
स्वागत है आपको हमारे इस Star Daily Website पर जहां हम बात करते हैं हेल्थ, एजुकेशन और सेक्स एजुकेशन से जुड़े ऐसे विषयों पर, जिनके बारे में अक्सर लोग खुलकर बात नहीं कर पाते। आज का टॉपिक थोड़ा संवेदनशील है, लेकिन बहुत जरूरी भी है। आखिर किस उम्र में लड़की को शारीरिक संबंध बनाने का मन होता है? बहुत से लड़के और लड़कियां दोनों इस सवाल के जवाब में गलतफहमियों का शिकार होते हैं। कई लोग सोचते हैं कि यह कोई गंदी बात है जबकि यह एक
नेचुरल चीज है। आज हम इसी को आसान भाषा में विस्तार से समझेंगे। सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि लड़की के शरीर में बदलाव कब शुरू होते हैं। लड़कियों में प्यूबर्टी यानी किशोरावस्था की शुरुआत आमतौर पर 10 से 14 साल के बीच होती है। कुछ लड़कियों में यह जल्दी यानी 9 साल से भी शुरू हो सकता है और कुछ में थोड़ा देर से भी। इस उम्र में कुछ बड़े बदलाव होते हैं। ब्रेस्ट डेवलप होना शुरू होते हैं। पीरियड्स आना शुरू होता है। शरीर में हेयर ग्रोथ जैसे बगल और प्राइवेट पार्ट के आसपास शरीर का आकार
बदलता है। हिप्स चौड़े होने लगते हैं। यह सब बदलाव इस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन नाम के हार्मोन की वजह से होते हैं। यह हार्मोन ही लड़की के शरीर में सेक्स ड्राइव यानी शारीरिक इच्छा को भी धीरे-धीरे जागृत करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लड़की को तुरंत ही शारीरिक संबंध बनाने का मन करने लगे। इस उम्र में वह बस अपने शरीर को समझ रही होती है। अब बात करते हैं असली सवाल की। लड़की को पहली बार शारीरिक इच्छा कब महसूस होती है? हर लड़की अलग होती है। ज्यादातर रिसर्च के अनुसार 13 – 16 साल के बीच लड़की को पहली बार अट्रैक्शन यानी किसी लड़के की तरफ
आकर्षण महसूस होता है। 15 और 18 साल के बीच हार्मोनल पीक होता है। यानी सेक्स ड्राइव का लेवल बढ़ने लगता है। बहुत सी लड़कियां अपने फ्रेंड सर्कल, फिल्मों या इंटरनेट से भी इस बारे में जानती हैं। वे कभी-कभी मास्टरबेशन यानी स्वयं सुख भी ट्राई करती हैं जो कि एकदम नॉर्मल है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह तुरंत सेक्स करना चाहती हैं। कई बार यह सब चीजें सिर्फ फेंटसी होती हैं। असली में संबंध बनाने से डर भी लगता है क्योंकि वह इमोशनली तैयार नहीं होती। कई साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि लड़कियों के लिए शारीरिक इच्छा के साथ-साथ भावनात्मक कनेक्शन ज्यादा जरूरी होता है। लड़के कई बार सिर्फ फिजिकल जरूरत देखते हैं। लेकिन लड़की के लिए ट्रस्ट, प्यार और इमोशनल सेफ्टी जरूरी होती है। अब थोड़ा साइंस भी समझ लेते हैं। लड़की के शरीर में दो मुख्य सेक्स हार्मोन होते हैं। एक एस्ट्रोजन, यह ब्रेस्ट डेवलपमेंट, पीरियड्स और फीमेल बॉडी शेप के लिए जिम्मेदार होता है। दो प्रोगेस्टेरोन। यह पीरियड्स और प्रेगनेंसी में बड़ी भूमिका निभाता है। ओवुलेशन यानी जब एग निकलता है उस समय लड़की की सेक्स