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5 तरीके जिससे आपका फोकस अटूट हो जाएगा | Swami Vivekananda

कई बार हम सबको लगता है कि चाहे पढ़ाई हो, करियर हो या कोई सपना मन स्थिर ही नहीं रहता। हम शुरू तो करते हैं लेकिन कुछ ही देर में ध्यान बट जाता है। यही सवाल लेकर एक दिन एक नौजवान स्वामी विवेकानंद के पास पहुंचा और उनसे कहने लगा स्वामी जी मैं बहुत

कोशिश करता हूं पढ़ाई और काम पर ध्यान लगाने की। लेकिन मेरा मन बार-बार भटक जाता है। मुझे समझ नहीं आता कि आखिर मैं फोकस कैसे करूं। कृपया मार्गदर्शन दीजिए। स्वामी विवेकानंद ने मुस्कुराते हुए कहा, एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है। जिसने मन को साध लिया, उसने जगत को जीत लिया। मैं तुम्हें पांच

सरल लेकिन शक्तिशाली सुझाव दूंगा। जिन्हें अपनाकर तुम अपने अंदर गहरी एकाग्रता ला सकते हो। नौजवान ध्यान से स्वामी जी की बात सुनने लगा। स्वामी जी ने कहा, पहला सुझाव लक्ष्य स्पष्ट करो। बिना लक्ष्य के इंसान समुद्र में भटकती नाव जैसा है। जब तक तुम्हें यह पता ही नहीं कि जाना कहां है तब तक ध्यान कैसे टिकेगा। सबसे पहले अपना उद्देश्य लिखो। चाहे वह पढ़ाई में अव्वल आना हो। किसी प्रतियोगिता में

सफलता पाना हो या जीवन में बड़ा लक्ष्य हासिल करना हो। याद रखो स्पष्ट लक्ष्य ही एकाग्रता की पहली सीढ़ी है। अगर हमारे सामने स्पष्ट लक्ष्य होता है तो हमारे मन को भटकने का कम समय मिलता है। दूसरा सुझाव मन को वर्तमान में लाओ। ज्यादातर लोग या तो अतीत की यादों में जीते हैं या भविष्य की चिंता में। जबकि शक्ति तो सिर्फ वर्तमान में है। जब भी मन भटके खुद से पूछो अभी कौन सा काम सबसे ज्यादा जरूरी है? फिर कहो अभी यही काम सबसे महत्वपूर्ण है? पढ़ाई करते समय

सिर्फ किताब में डूबो। काम करते समय सिर्फ काम को देखो। धीरे-धीरे मन वर्तमान में टिकना सीख जाएगा। तीसरा सुझाव ध्यान और प्राणायाम। मन को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी साधन है ध्यान और प्राणायाम। रोज कुछ देर आंखें बंद करके गहरी सांस लो और सिर्फ अपनी सांसों को महसूस करो। यह अभ्यास तुम्हारे मन को स्थिर करेगा। याद रखो ध्यान मन की तलवार को तेज करने जैसा है। जितना अभ्यास करोगे उतना मन धारदार होगा। चौथा इंद्रियों पर नियंत्रण। फोकस तभी बढ़ेगा जब तुम अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करना

सीखोगे। नींद, भोजन और भोग। अगर किसी इंसान के अंदर इन तीनों में से किसी एक चीज का भी प्रेम है तो वह पशु समान है। निरर्थक बातें, बेकार की बात करने की आदतें और घंटों का समय बर्बाद करने वाले काम यह सब तुम्हारे ध्यान को चुरा लेते हैं। अगर तुम सच में सफल होना चाहते हो तो तय करो कि कौन सी चीज तुम्हें आगे बढ़ा रही है और कौन सी पीछे खींच रही है। अनुशासन ही एकाग्रता का आधार है। पांचवा आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच। स्वामी जी मन तभी एकाग्र रहता है जब उसमें आत्मविश्वास और

सकारात्मकता हो। यदि तुम बार-बार सोचोगे कि मुझसे नहीं होगा तो मन कभी स्थिर नहीं होगा। खुद से कहो मैं कर सकता हूं मैं जरूर सफल होऊंगा। यह वाक्य तुम्हारे भीतर ऐसी शक्ति जगाएगा कि बाधाएं भी अवसर लगने लगेंगे। याद रखो विश्वास ही शक्ति है। नौजवान धन्यवाद स्वामी जी। आज आपने मेरे जीवन का रास्ता साफ कर दिया। अब मैं लक्ष्य स्पष्ट करूंगा। वर्तमान में रहूंगा।

ध्यान का अभ्यास करूंगा। अपनी आदतों पर नियंत्रण रखूंगा और आत्मविश्वास के साथ आगे बढूंगा। स्वामी विवेकानंद के यह पांच सुझाव ना सिर्फ उस नौजवान के जीवन को बदल गए बल्कि आज भी हर विद्यार्थी हर

युवा के लिए अमूल्य मार्गदर्शन है। एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है। जिस दिन आपने अपने मन को साध लिया उसी दिन जीवन की हर बाधा छोटी लगने लगेगी।

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