Star Daily

Author: Star Daily

  • दुनिया के पहले हवाई जहाज बनने की कहानी | Wright Brothers Story

    साल था 1898। अमेरिका के एक शहर ओहायो में दो भाई अपनी साइकिल की दुकान चलाते थे। ना कोई बड़ी डिग्री, ना पैसे, ना किसी वैज्ञानिक का साथ। लेकिन उनके अंदर एक ऐसा सपना पल रहा था जिसे दुनिया पागलपन कहती थी। उनका सपना था इंसान को उड़ते हुए देखने का। जब भी कोई पंछी

    आसमान में उड़ता तो दोनों भाई उसे घंटों तक देखते रहते और अपने मन में सोचा करते अगर यह कर सकता है तो इंसान क्यों नहीं कर सकते? यही सवाल उनके दिल में आग बनकर जलने लगा। उन दोनों भाइयों ने ठान लिया था कि वह उड़ने वाली मशीन बनाकर रहेंगे। अपनी साइकिल रिपेयरिंग की दुकान पर पुराने पुर्जों से उन्होंने उस असंभव मशीन को बनाने की

    शुरुआत की। लोगों ने उनसे कहा, “अरे पागल हो गए हो क्या? उड़ना ईश्वर का काम है। इंसान का नहीं। वैज्ञानिकों ने उनका मजाक उड़ाया। अखबारों में उन्हें ड्रीमिंग मैकेनिक्स कहा गया। लेकिन उन दोनों भाइयों के लिए हर ताना, हर हंसी एक और सबक बन गया। उन्होंने अपनी साइकिल की दुकान के कोने में टेस्ट शुरू किए। लकड़ी, तार और कपड़े के पंख बनाए और हवा में उड़ाने की कोशिश की। कभी इंजन फेल हो जाता, कभी मशीन टूट जाती। कभी हवा साथ

    नहीं देती तो कभी जमीन धोखा दे जाती। लेकिन हर बार गिरने के बाद वह मुस्कुरा कर कहते हम उड़ नहीं पाए पर आज हमने उड़ना सीखा है। 2 साल तक प्रयोग करने के बाद साल था 1900। उन्होंने अपनी मेहनत से अपना पहला ग्लाइडर बनाया और उसे टेस्ट करने गए नॉर्थ कैरोलना के रेतीले टीलों पर। वहां पर हवाएं तेज थी और हालात मुश्किल थे। दिन में तपती धूप और रात में कड़ाके की ठंड और

    ऊपर से असफलता है। उन्हें कई बार प्रयोग के दौरान गिरते-गिरते चोटें लगी। किसी किसी टेस्ट में उनकी हड्डियां तक टूट गई। लेकिन उन्होंने हार मानने से इंकार कर दिया। बड़े भाई ने एक रात छोटे भाई से कहा, शायद दुनिया हम दोनों को पागल समझती है। लेकिन एक दिन यही पागलपन इंसान को आसमान में ले उड़ेगा। और 3 साल तक चोट खाने और असफल होने के बाद वो दिन आया 17 दिसंबर 1903 सर्दियों की सुबह थी। हवा में धुंध थी। आसमान पूरा बादलों से ढका हुआ था। लेकिन उन दोनों

    भाइयों के दिल में एक साफ आसमान था। उम्मीदों से भरा हुआ। उन्होंने अपनी मशीन तैयार की। द राइट फ्लेयर। बड़े भाई ने कंट्रोल संभाला और दूसरे भाई ने पीछे से धक्का दिया। इंजन गरजा, पंख फड़फड़ाए और देखते ही देखते इंसान ने अपनी उड़ान भरी। 12 सेकंड 120 फीट। लेकिन वो 12 सेकंड इंसानी

    इतिहास की सबसे बड़ी उड़ान थी। पहली बार इंसान ने आसमान को छुआ था। उनकी आंखों में आंसू थे। लेकिन वो आंसू सिर्फ सफलता के नहीं थे। वो सालों की मेहनत और विश्वास के आंसू थे। लेकिन अभी कहानी खत्म नहीं हुई। उनकी उड़ान के बावजूद किसी ने भी उन पर यकीन नहीं किया। सरकारों ने कहा ये धोखा है। अखबारों ने छापा मशीन उड़ नहीं सकती। लेकिन वो दोनों भाई जानते थे सच को साबित करने में वक्त लगता है। उन्होंने और बेहतर मशीन बनाई बार-बार टेस्ट किए। हर उड़ान

    दूसरी उड़ान से ऊंची होती गई। धीरे-धीरे दुनिया ने उनके सामने अपना सिर झुका लिया और उनकी मेहनत का लोहा मान लिया। अब वो ड्रीमिंग मैकेनिक्स नहीं रहे। अब वो द फादर ऑफ एिएशन बन चुके थे। यह दो भाई और कोई नहीं ओरिवल और विलबर राइट थे जिन्हें राइट ब्रदर्स के नाम से जाना जाता है। जिन्होंने

    सबसे पहले विमान की नींव रखी और दुनिया ने जिन्हें बेवकूफ कहकर उनका मजाक उड़ाया। आज जब भी कोई विमान आसमान में उड़ता है तो उसके हर पंख में राइट ब्रर्स का जुनून होता है। हर इंजन की गूंज में उनकी मेहनत की आवाज होती है। उन्होंने दुनिया को सिखाया असफलताएं रास्ते की दीवार नहीं तुम्हारे हर सपने की सीढ़ियां हैं। हर कोई कहता है

    नामुमकिन है लेकिन इतिहास वही बदलता है जो कहता है चलो कोशिश करते हैं। ओरिवल और विलबर राइट ने यह साबित कर दिया अगर तुम गिरने से नहीं डरते तो एक दिन यह पूरा आसमान तुम्हारे कब्जे में होगा क्योंकि सपने उन्हीं के पूरे होते हैं जो हार से लड़ने की हिम्मत रखते हैं।

  • पागल बच्चे से Genius बनने की कहानी | Albert Einstein Story

    यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसे बचपन में लोग मंदबुद्धि कहते थे। जिसे उसके स्कूल से निकाल दिया गया। जो बोलना तक देर से सीखा जिसे दुनिया ने हर बार बताया कि वो पागल है। वो कुछ नहीं कर पाएगा। लेकिन उसी लड़के ने आगे चलकर दुनिया की सोच बदल

