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  • Powerful Motivational Story – खुद को कम मत समझो 👇

    बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में एक साधारण आदमी रहता था। उसका काम था पहाड़ पर जाकर दिनभर पत्थर तोड़ना। यह काम कठिन था, थकाऊ था। लेकिन उस आदमी को अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। वह सुबह काम पर जाता, दिनभर मेहनत करता और शाम को थोड़े बहुत पैसे लेकर लौट आता। उसी पैसे से अपने परिवार का

    गुजारा चलता था। रात को अपने घर आकर वो अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताता और फिर आराम से सो जाता। यही उसकी रोजमर्रा की जिंदगी थी। लेकिन एक दिन काम खत्म करके घर लौटते समय उसके मन में एक विचार आया क्या यही जिंदगी है? सुबह से शाम तक पत्थर तोड़ो और उसके बदले में इतने कम पैसे मिले कि मुश्किल से गुजारा हो पाए। काश मेरे पास कोई ऐसी शक्ति होती कि मैं जो चाहूं वो बन पाता। वो गहरी सोच में डूबा हुआ घर पहुंचा। खाना उसके आगे रखा गया लेकिन उसका ध्यान

    अपने विचार में ही डूबा हुआ था। धीरे-धीरे वह सोने लगा और नींद में चला गया। तभी उसे एक अजीब सपना आया। वो देखता है कि रोज की तरह वो अपने काम से घर लौट रहा है और रास्ते में उसे एक बहुत ही आलीशान मकान दिखा। घर इतना शानदार था कि देखकर उसके मन में ख्याल आया काश यह घर मेरा होता। काश मैं इसका मालिक होता। और जैसे ही उसने यह सोचा पल भर में वही घर उसका हो गया। वह उस घर के अंदर था। उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। सचमुच जो उसने चाहा वो उसे मिल गया। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई।

    अचानक उसने एक शोर सुना। दरवाजे पर जाकर देखा तो उसे एक बहुत बड़ी रैली दिखाई दी। लोग जोर-जोर से नारे लगा रहे थे। बीच में एक नेता खड़ा था और लोग उसके नाम के जयकारे कर रहे थे। वो सोचने लगा मैं इस आलीशान घर का मालिक हूं। लेकिन असली ताकत तो उस नेता के पास है। अगर मैं वह नेता बन जाऊं तो हजारों लोग मुझे देखने के लिए तरसेंगे। बस इतना सोचना था कि वो नेता बन गया। चारों ओर लोगों की भीड़, नारे सब उसके लिए कर रहे थे। वो खुशी से पागल हो गया। लेकिन यह

    खुशी भी ज्यादा देर तक नहीं टिकी। तभी धूप बढ़ने लगी। कड़ी गर्मी और रोशनी से उसका सिर चकराने लगा। पसीने से लथपथ होकर वह बैठ गया और उसे एहसास हुआ इस नेता से भी कोई ताकतवर है और वह है सूरज। असली ताकत तो उसी की है। उसके मन में विचार आया काश मैं सूरज बन जाऊं और पलक झपकते ही वह सूरज बन गया। पूरा संसार अब उसकी रोशनी से जगमगा उठा। उसे लगा कि अब इस दुनिया में उससे ताकतवर कोई नहीं है। लेकिन यह खुशी भी ज्यादा देर तक नहीं रही। कुछ ही देर बाद

    आसमान में बादल खिराए। सूरज की रोशनी पूरी तरह ढक गई। उसने महसूस किया कि बादल तो उससे भी ताकतवर है और सोचने लगा काश मैं बादल बन जाऊं। और इतना सोचते ही वो बादल बन गया और आसमान में उड़ने लगा। उसे लगने लगा कि अब कोई उसकी बराबरी नहीं कर सकता। वो जहां चाहे वहां बरस सकता था और सुनामी ला सकता था। लेकिन अचानक तेज हवाएं चलने लगी और उस बादल को इधर-उधर उड़ाने लगी। उसके मन में ख्याल आया हवा तो बहुत शक्तिशाली है। काश मैं हवा बन जाऊं। और यह बोलते ही वो हवा बन गया। अब वह चाहे तो धीरे-धीरे उड़े या चाहे आंधी बनकर सब कुछ बहा ले जाए। उसे लगा अब सचमुच दुनिया में

    ताकतवर मैं ही हूं। लेकिन तभी उसके सामने एक पत्थर का पहाड़ आया। उसने पूरी ताकत लगाई। आंधी बनकर भी उड़ा लेकिन उसे 1 इंच भी नहीं हिला पाया। उसने हैरानी के साथ सोचा तो इस दुनिया में हवा से भी ज्यादा शक्तिशाली कोई है तो वह है यह पहाड़। काश मैं यह पहाड़ बन जाऊं। और इतना सोचते ही वो मजबूत पहाड़ बन गया। उसे लगने लगा कि अब कोई भी ताकत उसे हिला नहीं सकती। लेकिन अचानक उसे दर्द होने लगा जैसे कोई आदमी उसे चोट पहुंचा रहा हो। उसने देखा कि एक आदमी हथौड़ी लेकर पत्थर तोड़ रहा था। उसे झटका लगा। यह कैसे हो सकता है? पहाड़ जैसे मजबूत को भी

    कोई तोड़ सकता है। आखिर इतनी ताकत किसके पास है? उसके मन में ख्याल आया काश मैं वही इंसान बन जाऊं जो इस पत्थर को तोड़ रहा है। लेकिन इस बार उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई। वो दर्द से तड़पता रहा। तभी उसका सपना टूटा। वो घबरा कर उठा और उसने आईने में अपने आप को देखा। तब उसे समझ में आया। सपने में मैं वह इंसान इसलिए नहीं बन पाया क्योंकि असलियत में मैं वह इंसान ही हूं जो पहाड़ को तोड़ सकता है। मैं वही हूं जिसकी मेहनत से हर कुछ संभव है। उस दिन उसे यह सच्चाई समझ आई। कभी भी अपने आप को कम मत

