Star Daily

Author: Star Daily

  • एक हाथ गया, पर हिम्मत नहीं टूटी | Motivate Stories of Károly Takács Hindi

    साल था 1938 यह कहानी है कैरली नाम के एक आदमी की। कैरली हंगरियन आर्मी में एक अच्छा सैनिक था। लेकिन उसकी पहचान सिर्फ एक सैनिक के रूप में नहीं थी। वो उस देश का सबसे अच्छा शूटर था। उसने अपने देश की हर नेशनल चैंपियनशिप जीत रखी थी। लोगों को

    पूरा यकीन था कि आने वाले ओलंपिक में गोल्ड मेडल सिर्फ और सिर्फ कैरली को ही मिलेगा। कैरली का सपना साफ था। मुझे अपने हाथ को दुनिया का सबसे अच्छा शूटिंग हैंड बनाना है। दिन रात बस यही मंदिर था और बेहतर बनाना है हर दिन हर पल। और वो बन चुका था दुनिया का सबसे अच्छा निशाने लगाने वाला शूटर।

    लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 1938 में एक दिन आर्मी ट्रेनिंग कैंप के दौरान एक हादसा हुआ। कैरली के हाथ में एक हैंड ग्रेनेड ब्लास्ट हो गया और उसी हाथ में ब्लास्ट हुआ जिससे वह गोल्ड मेडल जीतने वाला था। उसका दाया हाथ जो उसका सपना था, उसकी

    पहचान थी, अब वह नहीं रहा। सोचिए एक ही पल में सब कुछ बर्बाद हो गया। सालों की मेहनत, उसका सपना, उसकी उम्मीद सब मिट्टी में मिल गया। कई लोग सोचते कि अब उसकी जिंदगी खत्म हो गई कि अब वो आदमी टूट गया होगा। लेकिन जो कैरली ने किया वो इतिहास बन गया। उसने उस हाथ पर फोकस

    नहीं किया जो चला गया था। बल्कि उस पर फोकस किया जो अब भी उसके पास था। उसका लेफ्ट हैंड वो हाथ जिससे वह लिख भी नहीं सकता था जिससे उसे कुछ भी काम करने की आदत नहीं थी लेकिन उसने मन बना लिया था। अगर दाया हाथ चला गया तो क्या हुआ? अब मैं अपने लेफ्ट हैंड को दुनिया का सबसे अच्छा शूटिंग हैंड बनाऊंगा। एक महीने तक हॉस्पिटल में इलाज चलता रहा। लेकिन जैसे ही वह ठीक हुआ उसने एक भी दिन गवाए बिना फिर से ट्रेनिंग शुरू कर दी। हर दिन हर पल वो

    अपने लेफ्ट हैंड से निशाना लगाने की प्रैक्टिस करता रहा। 1939 में जब नेशनल चैंपियनशिप हुई तो सारे शूटर वहां पहुंचे। सबने देखा कि वहां कैरली भी है। तो हर किसी को लगा कि वो सिर्फ देखने आया होगा। शायद अपने पुराने साथियों को सपोर्ट करने और उन्होंने कैरली से कहा कैरली तुम एक अच्छे इंसान हो। इतना सब होने के बाद भी तुम यहां हमें हौसला देने आए हो। यह बहुत बड़ी बात है। लेकिन वो मुस्कुराया और बोला, “मैं यहां तुम्हारा हौसला बढ़ाने नहीं आया हूं। मैं यहां तुम्हारे साथ

    मुकाबला करने आया हूं। सभी हैरान रह गए। उस देश के बाकी खिलाड़ी अपने बेस्ट हैंड से खेल रहे थे। लेकिन सिर्फ अकेला कैरली अपने ओनली हैंड से खेल रहा था। लेकिन जब नतीजे आए तो जीत उसी की हुई लेफ्ट हैंड वाले कैरली की। हर कोई हैरान हुआ। लेकिन कैरली यहीं नहीं रुका। अब उसका लक्ष्य था 1940 के ओलंपिक। लेकिन उसी वक्त सेकंड वर्ल्ड वॉर हो गई और ओलंपिक रद्द कर दिए गए। उसने हार नहीं मानी और इंतजार किया। अब उसका

    लक्ष्य था 4 साल बाद होने वाले ओलंपिक। दिन रात वो मेहनत करता रहा। हर दिन प्रैक्टिस करता रहा। लेकिन जब ओलंपिक का समय आया तो वह भी कैंसिल हो गए। सब लोगों ने कैरली से कहा कि अब तुम्हारी उम्र बीत चुकी है। अब तुम यह सपना यहीं छोड़ दो। लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने अपना सारा ध्यान 1948 के ओलंपिक पर केंद्रित किया। अब वो 38 का हो चुका था। युवा शूटरों के बीच मुकाबला करना मुश्किल था। लेकिन कैरली की डिक्शनरी में मुश्किल शब्द तो है ही नहीं।

    1948 के लंदन ओलंपिक में दुनिया के सबसे अच्छे शूटर अपने बेस्ट हैंड से खेल रहे थे और वो कैरली सिर्फ अपने एक हाथ से और जब नतीजा आया तो गोल्ड मेडल गया कैरली को। उसका सपना आज पूरा हो चुका था। लेकिन वो यहीं नहीं रुका। अगली बार होने वाले 1952 के ओलंपिक में उसने दोबारा हिस्सा लिया और वहां क्या हुआ? फिर से जीत हुई कैरली की। उसने एक और गोल्ड मेडल जीता और इतिहास में पहला व्यक्ति बना जिसने लगातार दो

