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  • Paisa ka ghamand koun karta hai, पैसा पैसे दौलत

    पैसे का घमंड केवल दो तरह के लोग ही करते हैं। एक जिन्हें खानदानी जायदाद मिली हो और दूसरे जिसने धोखे और बेईमानी से पैसे कमाए हो। ईमानदारी से सफल होने वाला व्यक्ति अपनी दौलत पर कभी घमंड नहीं करता।

  • How man was invented, Manav ka janm kaise hua ( मानव का जीवन धरती पर कैसे हुआ ) to


    How man was invented, Manav ka janm kaise hua ( मानव का जीवन धरती पर कैसे हुआ )

    एवोल्यूशन सिर्फ एक थ्योरी है या फैक्ट है? हमारे सबसे पुराने पूर्वज एक्चुअली में आए कहां से? नमस्कार मित्रों, आज से करीब 4 बिलियन साल पहले लाइफ की शुरुआत होती है धरती पर। बिलियंस ऑफ इयर्स एवोल्यूशन के बाद अनगिनत प्रकार के प्लांट्स और एनिमल स्पीशीज उभर कर आते हैं। ये सारे पेड़-पौधे, जानवर और जीव जो आप देखते हैं आज के दिन वो सब आए एववोल्यूशन के चलते। इनमें से एक स्पीशीज होती है होमोसेपियंस की भी यानी इंसान। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर इंसान बंदरों से आए तो आज के दिन भी हमें बंदर क्यों देखने को मिलते हैं? ये सारे बंदर

    चिंपांजीज और गोरिल्लास ये सब इंसानों में इवॉल्व क्यों नहीं हो जाते? ऐसे सवाल अक्सर उठाए जाते हैं लोगों के द्वारा। कुछ लोग तो एवोल्यूशन को ही नकार देते हैं। कहते हैं ये झूठ है? आखिर कितनी सच्चाई है इस एवोल्यूशन की थ्योरी में। यह थ्योरी है या फैक्ट भी है? और कैसे ये अलग-अलग प्रकार के जीव इवॉल्व किए? आइए जानते हैं आज के इस वीडियो में। [संगीत] शुरुआत से ही दोस्तों सबसे बड़े मिसकसेप्शन को क्लियर कर देते हैं। एववोल्यूशन की थ्योरी कभी यह नहीं कहती कि बंदर इंसान बन गए बल्कि यह कहा जाता है कि सारे चिंपांजीस गोरिल्लास, बंदरों और

    इंसानों के पूर्वज एक ही रहे हैं और वो पूर्वज आज के दिन जिंदा नहीं है। एववोल्यूशन को अगर आप विजुअलाइज करना चाहते हो तो एक पेड़ इमेजिन कीजिए। एक पेड़ की शुरुआत होती है सिर्फ एक स्टेम से। फिर ऊपर जाकर टहनियां बनती है। फिर उन टहनियों से और छोटी-छोटी टहनियां बनती हैं। ऐसे ही अगर आप आगे चलते रहे तो जो टिप आप देखेंगे इस पेड़ का एंड पॉइंट जो है वो आज के दिन सारे जिंदा जीव है। लेकिन एक सवाल तो आपके दिमाग में अभी-अभी आएगी कि जो हमारे पूर्वज थे इनमें से कुछ इंसान बने, कुछ चिंपांजी बने और कुछ बंदर बने। ऐसा क्यों हुआ? इसका जवाब वीडियो में आगे

    आप समझेंगे। साल 1859 में चार्ल्स डार्विन ने अपनी एक ऐतिहासिक किताब लिखी थी ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज। इस किताब में उन्होंने थ्योरी ऑफ नेचुरल सेक्शन के बारे में बात करी थी। अब थ्योरी ऑफ़ नेचुरल सिलेक्शन सुनकर आपको लगेगा कि कोई बड़ी मिस्टिकल सी चीज होने लग रही है। सभी जीव में कोई इनर इंजीनियरिंग चलने लग रही है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। बड़ा सिंपल फंडा है। जब भी रिप्रोडक्शन होती है इंसानों में, जानवरों में, पेड़-पौधों में तो जींस जो है वो एक से दूसरे जिम में जाती है। हमारी जींस बच्चों में पास ऑन होती है और जब भी यह

