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Author: Star Daily

  • Nitish की वोटर्स से ऐसी बदसलूकी ? खींच-खींचकर महिलाओं को भगाया…बिहार में गरज रहा सम्राट का बुलडोजर

    नीतीश का गृह विभाग भाजपा के पास जाते ही बिहार में बुलडोजर एक्शन की शुरुआत हो गई है और जिन महिलाओं के दम पर नीतीश कुमार जीतकर मुख्यमंत्री बने उन्हीं महिलाओं पर लाठियां बरसाई जा रही है। आप खुद इस तस्वीर को देखिए। इस तस्वीर में आपको नजर आ रहा होगा कि पुलिस जो है वो लगातार उनके आसपास मौजूद तमाम लोगों पर लाठियां बरसा रही है। इसी दौरान एक कोने में एक महिला खड़ी होती है।

    उसके पास से जैसे ही पुलिसकर्मी गुजरता है, पुलिसकर्मी की नजर उस महिला पर पड़ती है, वह पुलिसकर्मी महिला पर एक डंडा मारता है और फिर उस महिला को धक्का दे देता है। सोशल मीडिया यूज़र्स के मुताबिक जिस महिला को धक्का दिया गया है, वह महिला गर्भवती थी यानी प्रेग्नेंट थी और उसे इस तरीके से पुलिस वाले ने धक्का दे दिया। दोस्तों, संविधान के मुताबिक एक महिला से महिला पुलिसकर्मी ही डील

    करती है। लेकिन यहां पर वैसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा है। यह वही महिलाएं हैं जिन्होंने बिहार चुनाव में बढ़-चढ़कर बंपर वोटिंग की थी। इस आस में कि नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे तो उनको फायदा होगा, महिलाओं को फायदा होगा। लेकिन फायदा क्या हो रहा है आप इन तस्वीरों में देख पा रहे हैं। इसके अलावा और जो तमाम तस्वीरें सामने आई हैं, हम उस पर भी बात कर लेते हैं। उससे पहले आपको बता दें कि यह जो तस्वीरें आप देख रहे हैं, यह जो बुलडोजर एक्शन जिस

    पर हम बात कर रहे हैं, यह बेगुरसराय का बुलडोजर एक्शन है जो कि लोहिया नगर झोपड़पट्टी से जेल तक चलाया गया है। इस बुलडोजर एक्शन के दौरान तमाम महिलाओं पर मेल पुलिसकर्मियों के डंडे बरसाए गए हैं। पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं पर डंडे बरसाए हैं। उन्हें जबरदस्ती हाथ पकड़ कर घसीटा है। हालांकि इस दौरान मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को गालियां भी दी हैं। लेकिन जिस तरीके से पुलिसकर्मी ने एक महिला पर डंडा मारा और बाद में

    उसे धक्का दे दिया। अब यह वीडियो वायरल हो रहा है और इस पर एक्शन लेने की मांग की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ जो और भी तमाम तस्वीरें निकल कर सामने आई हैं आप उसमें देखेंगे तो पुलिसकर्मी तमाम लोगों को पकड़ के घसीटते हुए किसी का बाल किसी का हाथ पकड़ कर घसीटते हुए ले जाते हुए दिख रहे हैं। इस दौरान तमाम जो महिलाएं वहां पर मौजूद हैं, वह पुलिसकर्मियों से गुहार लगा रही हैं ऐसा ना करने की। लेकिन पुलिसकर्मी और नगर निगम के तमाम अधिकारी नहीं सुन रहे हैं। अब इसके पीछे की कहानी क्या है?

    तमाम लोग जो भाजपा के सपोर्टर हैं, वह आ जाएंगे कहने कि अतिक्रमण हटाया जा रहा है। वहां पर जबरन कब्जा किया गया था। तो आपको बता दें कि कहीं पर भी अगर बुलडोजर एक्शन लिया जाता है या फिर इस तरीके की कार्यवाही की जाती है तो उन्हें पहले सूचना दी जाती है, जानकारी दी जाती है। लेकिन वैसा यहां पर बिल्कुल देखने को नहीं मिला। भाजपा की पुलिस वहां पहुंचती है और ताबड़तोड़ एक के बाद एक तमाम जो झोपड़ियां बनी हुई थी उन्हें हटाना शुरू कर देती है। वहां पर रह रहे तमाम लोगों के मुताबिक उन्हें पहले से ना ही

    इस बात की जानकारी थी और ना ही किसी प्रकार का सूचना भी उन्हें मिला था। ठंड के दिनों में उनके सर से छत छीन ली गई। ठंड के दिनों में अब तमाम यह जो परिवार हैं, वह खुले आसमान के नीचे अपनी रात बिताने पर मजबूर हैं। अपने दिन काटने पर मजबूर हैं। तमाम लोगों ने पाईपाई जोड़कर जो अपने घर में अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए चीजें इकट्ठा की थी, रजाई गद्दे का इंतजाम किया था, अपने बच्चों के लिए स्वेटर मोजो का इंतजाम किया था, वह सारी चीजें बुलडोजर एक्शन के साथ मलबे में दबकर रह गई हैं। जब यह

    तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह तस्वीरें इस बात की गवाह हैं कि भाजपा जब सरकार में आती है और उसको सत्ता मजबूत मिल जाती है। उसके नंबर गेम ज्यादा हो जाते हैं। तो इसी तरीके से तानाशाही करती है और जो हमने बिहार की पुलिस को भाजपा की पुलिस बताया वह भी इसलिए क्योंकि मौजूदा समय में बिहार में जो गृह विभाग है वह भाजपा के नेता सम्राट चौधरी के पास है जो कि डिप्टी सीएम भी हैं। पहले यही गृह विभाग जो है नीतीश कुमार के पास हुआ करता था। नीतीश कुमार के कार्यकाल में महिलाओं में इस तरीके से ज्यातियां नहीं