ड्राइव बढ़ सकती है क्योंकि शरीर उस वक्त गर्भधारण के लिए तैयार होता है। यही कारण है कि कुछ महिलाएं पीरियड्स के कुछ दिन पहले या बीच में ज्यादा डिजायर महसूस कर सकती हैं। साथ ही डोपामाइन और ऑक्सीटोसिन जैसे हैप्पी हार्मोन भी इसमें रोल निभाते हैं। कभी-कभी इमोशनल अटैचमेंट बढ़ जाने पर लड़की को इंटिमेसी यानी शारीरिक नजदीकी का मन ज्यादा करता है। हमारे समाज में लड़कियों की इच्छाओं को लेकर बहुत सारी गलत बातें फैली हुई हैं। कुछ लोग कहते हैं कि लड़की को सेक्स का मन नहीं होता यह झूठ है। हर इंसान को नेचुरली होता है। कुछ लोग कहते हैं कि शादी के बाद ही लड़की को इच्छा होती है। यह भी जरूरी नहीं। शादी सिर्फ एक सोशल परमिशन है। लेकिन शरीर के नेचुरल बदलावों से इसका कोई सीधा लेना देना नहीं। कुछ लोग इसे गंदी नजर से देखते हैं। जबकि यह एकदम सामान्य और हेल्दी चीज है। जरूरत है सही एजुकेशन की ताकि लड़कियां भी अपनी इच्छाओं को समझ सकें और गलत लोगों से बच सकें। यह बहुत जरूरी पॉइंट है। ज्यादातर लड़कियां चाहती हैं उनकी इच्छाओं का सम्मान हो। कोई जबरदस्ती ना करें। प्यार और ट्रस्ट वाला रिलेशन हो। सेक्स सिर्फ फिजिकल ना होकर इमोशनल भी हो। इसलिए अगर आप किसी लड़की से प्यार करते हैं तो उसकी भावनाओं को समझें। उससे खुलकर बात करें। उस पर प्रेशर ना बनाएं। अगर वह तैयार नहीं है तो कभी भी जबरदस्ती ना करें। कंसेंट यानी सहमति सबसे जरूरी है। कानूनी रूप से भारत में 18 साल से कम उम्र में शारीरिक संबंध बनाना अवैध है। क्यों? क्योंकि इस उम्र तक शरीर और दिमाग दोनों पूरी तरह मैच्योर नहीं होते। वैज्ञानिक रूप से भी देखा जाए तो 18 से 21 साल के बीच लड़की शारीरिक और मानसिक रूप से मैच्योर होती है। पहले वह कई बार कंफ्यूज रहती हैं। वह अपनी भावनाओं को पहचान नहीं पाती। इसलिए अगर कोई लड़का या लड़की रिलेशन में है तो जिम्मेदारी से सोें। दोनों बालिग हो। 18 प्लस कंसेंट यानी सहमति हो। कोई दबाव या लालच ना हो। प्रोटेक्शन का सही इस्तेमाल हो। ताकि कोई प्रेगनेंसी या सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज ना हो। अक्सर मां-बाप इस विषय पर बात करने से डरते हैं। लेकिन अगर पेरेंट्स अपनी बेटियों से खुलकर बात करेंगे तो वह गलतफहमियों का शिकार नहीं होंगी। अपनी बेटियों को प्यूबर्टी, पीरियड्स और सेफ सेक्स के बारे में सही एजुकेशन दें। उन्हें बताएं कि उनके शरीर में बदलाव क्यों हो रहे हैं। अगर कोई लड़का उन्हें परेशान कर रहा है तो खुलकर बताएं। उम्मीद है दोस्तों, आपको
यह स्टोरी पसंद आई होगी। अगर आपको ऐसे ही एजुकेशनल कंटेंट चाहिए तो इस कहानी को , शेयर करें और कमेंट में बताएं कि आपको अगला टॉपिक किस पर चाहिए। याद रखिए सेक्स एजुकेशन कोई गंदी चीज नहीं है। यह आपके जीवन के लिए जरूरी जानकारी है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें और दूसरों को भी जागरूक करें। मिलते हैं बाद में। धन्यवाद।
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