    होता है तो जींस में म्यूटेशन देखने को मिलती है। थोड़े बहुत बदलाव आ जाते हैं जींस में और कुछ वेरिएशंस देखने को मिलते हैं। जैसे कि फॉर एग्जांपल आपकी ब्राउन आंखें हैं और आपके बच्चों में ग्रीन आंखें देखने को मिलती है। इसका मतलब है कि अचानक से एक म्यूटेशन आ गई है उनके जींस में। आंखों को कलर देने वाली जींस में। हो सकता है आगे आने वाले बच्चों में भी ग्रीन आंखें देखने को मिले। अक्सर ये जो वेरिएशंस होती है इनमें से कुछ फायदेमंद होती है तो कुछ नुकसानदायक रहती है अपने एनवायरमेंट के चलते। तो कुछ सर्वाइव कर

    पाते हैं। कुछ डायट हो जाती हैं। इसी प्रोसेस को कहा जाता है नेचुरल सेक्शन। फॉर एग्जांपल मान लो एक मेंढक है जो ब्राउन कलर का है। जंगल में रहता है। इसके पांच बच्चे हैं जिनमें से चार ब्राउन कलर के हैं और एक ग्रीन कलर का है। यह ग्रीन कलर का मेंढक बड़े अच्छे से डिसगाइस कर पाता है। अपने आप को कैमोफ्लाज कर पाता है ग्रीन कलर के पेड़-पौधों में। इसके चलते इसको एक एडवांटेज मिलता है। एक दिन एक सांप आकर ब्राउन कलर के मेंढकों को खा जाता है क्योंकि वह आसानी से दिख पाते हैं। लेकिन ये ग्रीन कलर का मेंढक दिख नहीं पाता पाता बच जाता है और आगे आने

    वाली पीढ़ियां अब इसकी ग्रीन कलर की। कुछ इसी तरीके से मोटे-मोटे तौर पर थ्योरी ऑफ नेचुरल सिलेक्शन काम करता है। यहां पर एक टर्म को यूज़ किया जाता है सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट। कई मोटिवेशनल स्पीकर्स इस टर्म का मिसयूज करते हैं यह कहकर कि जो फिजिकली फिट लोग हैं, सिर्फ वही लोग सर्वाइव कर पाएंगे। लोग इमेजिन करते हैं कि जिसके बड़े-बड़े बाईसेप्स होंगे, ट्राइसेप्स होंगे, सिक्स पैक्स होंगे, उन्हीं लोगों का यहां पर सर्वाइवल देखने को मिलेगा। लेकिन यह कहना एक्चुअली में गलत होगा। चार्ल्स डार्विन के अकॉर्डिंग फिट का मतलब

    है कि जो अपने आसपास के एनवायरमेंट में सबसे अच्छे से फिट बैठ पाए। अब आपने बेसिक समझ लिए है। आप समझते हैं कि एववोल्यूशन एक्चुअली में हुआ कैसे? एवोल्यूशन के ट्री में अगर आप टाइम में पीछे जाते रहे तो हर किसी में आपको एक कॉमन एनसेेस्टर देखने को मिलेगा। कई बिलियन साल आगे चले तो एक बड़ा खास किस्म का बैक्टीरिया उभर कर आता है एववोल्यूशन के चलते साइनोबक्टीरिया यह पहला ऐसा बैक्टीरिया होता है जो फोटोसिंथेसिस कर पाता है यानी धूप का इस्तेमाल करके एनर्जी जनरेट करना इसमें पानी को भी एक फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया

    जाता है और एंड प्रोडक्ट यहां पर निकलता है ऑक्सीजन जो सारी स्पीशीज आज के दिन एक्सिस्ट करती है ये सब एक इक्विलिब्रियम में एकिस्ट करती है। एक ऐसा इक्विलिब्रियम जहां हर कोई फिट बैठा है।

    अपना राय कमेंट में जरूर दीजिए साथ में शेयर भी कीजिए Thankyou ❤️

  • Motivational quotes hindi motivation love

    हार तो वो सबक है, जो आपको बेहतर होने का मौका देगी..!!

  • Dharti ka Nirman kaise hua ( पृथ्वी का आविष्कार कैसे हुआ ) Bhagwan ne Dharti ka aavishkar kaise kiya

    इस तरह से सब कुछ शुरू हुआ। भगवान ने छह दिनों में ब्रह्मांड और उसमें मौजूद हर चीज़ बनाई। भगवान द्वारा पृथ्वी बनाने के बाद यह अंधेरा और खाली था, और इसमें कुछ भी नहीं बना था। लेकिन भगवान की आत्मा पानी के ऊपर थी।

    फिर भगवान ने कहा, “प्रकाश हो!” और प्रकाश हुआ। भगवान ने देखा कि प्रकाश अच्छा था और इसे “दिन” कहा। उन्होंने इसे अंधकार से अलग किया, जिसे उन्होंने “रात” कहा। भगवान ने सृष्टि के पहले दिन प्रकाश बनाया।

