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Tag: सात भाई ने एक बहन को क्यो मार डाला 😭 The real crime stories in hindi love

  • सात भाई ने एक बहन को क्यो मार डाला 😭 The real crime stories in hindi love

    क्यों खाया सात भाइयों ने अपनी बहन के

    शरीर का मांस गांव में सात भाई और उनकी एक

    बहन रहते थे उनके माता-पिता का निधन बचपन

    में ही हो गया था लेकिन भाइयों और बहन ने

    जिम्मेदारियों को समझते हुए एक दूसरे का

    सहारा बनना सीख लिया था भाई प्रतिदिन जंगल

    में शिकार के लिए जाते थे जबकि बहन घर पर

    रहकर भोजन बनाती थी एक दिन जब बहन हरी

    सब्जी काट रही थी तो गलती से उसकी उंगली

    तेज चाकू से कट गई खून बहने लगा और उसने

    सोचा कि अगर भाइयों को इसका पता चला तो वह

    बहुत चिंतित होंगे उसने खून रोकने की बहुत

    कोशिश की लेकिन जब वह सफल नहीं हुई तो

    अनजाने में वह खून उसी सब्जी में मिल गया

    जो वह पका रही थी शाम को जब भाई शिकार से

    लौटे और भोजन किया तो उन्हें साग का स्वाद

    असाधारण रूप से लजीज लगा वे बहन की खूब

    तारीफ करने लगे और बोले कि उन्होंने ऐसा

    स्वादिष्ट साग पहले कभी नहीं खाया अगले

    दिन भी वे जंगल में शिकार के दौरान उसी

    साग की चर्चा करते रहे रात को जब वे घर

    लौटे तो उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने

    बहन से पूछ लिया कि उसने भोजन में ऐसा

    क्या डाला था जिससे स्वाद इतना बेहतरीन हो

    गया जब बड़े भाई ने बहन से उस असाधारण रूप

    से स्वादिष्ट साग के बारे में पूछा तो

    पहले वह टालती रही लेकिन फिर झिझकते हुए

    बताया कि सब्जी काटते समय उसकी उंगली चाकू

    से कट गई थी और उसका खून साग में मिल गया

    था यह सुनते ही बड़े भाई के मन में एक

    भयानक विचार आया वह तुरंत अपने बाकी छह

    भाइयों के पास गया और बोला “अगर इसकी कुछ

    बूंदे ही खाने को इतना स्वादिष्ट बना सकती

    हैं तो सोचो इसका मांस कितना लजीज होगा “

    उसके इस विचार से बाकी भाई भी सहमत हो गए

    उन्होंने एक खतरनाक योजना बनाई वे बहन को

    शादी का लालच देकर जंगल ले जाएंगे और फिर

    उसकी हत्या करके उसका मांस पका कर खाएंगे

    लेकिन सबसे छोटा भाई यह सब सुनकर बेचैन हो

    उठा वह अपनी बहन को बचाना चाहता था लेकिन

    अकेले छह भाइयों के सामने उसकी कोई नहीं

    सुनने वाला था वह असमंजस में था कि क्या

    करें अगले दिन बड़े भाई ने मुस्कुराते हुए

    बहन से कहा “मने तुम्हारे लिए एक अच्छा वर

    ढूंढा है चलो तुम्हें उससे मिलवाने ले

    चलते हैं ” यह सुनकर बहन बहुत खुश हो गई

    शादी की बात से उत्साहित होकर वह तुरंत

    तैयार हो गई और अपने भाइयों के साथ जंगल

    की ओर चल पड़ी रास्ते में लंबा सफर तय

    करने के बाद बहन थक गई उसने भाइयों से