    दी। यह कहानी उस इंसान की है जिसने ब्रह्मांड के नियम समझे। अल्बर्ट आइंस्टीन। अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14th मार्च 1879 को जर्मनी के एक शहर उल्म में हुआ था। उनका बचपन आम नहीं था। वह कम बोला करते थे और हर चीज को धीरे-धीरे सीखते थे। वे दूसरे बच्चों से हमेशा अलग रहा करते थे। घर में उनके माता-पिता यह चिंता करते क्या यह बच्चा सामान्य है? लेकिन आइंस्टीन के दिमाग में एक ऐसी दुनिया थी जिसे आम इंसान देख ही नहीं सकता था। स्कूल में तो उनका हाल और भी खराब था। उनके टीचर कहते यह बच्चा बेकार है। इससे कुछ नहीं होगा। सख्त

    नियम, रटी हुई शिक्षा। आइंस्टीन को इन सब से नफरत थी। एक दिन तो उनके प्रिंसिपल ने यहां तक कह दिया तुम स्कूल की इज्जत गिराते हो। तुमसे कभी कुछ नहीं होगा। लेकिन यही वो लड़का था जो आगे चलकर फिजिक्स का चेहरा हमेशा के लिए बदल देने वाला था। 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और अपने

    परिवार के पास स्विट्जरलैंड चले गए। वहां भी उन्हें कई रिजेक्शन मिले। यूनिवर्सिटी ने पहले उन्हें स्वीकार नहीं किया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फिजिक्स और मैथ उनका जुनून थे और इसी जुनून ने उन्हें आगे बढ़ाया। डिग्री पूरी करने के बाद भी उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिल रही थी। इतना महान दिमाग और कोई नौकरी देने को तैयार नहीं। आखिरकार उन्हें एक छोटा सा जॉब मिला। स्विस पेटेंट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी। लेकिन यही वो जगह थी जिसने

    आइंस्टीन का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया। स्विस पेटेंट ऑफिस में बैठकर आइंस्टीन हर किसी के आविष्कार जांचते थे। लेकिन उनके दिमाग में ब्रह्मांड के रहस्य उबल रहे थे। अपना काम पूरा करने के बाद वह देर रात तक कागजों पर समीकरण लिखा करते। समय क्या है? रोशनी कैसे चलती है? ब्रह्मांड कैसे काम करता है? हर कोई अपनी जिंदगी में खोया था। लेकिन आइंस्टीन अपनी कल्पना की दुनिया में खोए रहते थे। और फिर आया सन 1905 और यह साल विज्ञान का चमत्कार वर्ष बन गया। सिर्फ एक साल में उन्होंने ऐसी रिसर्च पब्लिश

    की जो दुनिया को हिला देने वाली थी। यही वो साल था जब इंसानी इतिहास की सबसे मशहूर समीकरण जन्मी e = mc² यानी ऊर्जा और द्रव्य असल में एक ही चीज है। ये समीकरण इतनी शक्तिशाली थी कि आगे चलकर इसी के सिद्धांत पर एटम बम से लेकर न्यूक्लियर वेपन हर चीज बनी। दुनिया हैरान थी एक मामूली पेटेंट क्लर्क ने फिजिक्स का पूरा खेल ही बदल दिया। इसके बाद उन्होंने द थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी दी। एक ऐसी थ्योरी जिसने ब्रह्मांड, स्पेस और ग्रेविटी को समझकर पूरी तरह नया रूप दे दिया। आइंस्टीन कहा करते थे कल्पना ज्ञान से बड़ी होती है और उन्होंने साबित कर

    दिया कि सिर्फ कल्पना से यूनिवर्स के नियम लिखे जा सकते हैं। सन 1920 में आइंस्टीन को नोबेल प्राइज दिया गया। आइंस्टीन जितने महान वैज्ञानिक थे, उतने ही अच्छे इंसान भी। वह युद्ध और हिंसा के खिलाफ थे। लेकिन जब दुनिया दूसरे विश्व युद्ध में जल रही थी तब उन्होंने अमेरिकी सरकार को चेतावनी दी कि जर्मनी एटम बम बना सकता है और उनके इस एक पत्र से मैनहटन प्रोजेक्ट शुरू हुआ जिसने दुनिया का फर्स्ट एटम बम बनाया लेकिन आगे चलकर आइंस्टीन ने इसे अपनी सबसे बड़ी गलती बताया। उनकी जिंदगी में शोहरत भी

    आई और अकेलापन भी। अवार्ड भी मिले और आलोचना भी। लेकिन उन्होंने विज्ञान को जो दिया वो अनमोल है। उनका नाम आज भी जीनियस के तौर पर याद किया जाता है। और 18 अप्रैल सन 1955 को अल्बर्ट आइंस्टीन इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए। लेकिन उनकी सोच, उनका ज्ञान आज भी हमारी हर टेक्नोलॉजी में जीवित है। जीपीएस से लेकर लेजर तक सब में आइंस्टीन छिपे बैठे हैं। आइंस्टीन की जिंदगी हमें सिखाती है।

    दुनिया चाहे आपको 100 बार नालायक बोले पर अगर आपके अंदर जलती हुई जिज्ञासा है, सीखने का जुनून है और हार ना मानने की हिम्मत है तो आप भी ब्रह्मांड के नियम बदल सकते हैं। कभी अपने आप को किसी से कम मत समझो। अगर एक ऐसा बच्चा जिसे बोलना तक नहीं आता वो आगे चलकर इंसानी इतिहास का सबसे महान वैज्ञानिक बन सकता है तो आप कुछ भी कर सकते हो।

  • Tej Pratap On Bihar Election Result 2025: हार के बाद तेजप्रताप यादव ने PM मोदी की जमकर की तारीफ

    बिहार में एक बार फिर से एनडीए की वापसी हुई है। नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों ने मिलकर के आरजेडी और कांग्रेस समेत तमाम महागठबंधन की पार्टियों की हवा निकाल दी और इसके हवा निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव जो कि कभी तेजस्वी यादव के साथ रहते थे। उनके सारथी होने का दावा करते थे और भाई को अर्जुन बना करके महाभारत जीतने का सपना दिखाया करते थे। उन्होंने अब तेजस्वी यादव की मौज ले ली। पहले तो उन्होंने