    की जाती थी। लेकिन जैसे ही यह विभाग सम्राट चौधरी के पास आता है, वैसे ही महिलाओं पर इस तरीके से पुलिस लाठियां बरसाने लगती है और जो तमाम नेता हैं, जो जिम्मेदार हैं, जो इस चीज पर जिनको बोलना चाहिए, वो चुप्पी साध लेते हैं। सत्ता पक्ष अब इस वायरल वीडियो पर कोई भी जवाब देने के लिए राजी नहीं है और वह इस वायरल कहानी का जिक्र आते ही बगले झांकने लगते हैं। इस कहानी में तमाम जो

    जानकारियां सामने आ रही हैं उस पर अगर हम बात करें तो लोहिया नगर गुमटी के पास 100 से अधिक झोपड़ अह झोपड़ पट्टी नुमा दुकान और घर को हटाया गया है। इस दौरान सबसे ज्यादा महिलाएं भड़की हैं। महिलाओं का कहना था कि हमें पहले से जानकारी दी जानी चाहिए थी ताकि हम अपना इंतजाम अपने बच्चों का इंतजाम कहीं और कर पाते। प्रशासन महिलाओं का कहना है कि प्रशासन तमाम अधिकारियों के साथ तमाम बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंचता है और घर हटाना

    शुरू कर देता है। इससे उन्हें मौका नहीं मिल पाता अपने घर की सामान अपने बच्चों को सुरक्षित करने का। इस दौरान महिलाओं ने अधिकारियों से झड़प भी की और ऐसा ना करने की भी मांग की। लेकिन अधिकारी वहां पर ज्यादा संख्या में थे। पूरे दलबल के साथ पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। तो उन्होंने वहां मौजूद तमाम लोगों की नहीं सुनी। जो करने आए थे वह करके गए हैं। जानकारी के मुताबिक इसी तरीके से तमाम जगहों पर बुलडोजर एक्शन लिया जा रहा है सम्राट चौधरी के कहने पर

    क्योंकि डिप्टी सीएम होने के साथ-साथ उनके पास गृह विभाग की भी जिम्मेदारी है। अब इसको लेकर के आक्रोश उठने लगा है। विपक्षी दल के जो तमाम नेता हैं उनका कहना यह है कि भाजपा के पास पावर आते ही भाजपा इस तरीके से आम लोगों पर ज्यादतियां करने लगती है। विपक्षी दल के नेता नीतीश कुमार से भी सवाल पूछ रहे हैं और कह रहे हैं कि जिन महिलाओं के खाते में ₹10 ₹1ज़ दिए थे और उन महिलाओं ने

    आपको बंपर वोट किया तो सरकार आने के बाद आपने उन महिलाओं को इस तरीके से उनके जो वोट थे उसके बदले में इनाम दिया है। क्या वोट के बदले डंडा मिलेगा आम जनता को? इस तरीके से भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। फिलहाल यह जो महिला पर पुलिसकर्मी का डंडा बरसाते हुए वीडियो सामने आया है, यह सिर्फ इकलौता ऐसा वीडियो है, जबकि तमाम तस्वीरें और ऐसी ही निकल कर सामने आ रही हैं। जहां पर पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ इसी तरीके से

    ज्यादती की है। उन्हें घसीटने की कोशिश की है और उन पर जबरन लाठी डंडे बरसाने की भी कोशिश की है। और अब इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी तमाम लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। इन तस्वीरों को देखकर आप क्या कहना चाहते हैं? आप क्या सोचते हैं? और जिस तरीके से भाजपा राज में महिलाओं पर ऐसे आक्रमण किए जा रहे हैं, महिलाओं पर ऐसे हमले किए जा रहे हैं, उसको लेकर आपकी क्या राय है? कमेंट सेक्शन में बताइएगा।

  • क्यों तोड़ा अपना Bharat Ratna अवॉर्ड | C.V. Raman Story

    यह कहानी एक ऐसे बच्चे की है जिसने बचपन में टूटी हुई बोतलों में साइंस देखा। एक ऐसे जीनियस की जिसने महज 15 साल की उम्र में ग्रेजुएट होकर टॉप किया और उस वैज्ञानिक की जिसने फिजिक्स में इंडिया को फर्स्ट नोबेल प्राइज जिताया। लेकिन क्यों उसने गुस्से में आकर सरकार से मिले भारत रत्न को तोड़ दिया। आइए जानते हैं फादर ऑफ इंडियन साइंस की कहानी।

    सीवी रमन की कहानी। सीवी रमन का जन्म नवंबर 1888 को तमिलनाडु में हुआ। रमन का परिवार मध्यमवर्गीय था। उनके घर में जरूरत का हर सामान मौजूद था। लेकिन रमन सिर्फ अपने सपनों और किताबों में खोए रहते थे। रमन के पिता कॉलेज में लेक्चरार थे। और रमन बचपन से ही पिताजी की फिजिक्स और मैथ्स की किताबें पढ़ा करते थे। जब दूसरे बच्चे पतंग उड़ाते रमन घर में अपनी पुरानी बोतलें और कांच के टुकड़ों से

    प्रयोग किया करते। उनका मन हमेशा सवालों में उलझा रहता। रोशनी रंग क्यों बदलती है? कांच का टुकड़ा क्यों चमकता है? समुद्र क्यों नीला होता है? किसी को नहीं पता था कि यही सवाल आगे चलकर पूरी दुनिया को बदल देंगे। रमन का दिमाग इतना तेज था कि महज 11 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल की परीक्षा पास कर ली। 16 साल की उम्र में उन्होंने बीए टॉप किया और महज 18 साल की उम्र में एमए में गोल्ड मेडल हासिल किया।