    समझो। तुम्हारे अंदर ही सबसे बड़ी ताकत है। अगर तुम अपने आप को कम आंकते हो तो दुनिया तुम्हें और भी कम समझेगी। लेकिन अगर तुम अपनी असली ताकत को पहचान लोगे तो तुम्हें कोई रोक नहीं सकता। सबसे बड़ी शक्ति तुम्हारे अंदर ही है। दोस्तों, अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है, तो आपको यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

  • सबसे ताकतवर जानवर हाथी को मानते है और जंगल का राजा शेर को क्यो कहते है | Hindi Motivational Stories 👇

    जब भी हम जानवरों की बात करते हैं तो अक्सर हमारे दिमाग में हाथी की ताकत या चीते की रफ्तार का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जंगल का राजा आखिर शेर ही क्यों होता है? असल में शेर के अंदर ऐसे पांच खास गुणन हैं जो ना सिर्फ उसे

    जंगल का राजा बनाते हैं बल्कि अगर हम इंसान भी इन गुणों को अपनी जिंदगी में उतार लें तो हम भी अपने लक्ष्य और जीवन के राजा बन सकते हैं। आइए जानते हैं शेर के वो पांच अद्भुत गुण और यह पांचवा गुण। तो इतना जरूरी है कि उसके बिना कोई भी सफलता अधूरी है। पहला आत्मविश्वास। शेर जब चलता है तो उसके चेहरे पर घमंड नहीं बल्कि एक

    ठहराव और भरोसा होता है। वह जानता है कि वह कौन है और उसे क्या करना है। वो ना तो बिना वजह डरता है और ना ही किसी को डराने की कोशिश करता है। उसका आत्मविश्वास ही उसे सबकी नजर में खास बनाता है। दूसरा स्पष्ट लक्ष्य और फोकस शेयर। जब शिकार करता है तो वह बार-बार कोशिश नहीं करता। वो इंतजार करता है, सही वक्त देखता है और एक

    ही बार में वार करता है। उसका लक्ष्य बिल्कुल साफ होता है। जिंदगी में भी जब तक हम अपना फोकस नहीं तय करेंगे तब तक हम सिर्फ दौड़ते रहेंगे। पहुंचेंगे कहीं नहीं। तीसरा साहस और निर्णय क्षमता। शेर कभी भी पीछे नहीं हटता। भले सामने हाथी ही क्यों ना खड़ा हो वो डर से नहीं। साहस और रणनीति से आगे बढ़ता है। वह सही वक्त पर सही फैसला लेता है और उसी पर कायम रहता है। चौथा जिम्मेदारी शेर अकेला चलता है। लेकिन जब बात अपने समूह की आती है तो वह सबसे पहले खड़ा

    होता है। अपने परिवार की सुरक्षा हो या पूरे इलाके की हिफाजत शेर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता। एक असली राजा वह होता है जो खुद से पहले दूसरों की सोचता है। पांचवा गुण जानने से पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें। पांचवा अनुशासन। शेर की हर दिनचर्या में एक पैटर्न होता है। वो कब उठेगा, कब शिकार करेगा, कब आराम करेगा, सब तय होता है। उसकी ताकत सिर्फ शरीर में नहीं उसके अनुशासन में भी छुपी होती है। जिंदगी में कोई भी बड़ी सफलता हर दिन की मेहनत,

    अनुशासन और निरंतरता से ही मिलती है। यही वह पांच गुण है जो अगर हम अपने जीवन में उतार लें तो हम भी अपने भाग्य, अपने सपनों और अपने लक्ष्य के राजा बन सकते हैं। आपने शेर के यह पांच अनमोल गुण सीख लिए।

    लेकिन क्या आप जानते हैं एक सच्चे दोस्त की क्या पहचान होती है? अगर जानना चाहते हैं तो इसे शेयर करें ताकि नेक्स्ट स्टोरी लेकर आए।

  • आराम चाहिए या सपना | Motivational for UPSC Aspirants 👇

    यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर विद्यार्थी के सामने यह सवाल

    यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर विद्यार्थी के सामने यह सवाल हर दिन खड़ा होता है।

    क्या मैं थोड़ी देर और आराम करूं या अपने सपने को याद करके पढ़ाई शुरू करूं? यही पल आपके भविष्य का फैसला करता है। आराम आसान है। बिस्तर पर लेटना आसान है। दोस्तों के साथ घंटों बातें करना आसान है। सोशल मीडिया पर स्क्रोल करना आसान है। यह सब आपको तात्कालिक खुशी देता है। लेकिन यही

    आराम धीरे-धीरे आपके सपने को निगल जाता है। क्योंकि आराम आपको वहीं रोक देता है जहां आप हैं। यूपीएसएससी सिर्फ एक परीक्षा नहीं है। यह आपके धैर्य, अनुशासन और समर्पण को जानने का जरिया है। यह परीक्षा केवल किताबों से नहीं बल्कि आपके आत्मनियंत्रण और त्याग से पास होती है। हर बार जब आप कहते हैं चलो थोड़ी देर आराम कर लूं तब आपको याद रखना चाहिए कि

    हजारों प्रतियोगी इस समय पढ़ रहे हैं और वही कल आपसे आगे निकलेंगे। सपना कठिन है क्योंकि सपने को पूरा करने के लिए आपको हर दिन अपनी सीमा से आगे बढ़ना पड़ता है। कभी नींद छोड़नी पड़ती है। कभी पार्टियों को ना कहना पड़ता है। कभी दोस्तों से दूरी बनानी पड़ती है। लेकिन यह कठिनाई ही आपके भविष्य को महान बनाती है। सपना आपको वहां ले जाता है। जहां आप हमेशा से जाना चाहते थे। फर्क आपके ज्ञान में नहीं पड़ता। क्योंकि यूपीएससी की तैयारी करने वाले