    तेजस्वी यादव कह दिया यानी तेजस्वी यादव को फेल बता दिया और उसके बाद अपनी हार को लेकर के उन्होंने एक पोस्ट डाला है और नीतीश कुमार समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूब तारीफ की है। दरअसल तेजू भैया ने एक्स पर लिखा है कि हमारी हार में भी जनता की जीत छिपी है। आज के परिणामों को मैं जनादेश के रूप में स्वीकार करता हूं। हमारी हार कर भी जीत हुई है क्योंकि बिहार ने यह साफ संदेश दे दिया है कि अब राजनीति परिवारवाद की नहीं सुशासन और शिक्षा की होगी। यह जयचंदों की करारी हार है। हमने पहले ही कहा था कि इस

    चुनाव के बाद बिहार से कांग्रेस खत्म हो जाएगी और आज कहना नहीं साफ-साफ दिख भी रहा है। मैं तो हार कर भी जीता हूं क्योंकि मेरे साथ जनता का प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद खड़ा है। लेकिन सच्चाई कड़वी है। इन जयचंदों ने आरजेडी को भीतर से खोखला कर दिया, बर्बाद कर दिया। इसी वजह से आज तेजस्वी फिलसफरी हो गया है। जिन्होंने अपनी कुर्सी और अपनी राजनीति बचाने के लिए अपने ही घर को आग लगा दी। इतिहास इन्हें कभी माफ नहीं

    करेगा। मैं बार-बार कहता हूं जनता ही मां-बाप होता है। जनता का फैसला सर माथे पर और आज भी उसी भावना के साथ मैं आपका फैसला स्वीकार करता हूं। हार और जीत अलग-अलग बातें हैं। लेकिन इरादा और प्रयास ही असली हीरो होते हैं। महुआ की जनता से मैंने जो वादे किए थे उनको निभाने का प्रयास मैं लगातार करता रहूंगा। चाहे मैं विधायक बनूं या नहीं। मेरे दरवाजे हर समय जनता के लिए खुले

    रहेंगे। बिहार ने सुशासन की सरकार चुनी है। हम उसका सम्मान करते हैं और जनता के हित में हर कदम पर रचनात्मक भूमिका निभाएंगे। यह जीत हमारे यशस्वी कर्मठ प्रधानमंत्री और विश्व के सबसे मजबूत नेता श्री नरेंद्र मोदी जी के ही उनके व्यक्तित्व और उनके जादुई नेतृत्व का यह कमाल है। जनता ने माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के सुशासन को खुले दिल से अपनाया है। बिहार की यह ऐतिहासिक जीत भारत के गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य

    माननीय अमित शाह और भारत सरकार में मंत्री और बीजेपी बिहार के प्रभारी श्री धर्मेंद्र प्रधान की कूटनीति दूरदृष्टि और दिनरा किए गए परिश्रम का परिणाम है। इस विजय का सबसे बड़ा कारण एनडीए की अटूट एकता है। एनडीए गठबंधन की सभी पांचों पार्टियों पांच पांडवों ने एकजुट होकर के चुनाव लड़ा और जनता ने अपना विश्वास मत और भरपूर समर्थन देकर के इस एकता को विजय की शक्ति में बदल दिया। यह जीत बिहार की जनता की यह जीत विश्वास की है। यह जीत विकास और सुशासन के संकल्प की है। मैं बिहार के युवा शक्ति मातृशक्ति और आप सभी को

    दिल से धन्यवाद देता हूं। आपने मुझे अपार प्यार दिया और यह प्रेम मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। जनता की आवाज बनकर हम और मजबूती से वापस लौटेंगे। धन्यवाद। तेज प्रताप यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष जनशक्ति जनता दल। यानी तेज प्रताप यादव ने ना सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी से लेकर के बीजेपी और एनडीए के तमाम नेताओं की तारीफ कर डाली बल्कि अब सीधे-सीधे संदेश भी दे दिया है कि अब उनकी करीबी किस तरफ जा रही है। हालांकि इस बात की संभावना

    पहले से ही थी क्योंकि वो लगातार एक्टर और सांसद रविकिशन के साथ नजर आते थे। एयरपोर्ट से लेकर के कई जगह उनकी जुगलबंदी देखने को मिली और अब इस जीत के बाद उन्होंने कमेंट करके और फिलसफी यादव लिख के अपनी आगे की रणनीति साफ कर दी है। इस खबर में फिलहाल इतना ही। अपडेट्स के लिए बने रहिए वन इंडिया हिंदी के साथ। नमस्कार।

  • एक गधे की कहानी- ज़्यादा सीधे बनने का अंजाम – Story of a Fox and Donkey | Moral Story

    एक बार की बात है एक गांव में एक धोबी रहता था जिसके पास एक गधा था। हर दिन बेचारा गधा भारी भरकम कपड़ों के गट्ठर एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाता था। लेकिन धोबी बेहद कंजूस था। वह गधे को ना ठीक से खाना देता था और ना आराम। रात में वह बस उसे खोल देता और उससे कहता जा अपना खाना अपने आप ढूंढ ले। थका हारा गधा रात के अंधेरे में

    यहां से वहां भटकता और अपने लिए खाने की तलाश करता। उसका शरीर इतना कमजोर हो गया था कि उसकी हड्डियां साफ दिखाई देती थी। एक रात जब वह दुखी होकर घूम रहा था तब उसे एक लोमड़ी मिली। लोमड़ी ने उसे देखा और उससे पूछा अरे भाई तुम इतने दुबले और कमजोर क्यों हो? गधे ने दुखी होकर कहा,

    “क्या बताऊं दोस्त? मेरा मालिक मुझसे दिन भर काम करवाता है और रोटी पानी कुछ नहीं देता। रात को मुझे अंधेरे में खुद ही खाना ढूंढना पड़ता है। लोमड़ी बोली, तो अब से तुम्हें यह तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी। आज रात मेरे साथ चलो। पास ही में एक बड़ा सब्जियों का

    बगीचा है। गाजर, मूली सब वहां भरे पड़े हैं। मैंने अंदर जाने का एक गुप्त रास्ता भी बनाया हुआ है। मैं हर रात वहां जाकर पेट भरकर खाती हूं। आज रात तुम भी चलो। फिर से तंदुरुस्त हो जाओगे। गधे की आंखें चमक उठी। उसने कहा, तो चलो। उस रात दोनों चुपके-चुपके उस बगीचे में घुस गए। महीनों बाद उस गधे ने