    लेकिन किस्मत उनके खिलाफ थी। उस समय इंडिया में रिसर्च के लिए अच्छे लैब्स नहीं थे। रमन साइंटिस्ट बनना चाहते थे। लेकिन मजबूरन उन्हें सरकारी नौकरी करनी पड़ी। फाइनेंस डिपार्टमेंट में साधारण क्लर्क की नौकरी। इंडिया को नोबेल प्राइज जिताने वाला व्यक्ति कभी सरकारी दफ्तर में फाइल्स पलटता था। लेकिन रमन रुके नहीं। वो लंच के समय बगल वाली लैब में दौड़ते और एक्सपेरिमेंट करते। कई-कई रातें उन्होंने बिना सोए सिर्फ रिसर्च में बिताई हैं। जब रमन की रिसर्च कुछ आगे बढ़ी। उन्होंने अपने पेपर इंग्लैंड के मशहूर अखबार के

    लिए भेजे। लेकिन जवाब आया इंडिया में साइंस यह इंपॉसिबल है। हम पब्लिश नहीं करेंगे। रमन दुखी हुए लेकिन टूटे नहीं। उन्होंने फिर दोबारा लिखा और इतना अच्छा लिखा कि आखिरकार दुनिया ने रमन का नाम देखा। पहली बार किसी इंडियन के रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय अखबार में छपे। रमन हमेशा से नोबेल प्राइज जीतना चाहते थे। 1922 में जब रमन को एक यूनिवर्सिटी के द्वारा अवार्ड दिया गया तो रमन ने अपने भाषण में कहा अगले कुछ सालों में मैं नोबेल प्राइज जीतूंगा। वहां बैठे कई लोगों ने इस पर यकीन नहीं

    किया। लेकिन यह भारत की साइंस के इतिहास में एक मोड़ था। एक दिन जब रमन समुद्र पर जहाज से यात्रा कर रहे थे। उन्होंने देखा कि समुद्र का पानी अलग-अलग रंगों में चमक रहा है। अगर कोई आम इंसान होता तो इस दृश्य को सुंदर कहकर आगे बढ़ जाता। लेकिन रमन की आंखों में फिर सवाल जाग उठे पानी रंग क्यों बदल रहा है? रोशनी ऐसा क्यों करती है? यही सवाल आगे चलकर उनके करियर की दिशा बदलने वाला था। 1921 से लेकर 1929 तक रमन ने रोशनी और उसके रहस्यों

    पर हजारों एक्सपेरिमेंट किए। उनके पास हाईटेक मशीनें नहीं थी। बस कुछ इक्विपमेंट और उनकी अटूट जिज्ञासा। कई एक्सपेरिमेंट बर्बाद हुए। कई बार उन्हें लगा कि वह गलत दिशा में जा रहे हैं। लेकिन आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। फरवरी 1929 को उन्होंने वह खोज की जिसने पूरी दुनिया को बदल दिया। रमन इफेक्ट्स यानी जब रोशनी किसी वस्तु से टकराती है तो वह सिर्फ परावर्तित नहीं होती बल्कि बदल भी जाती है। वो अपनी फ्रीक्वेंसी और रंग बदल सकती है।

    यह डिस्कवरी इतनी महान थी कि 1930 में रमन को मिला नोबेल प्राइज इन फिजिक्स। वो फर्स्ट इंडियन बने जिन्होंने इंडिया में रहकर नोबेल प्राइज जीता। भारत सरकार ने रमन का अच्छा सम्मान किया। लेकिन रमन को सरकार की कुछ साइंस नीतियां अच्छी नहीं लगती थी। आगे चलकर रमन को उस वक्त के प्रधानमंत्री नेहरू से सख्त चिढ़ थी। एक बार उन्होंने नेहरू की किसी पॉलिसी से चिढ़कर अपना भारत रत्न पदक टुकड़े-टुकड़े कर दिया जो उन्हें नेहरू सरकार ने दिया था। एक अन्य

    घटना में यह आता है कि उन्होंने नेहरू की प्रतिमा जमीन पर पटक दी। एक बार नेहरू ने रमन को उनके रिसर्च सेंटर के लिए वित्तीय सहायता की पेशकश की। जिसे रमन ने यह कहते हुए साफ मना कर दिया। मैं यह निश्चित रूप से नहीं चाहता कि यह एक और सरकारी लैब बन जाए। इसके बाद रमन ने इंडिया में कई सेंटर ओपन किए जिसमें इंडियन एकेडमी ऑफ साइंस, रमन रिसर्च इंस्टट्यूट शामिल है। रमन ने पूरी जिंदगी विदेशी नागरिकता या विदेश में काम करने के प्रस्ताव को

    ठुकराया है। रमन कहते थे कि मैं इंडियन हूं और इंडियन की साइंस पर ही हमेशा काम करना चाहता हूं। जब वो अपनी उम्र के आखिरी दौर में थे। 82 साल की उम्र में वो रोज अपने रिसर्च सेंटर जाया करते थे। उनके आखिरी दिनों में उनके कमरे में जो आखिरी चीज मिली वह कोई अवार्ड या मेडल नहीं था बल्कि एक प्रिज्म था जिससे वह रोज रोशनी को गिरते हुए देखते थे। रमन का इंडियन साइंस में जो योगदान है उसे याद करते हुए हर साल 28 फरवरी को पूरे इंडिया में साइंस डे मनाया जाता है।

    क्योंकि इसी दिन इंडिया ने पहला नोबेल प्राइज इन फिजिक्स जीता था। रमन की जिंदगी एक संदेश देती है कि जिसको दुनिया इंपॉसिबल कहे उसे आपकी जिज्ञासा पॉसिबल बना सकती है। मिडिल क्लास घर का लड़का सरकारी नौकरी करते हुए दुनिया को रोशनी का रहस्य बता सकता है तो हम भी कुछ कर सकते हैं।

  • iPhone 5s – दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं उस फोन की जिसने मोबाइल दुनिया में क्रांति ला दी थी… जी हाँ, ये है Apple का दमदार iPhone 5s

    Design & Look

    iPhone 5s अपनी प्रीमियम मेटल बॉडी और हल्के वज़न के लिए आज भी लोगों का फेवरेट है। छोटा, स्टाइलिश और हाथ में पकड़ने में बेहद आरामदायक।

