
परिचय
द्रोपती, अग्नि से जन्मी, असाधारण सौंदर्य और बुद्धि की प्रतीक थीं। उनका स्वयंवर, जहाँ अर्जुन ने मत्स्यभेदन कर उन्हें जीता, एक ऐतिहासिक घटना थी। परंतु, कुंती के वचन के कारण, वे पांचों पांडवों की पत्नी बनीं, जो एक अद्वितीय और जटिल संबंध था।
संघर्ष और शिक्षा
भरी सभा में उनका चीरहरण, धर्म और न्याय पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगा गया। इस अपमान ने ही महाभारत के युद्ध की नींव रखी, जहाँ उन्होंने न्याय के लिए संघर्ष किया। द्रोपती केवल एक रानी नहीं थीं, वे नारी शक्ति, स्वाभिमान और धर्म की रक्षा की प्रतीक हैं।
विरासत
उनकी कहानी हमें सिखाती है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना कितना महत्वपूर्ण है। उनका जीवन हमें धैर्य, दृढ़ता और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का पाठ पढ़ाता है।
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