    अच्छी तरह खाना खाया। वह खुद को फिर से जिंदा महसूस कर रहा था। उस दिन के बाद उन दोनों में दोस्ती हो गई और वह हर रात मिलकर दावत उड़ाने लगे। कुछ ही दिनों में गधे का शरीर मजबूत हो गया। अब उसका बदन चमकने लगा और उसकी चाल में गर्व आ गया। वो अपनी सारी परेशानियां भूल गया था। एक रात भरपेट भोजन के बाद गधे को अजीब सा आनंद

    महसूस हुआ। वह झूमने लगा और आसमान की ओर गर्दन उठाने लगा। लोमड़ी ने चिंतित होकर पूछा, “यह क्या कर रहे हो दोस्त?” गधा मुस्कुरा कर बोला, आज मैं आनंद में हूं। मेरा मन कर रहा है कि मैं गाना गाऊं। अच्छे भोजन के बाद खुशी से गाना तो बनता है। लोमड़ी घबरा गई। अरे नहीं नहीं यह मत करना। हम यहां चोरी से आए हैं। अगर चौकीदारों ने सुन लिया तो हम दोनों पकड़े जाएंगे। लेकिन गधे ने गर्व से कहा। तुम संगीत समझती नहीं हो प्रिय

    लोमड़ी तुम तो जंगल के जीव हो। कला क्या होती है यह तुम क्या जानो। मैं जन्मजात गायक हूं। मेरी आवाज सुनकर तो बगीचे का मालिक भी नाचने लगेगा। लोमड़ी ने हाथ जोड़कर कहा, अरे भाई मेरी बात मानो। तुम चाहे महान गायक हो पर अभी नहीं। अगर तुमने यहां गाया तो हम दोनों की खैर नहीं। गधा गुस्सा हो गया। लोमड़ी आज तुमने मेरी आवाज का मजाक उड़ाया। बस अब तुम देखना दुनिया किस तरह मेरी

    गायकी की तारीफ करती है। लोमड़ी ने समझ लिया कि गधा नहीं मानेगा। उसने कुछ सोचा फिर चालाकी से कहा अच्छा भाई मान लिया तुम महान गायक हो। मैं तुम्हारे लिए फूलों की माला लाती हूं। तुम कुछ देर बाद गाना शुरू करना ताकि मैं समय पर आकर तुम्हारा सम्मान कर सकूं। गधा हंसकर मान गया। जैसे ही लोमड़ी वहां से निकली, गधे ने आंखें बंद की, गर्दन ऊपर उठाई और जोर-जोर से रेकने लगा। बगीचे के चौकीदार एकदम जाग पड़े। वो लाठियां लेकर आवाज की तरफ दौड़े और

    बोले, यही है। यही गधा हमारा बगीचा खराब कर रहा था। और उन्होंने उस गधे को पीटना शुरू करा। वे उसे तब तक पीटते रहे जब तक वह अधमरा होकर जमीन पर नहीं गिर पड़ा। दूर से यह सब देखते हुए लोमड़ी ने अपना सिर हिलाया और धीरे से कहा मूर्ख वही है जो अपने दोस्त की बात नहीं मानते। जब कोई आपको अच्छी सलाह दे खासकर वो इंसान जो आपकी परवाह करता हो तो देर होने से पहले उसे सुन

    लेना चाहिए। अहंकार और घमंड सबसे चतुर दिमाग को भी अंधा कर देते हैं। याद रखो जो अच्छे सुझाव को ठुकराते हैं उन्हें अक्सर दर्द से सीखना पड़ता है। सच्ची समझदारी अपनी आवाज दिखाने में नहीं अनुभव की खामोशी को सुनने में है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको दूसरी कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

    Thankyou

  • क्या आप भी रोज YouTube पर मोटिवेशनल वीडियो देखते हैं|

    क्या आप भी रोज YouTube पर मोटिवेशनल वीडियोस देखते हैं और यह सोचते हैं कि इससे आपकी जिंदगी बदल जाएगी या आप सफल बन जाएंगे तो माफ कीजिए। लेकिन आप भी उन लाखों लोगों में से एक हैं जो सोचते हैं कि सिर्फ मोटिवेशन से वह सफल बन जाएंगे। जब तक आप अपनी जिंदगी में डिसिप्लिन यानी अनुशासन नहीं लाते तब तक मोटिवेशन कुछ

    उखाड़ नहीं सकता। अगर आप इस बात को अच्छी तरह समझना चाहते हैं तो यह कहानी अंत तक सुने। हो सकता है यह कहानी आपकी जिंदगी बदल दे। छोटे से कस्बे में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वो बहुत बड़े सपने देखा करता था। हर दिन वो सोचता मुझे जिंदगी में कुछ ऐसा करना है जिससे लोग मुझे याद रखें। वो रोज मोटिवेशनल वीडियोस देखता, स्टोरीज पढ़ता और सक्सेसफुल लोगों की

    स्पीच सुनता। वो अपने आप से बार-बार कहता कल से मैं रोज इतने घंटे पढ़ाई करूंगा। अब से मैं हर चीज बदल दूंगा। और जब वह सोचता तो अंदर से जोश और एक्साइटमेंट महसूस करता। लेकिन वह जोश ज्यादा देर तक टिकता नहीं था। बस दो या तीन दिन बीतते और वो फिर अपनी आलसी आदतों पर लौट आता। कभी मन नहीं हुआ तो पढ़ाई छोड़ दी। कभी मौसम अच्छा नहीं लगा तो टहलने निकल गया। धीरे-धीरे उसकी जिंदगी बहानों का ढेर बन गई। बार-बार कोशिश करके असफल होने से वह अंदर

    से टूट गया था। उसे लगने लगा कि शायद वह कभी बदल नहीं सकता। एक दिन वो अपने दोस्त विवेक से मिला। विवेक को देखकर आरव हैरान रह गया। विवेक हर सुबह जल्दी उठता, अपनी दिनचर्या का पालन करता, पढ़ाई समय पर करता और हर दिन अपने आप को बेहतर बनाता। आरव ने पूछा, “यार विवेक, तू यह सब कैसे करता है? तू हर दिन इतना मोटिवेटेड कैसे रहता है?” विवेक मुस्कुराया और बोला, “मैं

    मोटिवेशन पर नहीं डिसिप्लिन पर भरोसा करता हूं।” आरव हैरान रह गया और बोला, “क्या? लेकिन सब तो कहते हैं मोटिवेशन ही सक्सेस की कूंजी है। विवेक ने ना सिर हिलाया और बोला कल सुबह सूरज निकलने से पहले मेरे साथ नदी किनारे चलना। मैं तुझे कुछ दिखाना चाहता हूं। अगली सुबह विवेक के साथ आरव नदी किनारे पहुंचा। वहां पर एक बूढ़ा मछुआरा बैठा था। उसके हाथ सख्त थे और आंखों में