    पूछा भैया मेरा ससुराल अभी और कितना दूर

    है बड़े भाई ने मुस्कुरा कर जवाब दिया बस

    थोड़ी दूर और फिर पहुंच जाएंगे आखिरकार वे

    एक ऊंचे टीले पर पहुंच गए वहां पहुंचते ही

    भाइयों ने अचानक बहन को पकड़ लिया और एक

    खंभे से बांध दिया अब बहन को समझ आ गया कि

    वे उसकी हत्या करने वाले हैं डर और बेबसी

    से उसकी आंखों से आंसू बहने लगे वह रोते

    हुए भगवान को पुकारने लगी बड़ा भाई सबसे

    पहले धनुष उठाकर तीर चलाने को तैयार हुआ

    लेकिन तभी बहन बोली मारो मारो भैया छाती

    पर निशाना साधो तुम्हारा तीर जंगल में चला

    जाए यह सुनकर बड़े भाई ने तीर छोड़ा लेकिन

    निशाना चूक गया फिर दूसरे भाई ने प्रयास

    किया लेकिन उसका तीर भी गलत दिशा में निकल

    गया इसी तरह एक-एक कर छह भाइयों ने तीर

    चलाए पर हर बार निशाना चूकते रहे तीर

    चलाने की बारी छोटे भाई की थी वह अपनी बहन

    को मारना नहीं चाहता था लेकिन उसके छह

    भाइयों ने उसे धमकाया अगर तेरा निशाना

    चूका तो तुझे भी मार देंगे बहन अपने छोटे

    भाई की बेबसी को समझ गई वह नहीं चाहती थी

    कि उसकी वजह से उसके सबसे प्रिय भाई की

    जान भी खतरे में पड़ जाए इसलिए उसने भारी

    मन से कहा मारो भैया छाती पर निशाना लगाना

    ताकि तीर सीधे मेरे हृदय में उतर जाए छोटे

    भाई की आंखों में आंसू भरा कांपते हाथों

    से उसने धनुष उठाया और तीर छोड़ दिया इस

    बार निशाना नहीं चुका तीर सीधा बहन की

    छाती में जा वह दर्द से करा उठी और कुछ ही

    पलों में प्राण त्याग दिए छह भाइयों ने

    मिलकर अपनी ही बहन के शरीर के टुकड़े किए

    और उसका मांस पकाने लगे लेकिन छोटा भाई इस

    घिनौने कृत्य में शामिल नहीं होना चाहता

    था वह अपनी बहन का मांस नहीं खा सकता था

    इसलिए उसने चुपके से कढ़ाई में कुछ

    मछलियां और केकड़े डाल दिए जब खाना परोसा

    गया तो उसने बहन के मांस को गुप्त रूप से

    एक गड्ढे में दबा दिया कुछ वर्षों बाद

    जहां बहन का मांस दफनाया गया था वहां एक

    बांस का पौधा उगाया समय के साथ वह पौधा

    बढ़ते-बढ़ते घने बांसों के झुंड में बदल

    गया कई साल बीत गए एक दिन एक महात्मा उस

    रास्ते से गुजरे उनकी नजर उस बांस के

    झुरमुट पर पड़ी और उन्होंने महसूस किया कि

    यह कोई साधारण बांस नहीं था इसमें एक

    अनोखी दिव्य ऊर्जा महसूस हो रही थी जो

    बाकी बांसों से अलग थी महात्मा ने सोचा

    क्यों ना इस बांस से एक बांसुरी बना ली

    जाए मैं इसे बजाकर गांव-गांव जाकर भिक्षा

    मांग सकूंगा यह सोचकर उन्होंने बांस की एक

    टहनी काटी और उससे एक सुंदर बांसुरी बना

    ली फिर भिक्षा मांगने के लिए एक गांव की

    ओर निकल पड़े नसीब का खेल देखिए महात्मा

    उसी गांव में पहुंच गए जहां सातों भाई

    रहते थे इस समय तक छह भाइयों की शादी हो

