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NITISH KUMAR ने MODI को पछाड़ा.. AMIT SHAH की प्लानिंग धरी रह गई…!

दोस्तों, मुख्यमंत्री बनने के महज 18 दिन बाद नीतीश कुमार ने नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने नीतीश की ताकत छीनने की कोशिश की। उनसे स्पीकर का पद तक छीन लिया और यहां तक कि अब तो बीजेपी अलग पैतरे आजमाने में लगी है। लेकिन नीतीश कुमार ने इस बीच नया रिकॉर्ड बना दिया है। हालांकि नीतीश की नजर इस रिकॉर्ड से ज्यादा

बीजेपी की हरकतों पर है। बीजेपी की स्ट्रेटजीस पे है कि आखिर बीजेपी क्या करने की कोशिश कर रही है। दरअसल इस वक्त बिहार में दो खबरें सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही हैं। पहली खबर तो नीतीश का रिकॉर्ड ही है जो उन्होंने बनाया है। दरअसल नीतीश कुमार का नाम लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आया है। 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए। यह नीतीश कुमार ने अपना रिकॉर्ड कायम कर दिया है 10 बार मुख्यमंत्री

पद की शपथ लेकर और जाहिर सी बात है कि यह बात बीजेपी को भला कैसे पसंद आएगी। बीजेपी चाहती थी कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री ना बने किसी भी करके कुछ भी करके इस बार उनका मुख्यमंत्री बने, लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार ही बनते हैं। 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हैं। हालांकि बीजेपी फिर अपना प्लान शुरू कर देती है धीरे-धीरे नीतीश कुमार की कुर्सी तक पहुंचने का। सीधे रास्ते से नहीं पहुंच पाई तो अब वो अलग-अलग पैतरे आजमा रही है और अब

अपने प्लान अपने एक्शन पर काम भी कर रही है जो कि नीतीश कुमार भी देख रहे हैं। दोस्तों सबसे पहले नीतीश कुमार से गृह विभाग छीना गया। उनकी सबसे मजबूत सबसे जरूरी ताकत उनसे छीन ली गई। इसके बाद स्पीकर के पद पर बीजेपी और जेडीयू दोनों के बीच में घमासान मचा रहा। विधायक बार-बार जेडीयू के इस बात को कहते रहे कि स्पीकर का पद तो हम नहीं जाने देंगे। नीतीश कुमार भी चाहते थे कि स्पीकर का पद

उनके हाथ से ना जाए लेकिन फिर भी बीजेपी उस पद को ले लेती है और अब बीजेपी नया पैतरा आजमा रही है और इसके पीछे संजय झा को आगे किया गया है। संजय झा ने हाल ही में एक बयान दिया है जो इस वक्त सबसे ज्यादा सुर्खियों में दूसरी खबर यही है कि संजय झा बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचलें मच गई है। सबसे पहले आप उनका यह बयान सुनिए। पार्टी के लोग, अब पार्टी के शुभचिंतक, पार्टी के समर्थक, अब पार्टी के सब लोग चाहते हैं कि अब आ के पार्टी में काम

करें। हम सब लोग चाहते हैं। अब इन्हीं को फैसला लेना है कि तब यह तय करते हैं और पार्टी में काम करें। तो दोस्तों, संजय झा ने निशांत कुमार का नाम लिया और अब अचानक निशांत कुमार का नाम लेकर संजय झा ने कहा कि भाई पार्टी के लोग चाहते हैं कि निशांत कुमार अब पार्टी के लिए काम करना शुरू कर दें। पार्टी का नेतृत्व आगे जाकर वह करें। इसकी बात उन्होंने कही। अब अचानक निशांत कुमार का नाम लेकर बिहार की

