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Author: Star Daily

  • अखिलेश यादव की वजह से यूपी में अटका BJP

    Up में अखिलेश यादव ने भाजपा को एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया है कि भाजपा उससे निकल नहीं पा रही है। यह चक्रव्यूह भारतीय जनता पार्टी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष से जुड़ा हुआ है और भाजपा इस वजह से परेशान है क्योंकि अखिलेश यादव अपने पीडीए के साथ किलेबंदी करे हुए हैं। आप जानते हैं कि यूपी में जल्द ही

    विधानसभा के चुनाव होने हैं और ऐसे में अखिलेश यादव लगातार जो पीडीए का नारा दे रहे हैं इसमें भारतीय जनता पार्टी घिरती जा रही है। उस पर सवाल उठते जा रहे हैं कि आप पिछड़े दलित अल्पसंख्यकों को नजरअंदाज कर रहे हैं। उनकी अनदेखी कर रहे हैं और सिर्फ समाज के जो सामान्य वर्ग हैं उनको लेकर आगे बढ़ रहे हैं या फिर उनको अहम पद सौंप रहे हैं। ऐसे में

    जब उत्तर प्रदेश में यूपी के प्रदेश अध्यक्ष का चयन भाजपा को करना था तो वो अखिलेश यादव की पीडीए के काट के रूप में करना चाहती है। भाजपा चाहती है कि वह जिस नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए वह अखिलेश यादव की पीडीए को काट सके और इस नैरेटिव में सेट बैठे जहां पर यह संदेश दिया जा सके कि भाजपा भी ऐसे लोगों को आगे बढ़ा रही है जो कि पिछड़े दलित या

    फिर अल्पसंख्यक हैं। अब दोस्तों इस लिस्ट में तमाम नाम चल रहे हैं, लेकिन इसके पीछे की थोड़ी कहानी जान लेते हैं। दरअसल एक तरफ जहां पर 2024 के लोकसभा चुनावों में अखिलेश यादव ने अपने पीडीए के दम पर भारतीय जनता पार्टी को काफी कम सीटों पर समेट कर रख दिया था तो दूसरी तरफ 2027 का विधानसभा चुनाव भी है। जिसको लेकर के अखिलेश

    यादव तो तैयारी कर ही रहे हैं लेकिन भाजपा जो है वह दो धड़ों में बंट चुकी है। पहला धड़ा अमित शाह वाला जो कि दिल्ली नेतृत्व है और दूसरा यूपी नेतृत्व यानी योगी आदित्यनाथ वाला। अमित शाह चाहते हैं कि उनके पसंद के नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दी जाए तो योगी आदित्यनाथ अपने पसंद के मंत्रियों और नेताओं की लिस्ट को लगातार आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। अब अमित शाह की जो लिस्ट है या फिर उनके जो

    पसंदीदा चेहरे हैं उसमें पहला नाम तो केशव प्रसाद मौर्य का है। दूसरा नाम उसमें साध्वी निरंजन ज्योति का चल रहा है। तीसरा नाम बीएल संतोष का चल रहा है। और इसी तरीके से तमाम जो नाम हैं वो इस लिस्ट में चल रहे हैं। इसके अलावा अगर हम बात करें योगी आदित्यनाथ की लिस्ट में तो बात कही जा रही है कि योगी आदित्यनाथ अपने सबसे अजीज और करीबी नेता

    जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपना चाहते हैं। इसके पीछे भी तमाम बड़ी वजह हैं। लेकिन भाजपा ने अब अपने प्रदेश अध्यक्ष के चयन से पहले भाजपा एक निष्कर्ष पे पहुंची है। भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि वो किसी ऐसे नेता को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपे जो यूपी का पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव दोनों ही भाजपा को जिता सके और भाजपा की जो सीटें हैं वो बढ़ा सके। क्योंकि पिछले

    अगर आप लोकसभा चुनाव जो हाल ही में 2024 में हुए उस पर नजर डालेंगे तो अखिलेश यादव की पीडीए ने काफी ज्यादा भारतीय जनता पार्टी का नुकसान किया था। अब भाजपा चाहती है कि अह इससे बचा जा सके। यानी अखिलेश यादव के पीडीए का जो नैरेटिव है उससे भाजपा का नुकसान ना हो। इस वजह से भाजपा एक ऐसे नेता को चुन रही है। स्वतंत्रदेव सिंह पर अगर हम

    बात करें तो वह कहीं ना कहीं भाजपा के इस नैरेटिव में फिट बैठते हैं। भाजपा के इस तमाम चीजों पर फिट बैठते हैं। क्योंकि इसके पीछे जो वजह हैं उन पर विस्तार से बात करते हैं। देखिए स्वतंत्रदेव सिंह जो हैं वह सिर्फ जलशक्ति मंत्री नहीं है। भाजपा के एक समर्थित कार्यकर्ता हैं। आरएसएस से जुड़े हुए हैं। उनके संबंध उनसे भी अच्छे हैं। लंबे समय से राजनीति करते आ रहे हैं और साथ ही साथ यूपी में प्रदेश अध्यक्ष की कमान

    पहले भी संभाल चुके हैं। तो ऐसे में उनको अगर यह पद सौंपा जाता है तो इससे यह होगा कि उनके योगी आदित्यनाथ से रिश्ते अच्छे हैं, आरएसएस से रिश्ते अच्छे हैं और शाह से रिश्ते अच्छे हैं। तो वो तीनों के बीच जो एक कनेक्शन है वो स्थापित कर पाएंगे। जो बातचीत है वो स्थापित कर पाएंगे। इस वजह से उनका नाम चल रहा है। और इसी बीच जो खबरें चल रही हैं उसके मुताबिक अगर हम बात करें तो कहा जा रहा है कि

