
पिछले कुछ वर्षों में चीन (China) के स्टील उत्पादन ने पूरी दुनिया के बाजार में हलचल मचा दी। सस्ता स्टील भारत में बड़ी मात्रा में आने लगा, जिससे भारतीय स्टील उद्योग को भारी नुकसान होने लगा। इसी स्थिति को रोकने के लिए भारत सरकार ने जो कदम उठाया, उसे आज “टैरिफ बम धमाका” कहा जाता है।
🏭 चीन का स्टील उत्पादन: कैसे बना खतरा?
चीन दुनिया का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश है।
- कम लागत
- सरकारी सब्सिडी
- भारी मात्रा में निर्यात
इन कारणों से चीन का स्टील भारत के बाजार में सस्ते दामों पर पहुंचने लगा, जिससे देश की स्थानीय फैक्ट्रियां बंद होने लगीं।
💥 भारत का टैरिफ बम धमाका क्या है?
भारत सरकार ने Anti-Dumping Duty और Import Tariff लगाकर बड़ा फैसला लिया।
मुख्य फैसले:
- चीन से आने वाले स्टील पर भारी टैक्स
- घरेलू कंपनियों को संरक्षण
- सस्ते विदेशी स्टील पर रोक
इस फैसले को मीडिया ने नाम दिया – 👉 “भारत का टैरिफ बम धमाका”
📜 टैरिफ की पूरी हिस्ट्री (History Report)
भारत ने समय-समय पर ये बड़े फैसले लिए:
- 2016 – Anti-Dumping Duty लागू
- 2018 – Safeguard Duty बढ़ाई गई
- 2021–2024 – Import Monitoring System शुरू
- 2025 के बाद – Make in India को प्राथमिकता
इन फैसलों से चीन के स्टील आयात में बड़ी गिरावट आई।
🏗️ राजपुरा (Rajpura) स्टील इंडस्ट्री पर असर
राजपुरा (पंजाब) एक उभरता हुआ स्टील और इंडस्ट्रियल हब माना जाता है।
सकारात्मक प्रभाव:
- स्थानीय फैक्ट्रियों को नया जीवन
- रोजगार के अवसर बढ़े
- कीमतों में स्थिरता आई
टैरिफ लगने के बाद राजपुरा की रोलिंग मिल्स और छोटे उद्योगों को बड़ा फायदा मिला।
🇮🇳 भारत को क्या फायदा हुआ?
- घरेलू स्टील उत्पादन में बढ़ोतरी
- आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती
- MSME सेक्टर को राहत
- विदेशी निर्भरता कम हुई
📈 भविष्य में क्या होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- भारत आने वाले समय में स्टील एक्सपोर्ट हब बन सकता है
- नई टेक्नोलॉजी और ग्रीन स्टील पर फोकस
- चीन पर निर्भरता और कम होगी
✍️ निष्कर्ष
चीन के स्टील उत्पादन पर लगाया गया भारत का टैरिफ बम धमाका सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं था, बल्कि यह भारतीय उद्योग को बचाने की ऐतिहासिक रणनीति थी। राजपुरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को इससे नई पहचान और मजबूती मिली।
