Star Daily

Tag: Seat 11A Miracle: How Ramesh Vishwas Kumar Survived the Deadly Crash? | Air India Plane Crash.

  • Seat 11A Miracle: How Ramesh Vishwas Kumar Survived the Deadly Crash? | Air India Plane Crash. ( अहमदाबाद प्लेन क्रैश हादसे में सिर्फ एक यात्री बचाः रमेश विश्वास कुमार की तस्वीर आई सामने, चलते हुए नजर आए; कहा- ये करिश्मे से कम नहीं )🇮🇳

    अहमदाबाद में 12 जून 2025 को दिल दहला देने वाली घटना होती है लंदन के लिए उड़ान भर रहे एयर
    इंडिया का बोइंग 787 अहमदाबाद के सरदार
    वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे
    से टेक ऑफ करता है और थोड़ी ही देर में
    मेघानी नगर के एक रिहाइशी इलाके में क्रैश

    हो जाता है 242 लोग सवार होते हैं 230
    यात्री और 12 क्र मेंबर आग का गोला बन क्रू
    चुका विमान मलबे में तब्दील हो गया
    रहे हैं कि 11A सीट पर बैठा एकमात्र
    यात्री जिंदा बचा है कोई कह रहा है कि

    शायद वह आपातकालीन खिड़की के पास है इसलिए
    बच गया कोई कहता है कि वो कूद कर बाहर चला
    गया इसलिए बच गया विश्वास को स्थानीय
    लोगों ने मलबे से निकाला अस्पताल में
    भर्ती करवाया डॉक्टर जो उनका इलाज कर रहे
    हैं वो बता रहे हैं कि उनके सीने में

    थोड़ी चोट आई है आंखों के पास चोट है
    पैरों में चोट है हालांकि वो खतरे से बाहर
    खासतौर पर दीव में अपने भाई अजय कुमार
    रमेश के साथ उनके भाई साहब अजय वह भी उसी
    फ्लाइट में बैठे थे दूसरी पंक्ति में विश्वास की सीट का नंबर 11A था आपातकाल
    खिड़की जो होती है ठीक उनके बगल में थी एक
    ऐसी जगह जो उनकी जिंदगी का टिकट बन गई

    विश्वास के बचने की कहानी इसलिए भी हैरान करती है
    क्योंकि फ्लाइट के उड़ने के 59 सेकंड के
    बाद ही यह हादसा हुआ था और
    59 सेकंड सोचने समझने के लिए बहुत कम होता
    है इसीलिए दुनिया इसे चमत्कार कह रही है कि क्या ईश्वर ने खुद कान में फुसफुसाकर उन्हें छोड़ दिया कि जाओ अभी
    नहीं विश्वास कहते हैं कि 30 सेकंड फ्लाइट

    उड़ती है उसके बाद धमाका होता है वो कहते
    हैं मैं गिर पड़ा चारों तरफ चीख पुकार थी
    जब होश आया तो दिखाई पड़ा चारों तरफ लाशें
    थी वो कहते हैं मुझे नहीं पता मैं कैसे
    बाहर निकला मुझे नहीं पता कि कैसे मलबे से
    खींचा गया एंबुलेंस से पहुंचा यह सब कुछ
    इतना जल्दी हुआ कि मुझे कुछ नहीं पता
    हालांकि इस घटना के बाद उन्होंने अपनी
    फैमिली को कॉल किया बताया कि प्लेन क्रैश
    हो गया और उनका भाई कहां पर है उन्हें
    नहीं पता उनके भाई इसी फ्लाइट में उनके

    साथ थे अजय की कोई जानकारी नहीं और संभवत
    वह भी अब इस दुनिया में नहीं है पुलिस
    प्रशासन लोग मीडिया सब हैरान है सब यही कह
    रहे हैं कि 11 ए सीट पर बैठा एकमात्र
    यात्री जिंदा बचा है कोई कह रहा है कि
    शायद वह आपातकालीन खिड़की के पास है इसलिए
    बच गया कोई कहता है कि वो कूद कर बाहर चला

    गया इसलिए बच गया विश्वास को स्थानीय
    लोगों ने मलबे से निकाला अस्पताल में
    भर्ती करवाया डॉक्टर जो उनका इलाज कर रहे
    हैं वो बता रहे हैं कि उनके सीने में
    थोड़ी चोट आई है आंखों के पास चोट है
    पैरों में चोट है हालांकि वो खतरे से बाहर
    itc वो खतरे से बाहर है बिस्तर पर वो बैठ सकते
    हैं दर्द के बीच अपनी कहानी को बयां कर
    सकते हैं और विश्वास की कहानी सोशल मीडिया
    पर वायरल हो रही है विश्वास जब मलबे से
    लंगड़ाते हुए बाहर निकले कपड़े फटे थे