    सृष्टि के दूसरे दिन, भगवान ने बोला और पृथ्वी के ऊपर आकाश बनाया। उन्होंने ऊपर के पानी को नीचे के पानी से अलग करके आकाश बनाया।

    तीसरे दिन, भगवान ने बोला और पानी को सूखी भूमि से अलग किया। उन्होंने सूखी भूमि को “पृथ्वी” कहा, और उन्होंने पानी को “समुद्र” कहा। भगवान ने देखा कि उन्होंने जो बनाया था वह अच्छा था।

    फिर भगवान ने कहा, “पृथ्वी सभी प्रकार के पेड़ और पौधे पैदा करे।” और ऐसा ही हुआ। भगवान ने देखा कि उन्होंने जो बनाया था वह अच्छा था।

    सृष्टि के चौथे दिन, परमेश्वर ने बात की और सूर्य, चंद्रमा और तारों को बनाया। परमेश्वर ने उन्हें पृथ्वी पर प्रकाश देने और दिन और रात, ऋतुओं और वर्षों को चिह्नित करने के लिए बनाया। परमेश्वर ने देखा कि उसने जो कुछ बनाया था वह अच्छा था।
    सृष्टि के चौथे दिन, परमेश्वर ने बोला और सूर्य, चंद्रमा और तारे बनाए। परमेश्वर ने उन्हें पृथ्वी पर प्रकाश देने और दिन और रात, ऋतुओं और वर्षों को चिह्नित करने के लिए बनाया। परमेश्वर ने देखा कि उसने जो बनाया था वह अच्छा था।

    पाँचवें दिन, परमेश्वर ने बोला और पानी में तैरने वाली हर चीज़ और सभी पक्षियों को बनाया। परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा था, और उसने उन्हें आशीर्वाद दिया।

    सृष्टि के छठे दिन, परमेश्वर ने कहा, “सभी प्रकार के ज़मीनी जानवर हों!” और यह वैसा ही हुआ जैसा परमेश्वर ने कहा था। कुछ खेत के जानवर थे, कुछ ज़मीन पर रेंगते थे, और कुछ जंगली थे। और परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा था।

    फिर परमेश्वर ने कहा, “हम अपने स्वरूप में मनुष्य बनाएँ जो हमारे समान हों। उनका पृथ्वी और सभी जानवरों पर अधिकार होगा।”

    इसलिए परमेश्वर ने कुछ मिट्टी ली, उससे एक मनुष्य बनाया, और उसमें जीवन फूंक दिया। इस मनुष्य का नाम आदम था। परमेश्वर ने एक बगीचा लगाया जहाँ आदम रह सकता था, और उसे उसकी देखभाल करने के लिए वहाँ रखा।

    बगीचे के बीच में, परमेश्वर ने दो खास पेड़ लगाए- जीवन का पेड़ और अच्छाई और बुराई के ज्ञान का पेड़। परमेश्वर ने आदम से कहा कि वह बगीचे के किसी भी पेड़ से खा सकता है, सिवाय अच्छे और बुरे के ज्ञान के पेड़ के। अगर वह इस पेड़ से खाएगा, तो मर जाएगा।

    फिर परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य का अकेले रहना अच्छा नहीं है।” लेकिन कोई भी जानवर आदम का सहायक नहीं हो सकता था।

    इसलिए परमेश्वर ने आदम को गहरी नींद में डाल दिया। फिर परमेश्वर ने आदम की एक पसली ली और उससे एक स्त्री बनाई और उसे उसके पास ले आया।
    जब आदम ने उसे देखा, तो उसने कहा, “आखिरकार! यह मेरे जैसी है! इसे ‘नारी’ कहा जाए, क्योंकि यह पुरुष से बनी है।” यही कारण है कि एक पुरुष अपने पिता और माँ को छोड़ देता है और अपनी पत्नी के साथ एक हो जाता है।
    भगवान ने पुरुष और महिला को अपनी छवि में बनाया। उसने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनसे कहा, “बहुत से बच्चे और पोते पैदा करो और पृथ्वी को भर दो!” और भगवान ने देखा कि उसने जो कुछ बनाया था वह बहुत अच्छा था, और वह इस सब से बहुत प्रसन्न था। यह सब सृष्टि के छठे दिन हुआ।
    जब सातवाँ दिन आया, तो भगवान ने अपना काम पूरा कर लिया था। इसलिए भगवान ने अपने सभी कामों से विश्राम किया। उन्होंने सातवें दिन को आशीर्वाद दिया और इसे पवित्र बनाया, क्योंकि इस दिन उन्होंने अपने काम से विश्राम किया था। इस तरह भगवान ने ब्रह्मांड का निर्माण किया .
    Thankyou ❤️

