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भाई मुझे सोया हुआ देखकर उसने अपना केला मेरे मुँह में डाल दिया । Story sad | Motivational Stories | Hindi Stories love

भाई प्लीज अपना बाहर निकालो मैं तुम्हारी बहन हूं मैं तुमको कितना शरीफ समझती थी लेकिन भाई ने मेरी एक ना सुनी और जो जो उनके मन में था वह सब उस दिन भाई ने मेरे साथ किया आखिर यह सब कैसे हुआ वह सब वह बताऊंगी

इस कहानी में मेरा नाम सोनम है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूं मेरी उम्र 20 साल है लोग कहते हैं कि मैं दिखने में काफी सुंदर हूं और शायद इसीलिए मोहल्ले के लड़के अक्सर मुझे लेकर बातें करते हैं लेकिन हमेशा इशारों में मेरा परिवार में मैं मेरा छोटा भाई और मम्मी हैं मेरी मम्मी स्कूल टीचर है मैं और मेरा भाई दोनों कॉलेज जाते हैं यह तीन महीने पहले की बात है उसी दिन सोमवार था मैं घर में अकेली थी और कुछ करने का मन नहीं हो रहा था मैं मोबाइल देखने लगी शायद कुछ दिल बहल जाए तभी मम्मी का फोन आया उन्होंने कहा आज मुझे आने में देर हो सकती है मैंने कहा ठीक है मम्मी

आप आराम से आओ उसके बाद मैं बिस्तर पर लेट गई और कब नींद आ गई पता ही नहीं चला अचानक से मेरी नींद खुली तो मुझे लगा जैसे कोई मेरे पास बैठा हुआ है मुझे महसूस हुआ कि कोई धीरे-धीरे अपनी उंगली से मुझे छू रहा है पहले तो मुझे समझ ही नहीं आया कि यह क्या हो रहा है लेकिन जैसे ही मैं हल्के से अपनी आंखें खोली मैं एकदम से चौक गई मेरा छोटा भाई जिसे मैं हमेशा मासूम और शरीफ समझती थी वही मेरे पास बैठा था मुझे यकीन नहीं हो रहा था

कि वह यह सब कर सकता है मेरा दिल बहुत तेज धड़कने लगा था अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाई मैं सोच रही थी कि वह ऐसा क्यों कर रहा है क्या उसने कभी ऐसा कुछ सोचा भी था मेरे बारे में या फिर यह सिर्फ एक गलती थी उसी पल मेरे मन में बहुत सारे ख्याल आ रहे थे क्या मैं उसे माफ कर सकती हूं क्या यह एक ऐसी घटना है जिसे मैं अनदेखा कर सकती हूं लेकिन साथ ही मुझे ना जाने क्यों उस में गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि उल्टा मुझे भी शायद अच्छा ही लग रहा था मेरी समझ में ही कुछ कमी थी या फिर मैं उस परल कुछ और

सोच रही थी कुछ समय बीता और मैं अभी भी सोने का नाटक कर रही थी तभी अचानक महसूस हुआ कि भाई मुझे हल्के से जगाने की कोशिश कर रहा है उसकी उंगलियां मेरे कंधे पर हल्के से छू रही थी लेकिन मैंने अपनी आंखें नहीं खोली मैं जानती थी कि मैं पूरी तरह से जाग रही हूं लेकिन वह शायद सोच रहा था कि मैं नींद में हूं धीरे-धीरे उसकी हरकतें पहले से ज्यादा होने लगी पहले जहां वह बस हल्का स्पर्श कर रहा था अब उसकी हिम्मत और बढ़ने लगी थी मैं समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या कर रहा रहा है और क्या करना चाहता है लेकिन मैं चुपचाप देख रही थी मेरे मन में कई सवाल उठ रहे थे यह मासूम भाई अचानक इतना बदल कैसे गया उसने ऐसा क्यों किया मैं समझ नहीं पा रही थी कि वह मुझे नींद में क्या खिलाने की कोशिश कर रहा था मेरे होंठ बंद थे लेकिन फिर भी उसने कोशिश की कि मैं खा लूं मैं सोते हुए जानबूझकर अपने होठ थोड़े से खोल दिए मैंने ऐसा महसूस कराया जैसे मैं नींद में हूं और मेरे होठ अपने आप ही खुल गए हैं उस पल में मेरे अंदर एक अजीब सी घबराहट थी