    ओलंपिक गोल्ड मेडल जीते। वो भी एक हाथ से शूटिंग करके। हर हारने वाला व्यक्ति अपनी असफलता की एक लंबी लिस्ट बनाता है। मैं इसलिए नहीं कर पाया। मेरे पास यह नहीं था या वक्त नहीं था। लेकिन हर जीतने वाले के पास सिर्फ एक वजह होती है। मुझे करना है। कैरली की कहानी से हम सीख सकते हैं कि बहाने बंद करो और एक्शन शुरू करो। क्योंकि

    अगर एक आदमी एक हाथ के बिना दुनिया का बेस्ट शूटर बन सकता है तो तुम्हें रोकने वाला कोई नहीं है सिवाय तुम्हारे खुद के। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको यह दूसरी कहानी भी सुननी चाहिए।

  • आत्म विश्वास ने बचाई जिंदगी – Power of Self Confidence

    अगर आप अपनी जिंदगी में कुछ हासिल करना चाहते हैं तो एक चीज है जो जरूर आपको अपने अंदर पैदा करनी होगी और वह है आत्मविश्वास। आत्मविश्वास से भरा इंसान वो सब कुछ कर दिखाता है जो किसी और इंसान के लिए असंभव होता है। आइए एक अच्छी

    कहानी के माध्यम से आत्मविश्वास की अद्भुत शक्ति को पहचानते हैं। यह कहानी है दो छोटे बच्चों की जो एक मामूली से गांव में रहते थे। एक बच्चा था 11 साल का और दूसरा था सिर्फ 8 साल का। दोनों एक दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे। ऐसा कहा जाता था जैसे वह दोनों दो शरीर में एक जान हो। दोनों हर वक्त एक साथ रहते साथ खेलते, साथ खाना खाते और साथ

    ही हंसते। कभी-कभी तो लगता जैसे दोनों एक ही मां की दो संताने हो। लेकिन वो दोनों दोस्त यह नहीं जानते थे कि उनके साथ क्या होने वाला है। एक दिन वो दोनों खेलतेखेलते गांव से कुछ दूर निकल गए। दोपहर का वक्त था। सूरज सिर पर था। खेलतेखेलते वह दोनों बच्चे गांव के पुराने कुएं के पास पहुंच गए। कुआं बहुत ही पुराना था लेकिन वह ज्यादा गहरा नहीं था।

    खेलतेखेलते अचानक एक हादसा हो गया। वो बड़ा बच्चा जो 11 साल का था फिसल गया और सीधा कुएं में गिर पड़ा। वो घबराकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था। कुएं के पानी में हाथ-पांव मारते हुए वो डूबने लगा। अब वहां और कोई नहीं था। ना कोई बड़ा आदमी ना कोई मदद करने वाला। सिर्फ वो छोटा सात साल का बच्चा। उसने चारों तरफ देखा। किसी को आवाज दी पर कोई

    जवाब नहीं मिला। फिर उसकी नजर पड़ी पास ही एक लोहे की बाल्टी पर जिसमें एक रस्सी बंधी हुई थी। उस सात साल के बच्चे ने एक भी सेकंड नहीं गवाया। वो भाग कर गया। उसने बाल्टी उठाई और उस बाल्टी को नीचे कुएं में फेंक दी और अपने दोस्त की तरफ कहा ले पकड़ जल्दी पकड़ ले। बड़ा बच्चा बाल्टी पकड़ लेता है। और अब शुरू होती है असली लड़ाई। 7 साल के बच्चे और असंभव के बीच वो छोटा

    बच्चा पूरी शक्ति से बाल्टी को ऊपर खींचता है। उसके नन्हे हाथ दर्द से कांप रहे होते हैं। सांसे तेज चल रही होती है। लेकिन वो रुक नहीं रहा था। खींचता रहा खींचता रहा। इतनी देर के बाद आखिरकार उसने अपने दोस्त को कुएं से बाहर निकाल लिया। दोनों जमीन पर गिर पड़े। भीगे हुए लेकिन जिंदा। दोनों बच्चे गले लगकर रोने लगे। खुश भी थे और हल्का डर भी गए थे। उन्हें लगा अब तो घर जाकर बहुत डांट पड़ेगी।

    लेकिन जब वह दोनों गांव लौटे और सबको बताया तो किसी ने विश्वास ही नहीं किया। लोगों ने कहा अरे कैसे हो सकता है? इतना छोटा सात साल का बच्चा और वो किसी को ऊपर खींच ले असंभव है। सभी को लगता था कि यह बच्चे कोई बहाना बना रहे हैं। उस वक्त गांव के सबसे समझदार और बूढ़े व्यक्ति थे रहीम चाचा। सब लोग उनके पास पहुंचे और बोले रहीम चाचा आप बताइए क्या यह सच हो सकता है? रहीम चाचा ने पूरी कहानी सुनी और दोनों बच्चों की तरफ मुस्कुरा कर देखा। फिर बोले बिल्कुल हो सकता है। गांव वाले हैरान रह गए और बोले लेकिन कैसे इस बच्चे में इतनी