    अनुभव की गहराइयां थी। विवेक ने कहा दादा जी क्या आप को वह कहानी सुना सकते हैं जो आपने मुझे सुनाई थी? मछुआरे ने मुस्कुराते हुए आरव को देखा। बेटा क्या तुम इस नदी को देख रहे हो? मैं रोज इसी वक्त यहां पर आता हूं। चाहे सर्दी हो, बारिश हो या धूप। मैं हर दिन अपना जाल डालता हूं और सब्र के साथ मछलियों का इंतजार करता हूं। किसी दिन मुझे अच्छी मछलियां मिलती हैं। किसी दिन बेकार

    मछलियां मिलती हैं और किसी दिन मिलती ही नहीं। लेकिन मैं आना नहीं छोड़ता। जानते हो क्यों? आरव ने सोचा और फिर बोला क्योंकि आपको मछली पकड़ना पसंद है। मछुआरा हल्के से हंसा। नहीं बेटा यह मेरा शौक नहीं है। यह मेरी जिम्मेदारी है। अगर मैं सिर्फ उस वक्त आता जब मेरा मन करता है तो मेरा परिवार भूखा रह जाता। मैं मोटिवेशन का इंतजार नहीं करता। मैं अनुशासन पर यकीन रखता हूं। फिर मछुआरे ने बांस के पेड़ की तरफ इशारा किया और बोला, क्या तुमने बांस के पेड़ की कहानी सुनी है? आरव ने सिर हिलाया नहीं। मछुआरा बोला एक किसान ने एक बार बांस का बीज

    बोया। वो हर दिन उसे पानी देता। धूप देता और उसकी देखभाल करता। एक साल बीता कुछ नहीं हुआ। दूसरा साल बीता फिर भी कुछ नहीं हुआ। तीसरा यहां तक कि चौथा साल भी बीत गया। फिर भी जमीन से कुछ नहीं उगा। लोग उस पर हंसते कि वो अपना समय बर्बाद कर रहा है। लेकिन किसान नहीं रुका। और पांचवें साल अचानक सिर्फ कुछ ही हफ्तों में बांस का पेड़ 90 फीट तक ऊंचा हो गया। क्यों?क्योंकि शुरुआत के 4 साल वो जमीन के अंदर अपनी जड़े मजबूत कर रहा था। अगर किसान हार

    मान लेता तो वह कभी भी उसे बढ़ता हुआ नहीं देख पाता। मछुआरे ने मुस्कुरा कर कहा बेटा डिसिप्लिन भी उसी बांस की तरह है। शुरुआत में कोई नतीजा नहीं दिखता। लेकिन अंदर ही अंदर कुछ बड़ा बन रहा होता है और जब सही समय आता है तो सफलता इतनी तेजी से बढ़ती है कि लोग हैरान रह जाते हैं। आरव के अंदर कुछ बदल गया। उसे एहसास हुआ कि अब तक वो मोटिवेशन के पीछे भाग रहा था। जबकि उसे अनुशासन की जरूरत थी। उसने

    यह तय किया कि अब से वह कोई एक्सक्यूज नहीं करेगा। हर दिन एक समय पर उठेगा। हर दिन पढ़ाई करेगा। व्यायाम करेगा और अपने लक्ष्य पर काम करेगा। चाहे उसका मन हो या ना हो। क्या आप भी आरव की तरह अपने सपनों के लिए तैयार हैं? तो याद रखिए

    मोटिवेशन नहीं डिसिप्लिन ही असली ताकत है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको यह दूसरी कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

  • Powerful Motivational Story – खुद को कम मत समझो 👇

    बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में एक साधारण आदमी रहता था। उसका काम था पहाड़ पर जाकर दिनभर पत्थर तोड़ना। यह काम कठिन था, थकाऊ था। लेकिन उस आदमी को अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। वह सुबह काम पर जाता, दिनभर मेहनत करता और शाम को थोड़े बहुत पैसे लेकर लौट आता। उसी पैसे से अपने परिवार का

    गुजारा चलता था। रात को अपने घर आकर वो अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताता और फिर आराम से सो जाता। यही उसकी रोजमर्रा की जिंदगी थी। लेकिन एक दिन काम खत्म करके घर लौटते समय उसके मन में एक विचार आया क्या यही जिंदगी है? सुबह से शाम तक पत्थर तोड़ो और उसके बदले में इतने कम पैसे मिले कि मुश्किल से गुजारा हो पाए। काश मेरे पास कोई ऐसी शक्ति होती कि मैं जो चाहूं वो बन पाता। वो गहरी सोच में डूबा हुआ घर पहुंचा। खाना उसके आगे रखा गया लेकिन उसका ध्यान

    अपने विचार में ही डूबा हुआ था। धीरे-धीरे वह सोने लगा और नींद में चला गया। तभी उसे एक अजीब सपना आया। वो देखता है कि रोज की तरह वो अपने काम से घर लौट रहा है और रास्ते में उसे एक बहुत ही आलीशान मकान दिखा। घर इतना शानदार था कि देखकर उसके मन में ख्याल आया काश यह घर मेरा होता। काश मैं इसका मालिक होता। और जैसे ही उसने यह सोचा पल भर में वही घर उसका हो गया। वह उस घर के अंदर था। उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। सचमुच जो उसने चाहा वो उसे मिल गया। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई।

    अचानक उसने एक शोर सुना। दरवाजे पर जाकर देखा तो उसे एक बहुत बड़ी रैली दिखाई दी। लोग जोर-जोर से नारे लगा रहे थे। बीच में एक नेता खड़ा था और लोग उसके नाम के जयकारे कर रहे थे। वो सोचने लगा मैं इस आलीशान घर का मालिक हूं। लेकिन असली ताकत तो उस नेता के पास है। अगर मैं वह नेता बन जाऊं तो हजारों लोग मुझे देखने के लिए तरसेंगे। बस इतना सोचना था कि वो नेता बन गया। चारों ओर लोगों की भीड़, नारे सब उसके लिए कर रहे थे। वो खुशी से पागल हो गया। लेकिन यह

