
यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसने अनगिनत असफलताओं का सामना किया। एक ऐसे लड़के की जो बचपन में अखबार बेचा करता था जो अपनी क्लास में सबसे पीछे बैठता था। लेकिन उसी लड़के ने आगे चलकर इंडिया को मिसाइल्स की ताकत दी। देश का सबसे अच्छा वैज्ञानिक और अंत में राष्ट्रपति बना। हम
बात कर रहे हैं एपीजे अब्दुल कलाम की। अब्दुल कलाम का जन्म अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। अब्दुल कलाम बहुत ही साधारण परिवार से थे। उनका बचपन बहुत सरल था। उनके पिता नाव चलाते थे और उनकी मां घर पर काम किया करती थी। अब्दुल कलाम का परिवार बहुत बड़ा था। इसलिए कई बार उनके घर में ऐसा होता था कि भरपेट खाना नहीं हो
पाता था। लेकिन यह गरीबी अब्दुल कलाम के सपनों को नहीं दबा सकी। स्कूल जाने से पहले वह अखबार बांटते थे ताकि स्कूल की फीस निकल सके। सुबह जल्दी उठना, मंदिर के पास बैठे बूढ़े आदमी से अखबार की गड्डी लेना, फिर गलियों में दौड़ लगाकर अखबार डालना। यही उनकी रोजमर्रा की जिंदगी थी। लेकिन इन सब मुश्किलों के बावजूद अब्दुल कलाम के मन में आसमान को लेकर एक अजीब सा आकर्षण होता रहता। एक
बार अब्दुल कलाम के स्कूल टीचर पक्षियों के उड़ने का सिद्धांत समझाने के लिए सभी बच्चों को नदी तट पर ले गए। वहां पर उड़ते हुए पक्षियों को देखकर सभी बच्चों को उड़ने का सिद्धांत सिखाया। उन बच्चों में अब्दुल कलाम भी थे। उड़ते हुए पक्षियों को देखकर ना जाने अब्दुल कलाम के मन में क्या भावना पैदा हुई और उस दिन उन्होंने मन बना लिया कि एक दिन वह भी उड़ेंगे। स्कूल के बाद उन्होंने सेंट जोसेफ से फिजिक्स में पढ़ाई
की। अब्दुल कलाम अच्छे कॉलेज में पढ़ना चाहते थे। उनका उत्साह देखकर उनकी बड़ी बहन ने अपने गहने गिरवी रखकर कॉलेज की फीस भरी और फिर अब्दुल कलाम अपनी आंखों में आंसू लिए एमआईटी पहुंचे। लेकिन यहां पर उनकी असल परीक्षा शुरू हुई। उस कॉलेज में रहना खाना बहुत महंगा था। अब्दुल कलाम कभी-कभी भूखे रहकर पढ़ाई किया करते थे। एक बार वह कोई प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाए और उन्हें उस
कॉलेज से निकाल देने की धमकी मिली। अब्दुल कलाम इतना डर गए कि उस रात उन्होंने बिना सोए वो प्रोजेक्ट बनाया और अगले दिन सबको चौंका दिया और उन्हें यह बताया कि वह कुछ कर सकते हैं। डिग्री के बाद उन्होंने एयरफोर्स में पायलट के लिए अप्लाई किया। अब्दुल कलाम ने सोचा कि यहां से उनका सपना पूरा हो जाएगा। लेकिन किस्मत ने उन्हें एक बड़ा झटका दिया। अब्दुल कलाम नौवें स्थान पर आए और केवल आठ
लोग सिलेक्ट होने थे। उनका सपना वहीं टूट गया। कई दिनों तक अब्दुल कलाम अकेले उदास बैठे रहे। लेकिन फिर उन्होंने अपने आप से कहा, शायद मुझे एक बार और कोशिश करनी चाहिए। इस असफलता ने अब्दुल कलाम को इसरो की तरफ मोड़ दिया। यहीं से इंडिया की मिसाइल यात्रा शुरू हुई। इसरो में पहुंचकर उन्होंने एसएलवी प्रोजेक्ट संभाला। इंडिया का फर्स्ट सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए दिन रात मेहनत की। कई रातें जागकर अब्दुल कलाम ने
एसएलवी को पंख दिए। लेकिन जब इसकी टेस्टिंग हुई तो सेटेलाइट ब्लास्ट हो गई। अब्दुल कलाम की महीनों की मेहनत कुछ ही सेकंड में बर्बाद हो गई। यह उनके लिए एक बड़ा झटका था। कुछ दिन तक अब्दुल कलाम ऑफिस नहीं गए। इसरो की इस हार पर पूरा इंडिया हंसने लगा। लेकिन अब्दुल कलाम ने अपने आप को संभाला और अपनी टीम को टूटने नहीं दिया। उन्होंने कहा असफलता मुझ पर काबू नहीं पा सकती जब तक मेरी लगन मजबूत है। कई महीनों की मेहनत के बाद
अब्दुल कलाम ने फिर सेटेलाइट तैयार किया और फिर 1980 में वो दिन आया जिसने इतिहास बदल दिया। एसएलवी ने रोहिणी सेटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इंडिया अब उन देशों में शामिल हो गया था जिन्होंने अपनी सेटेलाइट ल्च की थी। हर अखबार ने लिखा कि इंडिया में अब मिसाइल पैदा हो चुकी है। इसके बाद कई असफलताओं के बाद अब्दुल कलाम ने अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल जैसी मिसाइलें ल्च की और दुनिया ने अब्दुल कलाम को नाम दिया मिसाइल मैन। 1998 में आया पोखरण टेस्ट। अमेरिकी सेटेलाइट के बीच से
बचकर इंडिया ने अपने एटॉमिक वेपन को टेस्ट करके दुनिया को चौंका दिया। धरती हिल गई और दुनिया समझ गई कि भारत चुप ना बैठने वाला देश है। इस ऑपरेशन के पीछे का दिमाग था एपीजे अब्दुल कलाम। 2002 में देश ने अखबार बेचने वाले उस बच्चे को इंडिया का राष्ट्रपति बनने का मौका दिया। लेकिन राष्ट्रपति होकर भी वो वही सरल इंसान था। बच्चों से मिलना, उन्हें सपने दिखाना, उनकी मुश्किलें आसान करना और अपनी किताबें लिखना यह सब उनका
रूटीन बन गया। अब्दुल कलाम कहा करते थे अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं तो पहले उसकी तरह जलना सीखिए। 27 जुलाई का वो दिन जब वो आईएम शिलांग में लेक्चर दे रहे थे। तभी वह मंच पर गिर पड़े और कुछ ही मिनटों में दुनिया ने अपना सबसे बड़ा प्रेरक, सबसे बड़ा वैज्ञानिक और एक अच्छा इंसान खो दिया। लेकिन उन्होंने जाते-जाते हम सबको एक
चीज सिखाई कि जीवन की असली उड़ान गरीबी और मुश्किलों से नहीं रुकती। अब्दुल कलाम की जिंदगी हमें बताती है कि अगर एक गरीब नावचालक का बेटा अखबार बेचते-बेचते इंडिया का मिसाइल मैन बन सकता है तो इस दुनिया में हम भी कुछ कर सकते है।
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