खत्म हुआ इंतजार सज गया राम दरबार। संसार को अभी आभा से आलोकित करने वाले सूर्यदेव, साक्षात शक्ति माता जगदंबा, समस्त जगह का पेट भरने वाली मां अन्नपूर्णा और शेषावतार के विग्रहों के भी प्राण प्रतिष्ठा की गई। यह वो मुद्दा है जिसने पूरे देश को जगझोर कर रख दिया।
जिसने राजनीति को बदला और जिसने हमारी सामाजिक सोच को नई दिशा दी। नगर निगम हो या विकास प्राधिकरण उत्तर प्रदेश सरकार की हर संस्थाएं उसी प्रतिबद्धता के साथ उन्हें सम्मानित करने का काम [संगीत] [प्रशंसा] करेंगे।
सबसे पहले बात करते हैं राम मंदिर का इतिहास। राम मंदिर के हिस्ट्री में बात आती है दोस्तों, अयोध्या की। अयोध्या उत्तर प्रदेश के सरयू नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन नगर है। यह नगर हिंदू धर्म के सात पवित्र नगरों यानी कि सप्तपुरियों में से एक है। वाल्मीकि रामायण और दूसरे पुराणों के अनुसार अयोध्या भगवान श्री राम की जन्मभूमि है। अयोध्या का उल्लेख वेद, महाभारत और कई धर्म ग्रंथों में मिलता है। हिंदुओं का मानना है कि जहां राम मंदिर है वहीं पर भगवान श्री राम का जन्म हुआ था।
यहां पर एक मंदिर हुआ करता था जिसे बाबर के सेनापति मीर बाकिर ने ध्वस्त कर दिया था और फिर उस स्थान पर उस जगह पर एक मस्जिद बनवाई जिसे बाबरी मस्जिद कहा गया लेकिन सन 1949 में इस मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्ति अचानक से प्रकट हुई। इस घटना ने चारों तरफ तहलका मचा दिया। यह देखकर सबके होश उड़ गए। हिंदुओं ने इसे भगवान श्री राम का चमत्कार भी कहा। राम जन्मभूमि को लेकर पहला संघर्ष सन 1853 में हुआ। जब हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई। ब्रिटिश सरकार ने 1859 में विवाद को शांत करने के लिए एक बाढ़ लगवाई। तब से हिंदू बाढ़ चबूतरे पर पूजा
करते और मुस्लिम भीतर नमाज पढ़ते। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया। लेकिन पक्ष में सुप्रीम कोर्ट चले गए। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने फैसला सुनाया कि पूरी जमीन रामलला को दी जाए। पूरी जमीन रामलला को दी गई और मुस्लिम पक्ष के लिए अलग से मस्जिद बनवाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का फैसला हुआ। 15 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री मोदी जी ने भूमि पूजन किया और फाइनली 22 जनवरी 2024 को जाकर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा भव्य समारोह के साथ हुई। करोड़ों राम भक्तों की कई
वर्षों की तपस्या आज सफल हुई। आज राम मंदिर केवल एक भवन ही नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। राम मंदिर का यह संघर्ष केवल धार्मिक मुद्दा नहीं था। यह भारतीय आत्मा का पुनर्जागरण था। इस मंदिर में केवल पत्थर ही नहीं लगे। इसमें करोड़ों लोगों की श्रद्धा, बलिदान और संघर्ष की ईंटें जुड़ी हैं। अयोध्या आज फिर से जाग रहा है और हर भारतीय के दिल में श्री राम बसे हैं। यह था राम मंदिर का इतिहास। अब समझते हैं इसकी जानकारी। राम मंदिर की लंबाई है करीब 360 फीट यानी कि 110 मीटर। चौड़ाई है
करीब 235 फीट यानी कि 72 मीटर्स। ऊंचाई है करीब 161 फीट यानी कि 49 मीटर्स। मंजिल की बात करें तो करीब तीन मंजिल है और हर एक मंजिल का अलग-अलग उद्देश्य और विशेषता है। पहली मंजिल ग्राउंड फ्लोर यानी कि भूतल। यह मंदिर का मुख्य मंजिल है जहां गर्भ गृह भी स्थित है। यहीं पर श्री राम लला की मूर्ति स्थापित है बाल रूप में। अब आता है यहां पर दूसरा मंजिल। यह भाग ध्यान और अध्ययन के लिए रखा गया है। यहां पर विशेष धार्मिक प्रवचन जैसे कि रामायण पाठ और सांस्कृत आयोजन भी हो सकता है। यह एक दर्शनीय मंजिल होगी। यहां से मंदिर परिसर और अयोध्या
नगरी का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। इसमें कुछ आलेख पेंटिंग्स और शिल्प कार्य भी होंगे जो रामायण की घटनाओं को दर्शाते हैं। सदियों का संघर्ष ना जाने कितने बलिदान असंख्य प्रतीक्षा के बाद आज प्रभु श्री राम अपने भव्य मंदिर में विराजमान है। यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और संघर्षशील इतिहास का प्रतीक है। यह मंदिर हमें याद दिलाता है कि रास्ते में चाहे कितनी भी बाधाएं हो, कितनी भी दिक्कतें हो, सत्य और धर्म की विजय निश्चित है। आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लेते हैं कि हम भी रामलला की तरह करुणा, मर्यादा और न्याय के पथ पर चलेंगे। क्योंकि राम सिर्फ एक नाम नहीं राम है हमारी आत्मा का मूल्य। और राम मंदिर हमारी चेतना का मंदिर है । जय श्री राम …
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