    खुशी भी ज्यादा देर तक नहीं टिकी। तभी धूप बढ़ने लगी। कड़ी गर्मी और रोशनी से उसका सिर चकराने लगा। पसीने से लथपथ होकर वह बैठ गया और उसे एहसास हुआ इस नेता से भी कोई ताकतवर है और वह है सूरज। असली ताकत तो उसी की है। उसके मन में विचार आया काश मैं सूरज बन जाऊं और पलक झपकते ही वह सूरज बन गया। पूरा संसार अब उसकी रोशनी से जगमगा उठा। उसे लगा कि अब इस दुनिया में उससे ताकतवर कोई नहीं है। लेकिन यह खुशी भी ज्यादा देर तक नहीं रही। कुछ ही देर बाद

    आसमान में बादल खिराए। सूरज की रोशनी पूरी तरह ढक गई। उसने महसूस किया कि बादल तो उससे भी ताकतवर है और सोचने लगा काश मैं बादल बन जाऊं। और इतना सोचते ही वो बादल बन गया और आसमान में उड़ने लगा। उसे लगने लगा कि अब कोई उसकी बराबरी नहीं कर सकता। वो जहां चाहे वहां बरस सकता था और सुनामी ला सकता था। लेकिन अचानक तेज हवाएं चलने लगी और उस बादल को इधर-उधर उड़ाने लगी। उसके मन में ख्याल आया हवा तो बहुत शक्तिशाली है। काश मैं हवा बन जाऊं। और यह बोलते ही वो हवा बन गया। अब वह चाहे तो धीरे-धीरे उड़े या चाहे आंधी बनकर सब कुछ बहा ले जाए। उसे लगा अब सचमुच दुनिया में

    ताकतवर मैं ही हूं। लेकिन तभी उसके सामने एक पत्थर का पहाड़ आया। उसने पूरी ताकत लगाई। आंधी बनकर भी उड़ा लेकिन उसे 1 इंच भी नहीं हिला पाया। उसने हैरानी के साथ सोचा तो इस दुनिया में हवा से भी ज्यादा शक्तिशाली कोई है तो वह है यह पहाड़। काश मैं यह पहाड़ बन जाऊं। और इतना सोचते ही वो मजबूत पहाड़ बन गया। उसे लगने लगा कि अब कोई भी ताकत उसे हिला नहीं सकती। लेकिन अचानक उसे दर्द होने लगा जैसे कोई आदमी उसे चोट पहुंचा रहा हो। उसने देखा कि एक आदमी हथौड़ी लेकर पत्थर तोड़ रहा था। उसे झटका लगा। यह कैसे हो सकता है? पहाड़ जैसे मजबूत को भी

    कोई तोड़ सकता है। आखिर इतनी ताकत किसके पास है? उसके मन में ख्याल आया काश मैं वही इंसान बन जाऊं जो इस पत्थर को तोड़ रहा है। लेकिन इस बार उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई। वो दर्द से तड़पता रहा। तभी उसका सपना टूटा। वो घबरा कर उठा और उसने आईने में अपने आप को देखा। तब उसे समझ में आया। सपने में मैं वह इंसान इसलिए नहीं बन पाया क्योंकि असलियत में मैं वह इंसान ही हूं जो पहाड़ को तोड़ सकता है। मैं वही हूं जिसकी मेहनत से हर कुछ संभव है। उस दिन उसे यह सच्चाई समझ आई। कभी भी अपने आप को कम मत

    समझो। तुम्हारे अंदर ही सबसे बड़ी ताकत है। अगर तुम अपने आप को कम आंकते हो तो दुनिया तुम्हें और भी कम समझेगी। लेकिन अगर तुम अपनी असली ताकत को पहचान लोगे तो तुम्हें कोई रोक नहीं सकता। सबसे बड़ी शक्ति तुम्हारे अंदर ही है। दोस्तों, अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है, तो आपको यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

  • सबसे ताकतवर जानवर हाथी को मानते है और जंगल का राजा शेर को क्यो कहते है | Hindi Motivational Stories 👇

    जब भी हम जानवरों की बात करते हैं तो अक्सर हमारे दिमाग में हाथी की ताकत या चीते की रफ्तार का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जंगल का राजा आखिर शेर ही क्यों होता है? असल में शेर के अंदर ऐसे पांच खास गुणन हैं जो ना सिर्फ उसे

    जंगल का राजा बनाते हैं बल्कि अगर हम इंसान भी इन गुणों को अपनी जिंदगी में उतार लें तो हम भी अपने लक्ष्य और जीवन के राजा बन सकते हैं। आइए जानते हैं शेर के वो पांच अद्भुत गुण और यह पांचवा गुण। तो इतना जरूरी है कि उसके बिना कोई भी सफलता अधूरी है। पहला आत्मविश्वास। शेर जब चलता है तो उसके चेहरे पर घमंड नहीं बल्कि एक

    ठहराव और भरोसा होता है। वह जानता है कि वह कौन है और उसे क्या करना है। वो ना तो बिना वजह डरता है और ना ही किसी को डराने की कोशिश करता है। उसका आत्मविश्वास ही उसे सबकी नजर में खास बनाता है। दूसरा स्पष्ट लक्ष्य और फोकस शेयर। जब शिकार करता है तो वह बार-बार कोशिश नहीं करता। वो इंतजार करता है, सही वक्त देखता है और एक

    ही बार में वार करता है। उसका लक्ष्य बिल्कुल साफ होता है। जिंदगी में भी जब तक हम अपना फोकस नहीं तय करेंगे तब तक हम सिर्फ दौड़ते रहेंगे। पहुंचेंगे कहीं नहीं। तीसरा साहस और निर्णय क्षमता। शेर कभी भी पीछे नहीं हटता। भले सामने हाथी ही क्यों ना खड़ा हो वो डर से नहीं। साहस और रणनीति से आगे बढ़ता है। वह सही वक्त पर सही फैसला लेता है और उसी पर कायम रहता है। चौथा जिम्मेदारी शेर अकेला चलता है। लेकिन जब बात अपने समूह की आती है तो वह सबसे पहले खड़ा

    होता है। अपने परिवार की सुरक्षा हो या पूरे इलाके की हिफाजत शेर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता। एक असली राजा वह होता है जो खुद से पहले दूसरों की सोचता है। पांचवा गुण जानने से पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें। पांचवा अनुशासन। शेर की हर दिनचर्या में एक पैटर्न होता है। वो कब उठेगा, कब शिकार करेगा, कब आराम करेगा, सब तय होता है। उसकी ताकत सिर्फ शरीर में नहीं उसके अनुशासन में भी छुपी होती है। जिंदगी में कोई भी बड़ी सफलता हर दिन की मेहनत,