    भाजपा जो है किसी गैर यादव ओबीसी पर दांव लगा सकती है। अब गैर यादव ओबीसी में अगर हम यादवों के बाद ओबीसी की जो बड़ी जनसंख्या पर बात करें तो वह कुर्मी समाज होता है और स्वतंत्रदेव सिंह जो हैं वो कुर्मी समाज से ही आते हैं। तो ऐसे में स्वतंत्र देव सिंह जो हैं वो उपयुक्त माने जा रहे हैं। हालांकि भाजपा में जैसी चर्चाएं चलती हैं वैसा होता कुछ नहीं है। कभी-कभी यह होता है कि 10-12 नाम चल रहे होते हैं और

    अचानक से एक ऐसा नाम जो है आलाकमान सुझा देता है जिसे सुनकर सब चौंक जाते हैं लेकिन इस लिस्ट में ऐसे 10-12 नहीं बल्कि करीब 18 से 20 नाम चल रहे हैं और इन नामों में जो सबसे ऊपर नाम थे वह हमने आपको बताएं। हालांकि साध्वी निरंजन ज्योति को लेकर के भी कहा जा रहा है कि वो एक महिला हैं और दलित समुदाय से पिछड़े समाज से आती हैं। तो ऐसे में हो सकता है कि भाजपा उन पर दांव चल दे क्योंकि उन्होंने

    हाल ही में अभी जो केंद्रीय नेतृत्व है उससे भी मुलाकात की थी लेकिन इस पर बहुत ज्यादा चर्चाएं इस वजह से भी नहीं हो रही है क्योंकि भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष पद की जो कमान है यूपी में वह अभी तक किसी महिला को सौंपी नहीं है। तो ऐसे में माना जा रहा है कि हो सकता है कि अभी इस पर विचार ना किया जा रहा हो कि महिला को एक एक महिला को प्रदेश अध्यक्ष की जो कमान है वो सौंपी जाए और साथ ही साथ दोस्तों ध्यान देने वाली बात यह भी है कि भाजपा जिस भी नेता को प्रदेश

    अध्यक्ष की कमान सौंपेगी उस नेता के कंधों पर पंचायत चुनाव और यूपी के विधानसभा चुनावों की भी जिम्मेदारी होगी। तो ऐसे में उस नेता को लेकर के अब जो सियासी गलियारों में चर्चाएं हैं वह तेज हो गई हैं। इसके अलावा जब उल्टा चश्मा यूसी ने वरिष्ठ पत्रकार केपी मलिक जी से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने यूपी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर जो बात कही है आप वो भी सुनिए। आज भारतीय जनता पार्टी के साथ आएगा। अगर

    भारतीय जनता पार्टी के साथ मुस्लिम समाज आ रहा था तो आप क्यों हार गए अयोध्या जैसी जगहों पे? आप तो हारने की कगार पर पहुंच गए बनारस में। आप तो चित्रकूट हार गए तो मुस्लिम समाज तो आया नहीं पबंदा आया नहीं आपके पास दलित भी नहीं आया इस बार तो क्यों नहीं आया तो आप जो है जो और अखिलेश यादव ने जो पीडीए बनाया है पीडीए पे कुछ काम चल रहा है दलित कहीं ना कहीं भारतीय जनता पार्टी को उसकी

    रणनीति के हिसाब से नाराज है तो भारतीय जनता पार्टी किसी पिछड़े या दलित को अध्यक्ष बना देगी उससे सारा दलित वापस दौड़ के चला आएगा मुझे ऐसा नहीं लगता तो दोस्तों गलियारों में चर्चा कई नामों की है। लेकिन भाजपा अक्सर ऐसे नाम से चौंका देती है जिसके बारे में बहुत ज्यादा चर्चाएं ना हो रही हो या फिर वह बिल्कुल भी सुर्खियों में ना रहा हो। तो नजर इस पर टिकी हुई है कि आखिर किसका नाम सामने आता है और साथ ही

    क्या अखिलेश यादव के पीडीए के नैरेटिव को अखिलेश यादव के पीडीए से घबराकर भाजपा कोई ऐसे ही नेता को जो है मैदान में उतार सकती है प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है या फिर ओबीसी समाज से लेकर आएगी ताकि अखिलेश यादव को टक्कर दी जा सके और 2027 के चुनावों में जो है एक कड़ा मुकाबला दिखाने की कोशिश की जा सके। आपको क्या लगता है? आप क्या सोचते हैं? इसका जवाब कमेंट सेक्शन में जरूर दीजिएगा।

  • कैसे बना एक चायवाला देश का प्रधानमंत्री, मोदी की कुंडली का रहस्य, मोदी का संघर्ष और अनोखी कहानी!

    नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करने वाले हैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म से लेकर उनके जीवन के कमाल के सफर और कुंडली से जुड़े रहस्यों के बारे में। यह पूरी जानकारी इतिहास, सार्वजनिक तथ्यों और ज्योतिष से जुड़ी मान्यताओं पर आधारित है। तो चलिए शुरू करते हैं!