    Display

    इसमें मिलता है 4 इंच का रेटिना डिस्प्ले, जो देता है सुपर क्लियर और ब्राइट विज़ुअल्स… चाहे वीडियो देखें या गेम खेलें, क्वालिटी हमेशा शार्प रहती है।

    Performance

    iPhone 5s में लगा है Apple का पावरफुल A7 चिप, जो उस समय अपने सेगमेंट में सबसे तेज़ प्रोसेसर था। रोज़मर्रा का काम—सोशल मीडिया, फोटो, कॉल—सब स्मूद चलता है।

    Camera

    कैमरा की बात करें तो पीछे मिलता है 8MP iSight कैमरा और सामने 1.2MP का फेसटाइम कैमरा। Natural रंग और साफ फोटो इसकी बड़ी खासियत हैं।

    Features

    iPhone 5s पहला Apple फोन था जिसमें आया था Touch ID… यानी फिंगरप्रिंट अनलॉक! सिक्योरिटी का नया स्तर।

    Battery

    बैटरी छोटी जरूर है, लेकिन iOS का ऑप्टिमाइजेशन इसे दिन भर चलाने में मदद करता है। नॉर्मल यूज़ पर बैटरी लाइफ काफी बढ़िया रहती है।

    Ending

    तो दोस्तों, अगर आपको छोटा, स्टाइलिश और भरोसेमंद फोन चाहिए, तो iPhone 5s आज भी एक क्लासिक चॉइस है!

  • MacBook – HD Quality दोस्तों अगर आप ढूंढ रहे हैं एक ऐसा लैपटॉप जो दिखने में स्टाइलिश हो परफॉर्मेंस में दमदार हो और क्वालिटी में नंबर वन… तो ये है Apple का शानदार MacBook!

    Premium Design

    MacBook का प्रीमियम एल्यूमिनियम बॉडी डिज़ाइन इसे बाकी सभी लैपटॉप से अलग बनाता है। पतला, हल्का और देखने में एकदम प्रोफेशनल — जैसे इसे खास आपके लिए ही बनाया गया हो!

    HD Retina Display

    इसमें मिलता है Apple का फेमस Retina HD Display, जिसमें हर पिक्सल साफ, शार्प और अल्ट्रा-क्लियर दिखता है। वीडियो एडिटिंग हो, फोटो एडिटिंग हो या ऑनलाइन क्लास — सब कुछ HD से भी ज्यादा शानदार!

    Powerful Performance

    MacBook में लगाया गया है Apple का सुपरफास्ट प्रोसेसर — जो आपको देता है स्मूद मल्टीटास्किंग, फास्ट ऐप ओपनिंग और बिल्कुल लैग-फ्री एक्सपीरियंस! एक बार इस्तेमाल कर लिया तो कोई दूसरा लैपटॉप छोटा लगने लगता है।

    Battery Backup

    MacBook की बैटरी लाइफ इसकी सबसे बड़ी ताकत है। एक बार चार्ज करो और घंटों काम करते रहो। चाहे वीडियो एडिटिंग हो या ऑफिस वर्क — पावर कभी खत्म नहीं होती।

    Camera & Sound

    HD वेबकैम और क्लियर माइक्रोफोन वीडियो कॉल को प्रोफेशनल बना देते हैं। और MacBook के स्पीकर्स… भाई, साउंड इतना साफ कि म्यूजिक सुनने का मज़ा दोगुना!

    Security & OS

    MacBook चलता है macOS पर — सुरक्षित, तेज़ और बेहद आसान। Touch ID के साथ आपकी प्राइवेसी रहती है पूरी तरह प्रोटेक्टेड।

    Ending

    तो दोस्तों, अगर आपको चाहिए एक HD क्वालिटी वाला, स्टाइलिश, शक्तिशाली और भरोसेमंद लैपटॉप — तो Apple का MacBook आपके लिए बेस्ट चॉइस है! सुझाव अच्छा लगे तो शेयर करना न भूलें!

  • बीजेपी ने टूटे विधायकों पर ठोका दावा, JDU ने शपथ ग्रहण की तैयारी कर ली! आर-पार..

    भारतीय जनता पार्टी का स्पीकर बनते ही भरे सदन में धमकी देने पर उतर आए नीतीश कुमार अचानक स्पीकर का चुनाव हुआ कैंसिल जेडीयू ने बीजेपी को खुला अल्टीमेटम दिया है तो आखिरकार वही हुआ है जिसका डर था खबरें हैं कि तोड़े गए विधायकों ने जैसे ही जेडीयू का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में

    शामिल होने की तैयारी की है तो हड़कंप मच गया है। तो फिलहाल अमित शाह का ऑपरेशन लोटस एक्टिव होते ही कैसे नीतीश कुमार ने खुली जंग का ऐलान कर दिया है आपको बताएंगे लेकिन खबर में सबसे पहले तोड़े गए विधायकों ने कैसे पलटी मारी है बिग ब्रेकिंग देखिए खबर आप देखिए न्यूज़ 18 की देखिए इसमें लिखा हुआ है कि कांग्रेस के चार विधायक के महागठबंधन की

    बैठक में नहीं पहुंचने पर सियासी कयास जारी कहा जा रहा है कि यह चारों नेता जेडीयू के साथ आने वाले चले हैं। तो खबरें एक तो पहले ही निकल कर सामने आ रही थी कि नीतीश कुमार बिहार में सिंगल लार्जेस्ट पार्टी या फिर कि विधानसभा में नंबर वन पार्टी बनने की तैयारी पूरी कर चुके हैं। लेकिन अब क्या ऐसा हो पाएगा? क्योंकि बीजेपी ने गृह विभाग के बाद स्पीकर पद भी जेडीयू से झटक लिया है। सूत्रों की मानें तो नीतीश