  • Pashupalan loan Yojana ke liye online aavedan kaise karen,( पशुपालन लोन योजना ऑनलाइन आवेदन कैसे करें )

    🙏 नमस्कार दोस्तों!
    स्वागत है आप 📢 आज हम बात करेंगे पशुपालन लोन योजना की — और जानेंगे कि इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें, कौन पात्र है, कितना लोन मिलता है, और इसके फायदे क्या हैं।
    📌 अगर आप गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी पालन या डेयरी फार्मिंग से जुड़कर अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए बहुत खास है।तो चलिए शुरू करते हैं!

    🎯 सेगमेंट 1: योजना का परिचय
    📌 भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पशुपालन लोन योजना चलाई जाती है।
    🐄 इस योजना के तहत आप गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी, सूअर पालन, और डेयरी यूनिट शुरू करने के लिए लोन ले सकते हैं।
    💰 यह लोन बैंकों द्वारा बहुत ही आसान शर्तों पर दिया जाता है। साथ ही, कई राज्यों में सब्सिडी (छूट) भी दी जाती है।

    📝 सेगमेंट 2: पात्रता (Eligibility)
    ✅ भारत का नागरिक होना चाहिए✅ आयु: 18 से 65 वर्ष तक✅ पशुपालन का अनुभव या योजना होनी चाहिए✅ आधार कार्ड, बैंक खाता और निवास प्रमाण जरूरी

    📄 सेगमेंट 3: जरूरी दस्तावेज
    आधार कार्ड
    राशन कार्ड या निवास प्रमाण
    पासपोर्ट साइज फोटो
    बैंक पासबुक की कॉपी
    पशुपालन की योजना / प्रोजेक्ट रिपोर्ट
    जमीन से संबंधित दस्तावेज (अगर हैं)

    💻 सेगमेंट 4: ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
    👇 स्टेप बाय स्टेप प्रक्रिया:
    👉 सबसे पहले जाएं https://ahd.mahaonline.gov.in (राज्य के अनुसार वेबसाइट अलग हो सकती है)
    🖊️ “पशुपालन योजना” या “Animal Husbandry Loan Scheme” पर क्लिक करें
    👤 अपना रजिस्ट्रेशन करें – नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल डालें
    🗂️ लॉगिन करने के बाद योजना का चयन करें
    📤 जरूरी दस्तावेज अपलोड करें
    ✅ आवेदन पत्र को भरें और सबमिट करें
    📩 आवेदन का प्रिंट निकाल लें और रसीद संभाल कर रखें

    🏦 सेगमेंट 5: लोन और सब्सिडी की जानकारी
    💰 इस योजना के तहत आप ₹50,000 से लेकर ₹5 लाख तक का लोन ले सकते हैं।
    🎯 SC/ST, महिला उम्मीदवारों को विशेष छूट दी जाती है।
    🎁 कुछ राज्यों में 25% से लेकर 35% तक सब्सिडी भी मिलती है।

    📞 सेगमेंट 6: संपर्क जानकारी
    अगर आपको आवेदन में कोई समस्या हो रही है, तो आप अपने नजदीकी पशुपालन विभाग, CSC केंद्र या बैंक शाखा से संपर्क कर सकते हैं।

  • The Untold Truth about Ram’s Exile – Ram Mandir vs Babri Masjid Exposed…

    खत्म हुआ इंतजार सज गया राम दरबार। संसार को अभी आभा से आलोकित करने वाले सूर्यदेव, साक्षात शक्ति माता जगदंबा, समस्त जगह का पेट भरने वाली मां अन्नपूर्णा और शेषावतार के विग्रहों के भी प्राण प्रतिष्ठा की गई। यह वो मुद्दा है जिसने पूरे देश को जगझोर कर रख दिया।

    जिसने राजनीति को बदला और जिसने हमारी सामाजिक सोच को नई दिशा दी। नगर निगम हो या विकास प्राधिकरण उत्तर प्रदेश सरकार की हर संस्थाएं उसी प्रतिबद्धता के साथ उन्हें सम्मानित करने का काम [संगीत] [प्रशंसा] करेंगे।