    1 – नरेंद्र मोदी का जन्म एवं बचपन

    17 सितंबर 1950… गुजरात के वडनगर कस्बे में एक साधारण परिवार में जन्म लिया नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने। उनके पिता दामोदरदास मोदी एक चाय बेचने वाले थे और मां हीराबेन घर का काम संभालती थीं। गरीबी, संघर्ष और छोटे-से घर में पले मोदी बचपन से ही मेहनती, शांत स्वभाव और कुछ अलग करने वाले बच्चे थे।”

    सीन आइडिया: गांव, साधारण घर, छोटा बच्चा, रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते हुए।

    2 – शिक्षा और प्रारंभिक संघर्ष

    मोदी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई वडनगर के स्कूल में की। युवावस्था में वे घर छोड़कर देशभर में घूमे—हिमालय, आश्रम और आध्यात्मिक यात्राएं। यही समय था जब उनमें नेतृत्व, अनुशासन और देशभक्ति की भावना और मजबूत हुई।

    3 – राजनीति में प्रवेश

    1970 के दशक में मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े। असाधारण संगठन क्षमता के कारण उन्हें भाजपा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। 2001 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने, और 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बनने तक उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया।

    4 – प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल

    प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने देश में विकास, डिजिटल इंडिया, अंतरिक्ष मिशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, आत्मनिर्भर भारत जैसे कई अभियानों की शुरुआत की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने भारत की छवि को मजबूत किया। उनकी नेतृत्व शैली—तेज़ निर्णय, सशक्त भाषण और जनता से जुड़ाव—उन्हें विश्व के प्रमुख नेताओं में शामिल करती है।

    5 – मोदी की कुंडली का रहस्य (ज्योतिषीय मान्यताएं)

    अब बात करते हैं कुंडली से जुड़े उन रहस्यों की, जिन पर ज्योतिषियों ने कई वर्षों से अध्ययन किया है। ज्योतिषियों के अनुसार मोदी जी का जन्म 17 सितंबर 1950, सुबह 11 बजे के आसपास माना जाता है। जन्म राशि ‘कन्या’ बताई जाती है, और लग्न ‘वृश्चिक’।

    कहा जाता है कि—

    • उनकी कुंडली में शनि और मंगल का मजबूत प्रभाव उन्हें संघर्षों से उभरने की शक्ति देता है।
    • बुध की स्थिति भाषण-कला और निर्णय क्षमता को बढ़ाती है।
    • कई ज्योतिषी उनके नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और प्रसिद्धि को ‘भाग्य और कर्म’ के योग का परिणाम बताते हैं।

    ध्यान रहे—यह सभी बातें केवल ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक प्रमाण नहीं।

    6 – आज के मोदी

    आज नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे चर्चित नेताओं में से एक हैं। उनका सफर हमें सिखाता है— कि अगर मन में लक्ष्य, अनुशासन और मेहनत हो, तो साधारण परिवार से उठकर भी देश की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंचा जा सकता है।

    End

    दोस्तों, यह था नरेंद्र मोदी के जन्म से लेकर कुंडली तक का दिलचस्प सफर। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो वेबसाइट को Follow करें शेयर करें। और कमेंट में बताएं 🙏

  • द्रोपती: अग्नि से जन्मी न्याय की प्रतीक // द्रोपती कि कहानी पूरा जाने आज इस ✍️

    परिचय

    द्रोपती, अग्नि से जन्मी, असाधारण सौंदर्य और बुद्धि की प्रतीक थीं। उनका स्वयंवर, जहाँ अर्जुन ने मत्स्यभेदन कर उन्हें जीता, एक ऐतिहासिक घटना थी। परंतु, कुंती के वचन के कारण, वे पांचों पांडवों की पत्नी बनीं, जो एक अद्वितीय और जटिल संबंध था।

    संघर्ष और शिक्षा

    भरी सभा में उनका चीरहरण, धर्म और न्याय पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगा गया। इस अपमान ने ही महाभारत के युद्ध की नींव रखी, जहाँ उन्होंने न्याय के लिए संघर्ष किया। द्रोपती केवल एक रानी नहीं थीं, वे नारी शक्ति, स्वाभिमान और धर्म की रक्षा की प्रतीक हैं।

    विरासत

    उनकी कहानी हमें सिखाती है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना कितना महत्वपूर्ण है। उनका जीवन हमें धैर्य, दृढ़ता और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का पाठ पढ़ाता है।

  • फुलौना या गुब्बारा (Balloon) के आविष्कार किसने किया था // पूरा इतिहास और रहस्य फुल जानकारी के साथ 🎈

    नमस्कार दोस्तों! आज हम बताने वाले हैं एक ऐसे खिलौने की कहानी, जिसने हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाई है— जी हाँ! गुब्बारा, जिसे कई जगह फुलौना भी कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इस रंग-बिरंगे गुब्बारे का आविष्कार किसने किया था? चलिए जानते हैं इसका पूरा इतिहास!

    🎈1 – गुब्बारे का सबसे पुराना रूप

    दोस्तों, गुब्बारा आज जितना खूबसूरत है, पहले उतना नहीं था। सबसे पुराने गुब्बारे प्राचीन सभ्यताओं में जानवरों के मूत्राशय और आंतों से बनाए जाते थे। ये त्योहारों और खेलों में उपयोग होते थे।

    🎈2 – वैज्ञानिक आविष्कार की शुरुआत

    लेकिन आधुनिक रबर के गुब्बारे के आविष्कार का श्रेय जाता है— 👉 माइकल फैराडे (Michael Faraday) को। उन्होंने सन 1824 में हाइड्रोजन गैस पर प्रयोग करते समय पहला रबर गुब्बारा बनाया। फैराडे ने दो रबर की शीट्स को गोल आकार में काटा, उनके किनारों पर आटा लगाया और उन्हें जोड़कर गुब्बारा तैयार किया।

    🎈3 – बच्चों के लिए गुब्बारा कब बना?