    कुमार भी एकनाथ शिंद की तरह खत्म होने की कगार पर आ गए हैं। ऐसे हालातों में तोड़े गए विधायकों ने भी दल बदल लिया है तो हड़कंप मच गया है। मतलब कल तक जो कांग्रेस के तोड़े गए विधायक जेडीयू में शामिल होने की पूरी तैयारी कर चुके थे, वह अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले हैं। और यह कोई हवाहवाई बात नहीं है। बकायदा बयान भी निकल कर सामने

    आया है कि कैसे रातोंरात खेल पलट गया है। खबर आप देखिए न्यूज़ 24 की। देखिए इसमें लिखा भी हुआ है कि बिहार में कई विपक्षी विधायक एनडीए के संपर्क में बने हुए हैं। वे पीएम मोदी के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं। तो चिराग पासवान ने दावा किया है कि अब तोड़े गए विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व चाहते हैं। मतलब साफ है कि स्पीकर का चुनाव होते ही बिहार सरकार का नेतृत्व भी बदल चुका है। खेल समझिए। पहले तो तोड़े गए

    विधायकों ने खुद दावा किया कि वह जेडीयू के संपर्क में हैं और उनको जेडीयू की तरफ से मंत्री पद ऑफर किया गया है। लेकिन अब रातोंरात पूरा खेल पलट चुका है क्योंकि नीतीश कुमार की कुर्सी खुद सुरक्षित नहीं है तो वह दूसरों को क्या मंत्री बनाएंगे और कितने दिनों तक मंत्री बना पाएंगे सवाल खड़ा होता है। अगर भारतीय जनता पार्टी इसमें कामयाब हो गई स्पीकर बनाने में और उन्होंने पांच सात 10 एमएलए इधर से उधर से तोड़ लिए

    और उन्होंने जाके चिराग पासवान के साथ मिलके एक स्टेबल सरकार बना ली तो फिर नीतीश कुमार के साथ जाने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन इसके लिए मुझे लगता है कि तब तक इंतजार करना होगा जब तक स्पीकर नहीं बन जाते। तो दैनिक भास्कर के वरिष्ठ पत्रकार केपी मलिक ने हमारे चैनल से बातचीत के दौरान पहले ही खुलासा कर दिया था कि कांग्रेस, एआईएमआईएम समेत बसपा और आईपी गुप्ता के विधायक खुद टूटने के लिए तैयार बैठे हैं। लेकिन वो

    स्पीकर के चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। अगर स्पीकर जेडीयू से नहीं बना तो बड़ा उलटफेर हो सकता है। फिलहाल अब वही कुछ होता हुआ नजर भी आ रहा है। जाहिर है कि स्पीकर बीजेपी का है तो बीजेपी के विधायकों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। क्योंकि दल बदलने की स्थिति में स्पीकर की भूमिका काफी से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जेडीयू का विधानसभा में नंबर वन पार्टी बनने का सपना तो दूर की बात है। नीतीश कुमार के विधायक अगर जेडीयू के साथ कायम रह जाएं तो यह भी बड़ी बात होने वाली है।

    क्योंकि भाजपा ने किस तरीके से महाराष्ट्र वाला फार्मूला बिहार में लागू कर दिया है और नीतीश कुमार को ठिकाने लगाने के लिए सम्राट चौधरी ने अमित शाह के साथ मीटिंग को किया है। ये किसी से छुपा हुआ नहीं है। फिलहाल भाजपा के खेल को नीतीश कुमार ने भी भाप लिया है और अचानक से कैबिनेट विस्तार करने का ऐलान कर दिया है तो तहलका मच गया है। मतलब कल तक खबरें थी कि 1 महीने के बाद कैबिनेट का विस्तार होगा। लेकिन अब नीतीश किसी तरह का कोई रिस्क

    लेना नहीं चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी में टूट को बचाने के लिए स्पीकर पद तो छोड़ दिया है लेकिन अब वह समझौता करने की स्थिति में नहीं दिखाई दे रहे हैं। खबरें हैं कि बीजेपी नेता प्रेम कुमार को भी जेडीयू की तरफ से मंत्री पद ऑफर किया गया था। लेकिन भाजपा ने रातोंरात मंत्रियों की सूची ही बदल डाली। खबर भी मौजूद है। खबर आप देख सकते हैं। देखिए इस खबर में लिखा भी हुआ है कि स्पीकर बनते बनते मंत्री बन गए विधायक जी। बिहार

    विधानसभा ने कर दिया खेला। तो स्पीकर के चुनाव के बीच विधानसभा सत्र की सूची में प्रेम कुमार का नाम मंत्री पद के लिए लगभग फाइनल कर दिया गया। रातोंरात सूची भी तैयार की गई। लेकिन जैसे ही यह सूची वायरल हुई, जैसे ही सूची को जारी किया गया, बवाल खड़ा हो गया। दावा यह किया जाने लगा कि प्रेम कुमार का नाम गलती से मंत्रियों की सूची में प्रिंट हो गया है। फिलहाल अगर बिहार की बात की जाए तो बिहार की राजनीति में कुछ भी गलती से नहीं होता है। मतलब

    जब स्पीकर को लेकर भारतीय जनता पार्टी और जेडीयू में तगड़ी खींचतान मची हुई है। उसी बीच भारतीय जनता पार्टी के स्पीकर प्रेम कुमार का नाम मंत्रियों की सूची में शामिल किया जाना कोई गलती नहीं बल्कि सोची समझी रणनीति है सोची समझी साजिश है और कितनी बड़ी यह साजिश है इसके लिए आप खबर देखिए खबर देखिए इसमें लिखा हुआ है कि तो ऐसी कसी जा रही नकेल राजस्व विभाग पर क्यों हुई अचानक टाइट आईएएस की एंट्री तो आपको बता दें कि बिहार में सरकार के गठन के बाद बड़े पैमाने पर

    आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। वैसे भी नीतीश कुमार की हमेशा से राजस्व विभाग पर नजर रहती है। ऐसे हालातों में गृह विभाग के बाद स्पीकर पर जाना नीतीश कुमार पचा नहीं पा रहे हैं। खबरें निकल कर सामने आ रही है कि पहले भी नीतीश कुमार ने अचानक से 800 से ज्यादा अधिकारियों का तबादला किया और अब अधिकारियों के जरिए सरकार पर कंट्रोल स्थापित किया जा रहा है। तो पहले तो सचिवों के जरिए मंत्रालय पर नियंत्रण रखते थे नीतीश कुमार लेकिन अब तो पूरी की पूरी सरकार पर अपना

    नियंत्रण नीतीश कुमार ने मजबूत कर लिया है। जाहिर सी बात है कि अगर अधिकारी नीतीश कुमार के अंडर में होंगे तो अमित शाह चाहकर भी किसी तरह का कोई खेल नहीं कर पाएंगे। आपको बता दें पहले भी नीतीश ने भाजपा को सिर्फ गृह विभाग दिया और अधिकारियों की पोस्टिंग ट्रांसफर की पावर को अपने पास रख लिया और अब उसी पावर का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। मतलब साफ़ है कि अगर बीजेपी ने नीतीश कुमार को हटाकर खुद के दम पर बहुमत जुटाने की कोशिश

    की या फिर कि तोड़े गए विधायकों ने जेडीयू की जगह भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की तैयारी की तो यह खेल अमित शाह की आखिरी गलती साबित होने वाला है। जाहिर है कि पूरा सिस्टम नीतीश के कब्जे में है। ऐसे हालातों में क्या नीतीश कुमार इतनी आसानी से हार मानेंगे? इस सवाल के जवाब में पूरी रिपोर्ट पर आपको क्या लगता है? आखिर क्यों नीतीश कुमार ने स्पीकर पद छोड़कर दूसरे मंत्रालयों पर कब्जा कर लिया है? जो भी आप सोचते हैं इस सवाल के जवाब में हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

  • क्या China में आतंकी हमले, कट्टरपंथी जैसी समस्याएं नहीं हैं? |

    आपको यह बताते हैं कि भारत की तरह चाइना में आतंकवाद की समस्या इतनी गहरी क्यों नहीं है और चाइना में आतंकी घटनाएं ना के बराबर आखिर क्यों होती है? तो सबसे बड़ा कारण यह है कि जिस पाकिस्तान को आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक

    माना जाता है। उस पाकिस्तान को चाइना ने अपने कर्ज से दबाया हुआ है। आज पाकिस्तान का एक भी आतंकी संगठन चाइना के उईगर मुसलमानों की बात नहीं करता। जिन पर चाइना में सबसे ज्यादा जुल्म होते हैं। दूसरा चाइना में आतंकवादी हमले बहुत कम होते हैं क्योंकि चाइना में आतंकवाद के खिलाफ सबसे कठोर

    कानून है। वहां आतंकवाद को लेकर राजनीति नहीं होती है। वहां की कम्युनिस्ट सरकार साफ शब्दों में यह कहती है आतंकवाद को धार्मिक कट्टरपन से जुड़ा हुआ ही माना जाएगा। तीसरा चाइना में आतंकवाद के खिलाफ सबसे मजबूत आंतरिक सुरक्षा और निगरानी तंत्र है। पूरे चाइना में सीसीटीवी कैमरों का ऐसा जाल है कि वहां छोटी से छोटी गतिविधियों की भी निगरानी होती है और लोगों

    का चेहरा देखकर उनका रिकॉर्ड निकाला जा सकता है। इससे लोगों में यह डर रहता है कि अगर वह आतंकवाद की गतिविधियों में शामिल होते हैं तो सरकार उन्हें मरते दम तक जेल में रख सकती है। साल 2015 में चाइना में एक नया कानून आया था जिसके तहत एक ऐसी संस्था बनाई गई थी जो देश भर में आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों संदिग्धों की पहचान करती है और पूरे चाइना में आतंकवाद से जुड़े मामलों में तुरंत कारवाई

    होती है वहां ऐसे मामलों में 10 20 सालों तक जांच नहीं चलती चाइना में सोशल मीडिया पर भी सरकार का पूरा नियंत्रण होता है। भारत में अगर सोशल मीडिया पर आतंकियों ने कोई साजिश रची है तो उसका डाटा हमें कंपनियों से मांगना पड़ता है और यह कंपनियां सरकार को डाटा देने से इंकार भी कर सकती हैं। लेकिन चाइना में ऐसा नहीं है। चाइना में इंटरनेट कंपनियों को आरोपी

    से जुड़ा हुआ सभी डाटा जांच एजेंसियों को फौरन देना होता है और इस वजह से वहां सोशल मीडिया के जरिए आतंक का नेटवर्क खड़ा ही नहीं किया जा सकता। युवाओं का ब्रेन वाश नहीं हो सकता। हालांकि चाइना के मामले में एक बड़ी बात यह है कि वहां होने वाली घटनाओं को सरकार की मंजूरी के बिना मीडिया में रिपोर्ट नहीं किया जा सकता और इस वजह से भी चाइना में होने वाली ज्यादातर घटनाएं दुनिया को पता ही नहीं चल पाती।

  • क्या भगवान श्री कृष्ण पूर्ण परमात्मा है

    kya bhagwan shri krishna purna parmatma hai

    यह एक जटिल प्रश्न है जिस पर अलग-अलग मत हैं। कई परंपराओं में, विशेषकर इस्कॉन जैसी, भगवान श्री कृष्ण को पूर्ण परमात्मा माना जाता है, जबकि अन्य परंपराओं में यह माना जाता है कि पूर्ण परमात्मा कोई और हैं और श्री कृष्ण विष्णु के अवतार हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण को पूर्ण अवतार माना जाता है, जिसका अर्थ है कि वे ईश्वर के पूर्ण रूप हैं, लेकिन यह भी कहा जाता है कि ईश्वर की शक्ति कहीं भी पूर्णतः प्रकट नहीं होती। 

