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समय के साथ चलो क्लिप स्टोरी हिन्दी |

भारत के एक हरेभरे गांव में रमेश नाम का किसान रहता था। रमेश मेहनती था, ईमानदार था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी। वह हमेशा पुराने तरीकों से ही खेती करता था। उसके पिताजी ने जिस तरह हल चलाया था, जिस तरह बीज बोए थे, रमेश आज भी वही

तरीके अपनाता था। हर दिन वह सुबह सूरज उगने से पहले अपने खेतों में पहुंच जाता। बैलों से हल चलाता, हाथ से बीज बोता और पूरे दिन पसीना बहाता। लेकिन असली समस्या यह थी कि दुनिया अब बदल चुकी थी। उसके आसपास के किसान नई टेक्नोलॉजी का

इस्तेमाल कर रहे थे। ट्रैक्टर, मोटर, ड्रिप इरीगेशन, अच्छी क्वालिटी के बीज। उससे उनकी फसलें भी ज्यादा होती, मेहनत भी कम लगती और आमदनी भी अच्छी होती। रमेश यह सब देखकर भी अनदेखा कर देता। वो कहता, “मेरे पिताजी ने यही तरीके अपनाए थे। मैं भी इन्हें ही अपनाऊंगा। मशीन पर भरोसा करके किसानी का असली मजा नहीं आता। उस गांव के और किसान धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे।

लेकिन रमेश उसी जगह अटका हुआ था। उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि परिवार का गुजारा भी मुश्किल होने लगा। एक दिन गांव में एक नौजवान आया। उसका नाम अर्जुन था। वो शहर से पढ़ाई करके लौटा था। अर्जुन ने देखा कि रमेश अब भी बैलों से ही हल चला रहा है। अर्जुन ने मुस्कुरा कर कहा, “अरे चाचा, आप भी पुराने तरीकों से ही किसाने कर रहे हो।”

क्यों ना आप एक ट्रैक्टर किराए पर ले लें। इससे आपका समय भी बचेगा और आपकी पैदावार भी बढ़ेगी। रमेश ने हंसते हुए कहा, “अरे बेटा, यह सब दिखावा है। असली किसानी तो पसीना बहाने से होती है। मशीनों में वह आत्मा कहां जो किसान अपने हाथ से काम करने में लाता है।” अर्जुन ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसने मन बना लिया कि रमेश को समय के साथ आगे

बढ़ना जरूर सिखाएगा। अगले दिन अर्जुन ने रमेश को अपने घर बुलाया और फिर उन्हें खेतों पर ले गया। वहां उसने रमेश को दिखाया कि कैसे सिर्फ 2 घंटे में ट्रैक्टर से पूरा खेत जोत दिया जाता है जो रमेश अकेले अपने बैल से 2 दिन में करता। उसने दिखाया कि नई तकनीक की मदद से पानी की बर्बादी नहीं होती और अच्छी क्वालिटी की फसल भी मिलती है। रमेश हैरान रह गया। उसे लगा कि सचमुच मेहनत तो

वही है लेकिन नतीजा कितना अलग है। अर्जुन ने समझाया चाचा समय बदल गया है। बदलते वक्त के साथ हमें भी बदलना पड़ता है। वरना हम पीछे रह जाते हैं। मेहनत जरूरी है लेकिन अकल और मेहनत को मिलाना भी जरूरी है। रमेश को पहली बार महसूस हुआ कि उसकी ज़िद ही उसे गरीबी की तरफ धकेल रही थी। आखिरकार रमेश ने अपनी सोच बदली। उसने पहली बार ट्रैक्टर किराया पर लिया। अच्छी

क्वालिटी के बीज भी खरीदे और नई सिंचाई तकनीक अपनाई। नतीजा यह हुआ कि उसकी फसल और दो गुना बढ़ गई। उसका परिवार भी खुशहाल था। गांव वाले हैरान थे कि रमेश जैसे जिद्दी किसान ने आखिरकार किस तरह बदलाव को अपना लिया। रमेश अब हर किसी से कहता मेरे दोस्तों मेहनत करो लेकिन समय के साथ बदलो। अगर हम अब भी पुराने तरीकों से ही चिपके रहेंगे तो जिंदगी आसान नहीं

होगी। बदलाव ही जीवन का नियम है। उस दिन से रमेश की सोच बदल गई। वो गांव के और किसानों को भी समझाने लगा। समय के साथ आगे बढ़ना सीखो। यही असली सफलता है। दोस्तों, समय के साथ आगे बढ़ो। तभी हमारा जीवन आसान और सफल बनता है। जो समय के साथ बदलता है वही आगे बढ़ता है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

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