    फैराडे के प्रयोग के बाद 1825 में 👉 थॉमस हैनकॉक (Thomas Hancock) नामक एक ब्रिटिश उद्योगपति ने पहली बार रबर के गुब्बारे खिलौने के रूप में बनाकर बेचना शुरू किया।

    इसके बाद रंगीन, गोल, दिल के आकार वाले और तरह-तरह के गुब्बारे बनने लगे।

    🎈4 – गुब्बारा क्यों खास है?

    गुब्बारा सिर्फ एक खिलौना नहीं… ये बच्चों की खुशी, त्योहारों की रौनक और जन्मदिनों की जान है। हल्का, सस्ता और हवा में उड़ने वाला— इसकी यही खासियत दुनिया भर में इसे लोकप्रिय बनाती है।

    🎈5 – आज का गुब्बारा

    आज गुब्बारे सिर्फ खिलौने नहीं, बल्कि सजावट, विज्ञान, मौसम अध्ययन और अंतरिक्ष प्रयोगों तक में इस्तेमाल होते हैं। एक छोटा-सा आविष्कार… लेकिन उपयोग अनगिनत!

    End

    दोस्तों, यह थी ‘गुब्बारे’ यानी हमारे बचपन के फुलौने की पूरी कहानी— कौन था इसका आविष्कारक और कैसे बना यह दुनिया का सबसे लोकप्रिय खिलौना। अगर आपको यह हिस्ट्री पसंद आई हो तो फॉलो और शेयर करें। और बताइए— कॉमेंट में

  • बंद कमरे मे ’90 मिनट’ तक मोदी-राहुल और अमित शाह के बीच क्या हुआ ?😱

    राहुल के संसद में वोट चोरी और एसआईआर पर भाजपा को बुरी तरह से फंसाने के बाद राहुल को रोकने के लिए मोदी और शाह ने आनन-फानन में एक बैठक रखी जिसमें राहुल गांधी को बुलाया गया लेकिन बैठक में भी राहुल गांधी के तेवर और आक्रामक नजर आए। उन्होंने मोदी शाह की एक भी बात पर सहमति नहीं जताई।

    मोदी शाह राहुल को मनाते रहे लेकिन राहुल ने एक पेपर पर डिसेंट नोट लिखकर मोदी को थमा दिया और मीटिंग छोड़कर चले गए। बैठक में कब कैसे क्या-क्या हुआ इस पर बात करते हैं। दोस्तों, संसद में राहुल के वोट चोरी पर बात करने के अगले ही दिन यानी बुधवार को दोपहर 1:00 बजे के बाद

    प्रधानमंत्री कार्यालय में एक बैठक होती है। यह बैठक पीएम मोदी, शाह और राहुल गांधी के बीच हुई थी। बैठक की शुरुआत 1:7 पर हुई जो करीब 1 घंटे 25 तक चली। यानी कुल 88 मिनट के आसपास। इस बैठक में सीआईसी यानी सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन और सीबीसी यानी सेंट्रल विजिलेंस कमीशन में खाली पदों की नियुक्ति पर चर्चा की गई। इसमें सरकार की तरफ से राहुल गांधी

    के सामने कुछ नाम रखे गए लेकिन राहुल इन नामों पर राजी नहीं हुए। राहुल गांधी का कहना था कि लिस्ट में जिनके नाम है उनमें दलित, आदिवासी, ओबीसी, ईबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय को सरकार ने पूरी तरह से इग्नोर किया है। राहुल इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि आपकी सरकार में बहुजनों की अपेक्षा की जा रही है और वह कोई नई बात नहीं है। राहुल के इस बात पर मोदी जी खुद यह स्वीकार करते हैं कि लिस्ट में

    शामिल नामों में सिर्फ एक उम्मीदवार ही दलित समाज का था। जबकि बहुजन समुदाय की उम्मीदवारी 7% तक होनी चाहिए थी। इसके बाद राहुल ने इस लिस्ट पर आपत्ति जताई और डिसेंट नोट यानी असहमति लेटर लिखकर सरकार को सौंप दिया और वहां से चलते बने। दोस्तों ये जो खबर अभी हमने आपको ये जो जानकारी दी है जिसमें राहुल गांधी के सामने नाम आए सीआईसी को लेकर बैठक हुई। यह पूरी खबर गोदी मीडिया बता

    रहा है। जी हां, अंदर की खबर कुछ और है। दरअसल राहुल जब बैठक से बाहर निकले तो राहुल ने तमाम ऐसे लोगों से बात की जिसमें यह बताया गया कि बैठक में सिर्फ इस मसले पर बात नहीं हुई है। राहुल की इस जानकारी के बाद यह बात साफ हो गई कि बैठक में चर्चा सिर्फ मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के बारे में नहीं हुई। बैठक में और भी कई मुद्दों पर बात की गई

    और यह मुद्दे बाहर ना आए इसलिए हेडलाइंस में यह दिखाया जा रहा है कि सीआईसी की नियुक्ति को लेकर बात हुई है। बैठक में शाह की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। क्योंकि नियमों के मुताबिक किसी की नियुक्ति को लेकर अगर बैठक होती है जिसमें प्रधानमंत्री और एलओपी शामिल होते हैं तो उसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। एलओपी भी शामिल होते हैं और इसके अलावा प्रधानमंत्री के पास एक पावर होता है

