
Up में अखिलेश यादव ने भाजपा को एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया है कि भाजपा उससे निकल नहीं पा रही है। यह चक्रव्यूह भारतीय जनता पार्टी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष से जुड़ा हुआ है और भाजपा इस वजह से परेशान है क्योंकि अखिलेश यादव अपने पीडीए के साथ किलेबंदी करे हुए हैं। आप जानते हैं कि यूपी में जल्द ही
विधानसभा के चुनाव होने हैं और ऐसे में अखिलेश यादव लगातार जो पीडीए का नारा दे रहे हैं इसमें भारतीय जनता पार्टी घिरती जा रही है। उस पर सवाल उठते जा रहे हैं कि आप पिछड़े दलित अल्पसंख्यकों को नजरअंदाज कर रहे हैं। उनकी अनदेखी कर रहे हैं और सिर्फ समाज के जो सामान्य वर्ग हैं उनको लेकर आगे बढ़ रहे हैं या फिर उनको अहम पद सौंप रहे हैं। ऐसे में
जब उत्तर प्रदेश में यूपी के प्रदेश अध्यक्ष का चयन भाजपा को करना था तो वो अखिलेश यादव की पीडीए के काट के रूप में करना चाहती है। भाजपा चाहती है कि वह जिस नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए वह अखिलेश यादव की पीडीए को काट सके और इस नैरेटिव में सेट बैठे जहां पर यह संदेश दिया जा सके कि भाजपा भी ऐसे लोगों को आगे बढ़ा रही है जो कि पिछड़े दलित या
फिर अल्पसंख्यक हैं। अब दोस्तों इस लिस्ट में तमाम नाम चल रहे हैं, लेकिन इसके पीछे की थोड़ी कहानी जान लेते हैं। दरअसल एक तरफ जहां पर 2024 के लोकसभा चुनावों में अखिलेश यादव ने अपने पीडीए के दम पर भारतीय जनता पार्टी को काफी कम सीटों पर समेट कर रख दिया था तो दूसरी तरफ 2027 का विधानसभा चुनाव भी है। जिसको लेकर के अखिलेश
यादव तो तैयारी कर ही रहे हैं लेकिन भाजपा जो है वह दो धड़ों में बंट चुकी है। पहला धड़ा अमित शाह वाला जो कि दिल्ली नेतृत्व है और दूसरा यूपी नेतृत्व यानी योगी आदित्यनाथ वाला। अमित शाह चाहते हैं कि उनके पसंद के नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दी जाए तो योगी आदित्यनाथ अपने पसंद के मंत्रियों और नेताओं की लिस्ट को लगातार आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। अब अमित शाह की जो लिस्ट है या फिर उनके जो
पसंदीदा चेहरे हैं उसमें पहला नाम तो केशव प्रसाद मौर्य का है। दूसरा नाम उसमें साध्वी निरंजन ज्योति का चल रहा है। तीसरा नाम बीएल संतोष का चल रहा है। और इसी तरीके से तमाम जो नाम हैं वो इस लिस्ट में चल रहे हैं। इसके अलावा अगर हम बात करें योगी आदित्यनाथ की लिस्ट में तो बात कही जा रही है कि योगी आदित्यनाथ अपने सबसे अजीज और करीबी नेता
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपना चाहते हैं। इसके पीछे भी तमाम बड़ी वजह हैं। लेकिन भाजपा ने अब अपने प्रदेश अध्यक्ष के चयन से पहले भाजपा एक निष्कर्ष पे पहुंची है। भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि वो किसी ऐसे नेता को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपे जो यूपी का पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव दोनों ही भाजपा को जिता सके और भाजपा की जो सीटें हैं वो बढ़ा सके। क्योंकि पिछले
अगर आप लोकसभा चुनाव जो हाल ही में 2024 में हुए उस पर नजर डालेंगे तो अखिलेश यादव की पीडीए ने काफी ज्यादा भारतीय जनता पार्टी का नुकसान किया था। अब भाजपा चाहती है कि अह इससे बचा जा सके। यानी अखिलेश यादव के पीडीए का जो नैरेटिव है उससे भाजपा का नुकसान ना हो। इस वजह से भाजपा एक ऐसे नेता को चुन रही है। स्वतंत्रदेव सिंह पर अगर हम
बात करें तो वह कहीं ना कहीं भाजपा के इस नैरेटिव में फिट बैठते हैं। भाजपा के इस तमाम चीजों पर फिट बैठते हैं। क्योंकि इसके पीछे जो वजह हैं उन पर विस्तार से बात करते हैं। देखिए स्वतंत्रदेव सिंह जो हैं वह सिर्फ जलशक्ति मंत्री नहीं है। भाजपा के एक समर्थित कार्यकर्ता हैं। आरएसएस से जुड़े हुए हैं। उनके संबंध उनसे भी अच्छे हैं। लंबे समय से राजनीति करते आ रहे हैं और साथ ही साथ यूपी में प्रदेश अध्यक्ष की कमान