    अधिकतर छात्रों के पास किताबें वही होती हैं, नोट्स वही होते हैं, कोचिंग वही होती है। फर्क सिर्फ एक चीज में पड़ता है आपके निर्णय में। आपका हर छोटा निर्णय तय करता है कि आप किस ओर बढ़ रहे हैं। आराम की ओर या अपने सपने की ओर। आज का एक घंटा आराम आपको तसल्ली देगा। लेकिन कल वही घंटा आपको पछतावे में डुबो देगा। आज की मेहनत आपको थकाएगी। लेकिन कल वही मेहनत

    आपको आईएएस, आईपीएस या आईएफएस की कुर्सी पर बैठाएगी। दुनिया आपको आज नहीं पहचानती। लेकिन आपकी लगन कल पूरी दुनिया को आपको सलाम करने पर मजबूर कर देगी। जब आप थक जाएं तो अपना सपना याद करें। खुद से पूछें मैंने यह सफर क्यों शुरू किया था? भविष्य की तस्वीर देखिए। खुद को उस पद पर कल्पना कीजिए जिसके लिए मेहनत कर रहे हैं। छोटे कदम उठाइए। पूरे दिन का नहीं तो कम से कम अगले 30 मिनट का संकल्प लें और पढ़ना शुरू करें। तुलना आराम से नहीं

    लक्ष्य से करें। हमेशा खुद से पूछें क्या आराम मेरे लक्ष्य से बड़ा है? विजेता वही है जो हर बार आराम को ठुकराकर अपने सपने को चुनता है। क्योंकि आराम आपको आज सुकून देगा। लेकिन सपना आपको जीवन भर सम्मान देगा। यूपीएसएससी सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं है। यह एक जिम्मेदारी है। यह सेवा है। यह राष्ट्र निर्माण का सपना है। जब भी आपका मन कहे कि बस अब और नहीं हो रहा तब याद रखिए आपकी हार सिर्फ आपकी हार नहीं है। यह उन लोगों की भी हार है जो आपको देखकर उम्मीद लगाते हैं। आपकी जीत सिर्फ आपकी

    जीत नहीं होगी। यह पूरे समाज की जीत होगी। अंत में आपको हर दिन खुद से एक सवाल पूछना है। क्या मैं आराम चुनूंगा या सपना?क्योंकि यही सवाल आपके आने वाले जीवन का उत्तर तय करेगा। तो दोस्तों जब भी मन कहे आराम कर लो तब अपने आप से कहिए मुझे आराम नहीं चाहिए। मुझे अपना सपना चाहिए। अगर आप भी अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं तो अभी से मेहनत शुरू कीजिए।

    क्योंकि यूपीएसएससी कोई मंजिल नहीं है। यह तो सिर्फ शुरुआत है उस महान जीवन की जो आप जीने वाले हैं।

  • समय बर्बाद मत करो | Motivational Stories in Hindi

    कभी-कभी जिंदगी में हम सोचते रहते हैं। मैं यह बाद में कर लूंगा। कल से शुरू करूंगा। अभी तो बहुत समय है। जल्दी किस बात की है? लेकिन यही छोटी सी आदत धीरे-धीरे हमारे सपनों और लक्ष्यों को निगल जाती है। आज के दौर में जहां ध्यान भटकाने वाली चीजें हर जगह है। लगातार स्क्रोलिंग, नोटिफिकेशन की बौछार, वहां वक्त बर्बाद करना बहुत आसान है। लेकिन समय सिर्फ घड़ी में टिक टिक नहीं करता। वह हमारे भविष्य की दिशा तय करता है। अगर आप भी जिंदगी के मौके गवाना नहीं चाहते तो इस कहानी को पूरे ध्यान से सुनिए। यह सिर्फ एक कहानी नहीं एक चेतावनी है। एक बार की

    बात है भारत के एक व्यस्त शहर में एक लड़का रहता था। उसका नाम था विजय। वो बेहद आलसी था। जरूरी कामों को हमेशा टालता रहता। इस वजह से उसकी पढ़ाई और जीवन दोनों बिछड़ने लगे थे। उसके माता-पिता और टीचर्स ने कई बार उसे समझाया कि समय की अहमियत को समझो लेकिन विजय ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। वो अपने भविष्य को लेकर बिल्कुल भी परेशान नहीं था और अपना समय बेवजह की चीजों में गवाता रहा। एक दिन उस शहर में एक मशहूर साधु महाराज आए। वे अपने ज्ञान और गहराई भरे विचारों के लिए जाने जाते थे। बहुत से लोग उनसे मिलने आए और ज्ञान

    प्राप्त किया। विजय ने सोचा अगर मैं इस साधु से कुछ सलाह ले लूं तो शायद मैं भी अपने दोस्तों की तरह सफल बन जाऊं। एक दिन उसने साधु को नदी किनारे कुछ लोगों से बात करते हुए देखा। जब भीड़ चली गई तो विजय उनके पास गया और बोला महाराज कृपया मेरी मदद कीजिए। मैं खुद को एक असफल इंसान महसूस करता हूं। मेरे सभी दोस्त मुझसे आगे निकल चुके हैं। मैं भी सबसे अच्छा बनना चाहता हूं। मुझे बताइए मैं क्या करूं? साधु ने उसकी आंखों में देखा और शांत आवाज में बोले, बेटा तुम खुद को खोया हुआ इसलिए महसूस कर रहे हो क्योंकि तुम समय का मूल्य

    नहीं समझते। तुम हर काम को टालते हो और कीमती पल बेकार कर देते हो। मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं जो शायद तुम्हारी आंखें खोल दे। विजय ध्यान से सुनने लगा और साधु ने कहानी शुरू की। बहुत समय पहले एक राजा हुआ करता था। वह बहुत दयालु और महान था। वह अपनी प्रजा से बहुत प्यार करता था और हर किसी की मदद करता था। एक दिन राजा को अपने बचपन का एक पुराना दोस्त मिला। वह दोस्त अब गरीब, बेरोजगार और समाज में पिछदा हुआ हो चुका था। वह हर बात का दोष दूसरों को देता था और कभी अपनी गलती नहीं मानता था। राजा ने उसे देखा और पहचान

