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Tag: बंद कमरे मे ’90 मिनट’ तक मोदी-राहुल और अमित शाह के बीच क्या हुआ ?😱

  • बंद कमरे मे ’90 मिनट’ तक मोदी-राहुल और अमित शाह के बीच क्या हुआ ?😱

    राहुल के संसद में वोट चोरी और एसआईआर पर भाजपा को बुरी तरह से फंसाने के बाद राहुल को रोकने के लिए मोदी और शाह ने आनन-फानन में एक बैठक रखी जिसमें राहुल गांधी को बुलाया गया लेकिन बैठक में भी राहुल गांधी के तेवर और आक्रामक नजर आए। उन्होंने मोदी शाह की एक भी बात पर सहमति नहीं जताई।

    मोदी शाह राहुल को मनाते रहे लेकिन राहुल ने एक पेपर पर डिसेंट नोट लिखकर मोदी को थमा दिया और मीटिंग छोड़कर चले गए। बैठक में कब कैसे क्या-क्या हुआ इस पर बात करते हैं। दोस्तों, संसद में राहुल के वोट चोरी पर बात करने के अगले ही दिन यानी बुधवार को दोपहर 1:00 बजे के बाद

    प्रधानमंत्री कार्यालय में एक बैठक होती है। यह बैठक पीएम मोदी, शाह और राहुल गांधी के बीच हुई थी। बैठक की शुरुआत 1:7 पर हुई जो करीब 1 घंटे 25 तक चली। यानी कुल 88 मिनट के आसपास। इस बैठक में सीआईसी यानी सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन और सीबीसी यानी सेंट्रल विजिलेंस कमीशन में खाली पदों की नियुक्ति पर चर्चा की गई। इसमें सरकार की तरफ से राहुल गांधी

    के सामने कुछ नाम रखे गए लेकिन राहुल इन नामों पर राजी नहीं हुए। राहुल गांधी का कहना था कि लिस्ट में जिनके नाम है उनमें दलित, आदिवासी, ओबीसी, ईबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय को सरकार ने पूरी तरह से इग्नोर किया है। राहुल इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि आपकी सरकार में बहुजनों की अपेक्षा की जा रही है और वह कोई नई बात नहीं है। राहुल के इस बात पर मोदी जी खुद यह स्वीकार करते हैं कि लिस्ट में

    शामिल नामों में सिर्फ एक उम्मीदवार ही दलित समाज का था। जबकि बहुजन समुदाय की उम्मीदवारी 7% तक होनी चाहिए थी। इसके बाद राहुल ने इस लिस्ट पर आपत्ति जताई और डिसेंट नोट यानी असहमति लेटर लिखकर सरकार को सौंप दिया और वहां से चलते बने। दोस्तों ये जो खबर अभी हमने आपको ये जो जानकारी दी है जिसमें राहुल गांधी के सामने नाम आए सीआईसी को लेकर बैठक हुई। यह पूरी खबर गोदी मीडिया बता

    रहा है। जी हां, अंदर की खबर कुछ और है। दरअसल राहुल जब बैठक से बाहर निकले तो राहुल ने तमाम ऐसे लोगों से बात की जिसमें यह बताया गया कि बैठक में सिर्फ इस मसले पर बात नहीं हुई है। राहुल की इस जानकारी के बाद यह बात साफ हो गई कि बैठक में चर्चा सिर्फ मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के बारे में नहीं हुई। बैठक में और भी कई मुद्दों पर बात की गई

    और यह मुद्दे बाहर ना आए इसलिए हेडलाइंस में यह दिखाया जा रहा है कि सीआईसी की नियुक्ति को लेकर बात हुई है। बैठक में शाह की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। क्योंकि नियमों के मुताबिक किसी की नियुक्ति को लेकर अगर बैठक होती है जिसमें प्रधानमंत्री और एलओपी शामिल होते हैं तो उसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। एलओपी भी शामिल होते हैं और इसके अलावा प्रधानमंत्री के पास एक पावर होता है

    जिसमें उनके मंत्रालय का कोई भी मंत्री इस बैठक में शामिल हो सकता है। अब मोदी जी के पास मंत्रियों की कमी तो है नहीं तो इतने मंत्रियों में से सिर्फ शाह को ही मोदी जी ने चुना जो सवाल खड़े करती है। जानकारी के मुताबिक बैठक में मोदी और राहुल के बीच जो बात हो रही थी उसमें अमित शाह सिर्फ शांति से बैठे उस बात को सुन रहे थे और उस बात में बहुत ज्यादा भागीदारी नहीं दे रहे थे। अब बैठक में जो बात है वो क्या हुई है

    उस पर बात करें लेकिन साथ ही साथ आप यह जान लीजिए कि किस तरीके से हेडलाइंस के जरिए गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल दोस्तों बैठक में सीआईसी को लेकर भले ही चर्चा हुई हो लेकिन इसके अलावा राहुल गांधी को मैनेज करने की भी कोशिश की जा रही थी। जी हां, राहुल गांधी को समझाने की कोशिश की जा रही थी कि संसद में जब वोट चोरी और एसआईआर का मुद्दा गूंज रहा है, तो जाहिर तौर पर

