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Author: Star Daily

  • Supreme Court CJI BR Gavai ने कौन सा फैसला बदला, साथी जज नाराज हो गए? 

    आगामी 23 नवंबर को रिटायर हो रहे मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने सरकार के पक्ष में एक ऐसा फैसला दे दिया जिसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश को पलटना पड़ा। इस कारण उनके साथ जज असहमति भी दिखाते हुए नजर आए। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई के अपने उस ऐतिहासिक आदेश को वापस ले लिया जिसने देश भर में कई

    सार्वजनिक परियोजनाओं को कथित तौर पर ध्वस्तकरण के खतरे में डाल दिया। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने दो एक के बहुमत से यह फैसला सुनाया। यह रिव्यू उस पुराने आदेश के खिलाफ थी जिसमें कहा गया था कि किसी भी निर्माण को जारी रखने या मंजूरी देने से

    पहले पर्यावरण अनुमति अनिवार्य है और पोस्ट फैक्टो क्लीयरेंस यानी निर्माण शुरू होने के बाद मिली मंजूरी को अवैध माना गया था। इस आदेश की वजह से देश भर में करीब ₹00 करोड़ की चल रही परियोजनाएं रुक गई थी। जिनमें ओडसा का एआईआईएमएस अस्पताल, ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट और कई राष्ट्रीय महत्व के ढांचे शामिल हैं। बहुमत का फैसला

    सीजीआई गवाई और जस्टिस विनोद चंद्रन ने दिया। सीजीआई ने 84 पन्नों में लिखा कि 16 मई का आदेश व्यावहारिक रूप से लागू होने योग्य नहीं था। इसका असर देश के विकास पर प्रतिकूल पड़ता और बड़ी संख्या में सार्वजनिक ढांचे ढहाने पड़ जाते। मोहम्मद ने कहा कि पोस्ट फैक्टो क्लीयरेंस को पूरी तरह अवैध करार देना अत्यधिक कठोर था क्योंकि पर्यावरण को नुकसान का आकलन, क्षतिपूर्ति और

    सुधारात्मक उपायों का विकल्प भी मौजूद है। उनका मानना है कि ऐसे आदेश से राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में अनावश्यक अवरोध पैदा होते और सरकार के पास उन्हें नियमित करने का कोई विकल्प नहीं बचता। अदालत केंद्र के द्वारा पेश उस सूची पर भी गौर करती हुई नजर आई जिसमें बताया गया कि कई अहम परियोजनाएं सिर्फ इस आदेश की वजह से

    खतरे में थी। लेकिन सबसे बड़ी बात तब हुई जब जस्टिस उज्जवल भुया का मत असहमति का रहा। उन्होंने अपने 97 पन्नों का डिसेंटिंग जजमेंट लिखा और कहा कि यह फैसला पर्यावरण न्यायशास्त्र को पीछे धकेलने वाला कदम है। जस्टिस भूिया ने कहा कि प्रिकॉशनरी प्रिंसिपल पर्यावरण कानून का आधार स्तंभ है। पहले सावधानी बाद में सुधार। उनके अनुसार पोस्ट फैक्टो क्लीयरेंस की अनुमति देने से

    सरकार को गलत प्रथाओं का बढ़ावा देने का लाइसेंस मिल जाता है और पर्यावरण को अकरणीय क्षति हो सकती है। उन्होंने बहुमत के फैसले को इनोसेंट एक्सप्रेशन ऑफ ओपिनियन कहा यानी ऐसा मत जिसने पर्यावरण संरक्षण के मूल सिद्धांतों को नजरअंदाज किया है। बेंच के तीसरे जज जस्टिस विनोद चंद्रन ने भी अलग से सहमति लिखी। उन्होंने कहा कि

    डिसेंट लोकतांत्रिक न्यायिक व्यवस्था की आत्मा है लेकिन कानूनी सिद्धांतों के दायरे में रहकर होना चाहिए। उनके अनुसार 16 मई का आदेश पर्यावरण संरक्षण की चिंता में तो था लेकिन उसने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत उपलब्ध वैधानिक व्यवस्थाओं और सरकार को मिली शक्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उन्होंने रिव्यू को उचित, अनावश्यक और

    समायोजित बताया। इस फैसले के बाद देश भर में रुकी हुई परियोजनाओं को राहत मिल गई और सरकार अब कोस्ट फैक्टो क्लीयरेंस को उचित आकलन और सुधारात्मक उपायों के साथ जारी रख सकेगी। लेकिन जस्टिस भुया के कड़े डिसेंट ने यह भी साफ कर दिया कि आने वाले समय में पर्यावरण बनाम विकास की बहस और तीखी होने वाली है।

  • एक खिलाडी कैसे बना God of Cricket | Sachin Tendulkar Story

    साल था 1989। इंडिया पाकिस्तान के एक मैच के दौरान जब पाकिस्तान के तेज गेंदबाजों ने मैच को इंडिया से छीन ही लिया था तब बैटिंग करने आया एक 16 साल का लड़का और शुरुआत की बॉल पर ही अपनी नाक तुड़वा बैठा। पिच पर डॉक्टर्स आए और उस बच्चे से

    कहने लगे कि चलो तुम जख्मी हो चुके हो। अब तुम्हें आराम करना होगा। लेकिन उस बच्चे ने जो कहा वो इतिहास में दर्ज हो गया। मैं खेलेगा। इतनी सी उम्र में जिसके अंदर क्रिकेट को लेकर ऐसा जज्बा हो वही बन सकता है भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे अच्छा बैट्समैन

    सचिन तेंदुलकर। सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई के एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता एक लेखक थे और उनकी मां एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करती थी। सचिन बचपन से ही बहुत शरारती थे। स्कूल में पढ़ाई लिखाई से ज्यादा वो खेलकूद में दिलचस्पी

    लिया करते थे। कभी अपनी बॉल से किसी के घर का कांच तोड़ दिया तो कभी किसी की दीवार गंदी कर दी। लेकिन सचिन की जिंदगी का असली मोड़ उस वक्त आया जब उनके बड़े भाई अजीत ने उन्हें क्रिकेट खेलते देखा। शायद उन्होंने सचिन के अंदर छुपे हुनर को पहचाना