    लिया। दुखी होकर उसने दोस्त को पास बुलाया और उसके हाल पूछे। दोस्त ने लंबी सांस लेकर कहा महाराज मुझे समझ नहीं आता लोग मुझे निकम्मा क्यों समझते हैं जब भी कहीं पर काम मांगने जाता हूं लोग कहते हैं मैं समय पर काम नहीं करता मुझे नहीं पता अब क्या करूं। राजा ने थोड़ी देर सोचा और कहा एक शर्त मानो आज सूरज डूबने से पहले तुम मेरे राज खजाने से जितना सोना और जवाहरात लेना चाहो ले सकते हो। जो कुछ भी तुम इकट्ठा कर लोगे वह सब तुम्हारा होगा। दोस्त बहुत खुश हुआ। उसने राजा को धन्यवाद दिया और सोचा पहले मैं घर जाकर कुछ थैले

    और बोरे ले आता हूं ताकि उसमें ज्यादा से ज्यादा सोना भर सकूं। इसलिए वह दौड़ता हुआ घर गया। उसने अपनी पत्नी को यह बात बताई। पत्नी बहुत खुश हुई और बोली जल्दी जाओ खजाना लाओ। लेकिन उसने कहा पहले बहुत भूख लगी है। थोड़ा खा लूं। पत्नी ने जल्दी से खाना तैयार किया। लेकिन वह धीरे-धीरे खाने लगा। यह सोचकर कि अब भी बहुत समय है। खाने के बाद उसे नींद आने लगी। उसने सोचा थोड़ी देर सो लूं फिर खजाना लेने जाऊंगा। वो गहरी नींद में चला गया। 2 घंटे बाद उसकी पत्नी ने उसे उठाया। लेकिन अभी भी दोपहर ही थी तो उसने गुस्से में कहा। इतनी जल्दी

    क्यों उठा दिया? वो कुछ बोरे लेकर निकला। लेकिन रास्ते में धूप बहुत तेज थी। उसने सोचा इस पेड़ की छांव में थोड़ा आराम कर लूं। फिर आगे बढूंगा। ठंडी हवा चल रही थी और वह फिर सो गया। इस बार नींद और गहरी थी। जब आंख खुली तब तक सूरज डूब चुका था। वो भागता हुआ महल पहुंचा लेकिन देर हो चुकी थी। खजाने के दरवाजे बंद हो चुके थे। वो वहीं खड़ा रह गया। पछतावे से भरा हुआ। उसने अपनी किस्मत खुद खोई थी क्योंकि उसने समय का मूल्य नहीं समझा। साधु ने कहानी पूरी की और विजय की ओर देखा। विजय चुप था। उसकी आंखें नीचे झुकी हुई थी। उसे अपनी

    गलती समझ में आ चुकी थी। शर्मिंदा होकर उसने साधु का धन्यवाद किया और वादा किया कि अब वह बदल जाएगा। अब उसने जाना समय अनमोल है। जो एक बार चला गया वह कभी लौट कर नहीं आता। विजय ने घर जाकर मेहनत करना शुरू किया। काम को टालना बंद किया। जो भी काम होता समय पर पूरा करता। धीरे-धीरे उसके जीवन में बदलाव आने लगा। लोग उसकी तारीफ करने लगे और वह पहले से कहीं ज्यादा खुश और आत्मविश्वासी हो गया। किसी महापुरुष ने कहा है जो समय को नजरअंदाज करता है वही सबसे ज्यादा उसका मूल्य समझता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

    आप कुछ भी हासिल कर सकते हो। बस अगर आप समय का सही इस्तेमाल करो। लेकिन अगर आपने उसे यूं ही बहने दिया तो एक दिन पछतावे के आंसू ही बचेंगे। अपने समय का सही उपयोग कीजिए। परिवार के साथ कीमती पल बिताइए। दोस्तों संग हंसिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करिए। तभी जिंदगी सच में पूरी और सार्थक लगेगी। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो एक लाइक दीजिए और कमेंट करके बताइए आपकी जिंदगी में समय की सबसे कीमती सीख क्या रही। मैं जल्द लौटूंगा एक और प्रेरणात्मक कहानी के ||

  • कौवे की ये 5 आदतें आपको जीतना सिखा देंगी | Hindi Love Motivational Story

    जब भी हम पक्षियों की बात करते हैं तो आमतौर पर मन में मोर की सुंदरता या फिर बाज की ऊंची उड़ान का ख्याल आता है लेकिन क्या आपने कभी कौवे के बारे में सोचा है काला रंग कांवका की आवाज और रोजमर्रा के माहौल में इतनी आदत हो चुकी होती है कि हम उसे नजरअंदाज कर देते हैं पर सच्चाई यह है कि कौ प्रकृति का सबसे बुद्धिमान पक्षियों में से एक है अगर हम

    उसकी कुछ आदतों और गुणों को अपनी जिंदगी में उतार ले तो यकीन मानिए ना तो हम कभी डरेंगे और ना ही हारेंगे आइए जानते हैं कौवे के पांच ऐसे गुण जो हर इंसान को सफल बना सकते हैं और पांचवा गुण सफल होने के लिए सबसे जरूरी है पहला गुण चतुराई आपने बचपन में वो कहानी जरूर सुनी होगी प्यासे कौवे और सुराही की लेकिन यह सिर्फ कहानी नहीं कौवे की असल आदत है वैज्ञानिक रिसर्च में भी यह साबित हुआ है कि कौवा कई पक्षियों से ज्यादा चतुर होता है जब सामने

    कोई समस्या आती है तो कौवा घबराता नहीं सोचता है रास्ता ढूंढता है और हल निकालता है अगर आप भी हर मुसीबत में अपना दिमाग शांत रखकर हल निकालना सीख जाए तो जिंदगी की कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती दूसरा गुण माहौल के मुताबिक खुद को ढालना चाहे जंगल हो या शहर गांव हो या मेट्रो कौवा हर जगह मिल जाएगा वो बदलते माहौल के साथ खुद को ढालना जानता है कभी पेड़ पर घोंसला बनाता है कभी ऐसी के ऊपर कभी पेड़ की छाल खाता है तो कभी

