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दुनिया के पहले हवाई जहाज बनने की कहानी | Wright Brothers Story

साल था 1898। अमेरिका के एक शहर ओहायो में दो भाई अपनी साइकिल की दुकान चलाते थे। ना कोई बड़ी डिग्री, ना पैसे, ना किसी वैज्ञानिक का साथ। लेकिन उनके अंदर एक ऐसा सपना पल रहा था जिसे दुनिया पागलपन कहती थी। उनका सपना था इंसान को उड़ते हुए देखने का। जब भी कोई पंछी

आसमान में उड़ता तो दोनों भाई उसे घंटों तक देखते रहते और अपने मन में सोचा करते अगर यह कर सकता है तो इंसान क्यों नहीं कर सकते? यही सवाल उनके दिल में आग बनकर जलने लगा। उन दोनों भाइयों ने ठान लिया था कि वह उड़ने वाली मशीन बनाकर रहेंगे। अपनी साइकिल रिपेयरिंग की दुकान पर पुराने पुर्जों से उन्होंने उस असंभव मशीन को बनाने की

शुरुआत की। लोगों ने उनसे कहा, “अरे पागल हो गए हो क्या? उड़ना ईश्वर का काम है। इंसान का नहीं। वैज्ञानिकों ने उनका मजाक उड़ाया। अखबारों में उन्हें ड्रीमिंग मैकेनिक्स कहा गया। लेकिन उन दोनों भाइयों के लिए हर ताना, हर हंसी एक और सबक बन गया। उन्होंने अपनी साइकिल की दुकान के कोने में टेस्ट शुरू किए। लकड़ी, तार और कपड़े के पंख बनाए और हवा में उड़ाने की कोशिश की। कभी इंजन फेल हो जाता, कभी मशीन टूट जाती। कभी हवा साथ

नहीं देती तो कभी जमीन धोखा दे जाती। लेकिन हर बार गिरने के बाद वह मुस्कुरा कर कहते हम उड़ नहीं पाए पर आज हमने उड़ना सीखा है। 2 साल तक प्रयोग करने के बाद साल था 1900। उन्होंने अपनी मेहनत से अपना पहला ग्लाइडर बनाया और उसे टेस्ट करने गए नॉर्थ कैरोलना के रेतीले टीलों पर। वहां पर हवाएं तेज थी और हालात मुश्किल थे। दिन में तपती धूप और रात में कड़ाके की ठंड और

ऊपर से असफलता है। उन्हें कई बार प्रयोग के दौरान गिरते-गिरते चोटें लगी। किसी किसी टेस्ट में उनकी हड्डियां तक टूट गई। लेकिन उन्होंने हार मानने से इंकार कर दिया। बड़े भाई ने एक रात छोटे भाई से कहा, शायद दुनिया हम दोनों को पागल समझती है। लेकिन एक दिन यही पागलपन इंसान को आसमान में ले उड़ेगा। और 3 साल तक चोट खाने और असफल होने के बाद वो दिन आया 17 दिसंबर 1903 सर्दियों की सुबह थी। हवा में धुंध थी। आसमान पूरा बादलों से ढका हुआ था। लेकिन उन दोनों

भाइयों के दिल में एक साफ आसमान था। उम्मीदों से भरा हुआ। उन्होंने अपनी मशीन तैयार की। द राइट फ्लेयर। बड़े भाई ने कंट्रोल संभाला और दूसरे भाई ने पीछे से धक्का दिया। इंजन गरजा, पंख फड़फड़ाए और देखते ही देखते इंसान ने अपनी उड़ान भरी। 12 सेकंड 120 फीट। लेकिन वो 12 सेकंड इंसानी

इतिहास की सबसे बड़ी उड़ान थी। पहली बार इंसान ने आसमान को छुआ था। उनकी आंखों में आंसू थे। लेकिन वो आंसू सिर्फ सफलता के नहीं थे। वो सालों की मेहनत और विश्वास के आंसू थे। लेकिन अभी कहानी खत्म नहीं हुई। उनकी उड़ान के बावजूद किसी ने भी उन पर यकीन नहीं किया। सरकारों ने कहा ये धोखा है। अखबारों ने छापा मशीन उड़ नहीं सकती। लेकिन वो दोनों भाई जानते थे सच को साबित करने में वक्त लगता है। उन्होंने और बेहतर मशीन बनाई बार-बार टेस्ट किए। हर उड़ान

दूसरी उड़ान से ऊंची होती गई। धीरे-धीरे दुनिया ने उनके सामने अपना सिर झुका लिया और उनकी मेहनत का लोहा मान लिया। अब वो ड्रीमिंग मैकेनिक्स नहीं रहे। अब वो द फादर ऑफ एिएशन बन चुके थे। यह दो भाई और कोई नहीं ओरिवल और विलबर राइट थे जिन्हें राइट ब्रदर्स के नाम से जाना जाता है। जिन्होंने

सबसे पहले विमान की नींव रखी और दुनिया ने जिन्हें बेवकूफ कहकर उनका मजाक उड़ाया। आज जब भी कोई विमान आसमान में उड़ता है तो उसके हर पंख में राइट ब्रर्स का जुनून होता है। हर इंजन की गूंज में उनकी मेहनत की आवाज होती है। उन्होंने दुनिया को सिखाया असफलताएं रास्ते की दीवार नहीं तुम्हारे हर सपने की सीढ़ियां हैं। हर कोई कहता है

नामुमकिन है लेकिन इतिहास वही बदलता है जो कहता है चलो कोशिश करते हैं। ओरिवल और विलबर राइट ने यह साबित कर दिया अगर तुम गिरने से नहीं डरते तो एक दिन यह पूरा आसमान तुम्हारे कब्जे में होगा क्योंकि सपने उन्हीं के पूरे होते हैं जो हार से लड़ने की हिम्मत रखते हैं।

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