    और वह सचिन को शिवाजी पार्क ले गए। जहां कोच रमाकांत आचरेकर नेट्स लगवाया करते थे। आचरेकर ने पहली ही बार सचिन की आंखों में वह चमक देख ली। वो जुनून जो किसी भी खिलाड़ी को महान बना सकता है। उन्होंने सचिन से कहा अगर तू दिल से खेलेगा तो एक दिन देश का नाम रोशन कर सकता है।

    और उस वक्त सचिन ने मान लिया कि अब से क्रिकेट ही उनकी जिंदगी है। उस दिन से उनकी सुबह शुरू होती बल्ले से और रात खत्म होती बल्लेबाज बनने के सपने से। धूप में झुलसते, बारिश में फिसलते, क्रिकेट पिच पर गिरते लेकिन कभी रुकते नहीं। कई बार सचिन ट्रेन छूटने के डर से स्कूल का बैग तक छोड़ देते

    लेकिन कभी प्रैक्टिस मिस नहीं करते और इसी तरह सचिन की बैटिंग और बेहतरीन होती गई और उनका इंडियन टीम में सिलेक्शन हो गया और फिर आया साल 1989 जब सिर्फ 16 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ अपना डेब्यू किया। उनके सामने थे वसीम अकरम, इमरान खान और वकार यूनुस जैसे गेंदबाज। हर बॉल जैसे आग उगल रही थी। लेकिन उस नन्हे से चेहरे में एक

    आत्मविश्वास था और उस मैच में बुरी तरह घायल होने के बाद भी 16 साल के बच्चे ने उस हारे हुए मैच को ड्रॉ करा कर इंडिया को बचाया। धीरे-धीरे यह बच्चा बढ़ता गया और दुनिया झुकती गई। उसका हर शॉट एक जवाब था। हर रन एक अलग कहानी थी। वो सिर्फ बल्लेबाज नहीं था। वो इंडिया के लिए एक उम्मीद बन गया था। 1990 में एक सीरीज से लौटते हुए

    एयरपोर्ट पर सचिन की मुलाकात हुई अंजलि से और यहीं से सचिन को अपनी जीवन साथी मिल गई। 1995 में सचिन ने अंजलि से शादी की। 1998 का साल आया और सचिन बन गए शारजा के रेगिस्तान का सम्राट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी डेजर्ट स्टॉर्म इनिंग्स आज भी इतिहास में दर्ज है। रेत उड़ रही थी। आसमान से बिजली गिर रही थी। लेकिन उस वक्त सचिन की बैटिंग ने तूफान को भी मात दे दी थी।

    उन्होंने अकेले अपने दम पर इंडिया को जीत दिलाई और दुनिया ने कहा यह सिर्फ एक बैट्समैन नहीं है। यह क्रिकेट का चमत्कार है। लेकिन सचिन की जिंदगी हमेशा आसान नहीं थी। 2000 के दशक की शुरुआत में उन्हें लगातार इंजरीज होती गई। कभी बैक पेन, कभी टेनिस एल्बो। कई लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अब उनका समय खत्म हो गया। लेकिन सचिन जानते थे कि अब उनके और

    मेहनत करने का समय आ गया है। वो लौटे और ऐसा लौटे कि इतिहास लिख दिया। 2010 में उन्होंने वो किया जो किसी ने नहीं किया था। वन डे में डबल सेंचुरी लगाने वाले फर्स्ट क्रिकेटर बने। पूरा इंडिया झूम उठा और पूरा क्रिकेट इतिहास बदल गया और फिर आया 2011 वर्ल्ड कप। हर खिलाड़ी की आंखों में एक ही सपना था। सचिन के लिए वर्ल्ड कप। मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम सचिन के नारों से गूंज उठा।

    इंडिया ने वर्ल्ड कप जीता और सचिन की आंखों में वह आंसू थे जो एक सदी की मेहनत का प्रतीक थे। सचिन ने 24 इयर्स तक क्रिकेट खेला। 200 टेस्ट, 100 सेंचुरी, 34,000 प्लस रंस। लेकिन असली रन उन्होंने लोगों के दिलों में बनाए। जब उन्होंने वानखेड़े स्टेडियम में आखिरी बार अपना बल्ला घुमाया तो पूरा इंडिया रो पड़ा। उन्होंने अपना सिर झुका कर

    कहा, “मेरा सपना सिर्फ मेरा नहीं था। यह पूरे इंडिया का सपना था।” रिटायरमेंट के बाद भी सचिन रुके नहीं। वह आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं। समाज सेवा करते हैं और अपने काम से सिखाते हैं कि टैलेंट ईश्वर देता है। लेकिन महानता मेहनत से बनती है। सचिन तेंदुलकर सिर्फ एक नाम नहीं एक युग है।

    उन्होंने हमें सिखाया कद छोटा होना कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन तुम्हारा सपना और तुम्हारा विश्वास बड़ा होना चाहिए।

  • Chandrayaan 1 में क्या ये हुआ था चाँद पर |

    चाँद पर पानी की खोज | Chandrayaan-1 Moon

    चंद्रयान वन भारत का पहला मून मिशन था और इस मिशन से चांद पर पानी के मोलस्कुलस का पता चला था। चंद्रयान मिशन के मून इंपैक्ट प्रोब ने चांद की मिट्टी में पानी और हाइड्रोक्सिल्स के मोल स्केलेस ढूंढे थे जो

    बताते हैं कि चांद पर थोड़ा पानी मौजूद है। यह डिस्कवरी भविष्य में किसी मिशन के लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट हो सकता है क्योंकि पानी से ऑक्सीजन और फ्यूल बनाकर एस्ट्रोनॉट चांद पर ज्यादा दिन तक रह सकते

  • Tejashwi Yadav ने मुख्यमंत्री बनने पर Nitish Kumar को दी बधाई

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं और इस कड़ी में उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। लेकिन एक बधाई जिस पर सबकी नजर थी कि आखिर तेजस्वी यादव क्या कुछ कहेंगे। तो नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने पर तेजस्वी

    यादव ने उन्हें बधाई दी है और खास अंदाज में बधाई संदेश भी लिखा। तेजस्वी यादव ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई। मंत्री परिषद के सदस्य के रूप में भी शपथ लेने वाले बिहार सरकार के सभी मंत्रियों को हार्दिक