    कूड़ेदान से रैपर निकालकर जिंदगी में जो इंसान हालातों के साथ बदलना जानता है वही समय के साथ आगे बढ़ता है और हमेशा जीत उसकी होती है तीसरा गुण टीम वर्क और समझदारी कौए अकेले नहीं रहते वे हमेशा झुंड में काम करते हैं अगर खतरा महसूस होता है तो पूरा झुंड एक साथ हमला करता है खाना मिले तो बांटते हैं खतरा दिखे तो सब एक दूसरे को चेतावनी देते हैं जिंदगी में अकेले चलना कभी-कभी मजबूरी हो सकती है लेकिन सफलता की असली ताकत मिलती है जब हम टीम में सोें और मिलकर आगे बढ़े अकेले जाओगे तो जल्दी जाओगे लेकिन अगर सबके साथ जाओगे तो दूर तक जाओगे चौथा गुण हिम्मत और

    आत्मरक्षा की कला कौवा कभी बड़ी चील या बिल्ली से नहीं डरता वो डटकर सामना करता है अक्सर देखा गया है कि कोए ने मिलकर एक चील तक को भगा दिया चतुराई से वह खुद की रक्षा करता है भले ही सामने वाला कितना भी ताकतवर क्यों ना हो डर से आपको कभी जीत नहीं मिलती हिम्मत और समझदारी के साथ आप बड़ी से बड़ी चुनौती को मात दे सकते हैं पांचवा गुण अनुशासन कौवा रोज सुबह एक ही समय पर उठता है खाना ढूंढता है झुंड से जुड़ता है अपने बच्चों को सिखाता है उसका हर दिन लगभग एक जैसे कामों का दोहराव होता है बिना आलस्य के जिंदगी में बड़ी

    कामयाबी किसी एक दिन के कामों से नहीं मिलती हर दिन की मेहनत अनुशासन और अभ्यास ही असली जीत दिलाते हैं आलसी इंकसान कभी भी बधीजीत नहीं देखता सीख कौवा कोई सुपर हीरो नहीं है ना सुंदर है ना ताकतवर लेकिन फिर भी वो हर परिस्थिति में जीवित रहता है खुद को साबित करता है और आगे बढ़ता है अब सोचिए अगर हम अपने अंदर कौवे की चतुराई अनुकूलन क्षमता हिम्मत टीम वर्क और अनुशासन को शामिल कर लें तो क्या हमें कोई हरा सकता है शायद नहीं आपने जिंदगी में जीतने के लिए कौवे के गुण तो सीख लिए लेकिन क्या आपको सच्चे दोस्त की तीन पहचान पता है

    अगर जानना चाहते हैं तो शेयर जरूर कीजिएगा ताकि नेक्स्ट स्टोरी लेकर आपके पास आय।

  • 5 तरीके जिससे आपका फोकस अटूट हो जाएगा | Swami Vivekananda

    कई बार हम सबको लगता है कि चाहे पढ़ाई हो, करियर हो या कोई सपना मन स्थिर ही नहीं रहता। हम शुरू तो करते हैं लेकिन कुछ ही देर में ध्यान बट जाता है। यही सवाल लेकर एक दिन एक नौजवान स्वामी विवेकानंद के पास पहुंचा और उनसे कहने लगा स्वामी जी मैं बहुत

    कोशिश करता हूं पढ़ाई और काम पर ध्यान लगाने की। लेकिन मेरा मन बार-बार भटक जाता है। मुझे समझ नहीं आता कि आखिर मैं फोकस कैसे करूं। कृपया मार्गदर्शन दीजिए। स्वामी विवेकानंद ने मुस्कुराते हुए कहा, एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है। जिसने मन को साध लिया, उसने जगत को जीत लिया। मैं तुम्हें पांच

    सरल लेकिन शक्तिशाली सुझाव दूंगा। जिन्हें अपनाकर तुम अपने अंदर गहरी एकाग्रता ला सकते हो। नौजवान ध्यान से स्वामी जी की बात सुनने लगा। स्वामी जी ने कहा, पहला सुझाव लक्ष्य स्पष्ट करो। बिना लक्ष्य के इंसान समुद्र में भटकती नाव जैसा है। जब तक तुम्हें यह पता ही नहीं कि जाना कहां है तब तक ध्यान कैसे टिकेगा। सबसे पहले अपना उद्देश्य लिखो। चाहे वह पढ़ाई में अव्वल आना हो। किसी प्रतियोगिता में

    सफलता पाना हो या जीवन में बड़ा लक्ष्य हासिल करना हो। याद रखो स्पष्ट लक्ष्य ही एकाग्रता की पहली सीढ़ी है। अगर हमारे सामने स्पष्ट लक्ष्य होता है तो हमारे मन को भटकने का कम समय मिलता है। दूसरा सुझाव मन को वर्तमान में लाओ। ज्यादातर लोग या तो अतीत की यादों में जीते हैं या भविष्य की चिंता में। जबकि शक्ति तो सिर्फ वर्तमान में है। जब भी मन भटके खुद से पूछो अभी कौन सा काम सबसे ज्यादा जरूरी है? फिर कहो अभी यही काम सबसे महत्वपूर्ण है? पढ़ाई करते समय

    सिर्फ किताब में डूबो। काम करते समय सिर्फ काम को देखो। धीरे-धीरे मन वर्तमान में टिकना सीख जाएगा। तीसरा सुझाव ध्यान और प्राणायाम। मन को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी साधन है ध्यान और प्राणायाम। रोज कुछ देर आंखें बंद करके गहरी सांस लो और सिर्फ अपनी सांसों को महसूस करो। यह अभ्यास तुम्हारे मन को स्थिर करेगा। याद रखो ध्यान मन की तलवार को तेज करने जैसा है। जितना अभ्यास करोगे उतना मन धारदार होगा। चौथा इंद्रियों पर नियंत्रण। फोकस तभी बढ़ेगा जब तुम अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करना