    जनता के मन पर प्रभाव पड़ रहा होगा। इस वजह से चुपचाप बंद कमरे में 88 मिनट तक प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह राहुल को समझाते हैं, मैनेज करने की कोशिश करते हैं। लेकिन राहुल ठहरे लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष वो नहीं सुनते हैं। वह असहमति जताते हैं। विरोध जताते हैं। आक्रामक अंदाज में मोदी और शाह को अपने तेवर दिखाते हुए एक नोट लिखकर पकड़ाते हैं और वहां से उठकर चले आते हैं। बाहर आकर राहुल

    तमाम लोगों से बात भी करते हैं जिन्हें जानकारी देते हैं कि बैठक में क्या-क्या बात हुई है। उन सूत्रों से जब हमने बात की तो उन्होंने बहुत खुले तौर पर तो नहीं पर दबी जबान में यह जरूर बताया कि संसद में राहुल जो गरजे थे उसको मैनेज करने की कोशिश शाह और मोदी ने की है क्योंकि इसके पीछे भी वजह है। दरअसल राहुल के इन खुलासों, इन आरोपों, इन सवालों का जवाब अमित शाह को उसी शाम को संसद में देना था। शाम करीब

    5:30 बजे के आसपास संसद में अमित शाह पहुंचते हैं। राहुल के जवाबों सवालों पर जवाब देने के लिए लंबा सा चिट्ठा हाथ में थामे होते हैं। इसी दौरान अमित शाह जो है बात को जलेबी की तरह गोल-गोल घुमाते हैं। राहुल ने जो सवाल पूछे थे उस पर बात ना करके बात को गोल-गोल घुमाकर जवाब देने की कोशिश कर रहे होते हैं। तभी राहुल खड़े होते हैं। अमित शाह को टोकते हैं और फिर चैलेंज दे देते हैं। आई चैलेंज यू। आई चैलेंज यू टू

    हैव अ डिबेट ऑन द थ्री प्रेस कॉन्फ्रेंसेस। दोस्तों, साफ-साफ शब्दों में अमित शाह को राहुल गांधी कहते हैं कि आप मेरे प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा कर लीजिए और यह चैलेंज दे देते हैं। दरअसल अमित शाह और राहुल गांधी के बीच बैठक में ही खटपट हो गई थी। राहुल मान नहीं रहे थे। मोदी मना रहे थे। शाह शाह भी मना रहे थे लेकिन राहुल नहीं मान रहे थे और राहुल बैठक छोड़कर निकल जाते हैं और शाह इस बात पर बुरी तरीके से खींच जाते हैं और यह खींच संसद में निकलती है।

    लेकिन राहुल भी कहां शांत रहने वाले थे। राहुल ने भी अमित शाह को चैलेंज कर दिया और फिर यह गुस्सा और बड़ा हो गया। तो देखिए किस तरीके से मंगलवार को राहुल गांधी कुर्ते पैजामे में आते हैं और संसद में एसआईआर वोट चोरी पर बात करते हैं। अगले दिन बैठक होती है। दोपहर में उन्हें मैनेज करने की कोशिश की जाती है। जब नहीं मैनेज होते हैं तो शाम को

    आक्रामक अंदाज दोनों ही तरफ से देखने को मिलता है। तो दोस्तों एक बात तो साफ है कि राहुल गांधी के इन खुलासों से गुजरात लॉबी बुरी तरह से डरी हुई है और यही वजह है कि राहुल को मैनेज करने के लिए बंद कमरे में डेढ़-डेढ़ घंटे की बैठकें राहुल गांधी के साथ की जा रही हैं। आपको जाते-जाते यह भी बताते चलें कि सीआईसी को लेकर के यह जो बैठक हो रही थी और

    इसमें राहुल गांधी ने जो आपत्ति जताई है, वही आपत्ति राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के वक्त भी जताई थी। जिसमें जब ज्ञानेश कुमार का नाम राहुल गांधी के सामने रखा गया था तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी और उन्होंने कहा था कि इस बेंच में सीजीआई क्यों नहीं शामिल है? सीजीआई को शामिल करने की बात भी कही थी और उस वक्त भी उन्होंने डिसेंट नोट लिखकर छोड़ा था। असहमति पत्र

    लिखकर छोड़ा था और इस बार भी कुछ वैसा ही नजारा देखने को मिला है। लेकिन मीटिंग के अंदर काफी कुछ मसालेदार हुआ है जो अब निकल कर सामने आ गया है। फिलहाल इस खबर को लेकर आपकी क्या राय है? इसका जवाब कमेंट सेक्शन में दीजिएगा और गुजरात लॉबी जिस तरीके से राहुल गांधी के अंदाजों से, तेवरों से और खुलासों से घबराई हुई है, उसको लेकर आप क्या सोचते हैं, यह भी कमेंट में बताइएगा।