    शुभकामनाएं। आशा है नई सरकार जिम्मेदारी पूर्ण लोगों की आशाओं और अपेक्षाओं पर खरा उतर अपने वादों एवं घोषणाओं को पूरा करेगी तथा बिहार वासियों के जीवन में सकारात्मक व गुणात्मक परिवर्तन लाएगी। तेजस्वी यादव का यह बयान तब सामने आया है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके सारे मंत्री शपथ ले

    चुके हैं। आपको बता दें कि रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ली। इसमें 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली जिसमें बीजेपी के 14 और जेडीयू के आठ मंत्री शामिल हैं। नए मंत्रियों में एक मुस्लिम, तीन महिलाएं एवं तीन नए विधायक को भी जगह दी गई है।

    आपको बता दें कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी मंत्री पद की शपथ ली और बतौर डिप्टी सीएम दोनों रिपीट हुए। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री शामिल हुए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य

    प्रदेश के मोहन यादव, राजस्थान के भजन लाल, गुजरात के भूपेंद्र पटेल समेत कई बड़े नेता मंच पर मौजूद रहे। लेकिन नीतीश कुमार को तेजस्वी यादव ने जिस अंदाज में बधाई दी है, इसकी भी खूब तारीफ हो रही है। आपको बता दें कि तेजस्वी यादव की पार्टी का प्रदर्शन इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में बेहद ही

    खराब रहा। पार्टी 143 सीटों पर लड़कर महज 25 सीटों पर सिमट गई और पूरी की पूरी महागठबंधन मात्र 35 सीटों पर सिमटती दिखी। लेकिन तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी है और बधाई संदेश भी लिखा है। बहरहाल तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी है। यह एक औपचारिक

    प्रक्रिया भी है क्योंकि नेता विपक्ष की भूमिका में एक बार फिर से तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के सामने बिहार विधानसभा में होंगे। ऐसे में देखना होगा कि तेजस्वी यादव मीडिया के सामने आकर अपनी भूमिका पर क्या कुछ बात करते हैं। बहरहाल उन्होंने नीतीश कुमार को

    बधाई दी है। इस पर आप क्या कुछ कहेंगे? कमेंट सेक्शन में अपनी राय हमें बताइए और बिहार की तमाम खबरों के लिए आप देखते रहिए । Star ⭐ Daily

  • गजब का तरीका है यह जितना चाहो उतनी देर।

    फीमेल तो चार से पांच बार भी या फिर 10 से 20 बार भी उस संतुष्टि के लेवल तक जा सकती है। अगर आप प्रॉपर तरीके से उस लेवल तक पहुंचाना चाहते हैं और दोनों ही एक दूसरे के साथ बहुत अच्छे से करते हैं तो। ठीक है? एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझते हैं तो।

    लेकिन जो मेल्स है ना उनका एक बार में ही क्योंकि ऐसा होता है कि उसके बाद वह नहीं कर पाते। अगर वह एक बार उस सेटिस्फेक्शन के लेवल तक पहुंच गए तो वह दोबारा रेडी होने के लिए ही उनको समय लगेगा। एक से 2 घंटा भी लग सकता है। किसी में 6 घंटे भी लग सकते हैं। किसी में 12 घंटे भी लग सकते हैं जो कि बहुत ही

    लंबा समय है। लेकिन फीमेल करते-करते ही वह बार-बार भी उस लेवल तक पहुंच सकती है। एक से चार बार तो मिनिमम है। वह जा सकती है। उससे भी ज्यादा जा सकती है। क्या आपको यह बात पता थी? लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आप लंबे समय तक रहे। इसलिए उसको रिटेन करना जरूरी है। जो लिक्विड है उसको रोकना जरूरी है। उसको स्टॉप करना जरूरी है। तो

    उसकी ही एक टेक्निक है जिसको बोलते हैं इचिंग। जी हां टीज़िंग भी बोलते हैं। तो बहुत सारे नामों से जाना जाता है कि जब आपको वो लेवल मिलने वाला होता है। उससे पहले ही आप उसको कंट्रोल कर लें। यही वो टेक्निक होती है। चाहे आप किसी फीमेल के साथ कर रहे हैं। किसी भी तरीके से आप परफॉर्म कर रहे हैं अपने उस पार्ट से और आप चाहते हैं कि कंट्रोल करें। वो जो

    लिक्विड है बॉडी से बाहर ना निकले। तो उसकी ही कुछ टेक्निक्स होती हैं। तो सबसे पहले हम जानेंगे कि इसके क्या फायदे होते हैं और इसको कैसे किया जाता है? क्या टेक्निक होती है इसके बारे में ताकि आप लंबे समय तक बने रहें। ठीक है? तो पहला फायदा तो यही है कि आपका जो टाइमिंग है वह बहुत अच्छा हो जाता है

    अगर आप यह टेक्निक सीख जाते हैं तो उससे पहले हम समझते हैं एक पॉइंट को जिसको हम बोलते हैं पी एंड आर मतलब क्या है कि पॉइंट ऑफ नो रिटर्न उसके बाद आप रिटर्न नहीं हो सकते उससे पहले ही आपको कंट्रोल करना पड़ेगा अपने उस लिक्विड को ठीक है तो ये आपको देखना है कि जब आप बार-बार प्रैक्टिस करते हैं तो आपको पता चलेगा कि अगर इतना मैंने कंट्रोल

    कर लिया है इसके आगे अगर में गया तो फिर लिक्विड निकल ही जाएगा बॉडी से बाहर। उससे पहले अगर मैंने अपने को कंट्रोल कर लिया तो नहीं निकलेगा। ठीक है? वही वो पॉइंट होता है। तो वो आपको डिफाइन करना है कि कब आता है। ठीक है? आप कितना कंट्रोल कर पाते हैं और किसके बाद आप कंट्रोल बिल्कुल नहीं कर पाते हैं। तो वो आपको देखना होगा। वह आपको प्रैक्टिस से ही पता चलेगा कि आपका पीएआर कब आता है।

    ओके? अब हम जानते हैं कि इसके फायदे क्या है? तो फायदे देखिए एक तो आपका टाइम बढ़ जाता है। दूसरा आपके पार्टनर के साथ आपकी जो एक बॉन्डिंग है वो बहुत अच्छी हो जाती है। क्योंकि फीमेल जब तक पूरी तरीके से हैप्पी नहीं होती है तब तक आप अपना जो सेटिस्फेक्शन है वह ढूंढ ही नहीं पाते हैं। ठीक है? और आपको हमेशा ही कॉन्फिडेंस आता नहीं है। लो