पहले भी संभाल चुके हैं। तो ऐसे में उनको अगर यह पद सौंपा जाता है तो इससे यह होगा कि उनके योगी आदित्यनाथ से रिश्ते अच्छे हैं, आरएसएस से रिश्ते अच्छे हैं और शाह से रिश्ते अच्छे हैं। तो वो तीनों के बीच जो एक कनेक्शन है वो स्थापित कर पाएंगे। जो बातचीत है वो स्थापित कर पाएंगे। इस वजह से उनका नाम चल रहा है। और इसी बीच जो खबरें चल रही हैं उसके मुताबिक अगर हम बात करें तो कहा जा रहा है कि
भाजपा जो है किसी गैर यादव ओबीसी पर दांव लगा सकती है। अब गैर यादव ओबीसी में अगर हम यादवों के बाद ओबीसी की जो बड़ी जनसंख्या पर बात करें तो वह कुर्मी समाज होता है और स्वतंत्रदेव सिंह जो हैं वो कुर्मी समाज से ही आते हैं। तो ऐसे में स्वतंत्र देव सिंह जो हैं वो उपयुक्त माने जा रहे हैं। हालांकि भाजपा में जैसी चर्चाएं चलती हैं वैसा होता कुछ नहीं है। कभी-कभी यह होता है कि 10-12 नाम चल रहे होते हैं और
अचानक से एक ऐसा नाम जो है आलाकमान सुझा देता है जिसे सुनकर सब चौंक जाते हैं लेकिन इस लिस्ट में ऐसे 10-12 नहीं बल्कि करीब 18 से 20 नाम चल रहे हैं और इन नामों में जो सबसे ऊपर नाम थे वह हमने आपको बताएं। हालांकि साध्वी निरंजन ज्योति को लेकर के भी कहा जा रहा है कि वो एक महिला हैं और दलित समुदाय से पिछड़े समाज से आती हैं। तो ऐसे में हो सकता है कि भाजपा उन पर दांव चल दे क्योंकि उन्होंने
हाल ही में अभी जो केंद्रीय नेतृत्व है उससे भी मुलाकात की थी लेकिन इस पर बहुत ज्यादा चर्चाएं इस वजह से भी नहीं हो रही है क्योंकि भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष पद की जो कमान है यूपी में वह अभी तक किसी महिला को सौंपी नहीं है। तो ऐसे में माना जा रहा है कि हो सकता है कि अभी इस पर विचार ना किया जा रहा हो कि महिला को एक एक महिला को प्रदेश अध्यक्ष की जो कमान है वो सौंपी जाए और साथ ही साथ दोस्तों ध्यान देने वाली बात यह भी है कि भाजपा जिस भी नेता को प्रदेश
अध्यक्ष की कमान सौंपेगी उस नेता के कंधों पर पंचायत चुनाव और यूपी के विधानसभा चुनावों की भी जिम्मेदारी होगी। तो ऐसे में उस नेता को लेकर के अब जो सियासी गलियारों में चर्चाएं हैं वह तेज हो गई हैं। इसके अलावा जब उल्टा चश्मा यूसी ने वरिष्ठ पत्रकार केपी मलिक जी से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने यूपी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर जो बात कही है आप वो भी सुनिए। आज भारतीय जनता पार्टी के साथ आएगा। अगर
भारतीय जनता पार्टी के साथ मुस्लिम समाज आ रहा था तो आप क्यों हार गए अयोध्या जैसी जगहों पे? आप तो हारने की कगार पर पहुंच गए बनारस में। आप तो चित्रकूट हार गए तो मुस्लिम समाज तो आया नहीं पबंदा आया नहीं आपके पास दलित भी नहीं आया इस बार तो क्यों नहीं आया तो आप जो है जो और अखिलेश यादव ने जो पीडीए बनाया है पीडीए पे कुछ काम चल रहा है दलित कहीं ना कहीं भारतीय जनता पार्टी को उसकी
रणनीति के हिसाब से नाराज है तो भारतीय जनता पार्टी किसी पिछड़े या दलित को अध्यक्ष बना देगी उससे सारा दलित वापस दौड़ के चला आएगा मुझे ऐसा नहीं लगता तो दोस्तों गलियारों में चर्चा कई नामों की है। लेकिन भाजपा अक्सर ऐसे नाम से चौंका देती है जिसके बारे में बहुत ज्यादा चर्चाएं ना हो रही हो या फिर वह बिल्कुल भी सुर्खियों में ना रहा हो। तो नजर इस पर टिकी हुई है कि आखिर किसका नाम सामने आता है और साथ ही
क्या अखिलेश यादव के पीडीए के नैरेटिव को अखिलेश यादव के पीडीए से घबराकर भाजपा कोई ऐसे ही नेता को जो है मैदान में उतार सकती है प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है या फिर ओबीसी समाज से लेकर आएगी ताकि अखिलेश यादव को टक्कर दी जा सके और 2027 के चुनावों में जो है एक कड़ा मुकाबला दिखाने की कोशिश की जा सके। आपको क्या लगता है? आप क्या सोचते हैं? इसका जवाब कमेंट सेक्शन में जरूर दीजिएगा।