    जिसमें उनके मंत्रालय का कोई भी मंत्री इस बैठक में शामिल हो सकता है। अब मोदी जी के पास मंत्रियों की कमी तो है नहीं तो इतने मंत्रियों में से सिर्फ शाह को ही मोदी जी ने चुना जो सवाल खड़े करती है। जानकारी के मुताबिक बैठक में मोदी और राहुल के बीच जो बात हो रही थी उसमें अमित शाह सिर्फ शांति से बैठे उस बात को सुन रहे थे और उस बात में बहुत ज्यादा भागीदारी नहीं दे रहे थे। अब बैठक में जो बात है वो क्या हुई है

    उस पर बात करें लेकिन साथ ही साथ आप यह जान लीजिए कि किस तरीके से हेडलाइंस के जरिए गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल दोस्तों बैठक में सीआईसी को लेकर भले ही चर्चा हुई हो लेकिन इसके अलावा राहुल गांधी को मैनेज करने की भी कोशिश की जा रही थी। जी हां, राहुल गांधी को समझाने की कोशिश की जा रही थी कि संसद में जब वोट चोरी और एसआईआर का मुद्दा गूंज रहा है, तो जाहिर तौर पर

    जनता के मन पर प्रभाव पड़ रहा होगा। इस वजह से चुपचाप बंद कमरे में 88 मिनट तक प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह राहुल को समझाते हैं, मैनेज करने की कोशिश करते हैं। लेकिन राहुल ठहरे लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष वो नहीं सुनते हैं। वह असहमति जताते हैं। विरोध जताते हैं। आक्रामक अंदाज में मोदी और शाह को अपने तेवर दिखाते हुए एक नोट लिखकर पकड़ाते हैं और वहां से उठकर चले आते हैं। बाहर आकर राहुल

    तमाम लोगों से बात भी करते हैं जिन्हें जानकारी देते हैं कि बैठक में क्या-क्या बात हुई है। उन सूत्रों से जब हमने बात की तो उन्होंने बहुत खुले तौर पर तो नहीं पर दबी जबान में यह जरूर बताया कि संसद में राहुल जो गरजे थे उसको मैनेज करने की कोशिश शाह और मोदी ने की है क्योंकि इसके पीछे भी वजह है। दरअसल राहुल के इन खुलासों, इन आरोपों, इन सवालों का जवाब अमित शाह को उसी शाम को संसद में देना था। शाम करीब

    5:30 बजे के आसपास संसद में अमित शाह पहुंचते हैं। राहुल के जवाबों सवालों पर जवाब देने के लिए लंबा सा चिट्ठा हाथ में थामे होते हैं। इसी दौरान अमित शाह जो है बात को जलेबी की तरह गोल-गोल घुमाते हैं। राहुल ने जो सवाल पूछे थे उस पर बात ना करके बात को गोल-गोल घुमाकर जवाब देने की कोशिश कर रहे होते हैं। तभी राहुल खड़े होते हैं। अमित शाह को टोकते हैं और फिर चैलेंज दे देते हैं। आई चैलेंज यू। आई चैलेंज यू टू

    हैव अ डिबेट ऑन द थ्री प्रेस कॉन्फ्रेंसेस। दोस्तों, साफ-साफ शब्दों में अमित शाह को राहुल गांधी कहते हैं कि आप मेरे प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा कर लीजिए और यह चैलेंज दे देते हैं। दरअसल अमित शाह और राहुल गांधी के बीच बैठक में ही खटपट हो गई थी। राहुल मान नहीं रहे थे। मोदी मना रहे थे। शाह शाह भी मना रहे थे लेकिन राहुल नहीं मान रहे थे और राहुल बैठक छोड़कर निकल जाते हैं और शाह इस बात पर बुरी तरीके से खींच जाते हैं और यह खींच संसद में निकलती है।

    लेकिन राहुल भी कहां शांत रहने वाले थे। राहुल ने भी अमित शाह को चैलेंज कर दिया और फिर यह गुस्सा और बड़ा हो गया। तो देखिए किस तरीके से मंगलवार को राहुल गांधी कुर्ते पैजामे में आते हैं और संसद में एसआईआर वोट चोरी पर बात करते हैं। अगले दिन बैठक होती है। दोपहर में उन्हें मैनेज करने की कोशिश की जाती है। जब नहीं मैनेज होते हैं तो शाम को

    आक्रामक अंदाज दोनों ही तरफ से देखने को मिलता है। तो दोस्तों एक बात तो साफ है कि राहुल गांधी के इन खुलासों से गुजरात लॉबी बुरी तरह से डरी हुई है और यही वजह है कि राहुल को मैनेज करने के लिए बंद कमरे में डेढ़-डेढ़ घंटे की बैठकें राहुल गांधी के साथ की जा रही हैं। आपको जाते-जाते यह भी बताते चलें कि सीआईसी को लेकर के यह जो बैठक हो रही थी और

    इसमें राहुल गांधी ने जो आपत्ति जताई है, वही आपत्ति राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के वक्त भी जताई थी। जिसमें जब ज्ञानेश कुमार का नाम राहुल गांधी के सामने रखा गया था तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी और उन्होंने कहा था कि इस बेंच में सीजीआई क्यों नहीं शामिल है? सीजीआई को शामिल करने की बात भी कही थी और उस वक्त भी उन्होंने डिसेंट नोट लिखकर छोड़ा था। असहमति पत्र

    लिखकर छोड़ा था और इस बार भी कुछ वैसा ही नजारा देखने को मिला है। लेकिन मीटिंग के अंदर काफी कुछ मसालेदार हुआ है जो अब निकल कर सामने आ गया है। फिलहाल इस खबर को लेकर आपकी क्या राय है? इसका जवाब कमेंट सेक्शन में दीजिएगा और गुजरात लॉबी जिस तरीके से राहुल गांधी के अंदाजों से, तेवरों से और खुलासों से घबराई हुई है, उसको लेकर आप क्या सोचते हैं, यह भी कमेंट में बताइएगा।

