
एक समय की बात है। भारत के एक छोटे से गांव में बिरजू नाम का आदमी रहता था। लोग उसे चोर के नाम से जानते थे। सालों तक उसने गांव और आसपास के इलाकों में चोरी की थी। खेतों से अनाज, घरों से सामान और यहां तक कि कभी-कभी मवेशी तक चुराना उसकी
आदत बन गई थी। हर दिन वह डर और लालच के बीच जीता। चोरी करने के बाद छिपकर सोना, पुलिस और गांव वालों से बचना यही उसकी जिंदगी थी। लेकिन धीरे-धीरे उसके भीतर अपराध बोध भरने लगा। उसे समझ आने लगा कि यह रास्ता सिर्फ उसे और गहरे अंधेरे में ले जा रहा है। फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उसकी जिंदगी बदल दी। चोरी
करते हुए वह पकड़ा गया। गांव वालों ने उसे खूब कोसा। अपमानित किया और उसके परिवार तक को ताने दिए। उस रात उसने खुद से वादा किया। अब कभी चोरी नहीं करूंगा। क्योंकि उस रात उसके भीतर इंसानियत जाग उठी थी। उसने तय किया कि मेहनत से जीना होगा। अगले ही दिन उसने गांव के एक किसान के खेत में मजदूरी शुरू कर दी। पसीना बहा
भूख सही लेकिन मन को पहली बार सुकून मिला। लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। हर जगह लोग उसके अतीत को उसके सामने फेंकते और उसे कहते अरे यह तो वही चोर है। सावधान रहना कहीं जेब ना काट ले। बिरजू कभी सुधर नहीं सकता है। ऐसा कई दिन तक चलता रहा। बिरजू रोज गांव वालों के ताने सुनता। इन तानों ने उसके दिल पर बोझ डाल
दिया। भले ही उसने चोरी छोड़ दी थी पर उसका अतीत उसकी छाया बनकर उसके पीछे चलता रहा। वह अपने आप से सवाल करता क्या मैं सच में बदल सकता हूं? या मैं हमेशा चोर ही कहलाऊंगा। बिरजू हर समय उदास रहने लगा। तभी एक दिन खेत के किनारे उसे गांव का एक बुजुर्ग मिला। सफेद दाढ़ी, झुकी
कमर और आंखों में गहरी चमक। उन्होंने बीरजू से पूछा क्यों उदास बैठा है बेटा? बीरजू ने आंसू भरकर अपनी कहानी कह दी। बाबा मैंने चोरी छोड़ दी है। अब मेहनत करता हूं लेकिन लोग मुझे मेरा अतीत बार-बार याद दिलाते हैं। मैं चाहे कितना भी बदल जाऊं मेरे पुराने कर्म मेरा पीछा नहीं छोड़ते। बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, बेटा जब बैल खेत जोतता है तो उसके पैरों के पीछे मिट्टी बिखरती है। अगर वह बार-बार पीछे मुड़कर देखेगा तो आगे बढ़ नहीं पाएगा। जिंदगी भी ऐसी ही है। तेरे कदमों के पीछे तेरा अतीत
है। पर तुझे देखना आगे है। फिर उन्होंने अपनी हथेली पर थोड़ी मिट्टी उठाई और बोले, “यह देख यह मिट्टी बीते हुए कल की तरह है। अगर इसे मुट्ठी में पकड़े रहोगे, तो यह भारी लगने लगेगी। लेकिन अगर इसे छोड़ दोगे तो हाथ खाली और हल्का हो जाएगा। अपने कल को छोड़ो। तभी जीवन आसान होगा। यह शब्द बीरजू के दिल में उतर गए। उसने महसूस किया कि लोग चाहे जो कहें असली आजादी तब है
जब इंसान खुद अपने अतीत को ढोना छोड़ दे। उस दिन के बाद बीरजू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने पूरी लगन से खेतों में काम किया। गांव के कामों में हाथ बंटाया और धीरे-धीरे लोग भी उसे सम्मान देने लगे। कुछ सालों बाद वही लोग जो उसे चोर कहते थे अब उसे बीरजू भैया कहकर पुकारने लगे क्योंकि उसने
अपने कल का बोझ छोड़ दिया था। अपने कल को भूल जाओ अतीत तुम्हें रोकने के लिए है। लेकिन भविष्य तुम्हें आगे बढ़ाने के लिए है। जब तक तुम अपने पुराने कर्मों का बोझ ढोते रहोगे। आज का सुख और आने वाला कल तुम्हारे हाथ से फिसल जाएगा।
