
Air India Plane Crash in Ahmedabad – Kya Hota Hai Black Box 🚫 12_06_2025 ✅ 1 : 40 pm 🙏
देखिए जब कोई व्यक्ति की मौत हो जाती है तो मौत का कारण पता करने के लिए पोस्टमार्टम किया जाता है। उसी तरह हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज में अक्सर यह देखा गया है कि बहुत कम लोग सर्वाइवर होकर बच पाते हैं। तो एक ही रास्ता है उसको उसके अंदर बताने के लिए क्योंकि कोई जिंदा ही नहीं बचा। तो उसमें एक मशीन लगी होती है जिसे ब्लैक बॉक्स कहते हैं। एक्चुअली ये ऑरेंज कलर का होता है। इसलिए ऑरेंज बनाया जाता है ताकि अगर ये विमान दुर्घटना के बाद इसे ढूंढना आसान हो जाए ऑरेंज कलर के होने के वजह से। ब्लैक बॉक्स जो होता है उसमें दो चीज होते हैं। एक होता है
कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर। कॉकपिट उसे बोलते हैं जहां पायलट बैठता है। जहाज का वह हिस्सा जहां पायलट की केबिन होती है उसे कॉकपिट कहते हैं। तो कॉकपिट में कौन सी बाती हुई है? उसे कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर सीवीआर फाइल करता है। और जहाज में कितना फ्यूल एयर प्रेशर ये सब था। ये फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर करता है। तो इन दोनों को जब मिला देते हैं तो वो बनता है हमारा कॉक ब्लैक बॉक्स। अब इसमें जो पहला होता है कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर। तो ये देखिए ये जहाज का केबिन है जहां पे कॉकपिट में जहाज बैठते हैं। ये कॉकपिट है उसका। यहां पायलट बैठते हैं।
ये आपस में क्या बात कर रहे हैं। कभी-कभी इमरजेंसी होने पर ये पैसेंजर्स को भी बताते हैं कि ऐसी इमरजेंसी आ रही है। ये एटीसी से संपर्क करते हैं एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से कि क्या प्रॉब्लम आ रहा है। तो अगर इससे भी पता चल जाता है कि लास्ट मोमेंट पर क्या बातें हुई थी। आपस में ये लोग क्या बात कर रहे थे? एटीसी को क्या बोले थे? पैसेंजर को कौन सा वार्निंग दिए थे? इससे बहुत सहूलियत हो जाती है। साथ में यह लोग डिस्ट्रेस सिग्नल भी देते हैं। देखिए जहाज का जब एक इंजन फेल हो जाता है तो यह लोग वार्निंग के तौर पे पैन पैन पैन सिग्नल देते हैं।
तीन बार बोलेंगे पैन पैन पैन मतलब आधी इमरजेंसी है। एक इंजन पे भी जहाज आराम से लैंड कर सकता है। लेकिन यदि दोनों इंजन खराब हो जाता है तो इसमें मेड मेडे का सिग्नल दिया जाता है। मेड मे मतलब एक्सट्रीम इमरजेंसी है। यह हेलीकॉप्टर और मतलब विमान दोनों के लिए होता है। अह दूसरा होता है इसका ब्लैक बॉक्स का दूसरा अंग होता है फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर। फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर में 80 से ज्यादा आंकड़ों को रिकॉर्ड किया जाता है कि ये रोटर ब्लेड कितनी तेजी से घूम रहा था? बाहर हवाएं कितनी तेजी से चल रही थी? कितनी हाइट पर था?
फ्यूल कितना था? दाहिनी ओर कितना झुका था? बाई ओर कितना झुका था? पीछे का रोटर ब्लेड कितना तेजी से लड़ रहा था? टेंपरेचर कितना था? हवाएं किस दिशा से आ रही थी? कितने प्रेशर थे? फ्यूल काम कर रहा था कि नहीं? कोई दुश्मन का रडार तो नहीं आया था। कोई मिसाइल से अटैक तो नहीं हुआ। जितनी चीजें होती हैं 80 से ज्यादा चीजों को यही बताता है कि यह पीछे से कितना डिग्री उठा हुआ था। आगे से कितना डिग्री था। ऐसे 80 से ज्यादा आंकड़े जो रिकॉर्ड रहते हैं वो फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर में रहते हैं। तो जो कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट फ्लाइट
डाटा रिकॉर्डर को एक साथ सुनकर हम इस नतीजे पर पहुंच सकते हैं कि आखिर लास्ट मोमेंट पे क्या था। अब एक ही रास्ता बताया ब्लैक बॉक्स। अब ये ब्लैक बॉक्स में ही हर चीज होती है। इसलिए ब्लैक बॉक्स को बहुत ही सुरक्षित बनाया जाता है। इसे सॉलिड स्टील से बनाया जाता है। इतना मजबूत होता है कि अगर कोई हेलीकॉप्टर या जहाज 750 कि.मी./ घंटा की रफ्तार से भी टकराता है तो इसे कुछ नहीं हो सकता है। इसे आप गर्म भट्टी में 200 अक्सर आग लग जाते हैं। तो इसको ध्यान में रखते हुए इसे 260 डिग्री सेल्सियस तापमान सहने वाला भी बनाया जाता है।
ये उसमें भी गलता नहीं है। अगर यह पानी में गिर गया तो पानी में भी ये 30 दिन तक बिना बैटरी के सिग्नल छोड़ते रहेगा। बीन छोड़ते रहेगा जिससे कि इसे ढूंढने में आसानी हो सके इस ब्लैक बॉक्स को। इस ब्लैक बॉक्स को प्रेशर सहने के लिए भी बनाया जाता है कि हो सकता है कि ब्लैक बॉक्स नीचे गिरे उसके ऊपर पूरे जहाज का लोड आ जाए तो यह ढाई टन का वजन अपने ऊपर रोक सकता है। इसे अगर कहीं स्क्रैच आए कटने पीटने से भी इसे कुछ नहीं हो सकता है। इसे काटा भी नहीं जा सकता है। अतः यह ब्लैक बॉक्स बहुत ही सुरक्षित बनाए जाते हैं।
