
एक राजा को झूठी कहानियां सुनने का शौक था वह बिना कहानियां सुने दरबार का काम शुरू नहीं करता धीरे-धीरे दरबारियों और प्रजा के पास कहानियां खत्म हो गई लेकिन राजा की जिद कम नहीं हुई राजा ने घोषणा की कि जो उसे तीन झूठी कहानियां सुनाएगा उसे इनाम मिलेगा इनाम के लालच में लोग कहानियां लेकर आने लगे लेकिन राजा सारी कहानियां पहले ही सुन चुका था नई कहानियां सुनते ही वह पहचान लेता फिर राजा ने एक और घोषणा की कि जो उसे तीन झूठी कहानियां सुनाएगा उसे आधा राज्य और अपनी बेटी चंद्रप्रभा का हाथ में लेगा राजा ने यह घोषणा तो कर दी लेकिन उसे डर था कि अगर कोई सच में तीन झूठी कहानियां सुना देगा तो उसे वादा निभाना पड़ेगा इस डर से राजा ने दरबारियों को आदेश दिया कि जैसे ही तीसरी कहानी सुनाई जाए सभी कहें यह सच्ची है इसके बाद राजा उस व्यक्ति को राजद्रोह के आरोप में जेल भेज देता इससे लोग डर गए कोई कहानियां सुनाने को तैयार नहीं था अब राजा बेचैन हो गया उसने अपने खास दरबारी को आदेश दिया कि वह व्यवस्था करे अगर दो दिन तक कोई कहानी नहीं सुनाई गई तो दरबारी को 100 कोड़े मारे जाएंगे राजा के दरबारी को आदेश में मिला था कि किसी तरह तीन झूठी कहानियां सुनाने वाला व्यक्ति ढूंढे लेकिन दरबारी जानता था कि राजा की चाल थी कि तीसरी कहानी को सच्चा बताकर वह सुनाने वाले को जेल में डाल देता था अपने राज्य में कोशिश करने के बाद जब उसे कोई नहीं मिला तो वह दूसरे राज्य में भी गया वहां भी राजा की चाल के बारे में सुनकर कोई तैयार नहीं हुआ थक हार कर दरबारी एक पेड़ के नीचे बैठ गया तभी एक लकड़हारा वहां आया और उससे पूछा कि आप उदास क्यों बैठे हैं दरबारी ने कहा कि उसका दुख जानने से क्या होगा लेकिन लकड़हारे ने मदद का भरोसा दिया दरबार ने राजा की समस्या बताई कि वह झूठी कहानियां सुनने का शौकीन है लेकिन तीसरी कहानी को सच्चा बताकर सुनाने वाले को जेल में डाल देता है लकड़हारे ने मुस्कुराते हुए कहा बस इतनी सी बात आप चिंता मत कीजिए कल मैं राजा को तीन झूठी कहानियां सुनाने आऊंगा दरबारी ने कहा तुम युवा हो अपना जीवन क्यों खतरे में डाल रहे हो लकड़े ने कहा आप निश्चिंत रहें दरबारी उसकी बात मानकर दरबार लौट आया और राजा को खबर दी अगले दिन राजा उस व्यक्ति का बेसब्री से इंतजार करने लगा नियत समय पर युवक आया और राजा से कहा महाराज मैं आपको तीन झूठी कहानियां सुनाने आया हूं राजा ने कहा तुम्हें नियम मालूम ही होंगे अगर तुम तीन झूठी कहानियां सुना दोगे तो मेरी बेटी से विवाह और आधा राज्य तुम्हें मिलेगा लेकिन अगर कोई कहानी सच्ची निकली तो तुम्हें राष्ट्रद्रोह के आरोप में जेल या 1000 कोड़े मारने की सजा मिलेगी युवक ने कहा मुझे सजा मंजूर है लेकिन पहले मेरी कहानियां सुन लीजिए राजा ने अनुमति दी और युवक ने अपनी पहली कहानी सुनानी शुरू की महाराज मैं एक किसान हूं एक दिन जब मैं खेत में हल जोत रहा था मेरी मां खाना लेकर आई खाने में आम थे मैंने आम खाए और गुठलियों बैलों की पीठ पर रख दी तभी बारिश होने लगी और उन गुठलियों से बड़े-बड़े बरगद के पेड़ उगाए पेड़ इतने विशाल थे कि उनकी छाया में मैं बिना भीगे पूरा खेत जोतता रहा सारी सभा ठहाके लगाने लगी दरबारियों ने कहा आम की गुठलियों से बरगद और वो भी बैलों की पीठ पर यह तो पूरी तरह झूठ है राजा ने मुस्कुराते हुए कहा अगली कहानी सुनाओ उस युवक ने राजा से पूछा महाराज क्या आप मानते हैं कि मेरी पहली कहानी झूठी थी राजा ने कहा हां मैं मानता हूं अब दूसरी कहानी सुनाओ युवक ने कहानी शुरू की महाराज एक बार हमारे गांव में बारिश नहीं हो रही थी मेरी मां ने कहा कि कुछ करो मैंने एक डंडा उठाया और बादलों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया बादल मुझसे डर कर भागने लगे लेकिन मैंने उन्हें पकड़कर इतना पीटा कि वे रोने लगे उनके आंसू बारिश बनकर हमारे गांव में बरसने लगे वह बारिश इतनी तेज थी कि पूरा गांव डूब गया लेकिन