    ताकत आई कहां से? रहीम चाचा ने गहरी सांस ली और फिर बोले देखो सवाल यह नहीं है कि उसने यह कैसे किया? सवाल यह है कि उसने यह क्यों किया? सब हैरान रह गए। रहीम चाचा बोले उस वक्त वहां कोई नहीं था जो उसे यह कहे कि तू नहीं कर सकता। कोई नहीं था जो उसे डराए या रोक दे। यहां तक कि वह यह खुद भी नहीं सोच रहा था। उसको बस अपने दोस्त को बचाना था और उसने वही किया। रहीम चाचा आगे बोले जब इंसान के अंदर

    आत्मविश्वास होता है तो वह कुछ भी कर सकता है। हमारी हदें बाहर के लोग नहीं बनाते हम अपने आप भी बनाते हैं। जिस दिन हम यह मान लेते हैं कि हम नहीं कर सकते उसी दिन हम हार जाते हैं। उस दिन उस बच्चे ने ना सिर्फ अपने दोस्त को बचाया बल्कि उस गांव को एक सबक भी सिखाया। अगर तुम अपने आप पर विश्वास रखते हो तो असंभव भी संभव बन जाता है।

  • जब अर्जुन बिना रथ के युद्ध कर सकते है, श्रीराम और लक्ष्मण भी बिना रथ के युद्ध कर सकते है, तो सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर कर्ण को क्या हो गया था कि वो लड़ना बन्द करके पहिये को निकालने में लग गये?

    बहुत ही उचित प्रश्न है।

    सबसे पहले ये समझिए कि रथ क्या होता है?

    रथ सुनकर हमको TV में दिखाए गए रथ ही दिमाग मे आते हैं जो पैसे बचाने के चक्कर मे बैलगाड़ी की तरह बना दिये जाते हैं।

    मेरा अनुमान है कि रथ भी 2-3 तरह के होते होंगे

    1. तेज गति से चलने वाले रथ जो एक यात्री के लिए बनते होंगे। ये आकार में छोटे होते थे। कोई सुख सुविधा नही होती थी। छोटी दूरी के लिए इस्तेमाल होते होंगे।

    2. यात्री रथ- मान लीजिए द्रौपदी अपने मायके जा रही हो तो क्या वो पूरे समय पीछे खड़े रहती होगी जैसा TV में दिखाते हैं। कई दिनों की यात्रा होती थी तो कोई भी आराम पसन्द करेगा !! उनके लिए थोड़ा बड़ा रथ होता होगा जिसमें बैठने, सोने की जगह और खाने पीने का सामान भी रखा जाता होगा।

    3. युद्ध रथ- ये रथ बहुत बड़ा नही रख सकते क्योंकि तेजी से भी चलने की ज़रूरत है। पर भारी मात्रा में तीर, गदा, भाले इत्यादि भी रखना पड़ेगा। बल्कि मुझे तो लगता है कि खास योद्धाओं के लिए

    कुछ जड़ी-बूटी (फर्स्ट एड किट) या वैद्य को भी रथ में रखा जाता होगा। ये रथ इतने भी खुले नही होते थे जितना tv में दिखाते हैं, योद्धा जितना ढका रहे उतना अच्छा।

    ट्रेनिंग या प्रशिक्षण क्या होता है? इसमें आप हर तरह की स्थितियों का अभ्यास करते है। सबसे बुरा क्या हो सकता है उसके लिए खुद को तैयार करते हैं। जैसे कमांडो ट्रेनिंग में सांप खाना तक सिखाते हैं, बिना हथियार के लड़ना सिखाते हैं।

    क्या आपको लगता है कि अर्जुन, भीम, दुर्योधन, कर्ण, भीष्म जैसे योद्धाओं को जब युद्ध का प्रशिक्षण मिला होगा तब इनको बिना रथ के युद्ध करना नही सिखाया गया होगा? सारथि की मृत्यु होने पर खुद ही मुहँ से लगाम पकड़कर रथ चलाते हुए युद्ध करना भी सिखाते थे।

    इसलिए मुझे तो कर्ण के बिना रथ के युद्ध करने को इतना महत्व देना ही बकवास लगता है।

    जब घोष यात्रा में गन्धर्वो ने दुर्योधन को पकड़ लिया तो अर्जुन और भीम गंधर्वों को हराया था तब इनके पास कोई रथ नही थे, राम-लक्ष्मण ने लगभग पूरा युद्ध बिना रथ के लड़ा था जबकि रावण के हर योद्धा के पास रथ होते थे।

    बिना रथ के लड़ना एक disadvantage ज़रूर है पर महारथी, अतिरथी ऐसे ही नही बनते थे। जब कर्ण ने बिना रथ के युद्ध कर रहे अभिमन्यु पर दया नही की तो उस पर क्यों दया की जाए ??

