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शादी के बाद Romance और Attraction कम क्यों हो जाता है | Real Reason Behind This |

Dr. Nishu Sah

प्यार है, शादी है लेकिन करने का मन नहीं कर रहा। देयर इज नो अट्रैक्शन, नो फीलिंग। यह एक ऐसी बात है जो कि हर दूसरा कपल महसूस कर रहा है। जहां उनके बेडरूम्स बिल्कुल साइलेंट होते जा रहे हैं। कहीं ना कहीं वो जो मस्ती, वो फन, जो चीजें बहुत जरूरी हैं, बच्चों की जिम्मेदारियों के बाद जरूरी है, वो क्यों खत्म होती जा रही है? क्यों इसी आदमी को देखकर मुझे फीलिंग नहीं आती? कि इस औरत के साथ मुझे वो सब करने का मन

नहीं करता। क्यों है ऐसा? इसे समझेंगे और इसे कैसे ठीक किया जाए वह भी मैं बताती हूं। तो चलिए हम बात कर रहे थे दिस इमोशनल डिस्कनेक्शन  जिसकी वजह से देयर इज़ नो अट्रैक्शन। कोई अट्रैक्शन नहीं है। कोई स्पार्क नहीं है। बस हो रहा है। आते हैं खाना खाते हैं। सब्जी भाजी के भाव देखते हैं। बच्चों की पढ़ाई बच्चे कहां कर रहे हैं? काम में कितना कमा लिया। एंड दैट्स इट।  यह हो तब रहा है जब आपकी रूटीनंस बहुत सेम है। अगर

आप वही रोज सुबह उठ के जाना, आना, वही बातें, वही दाल, रोटी, सब्जी और यही सब कम्युनिकेशंस  करेंगे तो स्पार्क धीरे-धीरे घटने लगेगा। यह कोई बात नई नहीं है कि शादी के शुरू में आपका स्पार्क ज्यादा रहता है और फिर धीरे धीरे धीरे धीरे-धीरे घटता है और  खत्म ही हो जाता है। तो, वह लाइफ जो हम सोचते हैं कि रिटायरमेंट लाइफ होगी। 40-50 के बाद बढ़िया मजे करेंगे। बढ़िया अच्छी सेक्सुअल लाइफ होगी। बढ़िया हम इधर-उधर घूमने जाएंगे। मैं अपनी बीवी को लेके वर्ल्ड टूअर जाऊंगा।

जैसे बहुत सारे थॉट्स या गांव में जाके रहेंगे। यह मस्ती करेंगे। वो तब होगा ना जब आप लोगों का अट्रैक्शन रहेगा। बात क्या है कि आपको इस लाइफ  को एक्टिव रखना पड़ेगा। सो अगर आपको ऐसा लगता है कि यह बहुत मोनोटोनस हो गया है तो अपने रूटीन को बेहतर  करें। मैं हमेशा कहती हूं कि अगर एक हफ्ता आप काम करते हैं। दैट मींस इफ [संगीत] यू वर्क फाइव डेज और सिक्स डेज अ वीक वन डे शुड बी द कपल टाइम। वो वन डे में ऐसा नहीं है कि भ मैं तो रेस्ट ना करूं। मैं तो बाहर ना जाऊं। इसका यह मतलब है कि आप अपने रेस्ट को अपने पार्टनर के

रेस्ट से अलग मानते हो। तो जरूरी यह है कि दोनों मिलके कुछ ऐसा काम जरूर करो जो आपके रूटीन को बेहतर करे। बाहर जाना, मार्केट तक जाना, कुछ शॉपिंग करना और उस समय अपने उस इंटिमेट टाइम को बेहतर बनाओ। हो सकता है हफ्ते में आप एकद बार करते भी हो। बट जब जिस संडे या जिस सैटरडे आपकी छुट्टी है आप तब करना  चाहते हो उसको स्पाइसी करो। दूसरा मोनोटोनस तब हो जाता है जब आप ना इमोशनली एक दूसरे के साथ कंफर्टेबल नहीं हो। या तो बात नहीं कर सकते।

टाइम नहीं है। तो क्या होता है कि आप अपने मन की बातें खुद में रखने लग जाते हो। और आपको ऐसा लगता है उसको बता के भी क्या होगा? मन की बातें खुद में रखना कभी-कभी ओके है लेकिन इससे आपकी सेक्सुअल ड्राइव खत्म होने लग जाती  है। जितना आप खुल के अपनी बात कर पाओगे किसी से उसको सेफ मान पाओगे। अपना सबसे जिगरी मान पाओगे उतना ही आप उसके सामने बिना शर्म के बैठोगे। लेकिन अगर आपने खुद के पर्दे लगा लिए तो आपको उससे फीलिंग नहीं आएगी। तो

कम्युनिकेशन बहुत ज्यादा  जरूरी है। तो उसे मेंटेन डेफिनेटली करें। तीसरा सेल्फ लव। आपका डिजायर और इच्छा तब खत्म होती है जब आप खुद से नफरत करने लगे। अब आसपास हो रही बातों को हम अपने पार्टनर को नहीं बोलते और हम खुद पे लेते हैं। मैं शायद अच्छी  बीवी नहीं हूं। मैं शायद अच्छा नहीं कर पा रही। मैं शायद अच्छी नहीं लगती। मैं मोटी हो गई हूं। मैं ऐसा दिखता हूं। मैं बदबू आती। व्हाटएवर अगर आप खुद को लेकर 10,000 विचार रखते हो और खुद को ही प्यार नहीं करते तो

आपकी लिबडो आपकी सेक्स इच्छा [संगीत] खत्म हो जाएगी। तो अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसकी भी जिम्मेदारी समझें। यह जब तक यह चीजें नहीं करोगे शर्म बढ़ेगी। इच्छाशक्ति और हार्मोन खत्म होगा और आप कहीं ना कहीं फिर वही लाइफ जिओगे जहां अकेले लग्जुरियस कमरे में आप अकेले

रिटायरमेंट  पे बैठे हो। सो स्टार्ट इन्वेस्टिंग। कभी एक बार नई-नई चीजें करो। ऊटपटांग की चीजें करो करो। वही आपका जीवन साथी है जो आपके साथ ये ऊटपटांग की चीजें करेगा। आशा करती हूं मेरी Strory आपके डाउट्स को क्लियर कर पाई है।