
बहुत ही उचित प्रश्न है।
सबसे पहले ये समझिए कि रथ क्या होता है?
रथ सुनकर हमको TV में दिखाए गए रथ ही दिमाग मे आते हैं जो पैसे बचाने के चक्कर मे बैलगाड़ी की तरह बना दिये जाते हैं।
मेरा अनुमान है कि रथ भी 2-3 तरह के होते होंगे
1. तेज गति से चलने वाले रथ जो एक यात्री के लिए बनते होंगे। ये आकार में छोटे होते थे। कोई सुख सुविधा नही होती थी। छोटी दूरी के लिए इस्तेमाल होते होंगे।
2. यात्री रथ- मान लीजिए द्रौपदी अपने मायके जा रही हो तो क्या वो पूरे समय पीछे खड़े रहती होगी जैसा TV में दिखाते हैं। कई दिनों की यात्रा होती थी तो कोई भी आराम पसन्द करेगा !! उनके लिए थोड़ा बड़ा रथ होता होगा जिसमें बैठने, सोने की जगह और खाने पीने का सामान भी रखा जाता होगा।
3. युद्ध रथ- ये रथ बहुत बड़ा नही रख सकते क्योंकि तेजी से भी चलने की ज़रूरत है। पर भारी मात्रा में तीर, गदा, भाले इत्यादि भी रखना पड़ेगा। बल्कि मुझे तो लगता है कि खास योद्धाओं के लिए
कुछ जड़ी-बूटी (फर्स्ट एड किट) या वैद्य को भी रथ में रखा जाता होगा। ये रथ इतने भी खुले नही होते थे जितना tv में दिखाते हैं, योद्धा जितना ढका रहे उतना अच्छा।
ट्रेनिंग या प्रशिक्षण क्या होता है? इसमें आप हर तरह की स्थितियों का अभ्यास करते है। सबसे बुरा क्या हो सकता है उसके लिए खुद को तैयार करते हैं। जैसे कमांडो ट्रेनिंग में सांप खाना तक सिखाते हैं, बिना हथियार के लड़ना सिखाते हैं।
क्या आपको लगता है कि अर्जुन, भीम, दुर्योधन, कर्ण, भीष्म जैसे योद्धाओं को जब युद्ध का प्रशिक्षण मिला होगा तब इनको बिना रथ के युद्ध करना नही सिखाया गया होगा? सारथि की मृत्यु होने पर खुद ही मुहँ से लगाम पकड़कर रथ चलाते हुए युद्ध करना भी सिखाते थे।
इसलिए मुझे तो कर्ण के बिना रथ के युद्ध करने को इतना महत्व देना ही बकवास लगता है।
जब घोष यात्रा में गन्धर्वो ने दुर्योधन को पकड़ लिया तो अर्जुन और भीम गंधर्वों को हराया था तब इनके पास कोई रथ नही थे, राम-लक्ष्मण ने लगभग पूरा युद्ध बिना रथ के लड़ा था जबकि रावण के हर योद्धा के पास रथ होते थे।
बिना रथ के लड़ना एक disadvantage ज़रूर है पर महारथी, अतिरथी ऐसे ही नही बनते थे। जब कर्ण ने बिना रथ के युद्ध कर रहे अभिमन्यु पर दया नही की तो उस पर क्यों दया की जाए ??
ये सब कर्ण प्रेमियों के मनगढ़ंत तर्क सामने आते रहते हैं जिसमे एक घटिया व्यक्ति को हीरो बनाने की कोशिश की जाती है। एक साहब तो शिवाजी सावंत को सच्चा और वेद व्यास को झूठा बता चुके हैं।
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