    ये सब कर्ण प्रेमियों के मनगढ़ंत तर्क सामने आते रहते हैं जिसमे एक घटिया व्यक्ति को हीरो बनाने की कोशिश की जाती है। एक साहब तो शिवाजी सावंत को सच्चा और वेद व्यास को झूठा बता चुके हैं।

  • महाभारत मे कुंती के कितने पुत्र थे  // कुन्ती के चार बेटा था // Kunti ke Kitne Putra the love

    महाभारत में कुंती के चार पुत्र थेः कर्ण, युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव। हालाँकि, युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन पांडु से उनके विवाह के बाद उनके पुत्र थे,

    जबकि कर्ण का जन्म विवाह से पहले ही हो गया था और उन्हें छोड़ दिया गया था। नकुल और सहदेव कुंती की सौतेली माद्री के पुत्र थे, लेकिन कुंती ने उनकी भी देखभाल की थी।

    कर्णः कुंती ने विवाह से पहले ऋषि दुर्वासा के मंत्र का उपयोग करके सूर्य देव को आमंत्रित किया और कर्ण को जन्म दिया।

    युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनः ये कुंती के पति पांडु से उनके विवाह के बाद के पुत्र थे।

    नकुल और सहदेवः ये माद्री के पुत्र थे, लेकिन कुंती ने उनकी भी परवरिश की थी।

    नियम अनुसार कुंती के विवाह से पहले एक पुत्र थे, विवाह के बाद तीन पुत्र हुआ,

    और कुंती के सौतेली माद्री के दो पुत्र था,

  • डगर है मुश्किल कठिन सफ़र है | New Nirgun Bhajan | Dagar Hai Mushkil Kathin Safar Hai | Nirgun​ Bhajan love

    डगर है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है। डगर है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है। जो सोएगा बस वही खोएगा। जो सोएगा बस वही खोएगा। ये बात उसको पता नहीं है। नगर है मुश्किल कठिन सफर है। मगर

    मुसाफिर जगह नहीं है। नगर है मुश्किल कठिन सफर है। मगर मुसाफिर जगह नहीं है। [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] लगेंगे फल जब किसी वृक्ष में वो पेड़ झुक जाएंगे स्वत ही लगेंगे फल जब किसी वृक्ष में वो पेड़ झुक जाएंगे स्वत है ही अकड़ तने की बता रही है अकड़ तने की बता रही है अभी फल इसमें लगा नहीं है डगर है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है डगर है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है। [संगीत] जो खानदानी रईस होते मिजाज रखते हैं नरमा अपना

    [संगीत] जो खानदानी रईस होते मिजाज रखते हैं नरमा अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है। तुम्हारा लहजा बता रहा है। तुम्हारी दौलत नईनई है। डगर है मुश्किल कठिन सफर है। मगर मुसाफिर जगह नहीं है। अगर है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है। [प्रशंसा] [संगीत] जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा किया के बैठे हो पहली शफ में जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा किया के बैठे हो पहली शफ में अभी से उड़ने लगे हवा में अभी से उड़ने लगे हवा में अभी ये शोहरत नईनई है डगर है

    मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है अगर है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर फिर जगह नहीं है। [संगीत] डगर है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है। जग है मुश्किल कठिन सफर है मगर मुसाफिर जगह नहीं है जो सोएगा बस वही खोएगा जो सोएगा बस वही खोएगा ये बात उसको पता नहीं है गदर है मुश्किल कठिन सफर है मगर अगर मुसाफिर जगह नहीं है।

    Story Kahani Hindi

  • शिलाई मशीन का लाभ उठाना चाहते हो तो यह फॉर्म जरूर भरे

    शिलाई मशीन का लाभ उठाना चाहते हो तो यह फॉर्म जरूर भरे

    यदि आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आप किस प्रकार सिलाई मशीन योजना का लाभ उठा सकते हैं तो आज हम आपको फ्री सिलाई मशीन योजना के बारे में बताएंगे इस योजना के लाभ एवं विशेषताएं क्या हैं इसका उद्देश्य

    पात्रता आवश्यक दस्तावेज आपके पास क्या-

    क्या होने चाहिए फ्री सिलाई मशीन योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया आदि के बारे में आपको पूरी जानकारी हम इस वीडियो में बताने जा रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा देश के गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए फ्री सिलाई मशीन योजना का शुभारंभ किया गया है ताकि महिलाएं घर बैठे सिलाई का काम करके अपने परिवार का पालन पोषण कर सके और

    आत्मनिर्भर बने इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में 50000 से अधिक महिलाओं को मु मुफत सिलाई मशीन का लाभ प्राप्त होगा फ्री सिलाई मशीन योजना का उद्देश्य क्या है यह आपको बता दें आपको बता दें कि सरकार द्वारा फ्री सिलाई मशीन योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य यही है कि देश की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को आत्मनिर्भर

    बनाना है और इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा सभी गरीब जरूरतमंद महिलाओं को मुफ्त में सिलाई मशीन उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वह घर पर ही अपना रोजगार शुरू कर सके इससे स्वर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही साथ महिलाएं भी काम करने के लिए प्रेरित होंगी तो फ्री सिलाई मशीन योजना के लिए क्या पात्रता होनी चाहिए आप उसका

    लाभ कैसे उठा सकते हैं आपको बता दें कि फ्री सिलाई मशीन जो है उसका लाभ प्राप्त करने के लिए जो लाभार्थी है अ महिला पहले तो भारतीय होनी चाहिए आयु सीमा की बात कर ले तो आवेदन करने वाली जो महिला है उसकी आयु 20 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए और इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिला के पति की आय जो है वह 12000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए साथ ही साथ इस योजना का लाभ केवल देश की आर्थिक रूप से कमजोर

