
खालिक को हरा दिया। रेस पूरी होने के बाद उस वक्त पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खान ने कहा, मिल्खा सिंह तुम तो सच में उड़ते हो। तुम फ्लाइंग सिख हो। और यहीं से उनका नाम इतिहास के पन्नों में अमर हो गया। इसके बाद
भी उन्होंने कई इंटरनेशनल कंपटीशन में इंडिया का नाम रोशन किया। उन्हें पद्मश्री अवार्ड दिया गया और इंडियन एथलेटिक्स में उन्होंने अपना एक नाम बनाया। रिटायरमेंट के बाद वह युवाओं को सिखाते कि हर दौड़ सिर्फ मैदान में नहीं होती। असली दौड़ तो जिंदगी में होती है
और उसे जीतने के लिए जुनून और अनुशासन चाहिए होता है। मिल्खा सिंह ने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी। उन्होंने गरीबी, दर्द और असफलता हर किसी को हार दी। उन्होंने हम सबको सिखाया कि अगर इंसान अपना मन बना ले तो कोई दीवार इतनी ऊंची नहीं जो उसे रोक सके।
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