    अनुशासन और निरंतरता से ही मिलती है। यही वह पांच गुण है जो अगर हम अपने जीवन में उतार लें तो हम भी अपने भाग्य, अपने सपनों और अपने लक्ष्य के राजा बन सकते हैं। आपने शेर के यह पांच अनमोल गुण सीख लिए।

    लेकिन क्या आप जानते हैं एक सच्चे दोस्त की क्या पहचान होती है? अगर जानना चाहते हैं तो इसे शेयर करें ताकि नेक्स्ट स्टोरी लेकर आए।

  • आराम चाहिए या सपना | Motivational for UPSC Aspirants 👇

    यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर विद्यार्थी के सामने यह सवाल

    यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर विद्यार्थी के सामने यह सवाल हर दिन खड़ा होता है।

    क्या मैं थोड़ी देर और आराम करूं या अपने सपने को याद करके पढ़ाई शुरू करूं? यही पल आपके भविष्य का फैसला करता है। आराम आसान है। बिस्तर पर लेटना आसान है। दोस्तों के साथ घंटों बातें करना आसान है। सोशल मीडिया पर स्क्रोल करना आसान है। यह सब आपको तात्कालिक खुशी देता है। लेकिन यही

    आराम धीरे-धीरे आपके सपने को निगल जाता है। क्योंकि आराम आपको वहीं रोक देता है जहां आप हैं। यूपीएसएससी सिर्फ एक परीक्षा नहीं है। यह आपके धैर्य, अनुशासन और समर्पण को जानने का जरिया है। यह परीक्षा केवल किताबों से नहीं बल्कि आपके आत्मनियंत्रण और त्याग से पास होती है। हर बार जब आप कहते हैं चलो थोड़ी देर आराम कर लूं तब आपको याद रखना चाहिए कि

    हजारों प्रतियोगी इस समय पढ़ रहे हैं और वही कल आपसे आगे निकलेंगे। सपना कठिन है क्योंकि सपने को पूरा करने के लिए आपको हर दिन अपनी सीमा से आगे बढ़ना पड़ता है। कभी नींद छोड़नी पड़ती है। कभी पार्टियों को ना कहना पड़ता है। कभी दोस्तों से दूरी बनानी पड़ती है। लेकिन यह कठिनाई ही आपके भविष्य को महान बनाती है। सपना आपको वहां ले जाता है। जहां आप हमेशा से जाना चाहते थे। फर्क आपके ज्ञान में नहीं पड़ता। क्योंकि यूपीएससी की तैयारी करने वाले

    अधिकतर छात्रों के पास किताबें वही होती हैं, नोट्स वही होते हैं, कोचिंग वही होती है। फर्क सिर्फ एक चीज में पड़ता है आपके निर्णय में। आपका हर छोटा निर्णय तय करता है कि आप किस ओर बढ़ रहे हैं। आराम की ओर या अपने सपने की ओर। आज का एक घंटा आराम आपको तसल्ली देगा। लेकिन कल वही घंटा आपको पछतावे में डुबो देगा। आज की मेहनत आपको थकाएगी। लेकिन कल वही मेहनत

    आपको आईएएस, आईपीएस या आईएफएस की कुर्सी पर बैठाएगी। दुनिया आपको आज नहीं पहचानती। लेकिन आपकी लगन कल पूरी दुनिया को आपको सलाम करने पर मजबूर कर देगी। जब आप थक जाएं तो अपना सपना याद करें। खुद से पूछें मैंने यह सफर क्यों शुरू किया था? भविष्य की तस्वीर देखिए। खुद को उस पद पर कल्पना कीजिए जिसके लिए मेहनत कर रहे हैं। छोटे कदम उठाइए। पूरे दिन का नहीं तो कम से कम अगले 30 मिनट का संकल्प लें और पढ़ना शुरू करें। तुलना आराम से नहीं

    लक्ष्य से करें। हमेशा खुद से पूछें क्या आराम मेरे लक्ष्य से बड़ा है? विजेता वही है जो हर बार आराम को ठुकराकर अपने सपने को चुनता है। क्योंकि आराम आपको आज सुकून देगा। लेकिन सपना आपको जीवन भर सम्मान देगा। यूपीएसएससी सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं है। यह एक जिम्मेदारी है। यह सेवा है। यह राष्ट्र निर्माण का सपना है। जब भी आपका मन कहे कि बस अब और नहीं हो रहा तब याद रखिए आपकी हार सिर्फ आपकी हार नहीं है। यह उन लोगों की भी हार है जो आपको देखकर उम्मीद लगाते हैं। आपकी जीत सिर्फ आपकी

    जीत नहीं होगी। यह पूरे समाज की जीत होगी। अंत में आपको हर दिन खुद से एक सवाल पूछना है। क्या मैं आराम चुनूंगा या सपना?क्योंकि यही सवाल आपके आने वाले जीवन का उत्तर तय करेगा। तो दोस्तों जब भी मन कहे आराम कर लो तब अपने आप से कहिए मुझे आराम नहीं चाहिए। मुझे अपना सपना चाहिए। अगर आप भी अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं तो अभी से मेहनत शुरू कीजिए।

    क्योंकि यूपीएसएससी कोई मंजिल नहीं है। यह तो सिर्फ शुरुआत है उस महान जीवन की जो आप जीने वाले हैं।

  • समय बर्बाद मत करो | Motivational Stories in Hindi

    कभी-कभी जिंदगी में हम सोचते रहते हैं। मैं यह बाद में कर लूंगा। कल से शुरू करूंगा। अभी तो बहुत समय है। जल्दी किस बात की है? लेकिन यही छोटी सी आदत धीरे-धीरे हमारे सपनों और लक्ष्यों को निगल जाती है। आज के दौर में जहां ध्यान भटकाने वाली चीजें हर जगह है। लगातार स्क्रोलिंग, नोटिफिकेशन की बौछार, वहां वक्त बर्बाद करना बहुत आसान है। लेकिन समय सिर्फ घड़ी में टिक टिक नहीं करता। वह हमारे भविष्य की दिशा तय करता है। अगर आप भी जिंदगी के मौके गवाना नहीं चाहते तो इस कहानी को पूरे ध्यान से सुनिए। यह सिर्फ एक कहानी नहीं एक चेतावनी है। एक बार की

