
नमस्कार दोस्तों। 2000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हो गई। हवाई अड्डों पर हाहाकार है। इंटरेस्टिंग यह जानना है कि सरकार क्या कर रही है? दोस्तों सरकार ने देश भर में चार स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। क्या सरकार की इतनी ही जिम्मेदारी थी? एक वक्त था जब ज्यादा गर्मी पड़ने पर भी लोग सरकार को कोसते थे। भाई शेर पालने की यही दिक्कत है कि आप शेर से शिकायत नहीं कर सकते।
वरना खा जाएगा आपको। भारत के वर्ग ने शेर पाला है। शेर को लोगों की परेशानी से कोई मतलब नहीं है। एक तारीख से आज छ तारीख आ गई है। छ दिन से लोग परेशान हैं। लेकिन सरकार ने लोगों की मदद के लिए चार स्पेशल ट्रेनें चला दी हैं। कई ट्रेनों में बोगी बढ़ाई हैं। इससे ज्यादा इंतजाम सरकार ने बिहार में वोटरों को ले जाने के लिए कर दिया था। आप सोच कर देखिए कि कैसी निकम्मी सरकार है जो फ्लाइटें शुरू नहीं करवा पा
रही है। इंडिगो के आगे सरकार घुटनों पर आ गई है और ट्रेनें चलवा रही है। प्रधानमंत्री को चाहिए कि देश में इंडिगो शासन लगा दें। अब बात आती है इंडिगो के अलावा भी दूसरी एयरलाइंस है। तो फिर इंडिगो की इतनी चिरौली करने की क्या जरूरत है? और इंडिगो के आगे सरकार भी घुटने पर क्यों बैठ गई? तो दोस्तों इंडिगो के पास सबसे ज्यादा 434 विमान हैं। एक दिन
में 2300 से ज्यादा उड़ाने हैं। देश की 60% से ज्यादा घरेलू उड़ाने इसी के पास है। अभी इसके पास 5456 पायलट और 10,212 केबिन क्रू मेंबर्स हैं। 41,000 से ज्यादा स्थाई कर्मचारी हैं। इंडिगो का कहना है कि नए फ्लाइट टाइम लिमिटेशन नियमों के कारण पायलट और क्रू की कमी हुई है। नए नियमों में पायलटों के उड़ान भरने के नियमों को घटाकर रोजाना 8 घंटे कर दिया
गया है। नाइट लैंडिंग छ से घटाकर दो कर दी गई है। क्रू के लिए 24 घंटे में 10 घंटे आराम का समय रखा गया है। दोस्तों लगातार छठे दिन भी फ्लाइटें रद्द हैं। न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक देश के चार बड़े एयरपोर्ट समेत कई शहरों से आज भी इंडिगो की 400 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल की जा चुकी हैं। इसी बीच सिविल एिएशन मिनिस्ट्री ने इंडिगो को निर्देश दिया है कि वो बिना देर के सभी यात्रियों के पैसे वापस करें। रविवार 7 दिसंबर की रात 8:00 बजे तक सबके पैसे वापस हो
जाने चाहिए। जो प्रधानमंत्री दो देशों का युद्ध रुकवा देते हैं, जिनका पूरी दुनिया में डंका बजता है, वो इंडिगो के आगे सरेंडर है। जहाज उड़वाने के बजाय पैसे वापस करवा रहे हैं। सरकार कह रही है कि रिफंड में देरी और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। इंडिगो कहता है कि पायलट ही नहीं है तो जहाज कैसे उड़ाएं? डीजीसीए ने इंडिको को 10 फरवरी 2026 तक अस्थाई राहत दी है। वीकली रेस्ट के बदले कोई भी छुट्टी
नहीं देने के फैसले को वापस ले लिया है। एक थ्योरी यह भी है कि हवाई हादसे सबसे ज्यादा एयर इंडिया के होते हैं। इमरजेंसी लैंडिंग सबसे ज्यादा एयर इंडिया की होती है। शिकायत सबसे ज्यादा एयर इंडिया की आती है। लेकिन डीजीसीए सबसे ज्यादा सख्ती इंडिगो पर दिखा रही है। क्या इंडिगो जैसे बड़े एिएशन प्लेयर को आउट करने की तैयारी हो रही है? सरकार की इस मसले पर चुप्पी कई सवाल पैदा करती है। क्या कोई और सेठ
अपने जहाज लेकर तैयार बैठा है जो इंडिगो को किनारे करवा कर खुद मार्केट में उतरना चाहता है? क्योंकि सरकार सेठ प्रिय है? कुछ भी हो सकता है। क्या इंडिगो को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है? या फिर इंडिगो का सेठ सरकार से भी बड़ा हो गया। हम पिछले कई दशकों में देख चुके हैं। दर्जनों प्राइवेट एयरलाइंस या तो बंद हो गई या फिर बंद होने की कगार पर हैं। लेकिन इंडिगो का कारोबार बाकी एयरलाइंस के मुकाबले अच्छा चल रहा है। अचानक से यह भूचाल गले के नीचे से
उतरने वाला नहीं है। राहुल गांधी कहते हैं कि यह एक सेठ को सर्वशक्तिमान बनाने का नतीजा है। यह सिर्फ एयरलाइंस में नहीं है। कल को दूसरा सेठ उठकर खड़ा हो जाए और इंटरनेट देना बंद कर दे, बिजली देना बंद कर दे तो इंडिगो जैसा हाल होगा। सरकार को सेठ के आगे बकरी के बच्चे के जैसे में भी आना पड़ेगा। अगर आप ताकतवर करोगे तो वो सरकार की भी नहीं सुनेंगे। इस तरह का अपहरण इस तरह के जो एक तरीके से बंद कर देना लोगों को। शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की
होगी। कोई घटना हो जाए बात अलग है। लेकिन अगर कोई जानबूझ के कर रहा है तो अपनी ताकत का एहसास सरकार को दिला रहा है। और सरकार ये समझ लेगी अगर उद्योगपति ताकतवर होंगे तो इसी तरह हमें और आपको फेस करना पड़ेगा। सरकार ताकतवर हो, उद्योगपति ताकतवर ना हो। यह सरकार को सोचना चाहिए। इसीलिए जब आज हम बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी को याद कर रहे हैं। जो उन्होंने संविधान दिया वो हमारी किस्मत की किताब है। वो किस्मत की
किताब जो हमें समय-समय पर सम्मान दिलाती है। हमारी बेटियों को, माताओं, बहनों को सम्मान दिलाती है। हमें हक दिलाती है। हमें आरक्षण दिलाती है। ये तमाम वो लोग हैं जो हमारे आरक्षण को छीनना चाहते। इंडिगो की फ्लाइटें रद्द होने का सिलसिला अगले कई दिनों तक जारी रहने वाला है और सरकार के हाथ में कुछ नहीं है। ना जहाज ना हवाई अड्डे। सरकार ने टिकट का पैसा यात्रियों को वापस करवाने का आदेश दे दिया
है। सरकार को समझ ही नहीं आ रहा है कि लोगों को पैसे की चिंता नहीं है। लोगों को सही समय पर सही जगह ना पहुंच पाने का दुख है। मेरे साथ फिलहाल इस कहानी में इतना ही। इस पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में बताइए।
Leave a Reply