    सीखोगे। नींद, भोजन और भोग। अगर किसी इंसान के अंदर इन तीनों में से किसी एक चीज का भी प्रेम है तो वह पशु समान है। निरर्थक बातें, बेकार की बात करने की आदतें और घंटों का समय बर्बाद करने वाले काम यह सब तुम्हारे ध्यान को चुरा लेते हैं। अगर तुम सच में सफल होना चाहते हो तो तय करो कि कौन सी चीज तुम्हें आगे बढ़ा रही है और कौन सी पीछे खींच रही है। अनुशासन ही एकाग्रता का आधार है। पांचवा आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच। स्वामी जी मन तभी एकाग्र रहता है जब उसमें आत्मविश्वास और

    सकारात्मकता हो। यदि तुम बार-बार सोचोगे कि मुझसे नहीं होगा तो मन कभी स्थिर नहीं होगा। खुद से कहो मैं कर सकता हूं मैं जरूर सफल होऊंगा। यह वाक्य तुम्हारे भीतर ऐसी शक्ति जगाएगा कि बाधाएं भी अवसर लगने लगेंगे। याद रखो विश्वास ही शक्ति है। नौजवान धन्यवाद स्वामी जी। आज आपने मेरे जीवन का रास्ता साफ कर दिया। अब मैं लक्ष्य स्पष्ट करूंगा। वर्तमान में रहूंगा।

    ध्यान का अभ्यास करूंगा। अपनी आदतों पर नियंत्रण रखूंगा और आत्मविश्वास के साथ आगे बढूंगा। स्वामी विवेकानंद के यह पांच सुझाव ना सिर्फ उस नौजवान के जीवन को बदल गए बल्कि आज भी हर विद्यार्थी हर

    युवा के लिए अमूल्य मार्गदर्शन है। एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है। जिस दिन आपने अपने मन को साध लिया उसी दिन जीवन की हर बाधा छोटी लगने लगेगी।

  • EAGLE MINDSET कैसे बनाए | Best Motivational Story

    जिंदगी में दो तरह के लोग होते हैं। एक जो तोते की तरह हर वक्त बोलते रहते हैं लेकिन कुछ कर नहीं पाते और दूसरे जो बाज की तरह कम बोलते हैं लेकिन आसमानों में उड़ते हैं। तो चलिए आज हम जानते हैं उस ईगल माइंडसेट के बारे में जो एक इंसान को बाज की तरह ऊंचाइयों पर पहुंचा सकता है। अगर आप भी एक ईगल माइंडसेट डेवलप करना चाहते हैं तो यह वीडियो पूरा

    देखें। बाज अकेला उड़ता है। बाज हमेशा अकेला उड़ता है। लेकिन ऊंचाई पर वो कभी गौरैया या कौवों के झुंड में नहीं उड़ता। बाज यह जानता है कि उसे उन लोगों के साथ नहीं रहना जो उसकी सोच को नीचे खींचते हैं। वो उन्हीं के साथ उड़ता है जो ऊंचा सोचते हैं। ऊंचे सपने देखते हैं। अपने आसपास हमें उन्हीं लोगों को रखना चाहिए जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दें। क्योंकि जैसा

    संग वैसा रंग। बाज की नजर। एक बाज कई किलोमीटर दूर से भी अपने शिकार को देख सकता है। उसकी नजर एक बार जिस लक्ष्य पर टिक जाए वह तब तक नहीं हटती जब तक वो उसे हासिल ना कर ले। वो जब तक एक शिकार को दबोच नहीं लेता तब तक दूसरे पर नजर नहीं डालता। अपने जीवन में भी हमें एक साफ विज़न रखना चाहिए। जिस दिन हम अपने लक्ष्य पर फोकस

    करना सीख लेते हैं तो सफलता हमसे कुछ ही दूरी पर होती है। आत्मविश्वास की आदत जब बाज किसी शिकार को देखता है तो वो यह नहीं सोचता कि वो कितना बड़ा या ताकतवर है। वो बस एक ही विचार के साथ आगे बढ़ता है। मुझे इससे जीतना है। आत्मविश्वास को अपनी आदत बनाओ। डर को कभी अपने रास्ते में मत आने दो। समस्या चाहे कितनी बड़ी क्यों ना हो उसका सामना करो। बाज कभी मरा हुआ शिकार नहीं खाता। बाज अपने शिकार को खुद पकड़ता है। वो दूसरों के छोड़े हुए शिकार को नहीं खाता। वो जानता है कि दूसरों के टुकड़ों पर पलने वाला इंसान एक दिन भूखा

    मर जाता है। पुरानी सफलताओं पर जीना बंद कर दो। जो बीत गया वो बीत चुका है। हर दिन नई चुनौती लो। हर दिन नया मुकाम हासिल करो। बाज को तूफान से डर नहीं लगता। जब आंधी तूफान आते हैं, हर पक्षी अपने-अपने घोंसले में छिप जाते हैं। लेकिन सिर्फ अकेला बाज आसमान की ओर उड़ जाता है। वो आंधी की हवा का इस्तेमाल और भी ऊंचा उड़ने के लिए करता है। जिंदगी में जब मुश्किलें आए तो घबराओ मत बल्कि उन्हें अपने

    ऊपर उठने का जरिया बनाओ क्योंकि हर तूफान के बाद ही आसमान साफ होता है। बाज अपने बच्चों को खुद तकलीफ देता है। जब बाज के बच्चे हल्के बड़े हो जाते हैं तो बाज अपने घोंसले से मुलायम पंखों को निकाल देता है। उससे उसके बच्चों को चुभन होती है। लेकिन यही दर्द उन्हें उड़ना सिखाता है। जब यह दर्द असहनीय हो जाता है, तब बाज के बच्चे उड़ना सीखते हैं। अगर तुम आरामदायक ज़ोन में रहोगे, तो कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे। ग्रोथ हमेशा डिसकंफर्ट के दूसरी तरफ होती है। इसलिए आराम को त्यागो और उड़ान भरो। बाज अपने आप को दोबारा जन्म देता है। जब एक बाज बूढ़ा हो जाता है तो उसके पंख भारी हो जाते हैं। ऐसे में बाज