    महिलाओं को ही प्राप्त होगा देश की विधवा एवं विकलांग महिलाएं भी इस योजना में आवेदन करने के लिए पात्र होंगी आपको बता दें कि मुफ्त सिलाई मशीन योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज क्या-क्या होने चाहिए तो इस योजना में आवेदन करने के लिए लाभार्थी महिला के पास सभी दस्तावेज जो मैं आपको बताने जा रही हूं वह होना बेहद जरूरी है और अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो

    आपके पास आधार कार्ड होना चाहिए पहचान पहचान पत्र जो व है वो होना चाहिए आय प्रमाण पत्र आयु प्रमाण पत्र साथ ही साथ पासपोर्ट साइज फोटो होना चाहिए मोबाइल नंबर यदि महिला विधवा है तो उसका निराश्रित विधवा प्रमाण पत्र होना चाहिए और विकलांगता प्रमाण पत्र यदि महिला विकलांग है तो होना ही चाहिए तो आपको यह बता दें कि फ्री सिलाई मशीन योजना जो है रजिस्ट्रेशन

    फॉर्म वह आपको डाउनलोड करना होगा और उसके लिए आपको वेबसाइट प भी जाना होगा देश की इच्छुक महिलाएं जो इस योजना के तहत आवेदन करना चाहती हैं उन्हें सबसे पहले फ्री सिलाई मशीन योजना रजिस्ट्रेशन फॉर्म डाउनलोड करना होगा पंजीकरण फॉर्म डाउनलोड करने के लिए जो है आवेदक को

    भारत सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा वहां पर आपको तमाम तरीके की जानकारी मिल जाएगी तो महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए सरकार द्वारा यह एक अच्छा कदम उठाया गया है और इस योजना के माध्यम से आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं को काफी राहत मिलेगी !!

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  • क्या दोस्तो आपने कभी सोचा है कि औरत को सबसे ज्यादा मजा कब आता है? Love

    क्या महिलाओं को भी वैसे ही आनंद की अनुभूति होती है जैसे पुरुषों को? क्या उनके लिए भी सेक्स, रोमांस और इमोशंस उतने ही गहरे होते हैं? आज की इस वीडियो में हम इसी पर विस्तार से बात करेंगे। एकदम सरल भाषा में वैज्ञानिक और भावनात्मक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए। तो चलिए शुरू करते हैं। महिलाएं

    शारीरिक रूप से तो संवेदनशील होती ही हैं, लेकिन उनकी भावनात्मक दुनिया और भी गहरी होती है। औरत के लिए मजा सिर्फ शरीर से नहीं मन से भी जुड़ा होता है। जब कोई उसे समझता है, उसकी इज्जत करता है, तो वह खुद को खास महसूस करती है। जब वह प्यार महसूस करती है, तभी वह पूरी तरह से खुल पाती है। उसके लिए मानसिक संतुलन और भावनात्मक सुरक्षा सबसे जरूरी होती है।

    महिलाओं को सेक्स या शारीरिक संबंध का आनंद तब आता है जब वह मानसिक रूप से उस रिश्ते में सहज महसूस करती हैं। बहुत सी लड़कियों के लिए पहली बार का अनुभव बहुत खास होता है। लेकिन जरूरी नहीं कि वह हमेशा सुखद ही हो। अगर साथी ने समझदारी, धैर्य और प्यार से उसे संभाला हो, तो यह अनुभव उसके लिए जीवन भर की याद बन सकता है। लेकिन अगर जबरदस्ती हो या उसे

    मानसिक रूप से तैयार ना किया गया हो तो यह एक डरावना अनुभव बन सकता है। महिलाओं के लिए पहली बार का आनंद मानसिक स्थिति और रिश्ते की गहराई पर निर्भर करता है। अब सवाल आता है आखिर औरत को सबसे ज्यादा मजा कब आता है? जब उसे प्यार महसूस होता है जब वह खुद को अपने पार्टनर के साथ सुरक्षित और सम्मानित महसूस करती है। फोर प्ले के दौरान महिलाएं शारीरिक क्रिया से पहले की रोमांटिक बातों, स्पर्श और आलिंगन से

    ज्यादा जुड़ती हैं। फोर प्ले उन्हें उत्तेजित करता है और यही समय उनके लिए सबसे मजेदार हो सकता है। जब पार्टनर उसके मूड का ध्यान रखता है। सिर्फ अपनी खुशी का नहीं बल्कि महिला की खुशी का भी ख्याल रखना एक समझदार पुरुष की निशानी है। ऑर्गेज्म के समय अगर महिला को मानसिक और शारीरिक रूप से सही तरीके से उत्तेजित किया जाए, तो वह चरम सुख यानी ऑर्गेज़्म तक पहुंच सकती है। यही वह समय होता है जब औरत को सबसे

    गहरा मजा आता है। महिलाओं में इच्छा धीरे-धीरे जागती है। अगर उसका पार्टनर उसे समय दे, प्यार दे और उसकी तारीफ करे, तो उसकी भावनाएं सक्रिय होती हैं। अच्छी बातों, रोमांटिक माहौल और आत्मीयता से महिला उत्तेजित होती हैं। कुछ महिलाओं को साड़ी या सुंदर कपड़ों में खुद को देखकर भी अच्छा महसूस होता है। यानी महिलाओं की इच्छा सिर्फ फिजिकल टच से नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव से भी उत्पन्न होती है। अब यह भी जानना जरूरी है कि औरत को