लेकिन मैंने उसे जाहिर नहीं होने दिया तभी अचानक घर के फोन की घंटी बजने लगी उस आवाज से माहौल पूरी तरह बदल गया भाई तुरंत डर गया और घबराकर दूर चला गया वह इतनी तेज से उठा कि मैं समझ गई उसके दिमाग में भी डर था कि कहीं मैं जग ना जाऊं उसने फोन उठाया तो देखा वह मम्मी की कॉल थी वह पूछ रही थी कि तुम लोगों ने खाना खाया मैं मन ही मन सोची इनको भी इसी समय कॉल करना था लेकिन वह जल्दी से कॉल खत्म किया अब मेरा ध्यान फिर से भाई की तरफ था लेकिन फिर देखी तो वह कमरे से गायब हो चुका था मैं थोड़ी देर तक सोचती रही कि अब क्या

करना चाहिए मेरा मन अब बेचैन हो गया था यह वही भाई था जिसे मैं हमेशा मासूम और समझदार मानती थी वह अचानक इतना कैसे बदल गया क्या मैं उससे इस बारे में बात करूं या इसे अनदेखा कर दूं बहुत देर तक मैं अपने विचारों में उलझी रही मैंने सोचा कि अगर मैं इस पर कुछ नहीं करती तो शायद यह घटना फिर से हो सकती है लेकिन अगर मैं उसे कुछ कहती हूं तो हमारे बीच का रिश्ता हमेशा के लिए बदल जाएगा फिर मुझसे और रहा नहीं गया मेरे मन में उथल-पुथल मची हुई थी और मैं भाई से बिना बात किए खुद को रोक नहीं पा रही थी मैं उसके कमरे की तरफ गई भाई का कमरा अलग था जहां वह अक्सर पढ़ाई करता है मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उससे क्या कहूंगी किस तरह इस पूरे वाक्य का सामना करूंगी जब मैं भाई के कमरे के पास पहुंची तो दरवाजा आधा खुला हुआ था था मैंने धीरे से अंदर झांका

फिर मैंने जो देखा उसने मेरी आंखें पूरी तरह से चौड़ी कर दी भाई बिस्तर पर लेटा हुआ था और वह अपने हाथों से कुछ ऐसा कर रहा था जिसे देखकर मैं पूरी तरह से हैरान रह गई मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी मेरा मासूम और सीधा साधा भाई जिसे मैं अब तक सिर्फ एक बच्चे की तरह देखती थी वह ऐसा कर सकता है मैंने कभी सोचा भी नहीं था करीब 10 मिनट तक मैं बस दरवाजे पर खड़ी देखती रही मेरे दिमाग में कई सवाल उठ रहे थे आखिर उसे क्या हो गया है क्या वह सच में ऐसा कर रहा है या फिर मैं किसी भ्रम में हूं मैं खुद को शांत करने की कोशिश की लेकिन मेरी आंखें उसी पर टिकी हुई थी मुझे पता था कि मुझे कुछ करना चाहिए या कुछ कहना चाहिए लेकिन मेरे

अंदर से आवाज नहीं निकल रही थी मैं जिस भाई को अब तक मासूम समझती थी वह मेरे सामने बिल्कुल अलग रूप में था उसे इस हालत में देखकर मुझे एहसास हुआ कि शायद उसने बचपन से कुछ ऐसा देखा या महसूस किया है जिसके बारे में मैंने कभी सोचा ही नहीं मेरे मन में उसके प्रति नफरत नहीं आई बल्कि मैं उलझन में थी मैं समझ नहीं पा रही थी कि यह मेरी कोई गलत फहमी है या फिर कुछ और

मैंने धीरे-धीरे दरवाज से हटने का फैसला किया मुझे नहीं पता था कि अगर मैं उसे इस हालत में टोकू गी तो बीच क्या होगा मैं मन ही मन सोचने लगी कि उसने मेरे साथ कुछ गलत कर दिया तो उतने में उसने मुझे देख लिया और फिर वही हुआ जिसका मुझे डर था
तो दोस्तो आप समझ गए की मेरे साथ क्या हुआ।

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