
क्या आप भी रोज YouTube पर मोटिवेशनल वीडियोस देखते हैं और यह सोचते हैं कि इससे आपकी जिंदगी बदल जाएगी या आप सफल बन जाएंगे तो माफ कीजिए। लेकिन आप भी उन लाखों लोगों में से एक हैं जो सोचते हैं कि सिर्फ मोटिवेशन से वह सफल बन जाएंगे। जब तक आप अपनी जिंदगी में डिसिप्लिन यानी अनुशासन नहीं लाते तब तक मोटिवेशन कुछ
उखाड़ नहीं सकता। अगर आप इस बात को अच्छी तरह समझना चाहते हैं तो यह कहानी अंत तक सुने। हो सकता है यह कहानी आपकी जिंदगी बदल दे। छोटे से कस्बे में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वो बहुत बड़े सपने देखा करता था। हर दिन वो सोचता मुझे जिंदगी में कुछ ऐसा करना है जिससे लोग मुझे याद रखें। वो रोज मोटिवेशनल वीडियोस देखता, स्टोरीज पढ़ता और सक्सेसफुल लोगों की
स्पीच सुनता। वो अपने आप से बार-बार कहता कल से मैं रोज इतने घंटे पढ़ाई करूंगा। अब से मैं हर चीज बदल दूंगा। और जब वह सोचता तो अंदर से जोश और एक्साइटमेंट महसूस करता। लेकिन वह जोश ज्यादा देर तक टिकता नहीं था। बस दो या तीन दिन बीतते और वो फिर अपनी आलसी आदतों पर लौट आता। कभी मन नहीं हुआ तो पढ़ाई छोड़ दी। कभी मौसम अच्छा नहीं लगा तो टहलने निकल गया। धीरे-धीरे उसकी जिंदगी बहानों का ढेर बन गई। बार-बार कोशिश करके असफल होने से वह अंदर
से टूट गया था। उसे लगने लगा कि शायद वह कभी बदल नहीं सकता। एक दिन वो अपने दोस्त विवेक से मिला। विवेक को देखकर आरव हैरान रह गया। विवेक हर सुबह जल्दी उठता, अपनी दिनचर्या का पालन करता, पढ़ाई समय पर करता और हर दिन अपने आप को बेहतर बनाता। आरव ने पूछा, “यार विवेक, तू यह सब कैसे करता है? तू हर दिन इतना मोटिवेटेड कैसे रहता है?” विवेक मुस्कुराया और बोला, “मैं
मोटिवेशन पर नहीं डिसिप्लिन पर भरोसा करता हूं।” आरव हैरान रह गया और बोला, “क्या? लेकिन सब तो कहते हैं मोटिवेशन ही सक्सेस की कूंजी है। विवेक ने ना सिर हिलाया और बोला कल सुबह सूरज निकलने से पहले मेरे साथ नदी किनारे चलना। मैं तुझे कुछ दिखाना चाहता हूं। अगली सुबह विवेक के साथ आरव नदी किनारे पहुंचा। वहां पर एक बूढ़ा मछुआरा बैठा था। उसके हाथ सख्त थे और आंखों में
अनुभव की गहराइयां थी। विवेक ने कहा दादा जी क्या आप को वह कहानी सुना सकते हैं जो आपने मुझे सुनाई थी? मछुआरे ने मुस्कुराते हुए आरव को देखा। बेटा क्या तुम इस नदी को देख रहे हो? मैं रोज इसी वक्त यहां पर आता हूं। चाहे सर्दी हो, बारिश हो या धूप। मैं हर दिन अपना जाल डालता हूं और सब्र के साथ मछलियों का इंतजार करता हूं। किसी दिन मुझे अच्छी मछलियां मिलती हैं। किसी दिन बेकार
मछलियां मिलती हैं और किसी दिन मिलती ही नहीं। लेकिन मैं आना नहीं छोड़ता। जानते हो क्यों? आरव ने सोचा और फिर बोला क्योंकि आपको मछली पकड़ना पसंद है। मछुआरा हल्के से हंसा। नहीं बेटा यह मेरा शौक नहीं है। यह मेरी जिम्मेदारी है। अगर मैं सिर्फ उस वक्त आता जब मेरा मन करता है तो मेरा परिवार भूखा रह जाता। मैं मोटिवेशन का इंतजार नहीं करता। मैं अनुशासन पर यकीन रखता हूं। फिर मछुआरे ने बांस के पेड़ की तरफ इशारा किया और बोला, क्या तुमने बांस के पेड़ की कहानी सुनी है? आरव ने सिर हिलाया नहीं। मछुआरा बोला एक किसान ने एक बार बांस का बीज
बोया। वो हर दिन उसे पानी देता। धूप देता और उसकी देखभाल करता। एक साल बीता कुछ नहीं हुआ। दूसरा साल बीता फिर भी कुछ नहीं हुआ। तीसरा यहां तक कि चौथा साल भी बीत गया। फिर भी जमीन से कुछ नहीं उगा। लोग उस पर हंसते कि वो अपना समय बर्बाद कर रहा है। लेकिन किसान नहीं रुका। और पांचवें साल अचानक सिर्फ कुछ ही हफ्तों में बांस का पेड़ 90 फीट तक ऊंचा हो गया। क्यों?क्योंकि शुरुआत के 4 साल वो जमीन के अंदर अपनी जड़े मजबूत कर रहा था। अगर किसान हार
मान लेता तो वह कभी भी उसे बढ़ता हुआ नहीं देख पाता। मछुआरे ने मुस्कुरा कर कहा बेटा डिसिप्लिन भी उसी बांस की तरह है। शुरुआत में कोई नतीजा नहीं दिखता। लेकिन अंदर ही अंदर कुछ बड़ा बन रहा होता है और जब सही समय आता है तो सफलता इतनी तेजी से बढ़ती है कि लोग हैरान रह जाते हैं। आरव के अंदर कुछ बदल गया। उसे एहसास हुआ कि अब तक वो मोटिवेशन के पीछे भाग रहा था। जबकि उसे अनुशासन की जरूरत थी। उसने
यह तय किया कि अब से वह कोई एक्सक्यूज नहीं करेगा। हर दिन एक समय पर उठेगा। हर दिन पढ़ाई करेगा। व्यायाम करेगा और अपने लक्ष्य पर काम करेगा। चाहे उसका मन हो या ना हो। क्या आप भी आरव की तरह अपने सपनों के लिए तैयार हैं? तो याद रखिए
मोटिवेशन नहीं डिसिप्लिन ही असली ताकत है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको यह दूसरी कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।
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