    चुकी थी जबकि सातवां भाई कुंवारा था जब वे

    सबसे बड़े भाई के घर के दरवाजे पर पहुंचे

    तो बांसुरी बजाते हुए भिक्षा मांगने लगे

    जैसे ही बांसुरी बजी उसमें से एक

    अजीबोगरीब आवाज निकलने लगी यही है सबसे

    बड़ा गुनहगार इसी ने बहन का किया शिकार

    बड़े भाई के घर मत बजाओ इसने प्रेम ममता

    सब ठुकराया यह सुनते ही बड़े भाई के

    रोंगटे खड़े हो गए बांसुरी से आती इस अजीब

    आवाज को सुनकर महात्मा चौंक गए लेकिन सबसे

    ज्यादा हैरानी बड़े भाई को हुई क्योंकि वह

    तुरंत पहचान गया कि यह आवाज उसकी उस बहन

    की है जिसे उन्होंने सातों भाइयों ने

    मिलकर जंगल में मार डाला था बड़े भाई को

    डर था कि कहीं उसकी सच्चाई सबके सामने

    उजागर ना हो जाए उसने महात्मा से कहा आप

    आगे बढ़ जाइए यहां भिक्षा मांगना व्यर्थ

    है इसके बाद जब जब महात्मा दूसरे भाइयों

    के घर भिक्षा मांगने गए बांसुरी से वही

    सच्चाई भरी आवाज निकलती जो उनके मन में डर

    भर देती भाइयों को डर सताने लगा कि उनकी

    घिनौनी करतूत कहीं सबके सामने ना आ जाए इस

    भय से उन्होंने महात्मा को गांव से भगा

    दिया लेकिन जब महात्मा सबसे छोटे भाई के

    घर पहुंचे और बांसुरी बजाई तो उसमें से

    मधुर स्वर गूंज उठा बजाओ रे बांसुरी सबसे

    छोटे भाई के घर जिसने मन की बात छुपाई

    युगों से रखा सहेज कर इस मधुर धुन को

    सुनते ही छोटा भाई भावुक हो उठा उसके दिल

    में एक अजीब सी हलचल हुई मानो कोई भूली

    बिसरी यादें जाग उठी हो उसने महात्मा से

    निवेदन किया महात्मा जी कृपया यह बांसुरी

    मुझे दे दीजिए मुझे लगता है कि इसमें मेरी

    कोई पुरानी यादें समाई हैं महात्मा ने

    उसकी भावनाओं को समझते हुए बांसुरी उसे

    सौंप दी छोटा भाई बांसुरी को घर ले आया और

    उसे एक साफ स्थान पर रखकर धूप दीप जलाकर

    उसकी पूजा की वह उस बांसुरी को श्रद्धा से

    देखने लगा मानो वह अपने खोए हुए अतीत को

    उसमें तलाश रहा हो कुछ दिनों के बाद उसे

    अपने घर में एक अजीब आहट महसूस हुई मानो

    कोई उसके साथ उस घर में रह रहा हो जब वह

    घर पर नहीं होता तो उसके घर की सफाई हो

    जाती वस्त्र सही ढंग से तह लगाए रहते और

    दीपक भी प्रज्वलित रहता यह देखकर वह चकित

    रह गया आखिरकार उसने यह जानने का निश्चय

    किया कि यह रहस्यमई काम कौन करता है एक

    दिन वह चुपचाप घर के एक कोने में छिप गया

    इस बारे में पता लगाने के लिए तभी उसकी

    आंखों के सामने चौंकाने वाला दृश्य आया

    बांसुरी से उसकी बहन की आत्मा बाहर निकलती

    घर की सफाई करती कपड़े को तह लगाती दीपक

    जलाती और फिर वापस बांसुरी में समा जाती

    यह देखकर छोटा भाई स्तब्ध रह गया अगले दिन

    उसने अपनी बड़ी भाभी से इस रहस्य को साझा

    किया बड़े भाई ने अपनी भाभी को बताया भाभी

