
जिंदगी में दो तरह के लोग होते हैं। एक जो तोते की तरह हर वक्त बोलते रहते हैं लेकिन कुछ कर नहीं पाते और दूसरे जो बाज की तरह कम बोलते हैं लेकिन आसमानों में उड़ते हैं। तो चलिए आज हम जानते हैं उस ईगल माइंडसेट के बारे में जो एक इंसान को बाज की तरह ऊंचाइयों पर पहुंचा सकता है। अगर आप भी एक ईगल माइंडसेट डेवलप करना चाहते हैं तो यह वीडियो पूरा
देखें। बाज अकेला उड़ता है। बाज हमेशा अकेला उड़ता है। लेकिन ऊंचाई पर वो कभी गौरैया या कौवों के झुंड में नहीं उड़ता। बाज यह जानता है कि उसे उन लोगों के साथ नहीं रहना जो उसकी सोच को नीचे खींचते हैं। वो उन्हीं के साथ उड़ता है जो ऊंचा सोचते हैं। ऊंचे सपने देखते हैं। अपने आसपास हमें उन्हीं लोगों को रखना चाहिए जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दें। क्योंकि जैसा
संग वैसा रंग। बाज की नजर। एक बाज कई किलोमीटर दूर से भी अपने शिकार को देख सकता है। उसकी नजर एक बार जिस लक्ष्य पर टिक जाए वह तब तक नहीं हटती जब तक वो उसे हासिल ना कर ले। वो जब तक एक शिकार को दबोच नहीं लेता तब तक दूसरे पर नजर नहीं डालता। अपने जीवन में भी हमें एक साफ विज़न रखना चाहिए। जिस दिन हम अपने लक्ष्य पर फोकस
करना सीख लेते हैं तो सफलता हमसे कुछ ही दूरी पर होती है। आत्मविश्वास की आदत जब बाज किसी शिकार को देखता है तो वो यह नहीं सोचता कि वो कितना बड़ा या ताकतवर है। वो बस एक ही विचार के साथ आगे बढ़ता है। मुझे इससे जीतना है। आत्मविश्वास को अपनी आदत बनाओ। डर को कभी अपने रास्ते में मत आने दो। समस्या चाहे कितनी बड़ी क्यों ना हो उसका सामना करो। बाज कभी मरा हुआ शिकार नहीं खाता। बाज अपने शिकार को खुद पकड़ता है। वो दूसरों के छोड़े हुए शिकार को नहीं खाता। वो जानता है कि दूसरों के टुकड़ों पर पलने वाला इंसान एक दिन भूखा
मर जाता है। पुरानी सफलताओं पर जीना बंद कर दो। जो बीत गया वो बीत चुका है। हर दिन नई चुनौती लो। हर दिन नया मुकाम हासिल करो। बाज को तूफान से डर नहीं लगता। जब आंधी तूफान आते हैं, हर पक्षी अपने-अपने घोंसले में छिप जाते हैं। लेकिन सिर्फ अकेला बाज आसमान की ओर उड़ जाता है। वो आंधी की हवा का इस्तेमाल और भी ऊंचा उड़ने के लिए करता है। जिंदगी में जब मुश्किलें आए तो घबराओ मत बल्कि उन्हें अपने
ऊपर उठने का जरिया बनाओ क्योंकि हर तूफान के बाद ही आसमान साफ होता है। बाज अपने बच्चों को खुद तकलीफ देता है। जब बाज के बच्चे हल्के बड़े हो जाते हैं तो बाज अपने घोंसले से मुलायम पंखों को निकाल देता है। उससे उसके बच्चों को चुभन होती है। लेकिन यही दर्द उन्हें उड़ना सिखाता है। जब यह दर्द असहनीय हो जाता है, तब बाज के बच्चे उड़ना सीखते हैं। अगर तुम आरामदायक ज़ोन में रहोगे, तो कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे। ग्रोथ हमेशा डिसकंफर्ट के दूसरी तरफ होती है। इसलिए आराम को त्यागो और उड़ान भरो। बाज अपने आप को दोबारा जन्म देता है। जब एक बाज बूढ़ा हो जाता है तो उसके पंख भारी हो जाते हैं। ऐसे में बाज
अपने आप को पहाड़ की चोटी पर ले जाता है। वहां पहुंचकर वो अपने पंखों को खुद नोच कर तोड़ता है। अपनी पुरानी चोंच को खुद पत्थर पर मार-मार कर तोड़ता है। इसमें उसे बहुत दर्द होता है। लेकिन यही दर्द उसे एक नया जन्म देता है। कुछ महीनों बाद वह नए पंख और नई चोंच के साथ लौटता है। और भी ज्यादा खतरनाक और और भी ज्यादा ऊंचा। हमें अपनी जिंदगी से उन आदतों को निकालना होगा जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। चाहे उसमें हमें कितना ही आराम क्यों ना हो।
तो याद रखो तोते की तरह बोलने से नहीं बाज की तरह उड़ने से हमें सफलता मिलेगी। कम बोलो ज्यादा करो। अपने डर से लड़ो। आंधी तूफान से ऊपर उठो। अपनी नजर लक्ष्य पर रखो और उसे हासिल करने तक मत रुको।
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