    श्री कृष्ण को पूर्ण परमात्मा मानने वाले विचार

    • भगवद गीता का संदर्भ: कुछ लोग गीता में श्री कृष्ण के कथनों को उद्धृत करते हैं कि वह “मैं ही परमात्मा हूँ”।
    • भगवद पुराण का संदर्भ: कुछ लोग “कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्” (कृष्णास् तु भगवान् स्वयं) उक्ति का उपयोग करते हैं, जिसका अर्थ है कि कृष्ण स्वयं भगवान हैं।
    • इस्कॉन जैसी संस्थाएँ: ये संस्थाएँ श्री कृष्ण को सर्वोच्च भगवान मानती हैं। 

    श्री कृष्ण को पूर्ण परमात्मा न मानने वाले विचार

    • विष्णु के अवतार: कई मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार हैं।
    • अपूर्णता का तर्क: कुछ लोग तर्क देते हैं कि चूँकि उनका जन्म हुआ था, वे पूर्ण परमात्मा नहीं हो सकते क्योंकि वे जन्म और मृत्यु के चक्र में बंधे थे।
    • अन्य देवता: कुछ मतों के अनुसार, पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब हैं और श्री कृष्ण विष्णु के अवतार हैं। 

    विरोधाभास को समझने का एक तरीका

    • प्रकटीकरण और लीला: कुछ लोग मानते हैं कि परमात्मा जन्म नहीं लेते, बल्कि प्रकट होते हैं। श्री कृष्ण का जन्म एक दैवीय लीला (खेल) था, जो उनकी शक्ति को दर्शाता है, न कि उनकी वास्तविक सीमाओं को।
    • मानवता का अनुभव: यह भी माना जाता है कि परमात्मा मानव रूप में आकर मानवता का अनुभव करते हैं और हमें जीवन का सही मार्ग सिखाते हैं। 

    यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह एक गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक विषय है, और अलग-अलग मत और दृष्टिकोण हो सकते हैं।

    कास्ट वादी का परिचय:

    लोगो का कहना है कि उनका जन्म एक यदुवंशी परिवार में हुआ था यह बात उनकी बुआ और स्वयं ने भी कहा था, और लोगो ने उन्हें कई अन गिनत नाम से भी पुकारते थे,

    लेकिन मैं आपको जातिवाद के नाम पर परिचय देना नहीं चाहता हूं क्योंकि भगवान का कोई जाती नहीं होता है वह अटल है, दुख में सुख में जहां श्री कृष्ण भगवान का मन से नाम लो वहां श्री कृष्ण है।

    हे कृष्णा :

    हे नारायण :

    हे वासुदेव :

  • Crime पर रोक लगाने के सुझाव – Real तरीका से यह सलाह निम्न है।

    दोस्तों, बढ़ते अपराध सिर्फ एक खबर नहीं… ये हमारे समाज की सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन अगर हम सब मिलकर चाहें, तो क्राइम को काफी हद तक कम किया जा सकता है!

    1. मजबूत कानून और सख्त सज़ाएँ

    सबसे पहले ज़रूरी है—सख्त कानून और तुरंत कार्रवाई। तेज़ न्याय होगा, तो अपराध करने से पहले हर इंसान दस बार सोचेगा।

    1. CCTV और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

    शहरों–गाँवों में ज्यादा से ज्यादा CCTV कैमरे और स्मार्ट पुलिसिंग से अपराधियों पर आसानी से नज़र रखी जा सकती है।

    3. शिक्षा और जागरूकता

    क्राइम का सबसे बड़ा इलाज है—शिक्षा। जब लोगों को सही और गलत का फर्क पता हो, तो अपराध अपने आप कम होता है।

    4. बेरोजगारी कम करना

    ज्यादातर अपराध मजबूरी से भी होते हैं। अगर युवाओं को काम और ट्रेनिंग मिलेगी, तो वे गलत रास्तों से दूर रहेंगे।

    5. पुलिस–पब्लिक सहयोग

    पुलिस अकेले सब नहीं कर सकती। जब जनता खुद आगे आकर जानकारी देगी, रिपोर्ट करेगी, तभी समाज सुरक्षित बन पाएगा।

    6. नशा और शराब पर नियंत्रण

    अनेक अपराध नशे के कारण होते हैं। जागरूकता और नियंत्रण से इन घटनाओं में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

    अपराध रोकना सरकार का काम ही नहीं… हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर हर नागरिक एक कदम सही दिशा में उठाए, तो कल हमारी आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित होंगी!

    जिम्मेदार बनें, अपराध रोकें।

    धन्यवाद

  • बैटरी वाली साइकिल – दोस्तों, आज हम लेकर आए हैं एक ऐसी साइकिल… जो चलती है बिना थके, बिना पेट्रोल, बिना टेंशन!

    जी हाँ — ये है नई बैटरी वाली इलेक्ट्रिक साइकिल!

    इसमें मिलता है पॉवरफुल Lithium-ion बैटरी, जिसे फुल चार्ज करने में बस 3 से 4 घंटे लगते हैं… और एक बार चार्ज करके आप 40 से 60 किलोमीटर आराम से चला सकते हैं! सबसे बड़ी बात – ये किफायती भी है! न पेट्रोल भराना, न सर्विस का झंझट… बस चार्ज करो और चल पड़ो!

    इसका स्मूद मोटर, 25 km/h की टॉप स्पीड, और पेडल असिस्ट सिस्टम इसे रोजमर्रा के लिए परफेक्ट बनाते हैं—स्कूल हो, ऑफिस हो या रोज की सैर।

    सुरक्षा भी पूरी! आगे-पीछे के डिस्क ब्रेक, LED लाइट और मजबूत टायर इसे बनाते हैं हर रास्ते का बादशाह!

    तो अगर आप भी चाहते हैं एक सस्ती, स्टाइलिश और इको-फ्रेंडली राइड… तो बैटरी वाली ये इलेक्ट्रिक साइकिल आपकी बेस्ट चॉइस हो सकती है!