    जब मैं घर पर नहीं होता तो बांसुरी से

    मेरी छोटी बहन की आत्मा निकलती है वह सारा

    कामकाज करती है और फिर वापस उसी बांसुरी

    में समा जाती है यह सुनकर भाभी भी हैरान

    रह गई उन्होंने गंभीरता से कहा जब अगली

    बार तुम्हारी बहन की आत्मा बांसुरी से

    बाहर आए तो तुरंत बांसुरी को अग्नि में

    डाल देना और उस पर गंगाजल का छिड़काव करना

    लेकिन ध्यान रहे कि तुम्हारे भाइयों को इस

    बारे में जरा भी भनक ना लगे और यह सब

    बातें सबसे बड़ा भाई बाहर खड़े होकर सुन

    रहा था वह तुरंत अपने बाकी पांच भाइयों के

    पास गया और उन्हें सब बातें बता दी सभी

    भाई डर गए कि जो नीच हरकत उन्होंने कई

    वर्षों पहले की थी वह कहीं सभी गांव वालों

    के सामने ना आ जाए सभी ने मिलकर एक

    षड्यंत्र रचा और चालाकी से जब छोटा भाई

    बांसुरी को जलाने के लिए जंगल में लकड़ी

    लेने जा रहा था तभी उसे वहां कैद कर लिया

    और उसके घर जाकर बांसुरी चुरा ली और सभी

    भाइयों ने बांसुरी को तोड़कर नदी में

    फेंकने का सोचा तभी वहां वहीं संत प्रकट

    हो गए जिन्होंने छोटे भाई को बांसुरी दी

    थी भाइयों और संत के बीच कहासनी इतनी बढ़

    गई कि उन्होंने संत को पानी में फेंक दिया

    इसी बीच मौका पाते ही छोटे भाई ने बांसुरी

    चुरा ली और भागते हुए अपनी भाभी के पास

    गया और वहां पहुंचते ही आग जलाकर बांसुरी

    को आग में रख दिया और ऊपर से गंगाजल का

    छिड़काव कर दिया जैसे ही बांसुरी में

    गंगाजल पड़ा उसमें से एक तेज रोशनी बाहर

    आने लगी और देखते ही देखते उसकी बहन की

    आत्मा पूरी तरीके से बांसुरी के बाहर आ गई

    और जीवित हो गई अपनी बहन को इतने सालों

    बाद जीवित देखना छोटे भाई के लिए कोई

    चमत्कार से कम ना था उसने रोते हुए अपनी

    बहन को गले लगा लिया बहन के पुनर्जीवित

    होने की खबर पूरे गांव में जंगल की आग की

    तरह फैल गई लोग इस चमत्कार को सुनकर

    स्तब्ध रह गए कि एक मृत लड़की कैसे फिर से

    जीवित हो सकती है जब गांव के लोग इकट्ठा

    हुए तो छोटे भाई ने खुद सभी के सामने आकर

    पूरी सच्चाई बयां की उसने भारी मन से कहा

    मेरे छह भाइयों ने अपनी स्वाद की लालसा

    में आकर मेरी मासूम बहन की बेरहमी से

    हत्या कर दी थी उन्होंने उसे जंगल में ले

    जाकर पहले धोखे से बंधक बनाया और फिर उस

    पर वार करने की योजना बनाई जब उनका निशाना

    चूकने लगा तो उन्होंने मुझे मजबूर किया कि

    मैं अपनी ही बहन पर तीर चलाऊं चाहकर भी

    मैं उनकी बातों का विरोध नहीं कर सका और

    आखिरकार अपनी बहन के सीने में तीर मार

    दिया इतना ही नहीं मेरे भाइयों ने उसके शव

    को टुकड़ों में काटा और उसका मांस पकाकर

    खा लिया मैं इस अपराध में शामिल नहीं था

    लेकिन मजबूरी में मैं भी उस भयावह घटना का