मेरा कुत्ता बिल्ली खिलौने और मेरा घर सब सूखे रहे मैं अपनी एक अंगुली से सबको बचाकर रखे हुआ था मेरी अंगुली के नीचे मेरा घर और आसपास के चार पड़ोसियों के घर भी थे दरबारियों ने ठाके लगाते हुए कहा बादलों को पीटकर बारिश और एक अंगुली के नीचे पूरा घर ये तो पूरी तरह झूठ है राजा भी हंसते हुए बो बोला हां यह कहानी झूठी है अब तीसरी सुनाओ युवक ने मुस्कुरा कर कहा महाराज तीसरी कहानी मैं कल सुनाऊंगा राजा ने लड़के के जाने के बाद दरबारियों को आदेश दिया कल वह चाहे कैसी भी कहानी सुनाए तुम सबको कहना है कि यह कहानी सच्ची है उधर रात को दरबारी को चिंता होने लगी वह लड़के के पास गया और बोला बेटा तुम अभी यहां से भाग जाओ राजा ने आदेश दिया है कि तुम जो भी तीसरी कहानी सुनाओ ग उसे सच्ची बता दिया जाएगा इसके बाद तुम्हें राजद्रोह के आरोप में जेल भेज दिया जाएगा या तुम्हें 1000 कोड़े मारने की सजा दी जाएगी लड़के ने शांत रहते हुए कहा आप चिंता मत करें कल देखना या तो राजा अपनी झूठी कहानियां सुनने की आदत छोड़ देगा या फिर मैं यहां नहीं रहूंगा दरबारी ने समझाने की कोशिश की बेटा मैं जानता हूं तुम बुद्धिमान हो लेकिन राजा के दरबारी नीच और चालाक लोग हैं वे राजा के आदेश के अनुसार ही काम करेंगे अपनी जान बचाने के लिए भाग जाओ लड़के ने दृढ़ता से कहा आप मुझ पर भरोसा करें कल मैं ना केवल सुरक्षित रहूंगा बल्कि राजा को उसकी आदत भी छुड़वा दूंगा अगली सुबह दरबारियों ने राजा के इशारे का इंतजार किया राजा ने मुस्कुराते हुए लड़के से कहा अब अपनी तीसरी कहानी सुनाओ लड़के ने कहा महाराज जैसा कि आप जानते हैं आपके दादाजी और मेरे दादाजी बहुत अच्छे मित्र थे इतना सुनते ही सभी दरबारी बोल उठे हां यह सच है हमने सुना है कि वे बहुत अच्छे मित्र थे लड़के ने हाथ जोड़कर निवेदन किया महाराज कृपया मुझे पहले कहानी पूरी करने दें इसके बाद निर्णय लें कि यह सच्ची है या झूठी राजा ने दरबारियों को शांत कराया और लड़के से कहा ठीक है अपनी कहानी पूरी करो लड़का बोला महाराज एक बार आपके राज्य में अकाल पड़ा था तब आपके दादाजी ने मेरे दादाजी से मदद मांगी मेरे दादाजी ने 10000 बैल गाड़ियां सोने की मोहरों से भर कर भेजी थी जिससे अकाल का सामना किया गया लेकिन आपके दादाजी ने वादा किया था कि वे इस रकम का ब्याज के साथ लौट आएंगे लेकिन लौट आए नहीं मेरे दादाजी ने मरते समय मेरे पिताजी से कहा था और मेरे पिताजी ने मरते समय मुझसे कहा कि अब वह रकम 15500 बैल गाड़ियां सोने की हो चुकी है महाराज कृपया वह रकम मुझे लौटा दें इतना सुनते ही राजा सोच में पड़ गया इधर सभी दरबारी चिल्ला रहे थे यह कहानी सच्ची है यह कहानी सच्ची है राजा ने लड़के की तीसरी कहानी सुनकर सोचा अगर यह कहानी सच्ची है तो मुझे इसे 15500 बैल गाड़ियां सोने की देनी होंगी लेकिन मेरे पूरे राज्य में इतना सोना भी नहीं है यहां तक कि अगर मैं प्रजा से सब कुछ इकट्ठा करूं तब भी संभव नहीं होगा इसलिए मुझे यह कहानी झूठी माननी ही पड़ेगी उधर दरबारी चिल्ला रहे थे यह कहानी सच्ची है राजा गुस्से में अपनी गद्दी से खड़ा हुआ और बोला चुप हो जाओ यह कहानी झूठी है मैं खुद कहता हूं यह झूठी है दरबार में सन्नाटा छा गया दरबारियों को समझ नहीं आया कि राजा ने ऐसा क्यों कहा राजा ने कहा आज मुझे समझ में आ गया है कि सनक और जिद गलत होती है मैंने अपनी सनक में अपना आधा राज्य और समय बर्बाद किया फिर राजा ने लड़के से कहा युवक तुम्हारी बुद्धिमानी और चतुराई ने मुझे प्रभावित किया है मैं अपनी बेटी चंद्रप्रभा का विवाह तुमसे करूंगा लड़के ने मुस्कुरा कर कहा महाराज मैं मनोहर गढ़ का राजकुमार मनोहर सिंह हूं मैं आपकी सनक दूर करने और चंद्र प्रभा को देखने आया था वह सच में सुंदर और गुणी है राजा ने कहा आज मैंने सीखा कि राजा वही है जो प्रजा हित में सोचता है अब मैं हमेशा प्रजा की भलाई के लिए काम करूंगा
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