  • Rishabh Shefali Love Story: शादी पर घटिया कमेंट और ट्रोलिंग, Viral Couple की पूरी कहानी, दोनो कौन ?

    सोशल मीडिया पर इन दिनों ऋषभ और शेफाली की शादी की वीडियो खूब वायरल हो रही है और जैसे ही कोई चीज वायरल होती है प्यार करने वाले भी आ जाते हैं और बिना वजह ट्रोल करने वाले भी। आज हम आपको इस कपल की 11 साल की सच्ची लव स्टोरी और उनके स्ट्रगल और वायरल होने के बाद जो कुछ

    हुआ वो सभी सरल दिल छू लेने वाले अंदाज में बताएंगे। दरअसल यह कहानी ऋषभ और शेफाली की है। दोनों ने 11 साल पहले एक साथ कॉलेज में पढ़ते हुए। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर कविश अजीज के मुताबिक यह कहानी है ऋषभ और शेफाली की। दोनों ने 11 साल पहले एक साथ कॉलेज में पढ़ते हुए दोस्ती की थी। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली और दोनों ने एक दूसरे को तब

    से लेकर आज तक कभी अकेला नहीं छोड़ा। शेफाली के लिए ऋषभ सिर्फ एक बॉयफ्रेंड नहीं बल्कि उसका सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम था और ऋषभ के लिए शेफाली उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। ऋषभ ने इस शादी के लिए 11 साल का इंतजार किया है। एक लंबे इंतजार के बाद ऋषभ की नौकरी लगी और फिर शेफाली से शादी हो गई। ऋषभ की जिंदगी आसान नहीं थी। बचपन से ही उसकी स्किन कॉम्प्लेक्शन को लेकर लोग कमेंट

    करते थे। काला है हीरो जैसा नहीं लगता। ऐसे ताने उसे रोज सुनने पड़ते थे। लेकिन शेफाली वो हर बार उसके सामने खड़ी हो जाती और कहती मुझे तेरी रंगत नहीं तेरी नियत पसंद है। यही भरोसा था जिसने ऋषभ को मजबूत बनाया। वक्त गुजर गया, संघर्ष बढ़ता गया लेकिन उसने मेहनत नहीं छोड़ी। आज वही ऋषभ एक हैंडसम सैलरी वाली नौकरी करता है और 11 साल के

    लंबे इंतजार के बाद दोनों ने शादी कर ली। लेकिन खुशी के इन पलों के बीच सोशल मीडिया ने फिर वह पुरानी आदत दिखाई। उनकी शादी की वीडियोस वायरल हुई और लोग फिर वही घटिया कमेंट करने लगे। किसी ने रंग पर तंज कसा, किसी ने उनके जोड़े को अनमैच्ड कहा। तो किसी ने ब्यूटी वर्सेस बीस्ट जैसी लाइनें लिख दी। यह सब पढ़कर ऋषभ टूट गया। वो लड़का जिसने 11 साल मेहनत की जो अपनी शादी में सिर्फ खुश होना

    चाहता था। उसे फिर से उसी बात पर ताना मिला जिसने उसे बचपन से परेशान किया था। जाहिर है ऋषभ इस बार भी ट्रोलिंग से बेहद परेशान हुआ होगा। हालांकि सोशल मीडिया सिर्फ ट्र्स नहीं करता। कभी-कभी दिल भी दिखाता है। बहुत सारे लोग आ गए और बोले यह सच्चा प्यार है। लोगों ने ऋषभ और शेफाली की लव स्टोरी की तारीफ करते हुए कई सारे रिएक्शन दिए हैं। एक यूजर ने लिखा शी इज हैप्पी एंड वेरी हैप्पी। मैगज़ ने लिखा यह हैंडसम है। इफ यू थिंक हैंडसम

    दिखना सिर्फ स्किन वाइट और ब्लैक होना होता है। तो आपको बहुत कुछ समझने की जरूरत है। मेजर्स ने लिखा आई डोंट थिंक पीपल आर डूइंग गुड बाय ट्रोलिंग देम। मेजर्स ने लिखा सारी लड़कियां गोल्डर्स नहीं होती। एंड नॉट एवरी मैन इज हैंडसम। सो बेसिकली आपने उसको एक पुअर और खराब लड़का दिखाया क्योंकि उसके पास कोई गवर्नमेंट जॉब नहीं और उसका कलर भी ठीक नहीं है। टेक्निकली यू आर अ गोल्ड डिगर एंड रेसिस्ट एज वेल। ने लिखा गोरी चमड़ी नहीं तो हैंडसम

    नहीं। वाह बहन व्हाट स्टैंडर्ड एंड एजुकेशन शुड हैव जस्ट स्क्रोल्ड पास्ट। विकार्जन ने लिखा लोगों ने ऋषभ को उसके रंग पर ट्रोल किया जैसे उनकी खुद की जिंदगी 4K में चल रही हो। 11 साल का प्यार, मुश्किल दिनों का साथ और अब शादी लेकिन इंटरनेट आंटियां अंकल्स को बस बिल्टर चाहिए। सच्ची बात शेफाली ने रंग नहीं इंसान चुना। बाकी ट्रोलर्स अपना अकाउंट ही प्राइवेट कर लें तो बेहतर है। एक और ने लिखा आजकल किसी भी

    इंसान के आलोचक ज्यादा है। जब इंसान अपनी मेहनत और धैर्य से कुछ हासिल करता है तो जलनखोर लोग आ जाते हैं उसकी आलोचना करने। बाकी भाई को दिली मुबारकबाद। तो ऋषभ और शेफाली की कहानी ये सिखाती है कि प्यार में रंग नहीं देखा जाता। खूबसूरती चेहरे की नहीं दिल की होती है और सबसे बड़ी बात जो साथी आपके मुश्किल समय में साथ खड़ा होता है वही आपका असली जीवन साथी होता है। अगर आपको ऐसी सच्ची कहानी पसंद है तो कमेंट करके जरूर लिखें।