    चेहरा खून और धुएं से सना हुआ था तो वह
    चमत्कार से कम नहीं था लोगों ने कहा कि
    जाखोर आखे साइयां मार सके ना कोई किसी ने
    कहा यह प्रकृति का चमत्कार है किसी ने कहा
    कि मानो खुद यमराज ने मना कर दिया
    जिंदगी की उम्मीद की प्रतीक बन गई है उनकी
    सीट किसी ने कहा कि 11 ए सीट शायद अब बुक

    करने के लिए लोग तत्पर हो जाएंगे
    लेकिन विश्वास की कहानी सिर्फ चमत्कार की
    नहीं है उनके भाई की कोई खबर नहीं है उनके
    दोस्त दीव से अहमदाबाद पहुंचे हैं उम्मीद
    और डर के बीच विश्वास कहते हैं कि मैं
    अपने भाई को खोजना चाहता हूं मुझे नहीं
    पता मैं क्यों बचा हूं लेकिन अगर मैं
    जिंदा हूं तो शायद कोई वजह है अब सवाल यह
    है कि वो क्यों बचे हैं क्या कहते हैं

    एक्सपर्ट्स सीट नंबर 11A विमान विशेषज्ञ
    कहते हैं कि 11A उम्मीद की सीट इसलिए बनी क्योंकि यह सीट ना सिर्फ एग्जिट के करीब होती है बल्कि
    खिड़की के पास होने की वजह से बाहर का
    रास्ता तलाशने में मदद करती है इसलिए शायद
    एक मौका बने लेकिन इन सबसे आगे एक्सपर्ट्स
    ये कहते हैं कि वो बचे इसलिए हैं क्योंकि
    शायद उन्होंने तुरंत फैसला ले लिया
    मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार संकट के
    समय मैक्सिमम लोग जो होते हैं वह शॉक में
    चले जाते हैं चीखते हैं चिल्लाते हैं डरते हैं घबरा जाते हैं
    लेकिन शायद ये उन 0.01% लोगों में से थे जो तुरंत एक्टिव मोड में आ गए थे सीट 11A में शायद विश्वास साहब वही

    यात्री थे जो पल भर में फैसला ले लिया खिड़की तोड़ो निकलो बाहर निकलो और यही रहा शारीरिक क्षमता भी मैटर करती है बाहर निकलने के लिए ना सिर्फ दिमाग बल्कि शरीर
    की ताकत भी चाहिए मलबे को हटाना आग की
    गर्मी को झेलना धुएं के बीच सांस लेना यह सब आसान नहीं होता और विश्वास के बारे में कहा जा रहा है शायद वो फिजिकली चुस्त थे शायद इच्छाशक्ति जो थी वो ताकत दे रही थी लेकिन सबसे बड़ा रीजन जो एक्सपर्ट्स भी दे
    रहे हैं वो कह रहे हैं कि यह किस्मत का साथ है क्योंकि फिजिकल ताकत की बात हो तुरंत दिमाग लगाने की बात हो
    ये सारी बातें बेईमानी हो जाती है अगर किस्मत का साथ ना हो 12 क्रू मेंबर जो रोज फ्लाइट पर सफर करते हैं जो हर पैसेंजर को पहले बताते हैं कि कोई घटना हो जाए तो

    आपको क्या करना है उनमें से एक भी नहीं बचा विश्वास बचे और इसीलिए लोग मान रहे हैं कि इसमें किस्मत तकदीर का साथ था यह शायद किसी ऐसी ताकत का हाथ था जिसे हम और आप समझ नहीं सकते अगर आग एक सेकंड पहले फैल
    जाती अगर धमाका एक पल पहले हो जाता तो
    शायद यह सीट भी राख हो जाती और इसीलिए 11A सीट पर बचे हुए यात्री का सवाल जो है वो सवाल सिर्फ तथ्यों से नहीं उलझता यह सवाल जिंदगी और मौत के उस अनजाने
    दायरे में ले जाता है जहां जवाब गायब हो जाते हैं
    क्या यह सिर्फ संयोग था कि सही सीट सही समय सही फैसला क्या यह सब एक साथ आए और
    उसे बचा लिया विमान हादसों के इतिहास में कई ऐसे वाक्य रहे हैं जहां कुछ लोग बच निकले हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि वह सही जगह पर थे लेकिन क्या यह इतना आसान है

    या क्या विश्वास को तकदीर ने चुन लिया कुछ
    लोग मानते हैं कि हर इंसान का एक समय लिखा
    हुआ होता है क्या सीट 11 एक के यात्री का
    समय नहीं आया था क्या उसकी जिंदगी में कोई ऐसी अधूरी कहानी थी जिसे ईश्वर ने मौका दिया पूरा करने का
    क्या कोई बड़ा मकसद था जो शायद उसे रोक गया जो बाद विश्वास भी कह रहे हैं कि अगर भगवान ने बचाया है तो कुछ
    वजह तो होगी कई बार जो लोग ऐसे हादसों में बचते हैं