राजनीति में संजय झा ने हलचले बढ़ा दी। क्योंकि संजय झा आजकल अमित शाह के सबसे ज्यादा करीबी हो रहे हैं। वो जेडीयू से ज्यादा नीतीश कुमार से ज्यादा करीबी बीजेपी के होते दिखाई दे रहे हैं और यह बात यहां तक कि जेडीयू के नेता भी अच्छे से जानते हैं और इसीलिए कहा जा रहा है कि संजय झा ने ये जो कुछ भी बयान दिया है यह ऐसे ही नहीं दिया है बल्कि इशारों पर उनसे दिलवाया गया है और यह इशारा आया था अमित शाह

की तरफ से। केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाते हैं। उन्होंने ही संजय झा को यह बयान देने के लिए कहा। राजनीति में बयानों के कई मायने होते हैं और ये बयान बहुत जरूरी होते हैं। किस वक्त पर बयान दिया गया है ये जानना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है। जहां एक और नीतीश की ताकत लगातार कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी अपना कुनबा बढ़ा रही है। आरएलएम के विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है और अपने विधायकों की संख्या बढ़ाने की

कोशिश कर रही है। इस बीच नीतीश कुमार को किस तरीके से कमजोर किया जाए इसका पैतरा उसने निशांत कुमार के जरिए निकाला है। दोस्तों नीतीश कुमार कभी भी परिवारवाद का आरोप अपने ऊपर नहीं चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने बेटे को राजनीति में एंट्री नहीं दी। बिल्कुल वो राजनीति से उन्हें दूर रखते हैं। निशांत कुमार दिखाई जरूर दे जाते हैं और कई बार उनसे सवाल जवाब भी होते हैं और वह पार्टी को लेकर बयानबाजी करते हैं। लेकिन निशांत कुमार की कोई

एक्टिव भूमिका पार्टी में नहीं है और ना ही नीतीश कुमार यह चाहते हैं कि निशांत कुमार मौजूदा वक्त में पार्टी में भूमिका अपनी निभाए। क्योंकि नीतीश कुमार मौजूदा वक्त में बिहार में एक ऐसे नेता हैं जिनके ऊपर किसी भी तरीके का आरोप नहीं है। कोई लांछन उन पर नहीं लगा सकता और इसी वजह से वो मौजूदा वक्त में मुख्यमंत्री बने भी हैं। 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ उन्होंने ऐसे ही नहीं ली है बल्कि कई सैक्रिफाइसेस इस चीज के लिए उन्होंने किए हैं। जिसमें से एक सैक्रिफाइस उनका बेटा

भी था कि उन्होंने अपने बेटे को अभी तक एंट्री नहीं दी। वरना वह मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली चाहते तो अपने बेटे को कुछ भी बना सकते थे। अब जिस तरह से उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बना दिया तो वह भी चाहते तो बहुत कुछ कर सकते लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया और अभी अभी भी नीतीश कुमार यह चीज नहीं चाहते हैं। लेकिन संजय झा की तरफ से यह बात क्यों कही गई? यह सबसे बड़ा सवाल है। तो बीजेपी ने चाबी भरी है संजय झा को। संजय झा से यह बयान दिलवाया गया ताकि

एक जो बिहार में जो जेडीयू को पसंद करने वाले लोग हैं, जो जेडीयू के नेता हैं, कार्यकर्ता हैं, उन तक यह मैसेज चला जाए कि हां, अब निशांत कुमार को आना चाहिए। नीतीश का नाम धीरे-धीरे साइड करने की यह पहली कोशिश है। नीतीश कुमार को किस तरीके से साइडलाइन किया जाए। किस तरीके से मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा जाए, उस कुर्सी तक पहुंचा जाए, इसके लिए प्लानिंग बीजेपी ने शुरू की है। पहले उनसे और यह पैटर्न आप सिर्फ बिहार में नहीं देखेंगे। यह पैटर्न आप अलग-अलग राज्यों में देखेंगे जहां पर ये चीजें