    बात है भारत के एक व्यस्त शहर में एक लड़का रहता था। उसका नाम था विजय। वो बेहद आलसी था। जरूरी कामों को हमेशा टालता रहता। इस वजह से उसकी पढ़ाई और जीवन दोनों बिछड़ने लगे थे। उसके माता-पिता और टीचर्स ने कई बार उसे समझाया कि समय की अहमियत को समझो लेकिन विजय ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। वो अपने भविष्य को लेकर बिल्कुल भी परेशान नहीं था और अपना समय बेवजह की चीजों में गवाता रहा। एक दिन उस शहर में एक मशहूर साधु महाराज आए। वे अपने ज्ञान और गहराई भरे विचारों के लिए जाने जाते थे। बहुत से लोग उनसे मिलने आए और ज्ञान

    प्राप्त किया। विजय ने सोचा अगर मैं इस साधु से कुछ सलाह ले लूं तो शायद मैं भी अपने दोस्तों की तरह सफल बन जाऊं। एक दिन उसने साधु को नदी किनारे कुछ लोगों से बात करते हुए देखा। जब भीड़ चली गई तो विजय उनके पास गया और बोला महाराज कृपया मेरी मदद कीजिए। मैं खुद को एक असफल इंसान महसूस करता हूं। मेरे सभी दोस्त मुझसे आगे निकल चुके हैं। मैं भी सबसे अच्छा बनना चाहता हूं। मुझे बताइए मैं क्या करूं? साधु ने उसकी आंखों में देखा और शांत आवाज में बोले, बेटा तुम खुद को खोया हुआ इसलिए महसूस कर रहे हो क्योंकि तुम समय का मूल्य

    नहीं समझते। तुम हर काम को टालते हो और कीमती पल बेकार कर देते हो। मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं जो शायद तुम्हारी आंखें खोल दे। विजय ध्यान से सुनने लगा और साधु ने कहानी शुरू की। बहुत समय पहले एक राजा हुआ करता था। वह बहुत दयालु और महान था। वह अपनी प्रजा से बहुत प्यार करता था और हर किसी की मदद करता था। एक दिन राजा को अपने बचपन का एक पुराना दोस्त मिला। वह दोस्त अब गरीब, बेरोजगार और समाज में पिछदा हुआ हो चुका था। वह हर बात का दोष दूसरों को देता था और कभी अपनी गलती नहीं मानता था। राजा ने उसे देखा और पहचान

    लिया। दुखी होकर उसने दोस्त को पास बुलाया और उसके हाल पूछे। दोस्त ने लंबी सांस लेकर कहा महाराज मुझे समझ नहीं आता लोग मुझे निकम्मा क्यों समझते हैं जब भी कहीं पर काम मांगने जाता हूं लोग कहते हैं मैं समय पर काम नहीं करता मुझे नहीं पता अब क्या करूं। राजा ने थोड़ी देर सोचा और कहा एक शर्त मानो आज सूरज डूबने से पहले तुम मेरे राज खजाने से जितना सोना और जवाहरात लेना चाहो ले सकते हो। जो कुछ भी तुम इकट्ठा कर लोगे वह सब तुम्हारा होगा। दोस्त बहुत खुश हुआ। उसने राजा को धन्यवाद दिया और सोचा पहले मैं घर जाकर कुछ थैले

    और बोरे ले आता हूं ताकि उसमें ज्यादा से ज्यादा सोना भर सकूं। इसलिए वह दौड़ता हुआ घर गया। उसने अपनी पत्नी को यह बात बताई। पत्नी बहुत खुश हुई और बोली जल्दी जाओ खजाना लाओ। लेकिन उसने कहा पहले बहुत भूख लगी है। थोड़ा खा लूं। पत्नी ने जल्दी से खाना तैयार किया। लेकिन वह धीरे-धीरे खाने लगा। यह सोचकर कि अब भी बहुत समय है। खाने के बाद उसे नींद आने लगी। उसने सोचा थोड़ी देर सो लूं फिर खजाना लेने जाऊंगा। वो गहरी नींद में चला गया। 2 घंटे बाद उसकी पत्नी ने उसे उठाया। लेकिन अभी भी दोपहर ही थी तो उसने गुस्से में कहा। इतनी जल्दी

    क्यों उठा दिया? वो कुछ बोरे लेकर निकला। लेकिन रास्ते में धूप बहुत तेज थी। उसने सोचा इस पेड़ की छांव में थोड़ा आराम कर लूं। फिर आगे बढूंगा। ठंडी हवा चल रही थी और वह फिर सो गया। इस बार नींद और गहरी थी। जब आंख खुली तब तक सूरज डूब चुका था। वो भागता हुआ महल पहुंचा लेकिन देर हो चुकी थी। खजाने के दरवाजे बंद हो चुके थे। वो वहीं खड़ा रह गया। पछतावे से भरा हुआ। उसने अपनी किस्मत खुद खोई थी क्योंकि उसने समय का मूल्य नहीं समझा। साधु ने कहानी पूरी की और विजय की ओर देखा। विजय चुप था। उसकी आंखें नीचे झुकी हुई थी। उसे अपनी

    गलती समझ में आ चुकी थी। शर्मिंदा होकर उसने साधु का धन्यवाद किया और वादा किया कि अब वह बदल जाएगा। अब उसने जाना समय अनमोल है। जो एक बार चला गया वह कभी लौट कर नहीं आता। विजय ने घर जाकर मेहनत करना शुरू किया। काम को टालना बंद किया। जो भी काम होता समय पर पूरा करता। धीरे-धीरे उसके जीवन में बदलाव आने लगा। लोग उसकी तारीफ करने लगे और वह पहले से कहीं ज्यादा खुश और आत्मविश्वासी हो गया। किसी महापुरुष ने कहा है जो समय को नजरअंदाज करता है वही सबसे ज्यादा उसका मूल्य समझता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

    आप कुछ भी हासिल कर सकते हो। बस अगर आप समय का सही इस्तेमाल करो। लेकिन अगर आपने उसे यूं ही बहने दिया तो एक दिन पछतावे के आंसू ही बचेंगे। अपने समय का सही उपयोग कीजिए। परिवार के साथ कीमती पल बिताइए। दोस्तों संग हंसिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करिए। तभी जिंदगी सच में पूरी और सार्थक लगेगी। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो एक लाइक दीजिए और कमेंट करके बताइए आपकी जिंदगी में समय की सबसे कीमती सीख क्या रही। मैं जल्द लौटूंगा एक और प्रेरणात्मक कहानी के ||