    कब मजा नहीं आता। जब वह मानसिक रूप से तनाव में होती है। जब उसकी मर्जी के बिना कुछ किया जाता है। जब उसे सिर्फ उपयोग की वस्तु समझा जाता है। जब पार्टनर उसकी फीलिंग्स का सम्मान नहीं करता। जब जल्दीबाजी होती है और महिला को तैयार होने का समय नहीं दिया जाता। ऐसे में वह मजा नहीं बल्कि दर्द और मानसिक पीड़ा महसूस करती है। महिलाओं के शरीर के कई हिस्से संवेदनशील होते हैं। होंठ, गर्दन, कान, ब्रेस्ट, जांघों के बीच का क्षेत्र, प्राइवेट पार्ट्स, पीठ के निचले हिस्से इन हिस्सों को प्यार और कोमलता से छूने पर महिलाएं उत्तेजित महसूस करती हैं और उन्हें आनंद की अनुभूति होती है।

    महिलाओं को शारीरिक संबंध से ज्यादा भावनात्मक लगाव की जरूरत होती है। वह चाहती हैं कि कोई उन्हें समझे, उनकी बात सुने, उन्हें इज्जत दे और उन्हें स्पेशल फील करवाए। जब यह सब चीजें मिलती हैं, तभी वह खुद को उस व्यक्ति के साथ पूरी तरह से खुला और सुरक्षित महसूस करती हैं और तभी वह असली मजा ले पाती हैं। वैज्ञानिक रिसर्च से भी पता चला है कि महिलाओं को उत्तेजना तक पहुंचने में पुरुषों से ज्यादा समय लगता है। एक औसत पुरुष 3 से 5 मिनट में चरम सुख तक पहुंच जाता है। जबकि महिला को 15 से 20 मिनट लग सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि पुरुष धैर्य

    और समझदारी से काम लें। जब एक औरत को खुद पर भरोसा होता है तब उसे मजा लेना और भी आसान हो जाता है। अगर वह अपने शरीर को लेकर सहज है, अगर वह अपने पार्टनर के साथ खुलकर बात कर सकती है, अगर वह जानती है कि उसे क्या अच्छा लगता है, तो उसका अनुभव और भी खास हो जाता है। यह बहुत बड़ी गलतफहमी है कि महिलाएं सेक्स का

    मजा नहीं चाहती। वो भी चाहती हैं, लेकिन एक सही समय, सही साथी और सही माहौल में। उनकी इच्छाएं भी गहरी होती हैं। बस वह उन्हें खुलकर कह नहीं पाती। हमारा समाज लंबे समय तक महिलाओं की इच्छाओं और आनंद की बातों को दबाता रहा है। औरत अगर अपनी इच्छाओं की बात करती है तो उसे बेशर्म या

    बदचलन कहा जाता है। जबकि पुरुषों को उसी चीज के लिए मर्द माना जाता है। यह दोहरा मापदंड ही सबसे बड़ी वजह है कि

    महिलाएं खुलकर अपनी फीलिंग्स नहीं बता पाती। कई महिलाएं अपनी शादी के सालों बाद भी यह नहीं कह पाती कि उन्हें क्या पसंद है। वह सिर्फ अपने पति को खुश करने में लगी रहती हैं। खुद को कभी महत्व नहीं देती। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। महिलाएं पढ़ लिख रही हैं। आत्मनिर्भर हो रही हैं और अपने शरीर व इच्छाओं को भी समझ रही हैं। कई बार

    महिलाएं खुद भी नहीं जानती कि उन्हें क्या अच्छा लगता है। क्योंकि उन्होंने कभी उस पर ध्यान ही नहीं दिया। लेकिन अगर पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत हो जैसे कि क्या तुम्हें यह अच्छा लगता है? तुम्हें किस समय ज्यादा अच्छा लगता है? क्या मैं कुछ बदलूं तो महिला ना सिर्फ मानसिक रूप से खुलती है बल्कि

    उसका अनुभव भी बेहतर होता है। यह संवाद ही रिश्ते में एक नया रंग भरता है। जब महिला खुलकर अपनी पसंद नापसंद बताती है तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और मजा भी कई गुना बढ़ जाता है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो शेयर जरूर करें।

  • महिला रोजगार 10 हजार पैसा अब कब आयेगा // मुख्यमंत्री योजना लाभ 10 हजार // #2025 #news #india #bihar

    नमस्कार दोस्तों आज के इस वीडियो में बात करने वाले जो महिला रोजगार योजना के 10,000 के बारे में जो बात किया गया था वह तो 75 लाख महिलाओं के खाते में चला गया लेकिन अभी जो पैसा बाकी रह गया वह बोला था अक्टूबर आने के लिए अक्टूबर में और कब देगा किन तारीख को देगा और किन-किन डेट को मिलेगा सारा कुछ आज के इस वीडियो में बताने वाला