    कॉन्फिडेंट आप फील करते हैं। नेक्स्ट क्या है कि आप और भी बहुत सारे पॉइंट्स को ढूंढ सकते हैं जो प्रिज़र्व पॉइंट हैं अगर आप थोड़े समय के साथ बने रहते हैं अपने पार्टनर के साथ। ओके? तो बहुत सारे इसके फायदे हैं। एक आप पीई को कंट्रोल कर सकते हैं। बहुत सारे लोगों को छूते ही किसी भी फीमेल को या फिर इसके बारे में सोचते ही जो लिक्विड है बॉडी से बाहर

    निकल जाता है। तो उसको भी आप कंट्रोल कर पाएंगे। अगर आपने अपना पी एंड आर को ढूंढ लिया। ओके? तो बहुत सारे फायदे हैं। अब देखो नेक्स्ट क्या है कि इसको कैसे हम समझें? किस तरीके से आप इसको धीरे-धीरे करके ढूंढ सकते हैं। मतलब कैसे आप उसको पहचान सकते हैं। क्या टेक्निक्स आप यूज़ करें? तो सबसे पहली टेक्निक तो यही है कि जब भी आपका ऐसा हो कि अभी इसके बाद अगर आप थोड़ा सा भी और करते हैं तो आपका तुरंत बॉडी से बाहर आ

    जाएगा। तो आप क्या करें? तुरंत उस पार्ट को बाहर निकाल लीजिए। बिल्कुल भी टच नहीं होना चाहिए फीमेल की बॉडी से और आप क्या करेंगे? अपना ध्यान भटका लेंगे। एक बार के लिए बिल्कुल आप उससे कट हो जाइए। जी हां, बहुत मुश्किल है। लेकिन आपको ऐसा ही करना पड़ेगा। एक बार के लिए आप बिल्कुल रुक जाइएगा। अपने पार्ट को बाहर निकाल लीजिए।

    एंड उसके बाद आप थोड़ा सा अपने उस पार्ट के ऊपर फोकस करेंगे कि क्या करेंगे कि आप बिल्कुल गहरी सांस लेंगे। ठीक है? ताकि मैक्सिमम ऑक्सीजन आप अपनी बॉडी के अंदर ले सकें। एंड आपका जो पार्ट है मान लीजिए ये आपका हेड वाला हिस्सा है। यह आपका बेस वाला है। नीचे का हिस्सा है। तो बीच में एक आपको थोड़ी सी जगह दिखाई देती है। एक बैंड के जैसा दिखाई देता है। तो वहां पे आप क्या करेंगे? उसको स्क्वीज़

    करेंगे। जब आप उस हिस्से को स्क्वीज़ करते हैं तो एक बार के लिए आपका जो पार्ट है वह समझिए कि थोड़ा सा डीएक्टिवेट हो जाता है। उसके बाद आप कंट्रोल कर पाएंगे। एक तो यह टेक्निक होती है। एक क्या है कि थंब का भी इस्तेमाल किया जाता है। जो हेड है उसके ऊपर आप थंब का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। थोड़ा सा

    उसको दबा सकते हैं। ओके? जब भी आप करते हैं तो थोड़ा-थोड़ा सा रुकिए। फिर से कीजिए। फिर से रुकिए। इस तरीके से अगर आप करते हैं तो भी आपका यह जो पॉइंट है यह आने से पहले ही आप रुक जाएंगे और ऐसा करके आप करते हैं तो आपका बिल्कुल टाइमिंग बढ़ता है और आपके फीमेल पार्टनर कभी भी आपसे शिकायत नहीं करती है। ठीक है? इसके थ्रू आप जितना लंबा

    टिकना चाहें उतना टिक सकते हैं। यह आपकी आर्ट के ऊपर डिपेंड है कि आप किस तरीके से अपने पीएआर पॉइंट को ढूंढते हैं और समझते हैं। ओके? तो चलिए मिलते हैं नेक्स्ट पार्ट में। थैंक्स फॉर वाचिंग। अगर कहानी आपको अच्छा लगा तो, शेयर करना और कॉमेंट भी गुड बाय।

  • कब करता है लड़की का मन Real history Family Life 🧬

    लड़कियों को कब सबसे ज्यादा सेक्स करने का मन करता है लड़कों को बहुत बार ये कंफ्यूजन रहती है कि मेरी वाइफ तो करना ही नहीं चाहती मेरी गर्लफ्रेंड तो मना ही करती रहती है उसका तो मूड ही नहीं होता हमेशा बोलती है आई एम नॉट इन मूड टुडे कौन सा ऐसा टाइम है जब वो

    पीक पर होती हैं एंड शी वांट्स टू डू इट अगर आप ये मौका गवा रहे हैं तो डेफिनेटली आपकी जो कंप्लेंट्स है उसकी लिस्ट बढ़ती ही जाएगी लेकिन होना कुछ नहीं है  सबसे पहले जाने कि फीमेल की एक मेंस्ट्रुअल साइकिल है मतलब पीरियड साइकिल है जो कि पांच से छ दिन कम से कम ती दिन और ज्यादा से ज्यादा छ से सात दिन रहती है ये साइकिल के आसपास उनके

    जो हार्मोन जो हैं वो बदलते हैं कई फीमेल्स में मूड स्विंग्स होने शुरू हो जाते हैं कई में बहुत ज्यादा पीएमएसएस सिंड्रोम जैसे दर्द होना या जीबसी ठन होना या मूड बहुत ज्यादा डिफ्लेक्ड होना गर्म फ्लशस आना बहुत कॉमन हो जाता है क्योंकि उनकी बॉडी में हार्मोंस बदल रहे होते हैं पीरियड से जस्ट पहले फीमेल्स को काफी

    अर्जेस होती हैं रिलैक्सेशन और कंफर्ट की इसलिए उस समय फीमेल काफी ज्यादा सेक्सुअल एक्टिविटी को करने में इवॉल्व रहती हैं पीरियड्स खत्म होने के बाद भी रिलैक्सेशंस काफी होती हैं जब अ जब हम बोल रहे हैं कि बॉडी में से सारा वेस्ट चला गया ब्लड के थ्रू निकल गया है और अब वो नेक्स्ट एक