  • दो भाइयों की कहानी // Life Changing Story

    अन्याय का जवाब आइये जानते है

    इस सच्ची कहानी में

    पूरा राज

    बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में दो भाई रहते थे। मोहन और सोहन दोनों ही बेहद मेहनती थे और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने का सपना देखते थे। गांव में रोजगार के अवसर बहुत कम थे। इसलिए दोनों ने तय किया कि अब उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए शहर जाना होगा। शहर पहुंचकर दोनों

    भाइयों ने मिलकर कालीन बुनाई का काम शुरू किया। छोटा भाई सोहन अच्छे कालीन बुना करता था। वो दिन रात मेहनत करके खूबसूरत कालीन तैयार करता और उसका बड़ा भाई मोहन उन कालीनों को अपने घोड़े पर लादकर शहर के बाजार में बेचकर आता था। शाम को लौटकर मोहन अपनी कमाई थोन के साथ बांटता। धीरे-धीरे उनका काम अच्छा चल निकला और वह दोनों भाई

    खुशी से रहने लगे। लेकिन एक दिन एक ऐसी घटना घटी जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। उस दिन मोहन हमेशा की तरह अपने कालीन बेचकर लौट रहा था। घोड़े की काटी पर उसने एक हल्की सी पोटली बांधी हुई थी जिसमें उसने सोने के सिक्के रखे हुए थे। रास्ते में बाजार से कुछ सामान खरीदते समय एक दुकानदार मोहन के पास आकर बोला, “अरे भाई, मैं

    तुम्हारा घोड़ा खरीदना चाहता हूं। बताओ कितने में बेचोगे?” मोहन कुछ सोच ही रहा था कि दुकानदार ने कहा, “मैं पांच सिक्के दूंगा।” यह सुनकर मोहन अंदर ही अंदर मुस्कुराने लगा। उस समय घोड़े की कीमत सिर्फ एक सिक्का हुआ करती थी और यह दुकानदार पांच सिक्के देने को तैयार था। मोहन ने खुशी-खुशी हामी भर दी और बोला जी बिल्कुल मैं घोड़ा आपको बेचने को

    तैयार हूं। दुकानदार ने तुरंत अपनी जेब से पांच सिक्के निकाले और मोहन के हाथ में रखकर बोला, अब यह पूरा घोड़ा मेरा हुआ। मोहन ने सिक्के लेते हुए कहा, “जी हां, यह पूरा घोड़ा आपका है। मोहन घोड़े की काठी से अपनी पोटली निकालने लगा। लेकिन उसी वक्त दुकानदार ने उसे धक्का देते हुए कहा, नहीं यह पोटली भी अब मेरी है। तुमने पांच सिक्कों के बदले पूरा घोड़ा मुझे बेच दिया है। काटी हो या पोटली यह सब कुछ मेरा है। मोहन हैरान रह गया और उसने कहा, “अरे यह तो

    गलत है। मैंने तुम्हें घोड़ा भेजा है ना कि मेरी पोटली?” लेकिन दुकानदार चालाकी से बोला नहीं तुमने अभी सबके सामने मुझे कहा था कि पूरा घोड़ा तुम्हारा है। अब यह सब मेरी संपत्ति है। आसपास खड़े लोग भी दुकानदार की तरफदारी करने लगे। मोहन लाचार और उदास होकर अपने घर लौट आया। उसने रोते हुए सारी कहानी सोहन को बताई। सोहन ने धैर्यपूर्वक मोहन की बात सुनी और फिर बोला, परेशान मत हो भैया। जैसा उसने हमारे साथ किया, अब हम भी वैसा ही करेंगे।

    कुछ दिनों के बाद सोहन उस दुकानदार की दुकान पर गया। दुकान सचमुच सुंदर थी और पूरी तरह ग्राहकों से भरी हुई थी। सोहन ने दुकानदार से कहा, “अरे भाई, आपकी दुकान तो बहुत अच्छी है। मैं इसे 1000 सोने के सिक्कों में खरीदना चाहता हूं।” दुकानदार यह सुनकर अंदर ही अंदर झूं उठा। उसकी दुकान की असली कीमत सिर्फ 800 सोने की सिक्के थी और कोई उसे 1000 सोने के सिक्के दे रहा था। उसने तुरंत हामी भर दी और

    बोला, “जी हां बिल्कुल। अब यह दुकान आपकी है। सोन ने अपनी जेब से पोटली निकाली और 1000 सिक्के दुकानदार को थमाते हुए बोला, “अब यह पूरी दुकान मेरी है।” दुकानदार बोला, “जी हां बिल्कुल। यह पूरी दुकान आपकी है।” दुकानदार अपनी दुकान के अंदर जाकर अपना सामान समेटने लगा। लेकिन उसी वक्त सोहन ने उसे रोकते हुए कहा, रुको। अब यह सामान

    तुम नहीं ले जा सकते। आपने अभी सबके सामने कहा है कि पूरी दुकान मेरी है। यह सामान भी अब मेरा हो चुका है। दुकानदार गुस्से से लाल हो गया। उसने चिल्लाकर कहा, “यह क्या मजाक है? यह तो मेरी मेहनत की कमाई है।” सोहन ने भी उसी तरह चालाकी की जिस तरह दुकानदार ने मोहन के साथ की थी। उसने आसपास खड़े ग्राहकों से गवाही दिलाई और इस बार