    अपने आप को पहाड़ की चोटी पर ले जाता है। वहां पहुंचकर वो अपने पंखों को खुद नोच कर तोड़ता है। अपनी पुरानी चोंच को खुद पत्थर पर मार-मार कर तोड़ता है। इसमें उसे बहुत दर्द होता है। लेकिन यही दर्द उसे एक नया जन्म देता है। कुछ महीनों बाद वह नए पंख और नई चोंच के साथ लौटता है। और भी ज्यादा खतरनाक और और भी ज्यादा ऊंचा। हमें अपनी जिंदगी से उन आदतों को निकालना होगा जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। चाहे उसमें हमें कितना ही आराम क्यों ना हो।

    तो याद रखो तोते की तरह बोलने से नहीं बाज की तरह उड़ने से हमें सफलता मिलेगी। कम बोलो ज्यादा करो। अपने डर से लड़ो। आंधी तूफान से ऊपर उठो। अपनी नजर लक्ष्य पर रखो और उसे हासिल करने तक मत रुको।

  • दूसरों से जलना छोड़ों – Story of An Ant – Hindi Motivational Story

    हरेभरे जंगल में चिंटू नाम की एक छोटी सी मेहनती चींटी अपने परिवार के साथ रहती थी। चिंटू बचपन से ही समझदार थी और हर काम में आगे रहती थी। लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ी हुई उसके मन में एक अजीब सी जलन पैदा हो

    गई। जब वह मोर को नाचते देखती तो कहती देखो उसकी सुंदरता। सब उसकी तरफ देखते हैं। मेरी तरफ कोई क्यों नहीं देखता? तितली को उड़ते हुए देखती तो सोचती काश मैं भी पंखों से उड़ सकती। मुझे तो जमीन पर ही रेंगते रहना पड़ता है। यहां तक कि वो गिलहरी से भी जलने लगी थी। जो पलक झपकते ही एक पेड़ से दूसरे पर छलांग लगा लेती। धीरे-धीरे चिंटू

    का ध्यान अपने काम से हटने लगा। जहां पहले वो सबसे पहले खाना इकट्ठा करती थी। अब पीछे रह जाती थी। उसके साथी उससे पूछते तू इतनी उदास क्यों रहती है? लेकिन चिंटू बस मुस्कुरा कर चुप हो जाती। एक दिन जंगल में तेज आंधी और मूसलधार बारिश आई। पेड़ टूट गए। नाले उफान पर आ गए और कई जानवरों के घर उजड़ गए। तितली के पंख भीग कर भारी हो गए थे। वह उड़ नहीं पा रही थी।

    गिलहरी का पेड़ गिर गया था और वो कांपती हुई जमीन पर बैठी थी। मोर की रंगीन पूंछ गीली हो चुकी थी और वो अपने पंख भी नहीं फैला पा रहा था। जंगल में हाहाकार मच गया। लेकिन चींटियों की कॉलोनी पूरी तरह सुरक्षित थी। उन्होंने गहरी जमीन में सुरंगे बनाकर अपना घर मजबूत बना रखा था। चिंटू ने जब यह हाल देखा तो उसके भीतर कुछ टूट गया। वो सोचने लगी मैं जिनसे जलती रही। आज वो सब

    मुसीबत में है। क्या मैं कुछ कर सकती हूं? फिर उसने एक निर्णय लिया। चिंटू ने तुरंत अपनी कॉलोनी की सभी चींटियों को इकट्ठा किया और बोली, हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए। अगर हम मिलकर कोशिश करें तो सबको बचा सकते हैं। सैकड़ों चींटियां पंक्तिबद्ध होकर निकल पड़ी। कुछ तितली को पीठ पर उठाकर सुरक्षित जगह तक ले गई। कुछ गिलहरी के लिए पत्तों का बिस्तर बनाने लगी और कुछ मोर के पंखों से पानी साफ करने लगी। जंगल के जानवर यह देखकर हैरान थे कि इतनी छोटी जीव भी इतने

    बड़े दिल की मालिक हो सकती है। जब बारिश थमी और सूरज निकला तो तितली, मोर और गिलहरी सब ने चिंटू का धन्यवाद किया। मोर ने कहा, तेरी जैसी सुंदरता मैंने आज तक नहीं देखी। गिलहरी बोली आज मुझे समझ में आया कि असली ताकत दिखावे में नहीं सेवा में होती है। और तितली मुस्कुरा कर बोली तू ना उड़ सकती है ना चमकती है लेकिन तूने हमें बचाया है। तू सबसे ऊपर है। उस दिन चिंटू ने पहली

    बार खुद पर गर्व महसूस किया। उसने जाना कि वो जितनी दिखती है उससे कहीं ज्यादा कीमती है। अब वह दूसरों से जलना छोड़ चुकी थी। वो जान चुकी थी कि हर जीव की अपनी भूमिका होती है और अगर हम अपनी ताकत को पहचाने तो हम दूसरों की जिंदगी बदल सकते हैं। दूसरों से जलन करना हमें कमजोर बनाता है। लेकिन जब हम अपने भीतर की खूबियों को

    समझते हैं और उनका इस्तेमाल दूसरों की मदद में करते हैं। तभी हम सच्चे अर्थों में खास बनते हैं। छोटा होना कमजोरी नहीं है। जो बड़ा दिल रखता है, वही असली बड़ा होता है।

  • दादी और बिल्ली की कहानी। Real Family Story Hindi

    एक गांव में बूढ़ी दादी और बिल्ली रहता था दोनों का घर एक जगह था यानी पड़ोसी ही था दोनों अपने अपने घर खाना बना रही थी लेकिन बिल्ली के घर में कुछ नहीं था वे सोचा बिल्ली ने क्यों नही पड़ोसी दादी के घर से सारा सामान लेलू