    साइकिल के लिए प्रिपेयर होती हैं क्योंकि अगले महीने फिर एग रिलीज होगा ताकि वो प्रेग्नेंट हो पाए तो ऐसे में पीरियड से पहले और बाद एक बहुत ही अच्छा टाइम है जब वाइफ रिलैक्स भी फील करती है और वो एंगेज होना भी चाहती है और उनकी बॉडी को रिक्वायरमेंट भी होती है मोर ओवर बेनिफिट की बात ये है कि ये

    पीरियड सेफ सेक्स में जाना जाता है अगर आप पीरियड शुरू होने से जस्ट पहले और जस्ट बात करते हैं तो एक तो वाइफ भी रेडी है मोर ओवर इसमें कंसीव या प्रेगनेंसी होने के चांसेस नहीं रहते तो आप इस पीरियड में बिना कंडम के भी सेक्स को एंजॉय कर सकते हैं फिर मैं बात करूंगी कि इसके अलावा जब आपके एग बिल्कुल रिलीज होने का मिड टाइम होता है

    जैसे आपकी 28 दिन की साइकिल है तो 14 के आसपास हाई ओवुलेशन डे है उन समय पे उन कपल्स को सेक्स करना होता है जो बेबी कंसीव करना चाहते हैं हैं तो जैसे ही एग निकलेगा और वो आपके स्पर्म के साथ मिलेगा तो बेबी कंसीव हो सकता है इस टाइम पे भी फीमेल के सेक्सुअल अर्जेस बढ़ जाते हैं क्योंकि वो ओवुलेशन के लिए रेडी होती हैं वो फीमेल

    जो बेबी कंसीव करना चाहती हैं या मां बनने की फीलिंग रखती हैं उस टाइम पे उनके अर्जी बढ़ती हैं क्योंकि वो कंसीव करने के फ्रेम में होती हैं यही अर्जेस आफ्टर 40 काफी फ्रीक्वेंसी आते ही जैसे हम बोलते हैं कि

    महावरी बंद होते ही थोड़े से डिफ्लेक्शन आ सकते हैं लेकिन उसके बाद फीमेल काफी काफी सेक्सुअली एक्टिव हो जाती हैं जिनको इसका अर्ज है या जो इस तरफ ध्यान देती हैं और उस समय भी उनकी जो फीलिंग है वो काफी बढ़ जाती है रिप्रोडक्टिव एज में और पीरियड्स के आसपास सही समय है जब

    फीमेल सेक्स करने के लिए तैयार होती है अगर आप इस चीज से एग्री करते हैं और समझते हैं तो डेफिनेटली इस समय पे अपने पार्टनर को जरूर सहला एं सपोर्ट करें हो सकता है आप इसी चीज का वो वेट कर रही हो ताकि वो आपको वो प्लेजरस दे पाएं |

  • कैसा महसूस होता है अन्दर जाते ही

    एक मेल का वह पार्ट जब फीमेल की बॉडी में एंटर करता है, तो तुरंत बाद उसको कैसा महसूस होता है? कुछ महसूस होता भी है या नहीं होता है? या फिर कितनी देर बाद में महसूस होता है? तो आज हम इसी के बारे में बात करने वाले हैं। तो चलिए शुरुआत करते हैं आज के इस की proses ko । देखिए कैसा महसूस होता है। तो उसके लिए मैं आपको एक छोटा सा

    एग्जांपल दूंगी क्योंकि मेल और फीमेल दोनों के बीच में बहुत बड़ा डिफरेंस है। ठीक है? अब मान लीजिए कि आपकी आज इच्छा हो रही है और आप हैं ऑफिस में। कि आज जाके कुछ ना कुछ ऐसा करना है। ठीक है? अपने पार्टनर के साथ रिलेशन बनाना है। तो, आपको यह चीज़ें महसूस हो रही हैं जब आप ऑफिस में हैं तब।

    तो इतना मान के चलिए कि आपके दिमाग में स्टार्टिंग तो हो चुकी है। ठीक है? मतलब आपके दिमाग से ही वह चीज़ें उसकी शुरुआत हो चुकी है। रिलेशन बनाने की शुरुआत हो चुकी है। ठीक है? तो जब आप घर पे पहुंचते हैं, आपकी वाइफ को कुछ भी नहीं पता है। वह बिजी है, काम में बिजी है, बच्चों में बिजी है या फिर किसी भी तरीके से उसको कुछ भी नहीं पता है। तो उसके माइंड में तो कुछ भी नहीं है। ठीक है? लेकिन आपका जो लेवल है वह बहुत ज्यादा बढ़ चुका है।

    आपका बहुत ज्यादा मन हो रहा है। है ना? तो यह समझिए कि जो मेल है वो उसका समय ऑलरेडी कम होता है। उसकी जो स्टेजेस होती है ना रिश्ता बनाने की वो फास्ट आती है। बहुत जल्दी आती है। और अगर आप पहले से सोच रहे हैं तो आपकी तो और भी ज्यादा जल्दी आने वाली है। आपका जो एक ऑर्गेनिज्म की स्टेट है वो बहुत जल्दी आने वाली है। मतलब जो आपका लिक्विड है वो बॉडी से बाहर निकल जाना है।

    फीमेल की यह जो स्टेजेस है वो बहुत धीरे-धीरे आती हैं। ठीक है? और फिर वह जाके कहीं अपने उस संतुष्टि के लेवल तक पहुंच पाती है। तो यह बहुत ही मुश्किल होता है फीमेल्स के लिए। तो अगर आप उनको स्टार्टिंग में जब आपके माइंड में यह बात आई तो उसी समय अगर आप उसको भी बता देते हैं ना तो यह समझिए कि उसके दिमाग में भी कुछ ना कुछ चलेगा। हो सकता है कि जब आप ना बताएं, तो कुछ भी नहीं सोचेगी। उसके बाद वह रेडी होगी। जब आप बोलेंगे, फिर उसके बाद

