
आपको यह बताते हैं कि भारत की तरह चाइना में आतंकवाद की समस्या इतनी गहरी क्यों नहीं है और चाइना में आतंकी घटनाएं ना के बराबर आखिर क्यों होती है? तो सबसे बड़ा कारण यह है कि जिस पाकिस्तान को आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक
माना जाता है। उस पाकिस्तान को चाइना ने अपने कर्ज से दबाया हुआ है। आज पाकिस्तान का एक भी आतंकी संगठन चाइना के उईगर मुसलमानों की बात नहीं करता। जिन पर चाइना में सबसे ज्यादा जुल्म होते हैं। दूसरा चाइना में आतंकवादी हमले बहुत कम होते हैं क्योंकि चाइना में आतंकवाद के खिलाफ सबसे कठोर
कानून है। वहां आतंकवाद को लेकर राजनीति नहीं होती है। वहां की कम्युनिस्ट सरकार साफ शब्दों में यह कहती है आतंकवाद को धार्मिक कट्टरपन से जुड़ा हुआ ही माना जाएगा। तीसरा चाइना में आतंकवाद के खिलाफ सबसे मजबूत आंतरिक सुरक्षा और निगरानी तंत्र है। पूरे चाइना में सीसीटीवी कैमरों का ऐसा जाल है कि वहां छोटी से छोटी गतिविधियों की भी निगरानी होती है और लोगों
का चेहरा देखकर उनका रिकॉर्ड निकाला जा सकता है। इससे लोगों में यह डर रहता है कि अगर वह आतंकवाद की गतिविधियों में शामिल होते हैं तो सरकार उन्हें मरते दम तक जेल में रख सकती है। साल 2015 में चाइना में एक नया कानून आया था जिसके तहत एक ऐसी संस्था बनाई गई थी जो देश भर में आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों संदिग्धों की पहचान करती है और पूरे चाइना में आतंकवाद से जुड़े मामलों में तुरंत कारवाई
होती है वहां ऐसे मामलों में 10 20 सालों तक जांच नहीं चलती चाइना में सोशल मीडिया पर भी सरकार का पूरा नियंत्रण होता है। भारत में अगर सोशल मीडिया पर आतंकियों ने कोई साजिश रची है तो उसका डाटा हमें कंपनियों से मांगना पड़ता है और यह कंपनियां सरकार को डाटा देने से इंकार भी कर सकती हैं। लेकिन चाइना में ऐसा नहीं है। चाइना में इंटरनेट कंपनियों को आरोपी
से जुड़ा हुआ सभी डाटा जांच एजेंसियों को फौरन देना होता है और इस वजह से वहां सोशल मीडिया के जरिए आतंक का नेटवर्क खड़ा ही नहीं किया जा सकता। युवाओं का ब्रेन वाश नहीं हो सकता। हालांकि चाइना के मामले में एक बड़ी बात यह है कि वहां होने वाली घटनाओं को सरकार की मंजूरी के बिना मीडिया में रिपोर्ट नहीं किया जा सकता और इस वजह से भी चाइना में होने वाली ज्यादातर घटनाएं दुनिया को पता ही नहीं चल पाती।
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