किया गया, बवाल खड़ा हो गया। दावा यह किया जाने लगा कि प्रेम कुमार का नाम गलती से मंत्रियों की सूची में प्रिंट हो गया है। फिलहाल अगर बिहार की बात की जाए तो बिहार की राजनीति में कुछ भी गलती से नहीं होता है। मतलब

जब स्पीकर को लेकर भारतीय जनता पार्टी और जेडीयू में तगड़ी खींचतान मची हुई है। उसी बीच भारतीय जनता पार्टी के स्पीकर प्रेम कुमार का नाम मंत्रियों की सूची में शामिल किया जाना कोई गलती नहीं बल्कि सोची समझी रणनीति है सोची समझी साजिश है और कितनी बड़ी यह साजिश है इसके लिए आप खबर देखिए खबर देखिए इसमें लिखा हुआ है कि तो ऐसी कसी जा रही नकेल राजस्व विभाग पर क्यों हुई अचानक टाइट आईएएस की एंट्री तो आपको बता दें कि बिहार में सरकार के गठन के बाद बड़े पैमाने पर

आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। वैसे भी नीतीश कुमार की हमेशा से राजस्व विभाग पर नजर रहती है। ऐसे हालातों में गृह विभाग के बाद स्पीकर पर जाना नीतीश कुमार पचा नहीं पा रहे हैं। खबरें निकल कर सामने आ रही है कि पहले भी नीतीश कुमार ने अचानक से 800 से ज्यादा अधिकारियों का तबादला किया और अब अधिकारियों के जरिए सरकार पर कंट्रोल स्थापित किया जा रहा है। तो पहले तो सचिवों के जरिए मंत्रालय पर नियंत्रण रखते थे नीतीश कुमार लेकिन अब तो पूरी की पूरी सरकार पर अपना

नियंत्रण नीतीश कुमार ने मजबूत कर लिया है। जाहिर सी बात है कि अगर अधिकारी नीतीश कुमार के अंडर में होंगे तो अमित शाह चाहकर भी किसी तरह का कोई खेल नहीं कर पाएंगे। आपको बता दें पहले भी नीतीश ने भाजपा को सिर्फ गृह विभाग दिया और अधिकारियों की पोस्टिंग ट्रांसफर की पावर को अपने पास रख लिया और अब उसी पावर का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। मतलब साफ़ है कि अगर बीजेपी ने नीतीश कुमार को हटाकर खुद के दम पर बहुमत जुटाने की कोशिश

की या फिर कि तोड़े गए विधायकों ने जेडीयू की जगह भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की तैयारी की तो यह खेल अमित शाह की आखिरी गलती साबित होने वाला है। जाहिर है कि पूरा सिस्टम नीतीश के कब्जे में है। ऐसे हालातों में क्या नीतीश कुमार इतनी आसानी से हार मानेंगे? इस सवाल के जवाब में पूरी रिपोर्ट पर आपको क्या लगता है? आखिर क्यों नीतीश कुमार ने स्पीकर पद छोड़कर दूसरे मंत्रालयों पर कब्जा कर लिया है? जो भी आप सोचते हैं इस सवाल के जवाब में हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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