    आप एक्सपेक्ट करेंगे कि वह बहुत जल्दी उसका माइंड रेडी हो जाए। नहीं। वह एकदम इमोशंस के ऊपर चलती है फीमेल की बॉडी। ठीक है? तो अगर चलिए फिर भी ठीक है। आपकी सोच है कि करना है उसको नहीं पता है लेकिन आप चाहते हैं जल्दी हो तो उसके लिए आप उसको कुछ ऐसी बातें बोलते रहिए ताकि वह अच्छा फील करें। खुश महसूस करें। अपने आपको हैप्पी फील करें एंड थोड़ी सी एक्साइटेड भी फील करें। और जब आप करने के लिए जाएं तो उससे पहले उसको पूरा टाइम दें। जब आप पूरा टाइम देते हैं ना जिसको हम

    बोलते हैं पहले वाली एक्ट मतलब फॉर प्ले अगर वह बहुत अच्छे से करते हैं ना तो ट्रस्ट मी उसका भी टाइम कम हो जाएगा बहुत अच्छे से उसका भी जो लिक्विड है वो रिलीज होगा पहले होता है उसके दौरान भी होता है और बाद में भी होता है ठीक है तो जब आप ऐसा करते हैं तो सही होगा लेकिन इसका एक सलूशन और भी है कि जब आपका मन हुआ है तभी आप फोन करके चाहे उसके पास है या फिर नहीं है तो भी आप फोन करके उसको बता बता सकते हैं कि आज हम ऐसा कुछ करेंगे और थोड़ा सा और एक्साइटेड होके उसको बताइए कि क्या-क्या करने वाले हैं जिस जो कि उसको सुनने में

    अच्छा लगे एंड वो भी थोड़ा सा अपने आप को अराउज़ फील करवा सके। ठीक है? तो यह तो थे पहले के स्टैप्स। अब बात करते हैं मेन उसी के ऊपर कि उसको कैसा महसूस होता है। तो जब तक कोई फीमेल वो रेडी नहीं हो जाती। ये समझिए कि जब तक कि उसका जो पूरा ल्यूब है वो बॉडी से निकलने लग नहीं लग जाता है उस पार्ट से। तो तब तक तो वो बिल्कुल भी यह समझिए रेडी है ही नहीं। ठीक है? चाहे आप अंदर कितनी भी बार डालिए और निकाल लीजिए लेकिन उसको कुछ भी

    फेल नहीं होगा। यह बिल्कुल सच्ची बात है। ठीक है? तो ऐसा नहीं है कि जो फीमेल है उसका निकलता ही नहीं है। इच्छा नहीं होती है ना तभी ऐसा होता है। मोस्टली तो किसी किसी को होता है कि बहुत कम निकलता है। है ना? वो एज की बात हो जाती है। तो उस समय आप यूज़ कर सकते हैं जो भी लिक्विड आई मीन जो भी ल्यूब ठीक है जो मार्केट बेस्ड होते हैं जो अच्छे होते हैं वो आप इस्तेमाल कर सकते हैं। तो अब बात करते हैं कि उसको कैसा लगता है तो जब उसका इच्छा हो जाती है

    ल्यूब पास होने लगता है तो इसका मतलब है कि अब वो रेडी है बिल्कुल अंदर करवाने के लिए। तो जब आप एंटर करवाते हैं तो सेम टू सेम ऐसा ही फील होता है जैसा कि अगर वह पूरी तरीके से रेडी है तो ठीक है उसको अब ऐसा लग रहा है कि अब उसको चाहिए समझ रहे हैं वो स्टेज आ जानी चाहिए वो कब आ जानी चाहिए उसके लिए आपको पहले बहुत सारा वक्त उसको देना पड़ेगा ठीक है और अपने ऊपर कंट्रोल रखना पड़ेगा तो उसको ऐसा फील होगा जैसा आपको फील होता है वैसे ही

    क्योंकि जो आपका जो हेयर वाला हिस्सा है वहां पे भी बहुत सारी नर्व एंडिंग्स हैं बहुत सेंसिटिव होता है और जो फीमेल है उसका पूरा जो एक यह समझिए जो ट्यूब है वो पूरी की पूरी सेंसिटिव मैं नहीं कह सकती है उसका जो ऊपर वाला जो हिस्सा है वो सबसे ज्यादा सेंसिटिव होता है तो जब आप एक बार करते हैं दो बार करते हैं ठीक है इस तरीके से जब आप स्ट्रोक्स लगाते हैं तो उसको थोड़ा सा समय और चाहिए अच्छा लगने के लिए तो जैसे ही आप उनकी स्पीड बढ़ाते हैं तो हल्की सी वहां पे गर्माहट भी आती है और वहां की सेंसिटिविटी एक

    तरीके से थोड़ी सी इनक्रीस होने लगती है वह महसूस करना शुरू शुरू कर देती है तो तब उसको ऐसा ही फील होता है जैसा आपको फील होता है। समझ में आ रही है बात? क्योंकि फीमेल को थोड़ा सा समय तो लगेगा ही। ऐसा ही नहीं है कि जस्ट अंदर डालते ही हां उसका हो गया। ऐसा कभी नहीं होता है। तो आपको बार-बार बार-बार करना पड़ेगा। तब जाके थोड़ा सा घर्षण वहां पे जब होगा तो उसको अच्छा महसूस होगा और वह जैसा मैं बहुत बार बताती हूं कि ऊपर जो क्लिट होता है जो बाहर ही होता है वहीं से वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो पाती है। कुछ ऐसी भी फीमेल होती है जो अंदर से भी उनको

    अच्छा फील होता है क्योंकि नर्व एंडिंग्स वहां पे भी बहुत सारी होती हैं। आसपास उस एरिया में फैली होती है। उस ट्यूब के अंदर बहुत सारी नर्व एंडिंग्स उसके छत में उसके आसपास फैली हुई होती है। तो जब आप बार-बार बार-बार करते हैं ना कंटीन्यूअसली करते हैं स्पीड को बढ़ाते हैं तो उसको अच्छा फील होता है। ठीक है? तो आपको समझ में आया होगा कि अंदर होने के बाद उसको कैसा महसूस होता है। और बहुत सारे फीमेल्स के भी तो अंदर होना महसूस कर पाना इतना अच्छा भी उनको नहीं लगता है। मतलब उनको महसूस होता ही