    हूं। चलिए सबसे पहले मैं इस वीडियो को स्टार्ट करता हूं। तो चलिए मैं सबसे पहले यहां पे एक वेबसाइट पर आया हूं और वेबसाइट पर देखिए नीचे की तरफ थोड़ा हम स्क्रॉल करके आपके सामने लाइव बताता हूं। देखिए यहां पर लिखा है कि अक्टूबर में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का पैसा कब आएगा? देखिए यहां पर लिखा है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत किस्तों में लाभार्थी के खाते में पैसा भेजा जा रहा है। जो 26 सितंबर को 75 लाख महिलाओं के खाते में पैसा भेजा जा चुका है। आज 3 अक्टूबर को 25 लाख महिलाओं के खाते में पैसा भेजा जाएगा। यहां पर समझ

    रहे हैं कि आज 3 अक्टूबर को बोल रहा है कि 75 लाख महिलाओं के खाते में जाएगा। लेकिन और यहां पर देखिए आगे क्या लिखा है। यहां पर लिखा है कि इसके बाद 6 अक्टूबर मतलब इसके बाद बोला है कि अब 6 अक्टूबर को फिर बाकी जो रह जाएगा और फिर आपको 17 अक्टूबर को और 24 अक्टूबर को और यहां पर 31 अक्टूबर को खाते में पैसा भेजा जाएगा और जो मतलब पूरा अब एक बार नहीं भेजा जाएगा। आप थोड़ा-थोड़ा कर कर के कर करके कर कर के इस सब मतलब पांच छ डेट में आपको मतलब पूरा अक्टूबर इसी तरह बिता देगा। जब तक इलेक्शन जब इलेक्शन आ जाएगा तब तक सारे महिलाओं के खाते में पैसा भी आ जाएगा और इलेक्शन के पहले ही पैसा क्यों दिया जा रहा है

    आपको तो पता ही होगा वो वो तो कहने वाली बात ही नहीं है तो अब हर 10,000 जो बाकी है जी इन डेट को आपको दिया जाएगा यहां पर देखिए और कुछ क्या लिखा है जैसे कितने बजे आएंगे मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना यहां पर भी देखिए माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के कर्म कमलों द्वारा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना अंतर्गत 25 लाख महिलाओं को लाभुकों द्वारा क्या मतलब कि आपको 10,000 प्रति लाभु की दर से 2500 करोड़ की राशि का अंतर है। मतलब यहां पर देखिए इतना करोड़ का खर्चा हो रहा है दोस्तों। यह 3 अक्टूबर को यानी लमसम कि 10:00 बजे के बाद लोग बोल रहा है कि भेजने के लिए देखिए क्या होता है। और यहां पर भी दोस्तों आई यहां लाइव है

    कि जो इतने डेट को आपको यहां पर डेट जो लिखा है आपको 6 अक्टूबर 17 अक्टूबर 24 अक्टूबर 31 अक्टूबर को बाकी जो पैसा रहेगा ये थोड़ा-थोड़ा कर करके सारे डेट को पैसा दिया जाएगा और इलेक्शन से पहले पूरा पैसा आपको बांट ही देना है ताकि इलेक्शन में किसी प्रकार का दिक्कत ना हो। तो सो दोस्तों आप तो आप जो डेट का चिंता कर रहे थे कि पैसा बाकी रहेगा कब मिलने वाला है और किस वजह से पैसा भी दिया जा रहा है आपको तो सारा चीज पता ही होगा तो

    शेयर जरूर कीजिएगा नेक्स्ट न्यूज के साथ फिर मिलते है तब तक के लिए।

    Thankyou

  • लड़की अपने अन्दर घुसवाने के लिए त्यार कब होता है

    आज हम ऐसे विषय पर बात करेंगे, जो बहुत सारे कपल्स के लिए बहुत खास होता है। वह है महिला की योनि को चाटना या ओरल सेक्स। बहुत से लोग इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते लेकिन सच्चाई यह है कि बहुत सी महिलाएं और पुरुष इसे पसंद भी करते हैं और यह उनके सेक्स लाइफ को और बेहतर बना सकता है। तो चलिए जानते हैं कि लड़की को

    योनि चूसवाना अच्छा क्यों लगता है। पुरुष ऐसा क्यों करते हैं? इसके क्या फायदे हैं? और क्या बातें ध्यान में रखनी चाहिए। लड़की को योनि चूसवाना अच्छा क्यों लगता है? एक सबसे पहले समझिए कि महिला की योनि के अंदर और बाहर बहुत सारी नर्व्स होती हैं। क्लिटोरिस यानी भक्षिष्णिका सबसे ज्यादा सेंसिटिव हिस्सा होता है। जब पुरुष प्यार से योनि को चाटते हैं तो वहां की नर्व्स एक्टिव होती हैं और महिला

    को गुदगुदी के साथ-साथ बहुत ज्यादा सुख मिलता है। दो योनि को चाटना सिर्फ सेक्स क्रिया नहीं यह महिला के लिए इमोशनल कनेक्शन भी बनाता है। जब कोई पुरुष बिना जल्दी किए धीरे-धीरे योनि को चाटता है, तो महिला को महसूस होता है कि पार्टनर उसे पूरा प्यार दे रहा है। उसका विश्वास बढ़ता है और वह ज्यादा खुलकर अपने पार्टनर के साथ सेक्स का आनंद ले पाती है। तीन कई बार महिलाएं इंटरकोर्स यानी पेनिट्रेशन से ऑर्गेनिज्म नहीं पा पाती। ऐसे में ओरल सेक्स यानी योनि चाटना

