
बिहार चुनाव जीतने के बाद कुछ लोगों ने मीडिया के कुछ मोदी प्रेमियों ने फिर से यह कहना शुरू किया है भाजपा मोदी हमेशा 24/7 इलेक्शन बोर्ड में ही रहते हैं। मैं समझता हूं चुनाव जीतने के लिए इलेक्शन मोड नहीं 24ों घंटे इलेक्शन मोड में रहना जरूरी होता है।
इमोशनल मोड में रहना जरूरी होता है। इलेक्शन मोड में नहीं। जब मन के भीतर एक बेचैनी सी रहती है कि एक मिनट भी घमाना नहीं है। गरीब के जीवन से मुश्किलें कम करने के लिए, गरीब को रोजगार के लिए, गरीब को इलाज के लिए, मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बस मेहनत करते रहना है। इस इमोशन के साथ इस भावना के साथ सरकार लगातार जुटी रहती
है। तो उसके नतीजे हमें चुनाव परिणाम के दिन दिखाई देते हैं। बिहार में भी हमने अभी-अभी यही होते देखा है। साथियों, रामनाथ जी से जुड़े एक और किस्से का मुझसे किसी ने जिक्र किया था। यह बात तब की है जब रामनाथ जी को विदिशा से जनसंघ का टिकट मिला था। उस समय नानाजी देशमुख जी ने उनकी इस बात पर चर्चा हो रही थी कि यह संगठन महत्वपूर्ण होता है या
चेहरा। तो नाना जी देशमुख ने रामनाथ जी से कहा था कि आप सिर्फ नामांकन करने के लिए आएंगे और फिर चुनाव जीतने के बाद अपना सर्टिफिकेट लेने के लिए आ जाइएगा। फिर नाना जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के बल पर रामनाथ जी का चुनाव लड़ा और उन्हें जीता कर दिखाया। वैसे यह किस्सा बताने के पीछे है। मेरा यह मतलब नहीं है कि उम्मीदवार सिर्फ नामांकन करने आए। मेरा मकसद है भाजपा के अनगिनत कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओं के समर्पण की ओर आपका ध्यान
आकर्षित करना है। साथियों, भारतीय जनता पार्टी के लाखों करोड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने पसीने से भाजपा की जड़ों को सींचा है और आज भी सींच रहे हैं। और इतना ही नहीं केरला, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर ऐसे कुछ राज्यों में हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपने खून
से भी भाजपा की जड़ों को सींचा है। जिस पार्टी के पास ऐसे समर्पित कार्यकर्ता हो उनके लिए सिर्फ चुनाव जितनात धेय नहीं होता बल्कि वो जनता का दिल जीतने के लिए सेवा भाव से उनके लिए निरंतर काम करते हैं।