    सबसे पहले बात करते हैं राम मंदिर का इतिहास। राम मंदिर के हिस्ट्री में बात आती है दोस्तों, अयोध्या की। अयोध्या उत्तर प्रदेश के सरयू नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन नगर है। यह नगर हिंदू धर्म के सात पवित्र नगरों यानी कि सप्तपुरियों में से एक है। वाल्मीकि रामायण और दूसरे पुराणों के अनुसार अयोध्या भगवान श्री राम की जन्मभूमि है। अयोध्या का उल्लेख वेद, महाभारत और कई धर्म ग्रंथों में मिलता है। हिंदुओं का मानना है कि जहां राम मंदिर है वहीं पर भगवान श्री राम का जन्म हुआ था।

    यहां पर एक मंदिर हुआ करता था जिसे बाबर के सेनापति मीर बाकिर ने ध्वस्त कर दिया था और फिर उस स्थान पर उस जगह पर एक मस्जिद बनवाई जिसे बाबरी मस्जिद कहा गया लेकिन सन 1949 में इस मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्ति अचानक से प्रकट हुई। इस घटना ने चारों तरफ तहलका मचा दिया। यह देखकर सबके होश उड़ गए। हिंदुओं ने इसे भगवान श्री राम का चमत्कार भी कहा। राम जन्मभूमि को लेकर पहला संघर्ष सन 1853 में हुआ। जब हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई। ब्रिटिश सरकार ने 1859 में विवाद को शांत करने के लिए एक बाढ़ लगवाई। तब से हिंदू बाढ़ चबूतरे पर पूजा

    करते और मुस्लिम भीतर नमाज पढ़ते। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया। लेकिन पक्ष में सुप्रीम कोर्ट चले गए। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने फैसला सुनाया कि पूरी जमीन रामलला को दी जाए। पूरी जमीन रामलला को दी गई और मुस्लिम पक्ष के लिए अलग से मस्जिद बनवाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का फैसला हुआ। 15 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री मोदी जी ने भूमि पूजन किया और फाइनली 22 जनवरी 2024 को जाकर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा भव्य समारोह के साथ हुई। करोड़ों राम भक्तों की कई

    वर्षों की तपस्या आज सफल हुई। आज राम मंदिर केवल एक भवन ही नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। राम मंदिर का यह संघर्ष केवल धार्मिक मुद्दा नहीं था। यह भारतीय आत्मा का पुनर्जागरण था। इस मंदिर में केवल पत्थर ही नहीं लगे। इसमें करोड़ों लोगों की श्रद्धा, बलिदान और संघर्ष की ईंटें जुड़ी हैं। अयोध्या आज फिर से जाग रहा है और हर भारतीय के दिल में श्री राम बसे हैं। यह था राम मंदिर का इतिहास। अब समझते हैं इसकी जानकारी। राम मंदिर की लंबाई है करीब 360 फीट यानी कि 110 मीटर। चौड़ाई है

    करीब 235 फीट यानी कि 72 मीटर्स। ऊंचाई है करीब 161 फीट यानी कि 49 मीटर्स। मंजिल की बात करें तो करीब तीन मंजिल है और हर एक मंजिल का अलग-अलग उद्देश्य और विशेषता है। पहली मंजिल ग्राउंड फ्लोर यानी कि भूतल। यह मंदिर का मुख्य मंजिल है जहां गर्भ गृह भी स्थित है। यहीं पर श्री राम लला की मूर्ति स्थापित है बाल रूप में। अब आता है यहां पर दूसरा मंजिल। यह भाग ध्यान और अध्ययन के लिए रखा गया है। यहां पर विशेष धार्मिक प्रवचन जैसे कि रामायण पाठ और सांस्कृत आयोजन भी हो सकता है। यह एक दर्शनीय मंजिल होगी। यहां से मंदिर परिसर और अयोध्या

    नगरी का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। इसमें कुछ आलेख पेंटिंग्स और शिल्प कार्य भी होंगे जो रामायण की घटनाओं को दर्शाते हैं। सदियों का संघर्ष ना जाने कितने बलिदान असंख्य प्रतीक्षा के बाद आज प्रभु श्री राम अपने भव्य मंदिर में विराजमान है। यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और संघर्षशील इतिहास का प्रतीक है। यह मंदिर हमें याद दिलाता है कि रास्ते में चाहे कितनी भी बाधाएं हो, कितनी भी दिक्कतें हो, सत्य और धर्म की विजय निश्चित है। आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लेते हैं कि हम भी रामलला की तरह करुणा, मर्यादा और न्याय के पथ पर चलेंगे। क्योंकि राम सिर्फ एक नाम नहीं राम है हमारी आत्मा का मूल्य। और राम मंदिर हमारी चेतना का मंदिर है । जय श्री राम …