    उनको जल्दी ऑर्गेनिज्म तक पहुंचा सकता है। क्लिटोरिस को सीधा और हल्का-हल्का छूना बहुत प्रभावी तरीका होता है। पुरुष क्यों लड़की की योनि चूसते हैं? एक बहुत से पुरुषों के लिए योनि को चाटना अपने पार्टनर को खुश करने का तरीका है। उन्हें इससे यह एहसास होता है कि वह अपनी महिला को पूरी तरह से संतुष्ट कर रहे हैं। दो कई पुरुषों को योनि की खुशबू और उसका स्वाद पसंद आता है। यह नेचुरल चीज है और यह एक गहरा इंटिमेट मोमेंट बन जाता है। तीन ओरल सेक्स कपल्स के बीच प्यार बढ़ाता है। यह सिर्फ फिजिकल नहीं इमोशनल भी होता है। पुरुष को यह एहसास

    होता है कि उसकी महिला पूरी तरह संतुष्ट है तो उसके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होती है। फायदे क्या हैं? महिला को जल्दी ऑर्गेज मिल सकता है। कपल्स के बीच विश्वास और प्यार बढ़ता है। शरीर का तनाव कम होता है। मूड अच्छा होता है। दोनों पार्टनर एक दूसरे के शरीर को और अच्छे से समझ पाते हैं। क्या सावधानियां रखनी चाहिए? एक साफ सफाई बहुत जरूरी है। सेक्स से पहले दोनों को अच्छे से नहाना या प्राइवेट पार्ट्स धो लेना चाहिए। दो अगर किसी को ओरल सेक्स से इनफेक्शन का डर हो तो हमेशा साफ और हेल्दी रखें। अगर महिला को कोई इंफेक्शन है तो उस समय

    ओरल सेक्स नहीं करना चाहिए। तीन दांतों का इस्तेमाल बहुत संभलकर करना चाहिए। ज्यादा काटना या खरोचना दर्द दे सकता है। चार महिलाएं भी अपनी योनि की सफाई का खास ख्याल रखें। जरूरत से ज्यादा खुशबूदार प्रोडक्ट्स यूज ना करें क्योंकि नेचुरल खुशबू ही सही होती है। योनि चाटने का सही तरीका क्या होता है? एक जल्दबाजी ना करें। धीरे-धीरे शुरू करें। पहले किस फिर लैंगिक अंगों तक जाएं। दो क्लिटोरिस को हल्के से छुएं। धीरे-धीरे चांटें। बहुत जोर ना लगाएं क्योंकि वह हिस्सा बहुत सेंसिटिव होता है। तीन बीच-बीच में जीभ से

    अलग-अलग पैटर्न बनाएं। जैसे सर्कुलर मूवमेंट, ऊपर नीचे या हल्के-हल्के चूसना। चार पार्टनर से पूछते रहें कि उसे क्या पसंद आ रहा है। हर लड़की की पसंद अलग होती है। इसलिए कम्युनिकेशन जरूरी है। कुछ जरूरी बातें कपल्स को ध्यान रखनी चाहिए। जबरदस्ती ना करें। अगर महिला को पसंद ना हो तो क्या करें? नहीं तो उसे मजबूर ना करें। सेक्स में विश्वास और सहमति बहुत जरूरी है। आपस में बात करते रहें। इससे कोई गलतफहमी नहीं होगी। अगर महिला को दर्द हो तो तुरंत रुक जाएं। फोर प्ले को लंबा करें। सीधे योनि चाटने पर ना आए। पहले किस गले लगाना सहलाना जरूरी

    है। लोगों के आम सवाल और उनके जवाब एक। क्या योनि चाटने से कोई बीमारी फैल सकती है?अगर पार्टनर को एसटीडी या किसी इंफेक्शन की प्रॉब्लम है तो हां, बीमारी फैल सकती है। इसीलिए साफ सफाई और हेल्थ चेकअप जरूरी है। दो क्या सभी महिलाएं योनि चूसवाना पसंद करती हैं? हर महिला की पसंद अलग होती है। कुछ महिलाओं को बहुत अच्छा लगता है तो कुछ को अच्छा नहीं भी लग सकता। इसलिए उनकी सहमति जरूरी है। तीन क्या पुरुष को इससे नुकसान होता है? अगर साफ सफाई और हेल्थ प्रॉपर है तो कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन अगर कोई

    इनफेक्शन है तो सावधान रहें। चार क्या इससे रिलेशन मजबूत होता है? हां, ओरल सेक्स से कपल्स के बीच इंटिमेसी बढ़ती है और रिलेशन मजबूत होता है। सेक्स में आपसी समझ सबसे जरूरी याद रखें। सेक्स कोई जबरदस्ती या सिर्फ शारीरिक क्रिया नहीं है। यह आपसी प्यार, विश्वास और खुशी का तरीका है।

    इसलिए हमेशा अपने पार्टनर से खुलकर बात करें। उनकी सहमति लें और उन्हें खुशी दें। दोस्तों, उम्मीद है आपको इस कहानी से बहुत सारी जानकारी मिली होगी। अगर आपके मन में कोई सवाल हो तो हमें कमेंट में जरूर बताए फिर मिलेंगे एक नई जानकारी के साथ। धन्यवाद।