    उनकी जिंदगियां बदल जाती है वो दुनिया को
    कुछ देना चाहते हैं कोई संदेश कोई बदलाव क्या सीट 11 एक का यात्री अब कुछ करेगा ऐसा क्या उसकी कहानी हमें कुछ सिखाएगी पता नहीं लेकिन जो कुछ है वह समझ से परे है कोई इसे चमत्कार का नाम दे रहा है कोई
    किस्मत का कोई अनदेखी ताकत का खेल बांध
    रहा है जो जिंदगी और मौत का हिसाब रखती है
    लेकिन जो कुछ है यह हमारी समझ से परे है
    विश्वास की कहानी सिर्फ एक हादसे से बचने
    की नहीं बल्कि एक ऐसी त्रासदी की है जिसने

    देश को झकझोड़ दिया 30 सेकंड के अंदर टेक ऑफ के बाद जो धमाका हुआ था मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में जाकर
    गिरा 241 यात्रियों की मौत हो गई
    कितने लोग मारे गए हैं कोई अंदाजा नहीं है
    मेडिकल हॉस्टल में लोग मारे गए हैं इस दशक
    का सबसे भयावह विमान हादसा बताया जा रहा
    है लेकिन वहां पर इनका जिंदा बचना हैरान
    करता है हैरान करता है विश्वास कहते हैं
    उन्हें कुछ भी याद नहीं है उन्हें नहीं
    याद है कि किसने दरवाजा खोला उन्हें नहीं
    याद है वह कैसे बचे
    लेकिन दुनिया ने उन्हें उस आग की लपटों के
    बीच में धुएं से सना हुआ देखकर बाहर
    निकलते देखा लाशों राख के बीच में उन्हें

    चलते हुए देखा विश्वास की हालत को देखकर
    यह कहना मुश्किल है क्या वो पूरी तरह ठीक
    है क्योंकि शारीरिक चोटों के अलावा मानसिक
    सदमा इतना गहरा है कि वह बार-बार अपने भाई
    अजय का जिक्र करते हैं उनकी आंखों के
    सामने कहीं उनका भाई खो गया उनके परिवार
    ने लंदन में एक बयान जारी किया कि हमें
    नहीं पता विश्वास कैसे बचा लेकिन हम अजय
    की खोज कर रहे हैं सोशल मीडिया पर चमत्कार

    का जिक्र हो रहा है कुछ इसे ईश्वर की कृपा
    मान रहे हैं लेकिन सवाल यह भी है कि क्या
    हुआ अफवाहें बहुत सारी चल रही हैं हालांकि
    अफवाहों पर कोई सबूत नहीं है विश्वास अस्पताल में है उनकी कहानी दुनिया भर में
    चर्चा का केंद्र है लेकिन विश्वास कहते हैं चमत्कार अधूरा है मैं जिंदा हूं मेरा भाई कहां है उनका यह सवाल हर उस शख्स के
    दिल को छू रहा है जो इस राजी खबर को सुन छू
    रहा है सीट 11 ए अब सीट नहीं यह उस जिंदगी
    की नाजुक डोर का प्रतीक है जो आग राख और

    मौत के बीच नहीं डूबती आप इसे कैसे देखते हैं सही समय पर सही सीट पर होना किस्मत का
    होना यमराज का मना कर देना ईश्वर का
    आशीर्वाद होना किसी अनोखी ताकत का आना या
    केवल इत्तेफाक का होना जो कुछ है यह हैरान करने वाला है हमारी आपकी सोच से परे है काश जैसे एक जिंदगी बची है ऐसे 241 जिंदगियां बच जाती लेकिन उन 241 जिंदगियों के बीच में उम्मीद की एक रोशनी विश्वास की जिंदगी

    से नजर आती है ईश्वर उन तमाम आत्माओं को शांति दे जिन्होंने अपनी जान गवाई इस
    हादसे से उभरने में हिंदुस्तान को समय लगेगा क्योंकि इस हादसे ने हर हिंदुस्तानी के सीने में घर कर लिया है हर हिंदुस्तानी डरा है मां-बाप डरे हैं लोग डरे हैं आने
    जाने में डर लगेगा वो फ्लाइट में काम करने
    हादसे से उभरने में हिंदुस्तान को समय
    लगेगा क्योंकि इस हादसे ने हर हिंदुस्तानी

    के सीने में घर कर लिया है हर हिंदुस्तानी डरा है मां-बाप डरे हैं लोग डरे हैं आने जाने में डर लगेगा वो फ्लाइट में काम करने वाले लोग हर रोज डरेंगे लेकिन उस डर के
    बीच में विश्वास का बचना एक उम्मीद जताता
    है और यह सवाल उठाता है कि 241 जिंदगियों
    के बीच में सिर्फ विश्वास कैसे बचा .

    आप अपनी कीमती बाते जरूर बताए इस AIR Crass हादसे के मामले में।