    कम है क्योंकि उनको बाहर से ही बहुत अच्छा लगता है। ठीक है? तो सभी फीमेल्स अंदर से भी सेटिस्फाइड नहीं होती है। मैंने बहुत बार बताया है क्योंकि कुछ लोगों को सिर्फ बाहर से ही ज्यादा अच्छा लगता है। थोड़ा बहुत उनको अंदर भी अच्छा लगता है। ठीक है? तो आशा करूंगी कि आपको समझ में आया होगा। तो चलिए मिलते हैं नेक्स्ट Chats में। थैंक्स फॉर वाचिंग। गुड बाय। जिसके साथ आप कंफर्टेबल है ना उसके पास इसको शेयर कर दीजिए। गुड बाय।

  • Bihar Election में जीत के बाद RNG Lecture में बोले PM Modi कहा- 24×7 EmotionalMode में रहना जरूरी

    बिहार चुनाव जीतने के बाद कुछ लोगों ने मीडिया के कुछ मोदी प्रेमियों ने फिर से यह कहना शुरू किया है भाजपा मोदी हमेशा 24/7 इलेक्शन बोर्ड में ही रहते हैं। मैं समझता हूं चुनाव जीतने के लिए इलेक्शन मोड नहीं 24ों घंटे इलेक्शन मोड में रहना जरूरी होता है।

    इमोशनल मोड में रहना जरूरी होता है। इलेक्शन मोड में नहीं। जब मन के भीतर एक बेचैनी सी रहती है कि एक मिनट भी घमाना नहीं है। गरीब के जीवन से मुश्किलें कम करने के लिए, गरीब को रोजगार के लिए, गरीब को इलाज के लिए, मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बस मेहनत करते रहना है। इस इमोशन के साथ इस भावना के साथ सरकार लगातार जुटी रहती

    है। तो उसके नतीजे हमें चुनाव परिणाम के दिन दिखाई देते हैं। बिहार में भी हमने अभी-अभी यही होते देखा है। साथियों, रामनाथ जी से जुड़े एक और किस्से का मुझसे किसी ने जिक्र किया था। यह बात तब की है जब रामनाथ जी को विदिशा से जनसंघ का टिकट मिला था। उस समय नानाजी देशमुख जी ने उनकी इस बात पर चर्चा हो रही थी कि यह संगठन महत्वपूर्ण होता है या

    चेहरा। तो नाना जी देशमुख ने रामनाथ जी से कहा था कि आप सिर्फ नामांकन करने के लिए आएंगे और फिर चुनाव जीतने के बाद अपना सर्टिफिकेट लेने के लिए आ जाइएगा। फिर नाना जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के बल पर रामनाथ जी का चुनाव लड़ा और उन्हें जीता कर दिखाया। वैसे यह किस्सा बताने के पीछे है। मेरा यह मतलब नहीं है कि उम्मीदवार सिर्फ नामांकन करने आए। मेरा मकसद है भाजपा के अनगिनत कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओं के समर्पण की ओर आपका ध्यान

    आकर्षित करना है। साथियों, भारतीय जनता पार्टी के लाखों करोड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने पसीने से भाजपा की जड़ों को सींचा है और आज भी सींच रहे हैं। और इतना ही नहीं केरला, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर ऐसे कुछ राज्यों में हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने खून

    से भी भाजपा की जड़ों को सींचा है। जिस पार्टी के पास ऐसे समर्पित कार्यकर्ता हो उनके लिए सिर्फ चुनाव जितनात धेय नहीं होता बल्कि वो जनता का दिल जीतने के लिए सेवा भाव से उनके लिए निरंतर काम करते हैं।

  • प्यार में टूटा… लेकिन बना IAS ऑफिसर / UPSC Motivational Video UPSC Motivation / Study Motivation / IAS Motivational Story

    एक ऐसा लड़का जो जिंदगी से हार चुका था जो आत्महत्या करने के लिए फांसी के फंदे को गले लगाने वाला था। वो कैसे एक आईएएस ऑफिसर बना और जवाब दिया उन लोगों को जिसने उसे दर्द पहुंचाया। आइए जानते हैं अर्जुन की कहानी। दिल्ली के एक मिडिल क्लास घर में रहता था अर्जुन। पढ़ाई में वो ज्यादा अच्छा नहीं था, लेकिन अपने मां-बाप का

    लाडला था। अर्जुन के पिता एक दुकान चलाते थे और उसकी मां ग्रहणी थी। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब अर्जुन कॉलेज जाने लगा था। अर्जुन हमेशा से बस यही सोचता कि पढ़ाई करके कोई छोटी-मोटी सरकारी नौकरी मिल जाए तो जिंदगी बन जाएगी। लेकिन वो यह नहीं जानता था कि जिंदगी ने उसके लिए कुछ और ही सोच रखा है। अर्जुन को कॉलेज

    जाते हुए कई महीने बीत चुके थे और एक दिन उसकी मुलाकात हुई अनन्या से। अनन्या अर्जुन की ही क्लास में थी। लेकिन आज उसने उसे पहली बार देखा था। दोनों को साहित्य और कविताओं में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट था। धीरे-धीरे उन दोनों के बीच बातें बढ़ने लगी और देखते ही देखते वक्त पंख लगाकर उड़ गया। एक दिन लाइब्रेरी में अनन्या ने कहा, “अर्जुन, मैं

    बचपन से आईपीएस अफसर बनने का सपना देखती आई हूं।” विवेक मुस्कुराया और बोला, वाह, बहुत ही बड़ा सपना है। अनन्या ने जवाब दिया और तुम्हारा सपना? अर्जुन ने हंसते हुए कहा, “अभी तक तो कोई नहीं है।” अनन्या बोली, तो फिर आज से तुम्हारा सपना मेरा साथ देना होगा। तुम्हें भी यूपीएससी की तैयारी करनी चाहिए। अर्जुन अनन्या ने जिस तरह

    अर्जुन को यूपीएससी की तैयारी करने के लिए बोला था, अर्जुन बिल्कुल मना नहीं कर पाया। अर्जुन को उसका आत्मविश्वास अच्छा लगा और उसने भी मन बना लिया कि अब उसका लक्ष्य यूपीएससी पास करके अफसर बनना है। लेकिन वो यह नहीं जानता था कि यूपीएससी की परीक्षा उसकी जिंदगी की सबसे मुश्किल परीक्षा होने वाली है। दोनों ने एक साथ पढ़ाई शुरू की। लाइब्रेरी में दिन रात एक कर