सक्सेसफुल भी हुई हैं। सबसे बड़ा सबसे पहला उदाहरण महाराष्ट्र का ही सामने आता है। महाराष्ट्र में शिवसेना तोड़ी जाती है। पहले पार्टी को तोड़ा जाता है। इसके बाद जो लोग पार्टी से लाए जाते हैं उन्हें मुख्यमंत्री तक बना दिया जाता है। काफी तवज्जो दी जाती है और इसके बाद चुपचाप धीरे से किनारे लगा दिया जाता है और यही चीज बिहार में होने की कोशिश हो रही है। बीजेपी को लेकर अक्सर यह बातें कही जाती है कि बीजेपी जिसके साथ भी गठबंधन करती है उसे खा

जाती है। अगर वो क्षेत्रीय पार्टी है तो यह उड़ीसा में भी हुआ और यह बाकी जगहों पर भी हमें देखने को मिला है अलग-अलग राज्यों में और बिहार में भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश हो रही है कि बिहार में जिनका दबदबा है नीतीश कुमार का उन्हें किस तरीके से साइडलाइन किया जाए उनकी जगह पर अपनी बड़ी पिक्चर किस तरीके से की जाए इसके लिए बीजेपी का यह प्लान आज से नहीं बल्कि काफी पहले से काम कर रहा है और वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे इस पर अपना जो दबदबा है वह बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं। पिछली बार भी जब

सरकार थी तो उसमें बीजेपी का सरकार में काफी ज्यादा महत्व था। सरकार में उनके कई मंत्री थे। जेडीयू के कम थे, बीजेपी के ज्यादा थे। इस बार भी बिल्कुल वैसा ही है जबकि अंतर सिर्फ चार विधायकों का है। लेकिन फिर भी नीतीश कुमार को इस बार सबसे ज्यादा दबना पड़ रहा है क्योंकि वो चार विधायक उन्हें काफी ज्यादा भारी पड़ रहे हैं। अब नीतीश कुमार भी इन सब चीजों को देख रहे हैं। नीतीश कुमार रिकॉर्ड बना रहे हैं। लेकिन नीतीश

कुमार की नजर उन रिकॉर्ड से बिल्कुल हटकर इस चीज पर है कि आखिर बीजेपी क्या करने की कोशिश कर रही है। आखिर बीजेपी उन्हें किस तरीके से नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। नीतीश कुमार राजनीति के ऐसे मंजे हुए खिलाड़ी हैं कि वह सब कुछ सिर्फ ऑब्जर्व करते हैं और फिर एकदम झटके में फैसला लेते हैं। यह बात उनको लेकर कई बार कही गई है और जिस तरह से उन्होंने विधानसभा में बीते दिनों बयान दिया था कहा था कि अब मैं कहीं नहीं जाने वाला हूं तो उससे कई सारी हलचलें बढ़ती हुई दिखाई दी थी| अब बीजेपी यह

कोशिश कर रही है कि निशांत कुमार का नाम लेकर साइडलाइन किया जाए नीतीश के नाम को और किसी भी तरीके से जो निशांत कुमार है उन्हें अभिमन्यु की भूमिका दे दी जाए। पहले उन्हें अकेला किया जाए और उसके बाद उनकी जो राजनीतिक हत्या है वो भी करने की कोशिश की जाए। यह बातें राजनीतिक विश्लेषक लगातार इस बात को कह रहे हैं और जिस तरह से यह बयान दिया गया है यह बिहार की राजनीति में आने वाले वक्त में काफी बड़ा साबित हो सकता है। अब यह देखना

होगा कि जिस तरह से बीजेपी जेडीयू को खत्म करने या फिर जेडीयू पर कब्जा करने, मुख्यमंत्री पद पर कब्जा करने या जो भी कोशिशें कर रही है वो उसमें कामयाब हो पाती है या फिर नीतीश कुमार अपनी कोई अलग बुद्धि लगाते हैं। फिलहाल के लिए मेरे साथ इस खबर में इतना ही। आप पढ़ते रहिए

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