    गवाह बना जैसे ही छोटे भाई ने गांव वालों

    को पूरी सच्चाई बताई उनके रोंगटे खड़े हो

    गए उनके दिलों में आक्रोश की ज्वाला फूट

    पड़ी उन्होंने कहा ऐसे लोगों को जीने का

    कोई अधिकार नहीं जिन्होंने अपनी बहन के

    साथ ऐसा अत्याचार किया इधर जब छव भाई मौज

    मस्ती कर अपने घर वापस लौट रहे थे तब

    उन्हें गांव का वातावरण कुछ बदला हुआ लगा

    सभी लोग उन्हें घृणा और आक्रोश भरी नजरों

    से देख रहे थे पहले तो उन्हें मामला कुछ

    समझ नहीं आया लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने

    छोटे भाई को अपनी बहन के साथ गांव के

    बाजार में देखा वह आश्चर्यचकित हो गए और

    डर के मारे कांपने लगे और उन्हें मामला

    समझते देर ना लगी उन्हें पता चल गया कि

    छोटे भाई ने गांव वालों को पूरी घटना बता

    दी है और वह सब अब मिलकर उन्हें बीच

    चौराहे में पेड़ के साथ बांधकर जलाकर खाक

    कर देंगे सभी भाइयों ने सोचा कि वह जंगल

    की ओर भागकर अपनी जान बचाएंगे और बचा हुआ

    जीवन जंगल में ही बिताएंगे इतना सोच वह घर

    पहुंच अपना सारा सामान बांधने लग गए लेकिन

    उनके घर के बाहर खड़ा एक गांव वाला सब देख

    रहा था वह जल्दी से बाकी लोगों के पास गया

    और सब कुछ बता दिया सभी लोग मशाल लाठी

    रस्सी आदि लेकर भाइयों के घर गए और उनके

    घर को घेर कर सभी भाइयों को बंदी बनाकर

    घसीटते हुए गांव के चौक में ले जाकर एक

    पेड़ के साथ बांध दिया इसके बाद सभी गांव

    वालों ने सोचा कि अब इन्हें जलाकर खाक कर

    दिया जाए परंतु उसी समय छोटा भाई और उसकी

    बहन वहां आ पहुंचे और गांव वालों को ऐसा

    करने से मना कर दिया उन्होंने कहा ऐसा

    करने से इनमें और हम सब में क्या फर्क रह

    जाएगा आप सब इन्हें गांव से निकाल दीजिए

    और जंगल में रहने के लिए छोड़ दीजिए और

    कोई भी इन्हें संपर्क ना करें यही इनकी

    सजा रहे इतना कहने पर गांव वालों ने छहों

    भाइयों को जंगल में छोड़ दिया छहों भाई

    जंगल में रात दिन भटकते रहे घूमते-घूमते

    एक दिन वह उसी बांस के पेड़ के पास पहुंचे

    जहां उनकी बहन का मांस दफनाया गया था वह

    उसी पेड़ के पास रहने लग गए उन्होंने उसी

    बांस के पेड़ से रहने के लिए तंबू बनाया

    और जब भी बारिश होती तब उस बांस में पानी

    ईखा हो जाता जो छहों भाइयों के काम आता

    कुछ समय बाद सभी भाई एक-एक कर एक लालाज

    बीमारी का शिकार हुए और चल बसे इधर छोटा

    भाई अपनी बहन के लिए अत्यंत खुश था

    क्योंकि इतने वर्ष बाद अपनी बहन को जीवित

    देखना उसके लिए कोई चमत्कार से कम ना था

    उसने एक नए जीवन की शुरुआत की और अपनी बहन

    के साथ एक सुखी जीवन व्यतीत करने लगा और

    अपने बीते हुए कल को दोनों ने भुला दिया

    ऐसी रोमांचक और दिलचस्प कहानियां हमारे

    Website पर आती रहती हैं