    सब ने सोहन का साथ दिया। अब दुकानदार बेबस होकर रोने लगा। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने समझ लिया कि धोखा देकर कभी भी किसी का भला नहीं होता। जो जैसा करता है उसे वैसा ही फल मिलता है। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में कभी भी किसी के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए। क्योंकि जैसा हम दूसरों के साथ करते हैं, वैसा ही हमारे साथ लौट कर आता है।

    आपका साथ

    आपका ईमान

    फिर मिलते है

    नेस्ट बार

    राधे राधे

    जय हिन्द

    🇮🇳

  • OPPO Mobile High Quality & Premium Model

    अगर आप ऐसा स्मार्टफोन ढूंढ रहे हैं जो ताकत में भी आगे हो और स्टाइल में भी… तो पेश है नया OPPO Premium Series Smartphone—जो हर फीचर में कमाल है!

    Design & Build Quality

    सबसे पहले बात करते हैं इसके डिजाइन की। इसका Premium Glass Body, मजबूती से बना Metal Frame, और शानदार ग्रिप—इसे एक High-Quality फोन बनाते हैं। फोन हाथ में जैसे ही पकड़ेंगे, आपको इसका premium feel तुरंत महसूस होगा।

    RAM & Storage

    परफॉर्मेंस की बात करें तो ये OPPO मोबाइल आता है ✔ 12GB RAM तक ✔ और 256GB / 512GB Storage के ऑप्शन के साथ।

    भारी गेमिंग हो या multitasking… फ्रीजिंग? लैग? गर्म होना? इन सब को ये फोन कहता है— Goodbye!

    Battery & Fast Charging

    अब बात करते हैं पावर की… इसमें मिलता है 5000mAh की मजबूत बैटरी, जो दिन भर का पावर देती है!

    और सबसे खास— इसका SUPER VOOC Fast Charger, सिर्फ कुछ ही मिनटों में फोन को चार्ज कर देता है। यानी जल्दी चले, लंबा चले!

    Hard Camera Quality

    (Camera samples दिखें) Voice Over: “कैमरा इस फोन की असली ताकत है! इसमें है— 📸 108MP Ultra HD Main Camera 📸 Wide Angle Lens 📸 Super Night Mode 📸 4K Video Recording

    Outdoor शूट हो या रात का सीन— हर तस्वीर और वीडियो आती है बिलकुल साफ, शार्प और प्रोफेशनल लेवल की।

    Performance & Strength

    (Screen showing gaming + drop test visuals) Voice Over: “फोन में लगा हुआ Ultra Speed Processor और मजबूत बॉडी इसे देता है extra durability. चाहे गेमिंग हो या heavy apps… ये फोन बिना रुके, बिना रुके—मज़बूती से चलता है।

    Price (Dam)

    (Price text appear on screen) Voice Over: “क्वालिटी जितनी ऊपर— कीमत भी उतनी premium। ये OPPO मोबाइल मार्केट में आता है लगभग — 💰 ₹35,000 से ₹45,000 के प्रीमियम सेगमेंट में।

    लेकिन फीचर्स देख कर आप खुद कहेंगे— ‘कीमत पूरी तरह वाजिब है।

    एक ऐसा फोन जो— ✔ कैमरा में जबरदस्त, ✔ RAM–Storage में powerful, ✔ बैटरी में long lasting, ✔ और मजबूती में top class हो…

    तो OPPO का ये नया प्रीमियम मोबाइल आपके लिए Good hai

  • Dell Laptop High Quality Strong & Premium 512GB SSD या ✔ 1TB SSD का powerful option

    दोस्तों, अगर आप एक ऐसा लैपटॉप ढूंढ रहे हैं जो काम में भी तेज़ चले और मजबूती में भी शानदार हो… तो पेश है नया Dell High-Performance Laptop, बनाया गया खास professionals और students के लिए!

    Design & Build Quality

    सबसे पहले बात करते हैं इसके डिजाइन की… Dell ने इस बार दिया है Strong Metal Body, जो हल्की भी है और मजबूती में No.1 भी। इसका premium look और slim design इसे हर environment के लिए perfect बनाता है—office, study या travel!

    RAM & Multitasking Power

    Performance की बात करें तो ये Dell Laptop आता है ✔ 8GB / 16GB RAM ✔ और Ultra Fast Processing के साथ। भारी software, video editing, coding या multitasking— सब कुछ चलता है बिलकुल smooth, बिना किसी lag के!

    Storage (SSD)

    Storage की बात करें तो इसमें मिलता है ✔ 512GB SSD या ✔ 1TB SSD का powerful option। SSD की वजह से— लैपटॉप 3–4 सेकंड में ऑन हो जाता है, apps बिजली की रफ़्तार से खुलते हैं, और heavy files भी तुरंत load हो जाती हैं!

    Battery Backup

    Dell के इस मॉडल में दिया है ✔ 6–8 घंटे का Powerful Battery Backup। एक बार चार्ज कर लो— पूरे दिन online classes, office work या entertainment आराम से चलता है।

    Camera Quality

    Video calls या online meetings के लिए इसमें है ✔ HD Webcam, जिससे वीडियो आते हैं साफ, bright और natural। Zoom, Google Meet या Teams—सब पर best quality!

