
भारत के एक बड़े शहर में एक साधारण सा लड़का रहता था राहुल। राहुल की उम्र ज्यादा नहीं थी, लेकिन उसके मन में सपने बहुत बड़े थे। वह चाहता था कि उसका भी नाम हो। उसकी भी पहचान बने। लोग उसे जाने और उसकी बातें सुने। उसका सपना था कि वह अपना खुद का YouTube चैनल शुरू करें और लोगों को प्रेरित करें। लेकिन हकीकत अक्सर सपनों से अलग
होती है। राहुल एक साधारण नौकरी करता था। दिनभर अपने ऑफिस में मेहनत करता लेकिन उसे संतोष नहीं मिल पाता। उसे लगता जैसे वह किसी जेल में फंसा हुआ है। वो नौकरी से निकलना चाहता था लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाता। मन ही मन गुड़ता रहता और हर दिन अपने आप से यही पूछता क्या मेरी जिंदगी हमेशा ऐसी ही रहेगी? क्या मैं अपने सपनों को जी पाऊंगा?
समय गुजरता गया लेकिन राहुल की हालत वैसी ही रही। एक दिन वह परेशान होकर अपने घर से निकल गया और पास के पार्क में जाकर एक लकड़ी की बेंच पर बैठ गया। राहुल के चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी। वो चुपचाप सामने देख रहा था जैसे उसकी आंखों में कोई उम्मीद बाकी ना बजी हो। उसी समय पार्क में एक बुजुर्ग व्यक्ति टहलते हुए आए। वह शहर के सबसे
अमीर और सफल व्यक्तियों में से एक थे। जब उन्होंने राहुल को उदास देखा तो रुक गए और नरम आवाज में उससे पूछा क्या हुआ बेटे? तुम इतने परेशान क्यों दिख रहे हो? राहुल के पास खोने को कुछ नहीं था। उसने अपनी कहानी बुजुर्ग को बता दी। कैसे वह नौकरी में अटका हुआ है? कैसे वह अपने सपनों को नहीं जी पा रहा? कैसे उसकी जिंदगी नाकाम लगने लगी है। बुजुर्ग
आदमी ने अच्छी तरह राहुल की बातें सुनी। फिर राहुल की आंखों में देखा और मुस्कुराते हुए बोले, मैं तुम्हारी उदासी की वजह समझ गया हूं और मुझे उसका हल भी पता। राहुल उत्साहित होकर बोला, “प्लीज अंकल, मुझे बताइए ना। मुझे रास्ता दिखाइए।” बुजुर्ग व्यक्ति बोले, हल जानने से पहले तुम्हें मेरे साथ आना होगा।” चलो यहां से कुछ दूरी पर एक बड़ा सा कुत्ता बैठा है। उसके
पास चलते हैं। राहुल को थोड़ी हैरानी हुई। फिर भी वह उस आदमी के साथ आगे चल पड़ा। जब वह दोनों वहां पहुंचे तो राहुल ने देखा एक बड़ा सा कुत्ता जमीन पर बैठा रो रहा है। राहुल को लगा शायद इसे भूख लगी है। बुजुर्ग व्यक्ति ने तुरंत उसे कुछ रोटियां दी। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि कुत्ता रोटी खाने के बाद भी रोता ही रहा। थोड़ी देर वह चुप हो जाता। फिर से रोने लगता। रावण को समझ नहीं आया और उसने उत्सुकता से
पूछा, “अंकल, यह कुत्ता क्यों रो रहा है? आपने इसे खाना भी दे दिया। उसके बावजूद यह दुखी है। बुजुर्ग व्यक्ति मुस्कुराए और बोले, “यह इसलिए रो रहा है बेटा क्योंकि जिस जगह पर यह बैठा है, वहां नीचे एक नुकीला पत्थर पड़ा है। वो पत्थर इसे बार-बार चुभ रहा है। राहुल और हैरान होकर बोला, “अगर इतना दर्द हो रहा है, तो यह उठ क्यों नहीं जाता? अपनी जगह बदल क्यों नहीं लेता?” बुजुर्ग ने राहुल की तरफ देखा और
मुस्कुराते हुए बोले, यही तो बात है बेटा। अभी इसे इतना दर्द नहीं हो रहा कि यह उठ जाए। यह बस थोड़ी तकलीफ झेल लेता है। फिर आराम से उसी जगह बैठा रहता है। यह अपने कंफर्ट ज़ोन में है। जब तक कि यह दर्द असहनीय ना हो। यह यहां से उठेगा नहीं। यह सुनकर राहुल की आंखें फटी रह गई। बुजुर्ग ने आगे कहा, तुम्हारी भी यही समस्या है। राहुल, तुम सफलता चाहते हो, लेकिन अपनी पुरानी जिंदगी और आराम को नहीं त्यागना चाहते। जब तक इंसान अपने आराम के
दायरे से बाहर नहीं निकलता, वह कभी ऊंचे मुकाम पर नहीं पहुंच सकता। सफलता त्याग मांगती है, मेहनत मांगती है और सबसे बड़ी बात हिम्मत मांगती है। उस पल राहुल को अपनी गलती समझ में आ गई। उसने यह तय कर लिया कि अब वो अपनी जिंदगी को उदासी में नहीं बिताएगा। उस दिन के बाद राहुल ने अपनी जिंदगी बदल ली। दिन में वो नौकरी करता लेकिन रात में जाग कर अपने YouTube चैनल पर मेहनत करता। उसे
नींद नहीं मिल पाती। कभी उसके दोस्त उसका मजाक उड़ाते। यह सबसे कुछ नहीं होगा। लेकिन राहुल ने हार नहीं मानी। 2 साल तक उसने दिन रात मेहनत की। धीरे-धीरे उसका चैनल लोगों तक पहुंचने लगा। उसकी मेहनत रंग लाई और एक दिन राहुल उस शहर के सफल व्यक्तियों में गिना जाने लगा। जिस तरह वह कभी उदासी में पार्क की पेंच पर बैठा था। अब उसी पार्क में लोग उसे पहचानते और उसकी मिसाल दिया करते थे। दोस्तों
अगर जिंदगी में सचमुच बड़ा बनना है तो कुत्ते की तरह मत रोते रहो। उठो अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलो और वह कदम बढ़ाओ जिसकी तुम्हें जरूरत है। सफलता वहीं मिलती है जहां हिम्मत और त्याग होता है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आप एक शेयर जरूर करे।