    वे दिमाग लगाया और बिल्ली दादी के घर गया और दादी अभी बर्तन मज रहा था बिल्ली ने दादी से कहा दादी थोड़ा माचिस दो दादी बोली क्यों चूल्हा जलाना है दादी बोला ताखा में उठालो माचिस उठाने के बाद बिल्ली ने दादी के घर लौका देखा बिल्ली ने दादी से लौकी मांगा दादी बोली लेजाओगे कैसे गुरका_गुरका के दादी बोली लेजा

    फिर दादी बोली बनाओगे कैसे बिल्ली बोला चाकू से कच कच फिर दादी बोली निनोहगे कैसे बिल्ली बोला कराही में डब डब दादी बोली खाओगे कैसे बिली बोली प्लेट मे  धकर ग़ब_ग़ब दादी बोली सोओगे कहा बिली बोली चूली के पिछे

    दादी बोली ओढ़ोगे क्या बिली बोली सूप देख बिलाई के रूप, दोस्तो कहानी गया बन में आप सोचिए अपने मन में। कहानी से क्या सिख मिला कॉमेंट में बताए और दोस्तो के पास जरूर शेयर कीजिएगा।

  • समय के साथ चलो क्लिप स्टोरी हिन्दी |

    भारत के एक हरेभरे गांव में रमेश नाम का किसान रहता था। रमेश मेहनती था, ईमानदार था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी। वह हमेशा पुराने तरीकों से ही खेती करता था। उसके पिताजी ने जिस तरह हल चलाया था, जिस तरह बीज बोए थे, रमेश आज भी वही

    तरीके अपनाता था। हर दिन वह सुबह सूरज उगने से पहले अपने खेतों में पहुंच जाता। बैलों से हल चलाता, हाथ से बीज बोता और पूरे दिन पसीना बहाता। लेकिन असली समस्या यह थी कि दुनिया अब बदल चुकी थी। उसके आसपास के किसान नई टेक्नोलॉजी का

    इस्तेमाल कर रहे थे। ट्रैक्टर, मोटर, ड्रिप इरीगेशन, अच्छी क्वालिटी के बीज। उससे उनकी फसलें भी ज्यादा होती, मेहनत भी कम लगती और आमदनी भी अच्छी होती। रमेश यह सब देखकर भी अनदेखा कर देता। वो कहता, “मेरे पिताजी ने यही तरीके अपनाए थे। मैं भी इन्हें ही अपनाऊंगा। मशीन पर भरोसा करके किसानी का असली मजा नहीं आता। उस गांव के और किसान धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे।

    लेकिन रमेश उसी जगह अटका हुआ था। उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि परिवार का गुजारा भी मुश्किल होने लगा। एक दिन गांव में एक नौजवान आया। उसका नाम अर्जुन था। वो शहर से पढ़ाई करके लौटा था। अर्जुन ने देखा कि रमेश अब भी बैलों से ही हल चला रहा है। अर्जुन ने मुस्कुरा कर कहा, “अरे चाचा, आप भी पुराने तरीकों से ही किसाने कर रहे हो।”

    क्यों ना आप एक ट्रैक्टर किराए पर ले लें। इससे आपका समय भी बचेगा और आपकी पैदावार भी बढ़ेगी। रमेश ने हंसते हुए कहा, “अरे बेटा, यह सब दिखावा है। असली किसानी तो पसीना बहाने से होती है। मशीनों में वह आत्मा कहां जो किसान अपने हाथ से काम करने में लाता है।” अर्जुन ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसने मन बना लिया कि रमेश को समय के साथ आगे

    बढ़ना जरूर सिखाएगा। अगले दिन अर्जुन ने रमेश को अपने घर बुलाया और फिर उन्हें खेतों पर ले गया। वहां उसने रमेश को दिखाया कि कैसे सिर्फ 2 घंटे में ट्रैक्टर से पूरा खेत जोत दिया जाता है जो रमेश अकेले अपने बैल से 2 दिन में करता। उसने दिखाया कि नई तकनीक की मदद से पानी की बर्बादी नहीं होती और अच्छी क्वालिटी की फसल भी मिलती है। रमेश हैरान रह गया। उसे लगा कि सचमुच मेहनत तो

    वही है लेकिन नतीजा कितना अलग है। अर्जुन ने समझाया चाचा समय बदल गया है। बदलते वक्त के साथ हमें भी बदलना पड़ता है। वरना हम पीछे रह जाते हैं। मेहनत जरूरी है लेकिन अकल और मेहनत को मिलाना भी जरूरी है। रमेश को पहली बार महसूस हुआ कि उसकी ज़िद ही उसे गरीबी की तरफ धकेल रही थी। आखिरकार रमेश ने अपनी सोच बदली। उसने पहली बार ट्रैक्टर किराया पर लिया। अच्छी

    क्वालिटी के बीज भी खरीदे और नई सिंचाई तकनीक अपनाई। नतीजा यह हुआ कि उसकी फसल और दो गुना बढ़ गई। उसका परिवार भी खुशहाल था। गांव वाले हैरान थे कि रमेश जैसे जिद्दी किसान ने आखिरकार किस तरह बदलाव को अपना लिया। रमेश अब हर किसी से कहता मेरे दोस्तों मेहनत करो लेकिन समय के साथ बदलो। अगर हम अब भी पुराने तरीकों से ही चिपके रहेंगे तो जिंदगी आसान नहीं

    होगी। बदलाव ही जीवन का नियम है। उस दिन से रमेश की सोच बदल गई। वो गांव के और किसानों को भी समझाने लगा। समय के साथ आगे बढ़ना सीखो। यही असली सफलता है। दोस्तों, समय के साथ आगे बढ़ो। तभी हमारा जीवन आसान और सफल बनता है। जो समय के साथ बदलता है वही आगे बढ़ता है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।