    Hard Performance & Durability

    Dell अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है। इसमें है heat protection, solid hinges, और long-life keyboard, जो इसे heavy use के लिए perfect बनाते हैं— work हो, study हो या travel—ये laptop टिकाऊ और भरोसेमंद है।

    Price (Dam)

    अब बात कीमत की… यह Dell Laptop मार्केट में मिल जाता है लगभग— 💰 ₹45,000 से ₹65,000 के बीच, फीचर्स के हिसाब से ये price काफी justified है।

    Ending

    तो दोस्तों, अगर आप चाहते हैं ✔ Strong Body, ✔ Fast SSD Storage, ✔ Powerful RAM, ✔ Long Battery Backup, ✔ और Clear HD Camera वाला Laptop… तो Dell का यह model आपके लिए perfect है!

  • बीरबल का जादुई सुरमा – Birbal Ki Kahani | Akbar Birbal Ki kahani

    अकबर का साला हमेशा से ही बीरबल की जगह लेना चाहता था। अकबर जानते थे कि बीरबल की जगह ले सके ऐसा बुद्धिमान इस संसार में कोई नहीं है। फिर भी जोरू के भाई को वह सीधी ना नहीं बोल सकते थे। ऐसा करके वह अपनी लाडली बेगम की बेरुखी मोल नहीं लेना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने अपने साले साहब को एक कोयले से भरी बोरी दे दी और कहा कि जाओ और इसे हमारे राज्य के सबसे मक्कार और लालची सेठ सेठ

    दमधी लाल को बेच कर दिखाओ। अगर तुम यह काम कर गए तो तुम्हें बीरबल की जगह वजीर बना दूंगा। अकबर की इस अजीब शर्त को सुनकर उनका साला अचंभे में पड़ गया। वह कोयले की बोरी लेकर चला तो गया पर उसे पता था कि वह सेठ किसी की बातों में नहीं आने वाला। ऊपर से वह उल्टा उसे ही छूना लगा देगा। हुआ भी यही। सेठ दमद्दी लाल ने कोयले की बोरी के बदले एक ढेला भी देने से इंकार कर दिया। साला अपना

    सा मुंह लेकर महल वापस लौट आया और अपनी हार स्वीकार कर ली। अब अकबर ने वही काम बीरबल को करने को कहा। बीरबल कुछ सोचे और फिर बोले कि सेठ दमद्दी लाल जैसे मक्कार और लालची सेठ को यह कोयले की बोरी क्या? मैं सिर्फ कोयले का एक टुकद्दा ही 50 सोने के सिक्कों में बेच आऊंगा। यह बोलकर वह तुरंत वहां से रवाना हो गए। सबसे पहले उसने एक दर्जी के पास जाकर एक मखमली कुर्ता खरीदा। हीरे मोती वाली मालाएं गले में डाली। महंगी जूती पहनी और

    कोयले को बारीक सुरमे जैसा पिसवा लिया। फिर उसने पिसे कोयले को एक सुरमे की छोटी चमकदार डिब्बी में भर लिया। इसके बाद बीरबल ने अपना भेष बदल लिया और एक मेहमान घर में रुक कर इश्तहार दे दिया कि बगदाद से बद्े शेख आए हैं जो करिश्मा एक सुरमा बेचते हैं जिसे आंखों में लगाने से मरे हुए पूर्वज दिख जाते हैं और यदि उन्होंने कहीं कोई धनगाधा है तो उसका पता बताते हैं। यह बात शहर में आग की तरह

    फैली। सेठ दमद्दी लाल को भी यह बात पता चली। उसने सोचा जरूर उसके पूर्वजों ने कहीं ना कहीं धन काटा होगा। उसने तुरंत शेख बने बीरबल से संपर्क किया और सुरमे की डिब्बी खरीदने की पेशकश की। शेख ने डिब्बी के 100 सोने के सिक्के मांगे और मोल भाव करते-करते 50 सोने के सिक्कों में बात तय हुई। पर सेठ भी होशियार था। उसने कहा मैं अभी तुरंत यह सुरमा लगाऊंगा। और अगर मुझे मेरे पूर्वज नहीं दिखे तो मैं

    सिक्के वापस ले लूंगा। बीरबल बोला बिल्कुल आप ऐसा कर सकते हैं। चलिए शहर के चौराहे पर चलिए और वहां इसे जांच लीजिए। सुरमे का चमत्कार देखने के लिए भी डाज इकट्ठा हो गई। तब बीरबल ने ऊंची आवाज में कहा यह सेठ अभी यह चमत्कारी सुरमा लगाएंगे और अगर यह उन्हीं की औलाद हैं जिन्हें यह अपना मां-बाप समझते हैं तो इन्हें इनके पूर्वज दिखाई देंगे और गड्डी धन के बारे में बताएंगे। लेकिन अगर आपके मां-बाप में से

    किसी ने भी बेईमानी की होगी और आप उनकी असल औलाद नहीं होंगे तो आपको कुछ भी नहीं दिखेगा। और ऐसा कहते ही बीरबल ने सेठ की आंखों में सुरमा लगा दिया। फिर क्या था? सिर खुजाते हुए सेठ ने आंखें खोली। अब दिखना तो कुछ था नहीं। पर सेठ करे भी तो क्या करें? अपनी इज्जत बचाने के लिए सेठ ने 50 सोने के सिक्के बीरबल के हाथ थमा दिए और मुंह फुलाते हुए आगे बढ़ गए। बीरबल फौरन अकबर के पास पहुंचे और रुपए थमाते हुए सारी कहानी सुना दी। अकबर का

    साला बिना कुछ कहे अपने घर लौट गया और अकबर बीरबल एक दूसरे को देखकर मंदमंद मुस्काने लगे। इस किस्से के बाद फिर कभी अकबर के साले ने बीरबल का स्थान नहीं मांगा।