    दिए। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती एक अच्छे रिश्ते में बदल गई। और एक दिन अर्जुन ने हिम्मत जुटाकर अनन्या से कहा, “न्या, मुझे तुमसे प्यार हो गया है।” अनन्या मुस्कुराई। उसकी आंखों में भी वही फीलिंग्स थी जो अर्जुन की आंखों में थी। दोनों का रिश्ता अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके सपनों तक फैल गया। कॉलेज खत्म हुआ। अर्जुन और अनन्या दोनों उस कॉलेज के टॉप स्टूडेंट रहे। बस अब उनकी एक मंजिल थी यूपीएससी। उन्होंने तीनों

    एग्जाम्स, प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू की तैयारी एक साथ की। दिनरा पढ़ते, नोट्स बनाते और एक दूसरे का हौसला बढ़ाते। तीनों एग्जाम हो चुके थे। अर्जुन को पूरा विश्वास था कि अनन्या एक बार में ही यह एग्जाम क्लियर कर देगी और इसी विश्वास के बीच वो अपने आप पर विश्वास करना भूल गया था। रिजल्ट का दिन आया। दोनों के दिल जोर से धड़क रहे थे और हाथ कांप रहे थे। पर किस्मत का खेल देखिए। अनन्या ने टॉप रैंक हासिल की और अर्जुन कुछ नंबर से फेल हो गया। वो पल अर्जुन के लिए सबसे भारी था। लेकिन अनन्या ने उसका हाथ पकड़ कर कहा,

    अर्जुन एक बार की हार से कुछ नहीं होता। तुम्हें एक बात और कोशिश करनी चाहिए। मैं हूं तुम्हारे साथ। यह शब्द अर्जुन के अंदर आग की तरह उतर गए। उसने मन बना लिया कि अब उसे या तो मर जाना है या यूपीएससी क्लियर करना है। अर्जुन अपनी पढ़ाई में और डूब गया। दुनिया से यहां तक कि अनन्या से भी दूर हो गया। वह दिन रात बस किताबों में घुल

    गया। उसे नहीं पता था कि अब जिंदगी एक और इम्तिहान लेने वाली है। कुछ महीनों बाद अर्जुन ने सोचा कि अब मुझे अनन्या से मिलना चाहिए। वो उसके घर पहुंचा। दिल में खुशी थी कि अब दोनों एक साथ बैठकर आगे की तैयारी पर बात करेंगे। लेकिन अर्जुन यह नहीं जानता था कि उसकी जिंदगी कोई और मोड़ लेने वाली है। जब वो अनन्या के घर पहुंचा, वहां जो उसे पता चला वो सुनकर वह जैसे पत्थर बन गया। अनन्या के माता-पिता ने बताया कि 2 महीने

    बाद अनन्या की शादी है। अर्जुन के पैरों तले जैसे जमीन ही खिसक गई। वो भागता हुआ अनन्या के कमरे में पहुंचा। अनन्या वहीं थी। पर उसकी आंखों में अब वो चमक नहीं थी जो कभी हुआ करती थी। अर्जुन ने कांपती आवाज में उससे पूछा, “यह सब क्या है अनन्या? शादी?” अनन्या ने शांत आवाज में कहा, हां अर्जुन, मैं अरुण से शादी कर रही हूं। मैं तुम्हें अपनी शादी में जरूर बुलाऊंगी। अनन्या के चेहरे पर ना कोई शर्म थी, ना ही पछतावा। अर्जुन की आंखें नम हो चुकी थी। वो कुछ बोले बिना वहां से चला

    गया। अब तक जो सपना उसके जीने का मकसद था, वो अब उसके लिए बोझ बन चुका था। दिन भर सन्नाटा, रात भर जागना, नदी किनारे बैठकर भी वह अपने आप को घुटा हुआ महसूस कर रहा था। हर बार अपने आप से बस एक ही सवाल करता। क्यों हुआ यह मेरे साथ? एक हफ्ते तक अर्जुन ने अपने आप को कमरे में बंद रखा और फिर एक दिन उसने वो किया जो किसी को नहीं करना चाहिए। वो पंखे से रस्सी बांधकर कुर्सी पर बैठ गया। आंखों में आंसू,

    दिल में खालीपन, अर्जुन को लग रहा था कि वह हार चुका है। लेकिन जैसे ही उसने ऊपर देखा, दीवार पर टंगी अपने माता-पिता की तस्वीर दिखाई दी। उनकी मुस्कान ने जैसे उसे रोक लिया। वो तस्वीर जैसे उसे कुछ बता रही है। अर्जुन, यह जिंदगी सिर्फ तुम्हारी नहीं हमारी भी है। अर्जुन वहीं जमीन पर बैठ गया और जोर-जोर से रोने लगा। उसने रस्सी काठ फेंकी और यह फैसला किया कि अब वह अपने माता-पिता के लिए जिएगा और उन्हें गर्व महसूस कराएगा। उस दिन से उसकी जिंदगी बदल गई। वो अब वो अर्जुन नहीं था जो पहले था। अब उसके अंदर गम नहीं

    जुनून जल रहा था। वो अपनी पढ़ाई में ऐसा डूब गया कि दिन रात एक कर दिए। हर दर्द का जवाब उसने अपनी मेहनत से दिया। दिन बीतते गए महीने गुजर गए और फिर आया वो दिन। यूपीएससी रिजल्ट का दिन। इस बार विवेक ने ना सिर्फ यूपीएससी क्लियर किया बल्कि टॉप रैंक हासिल की। वो अब एक आईएएस अफसर बन चुका था। जब उसने अपने

    माता-पिता को यह खबर दी तो उनकी आंखों में खुशी और गर्व के आंसू थे। उनकी मुस्कुराहट को देखकर अर्जुन को लगा जैसे उसने पूरी दुनिया जीत ली। आज अर्जुन एक ईमानदार आईएएस अधिकारी है। उसकी कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो जिंदगी की मुश्किलों से हार मान लेते हैं। दोस्तों जब जिंदगी हमें दर्द देने पर आती है तो हमें उससे कोई रहम की

    उम्मीद नहीं करनी चाहिए। जिंदगी जब तुम्हें गिरा है तो उसे हार की तरह नहीं सबक की तरह समझो। क्योंकि असली जीत उन्हीं की होती है जो हारने के बाद भी कोशिश करना नहीं छोड़ते। और अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको एक बच्चे की यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।