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Category: Stories

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  • सोच को साफ कैसे रखें | Story of Two Monk | Motivational Story

    बहुत समय पहले की बात है। घने जंगल के बीचों-बीच दो युवा बुद्ध साधु सूरज और नीरज अपने आश्रम लौट रहे थे। आसमान में फैला सुनहरा सूरज मिट्टी की हल्की सुगंध और हर तरफ बिखरी हुई शांति उनकी साधना की गहराई को और बढ़ा रही थी। दोनों के चेहरों पर शांति की एक अलग ही चमक थी। जैसे-जैसे वह जंगल के भीतर आगे बढ़ते गए, अचानक उन्हें किसी की आवाज सुनाई दी। दोनों ने अपना चलना रोक दिया। आगे

    बढ़कर देखा तो एक महिला कीचड़ के बड़े गड्ढे में बुरी तरह फंसी हुई है। उसके कपड़े कीचड़ से लथपथ हैं और उसका चेहरा डरा हुआ है। वो कीचड़ से बाहर निकलने के लिए अपने हाथ पैर मार रही है। महिला दोनों साधुओं को देखकर बोली कृपया मेरी मदद कीजिए। मैं यहां से बाहर नहीं निकल पा रही हूं। महिला की बात सुनकर सूरज झिझक गया। उसके मन में विचारों का तूफान उठने लगा। उसने सोचा मुझे इस महिला को निकालने

    के लिए इसे हाथ लगाना पड़ेगा। कीचड़ में उतरना पड़ेगा कि यह तो नियमों के विपरीत है और क्या ऐसा करना सही होगा? सन्यासियों के लिए किसी भी महिला को हाथ लगाना अनुचित होता है। सूरज असमंजस में वहीं खड़ा रहा। वो महिला की हालत देखकर दुविधा में था लेकिन उसने कदम आगे नहीं बढ़ाया। उधर नीरज बिना एक भी पल गवाए तुरंत कीचड़ में उतरा। उसने अपना हाथ महिला की ओर बढ़ाया और उससे कहा, डरिए

    मत, मेरा हाथ पकड़ लीजिए। महिला ने अपने कांपते हाथों से नीरज का हाथ पकड़ा। कीचड़ में उसके हाथ पैर फिसल रहे थे। लेकिन नीरज पूरी हिम्मत लगाकर उसे ऊपर खींच रहा था। महिला का हाथ और कसता जा रहा था। मानो वह जीवन की आखिरी उम्मीद को पकड़ कर बैठी हो। कुछ ही क्षणों में नीरज उस महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लेता है। महिला की सांस अब भी तेज चल रही थी। लेकिन उसके चेहरे पर कृतज्ञता थी। वो बोली धन्यवाद। अगर आप ना होते तो शायद मैं बाहर नहीं निकल पाती। नीरज मुस्कुराया और बोला आप

    सुरक्षित हैं। बस इतना ही काफी है। महिला अपने रास्ते चली गई और वह दोनों साधु भी आगे बढ़ने लगे। लेकिन सूरज के मन में अब तूफान और भी तेज हो चुका था। वो लगातार सोचता जा रहा था इसने किसी महिला को हाथ कैसे लगाया? वो भी इतने नजदीक जाकर यह तो नियमों के विरुद्ध है। जंगल का रास्ता लंबा था लेकिन हर तरफ शांति फैली हुई थी। लेकिन सूरज का मन

    बिल्कुल भी शांत नहीं था। वो पूरे रास्ते बार-बार उसी घटना को दिमाग में दोहरा रहा था। आखिरकार 2 घंटे चलने के बाद वह दोनों आश्रम पहुंचे। आश्रम में प्रवेश करते ही सूरज आखिर अपनी बात रोक ना सका। वो नीरज की ओर मुड़ा और लगभग गुस्से से बोला, तुमने उस महिला को हाथ कैसे लगाया? तुम उसके इतने नजदीक कैसे गए? क्या तुम्हें जरा भी संकोच नहीं हुआ? क्या तुम नियम भूल गए हो? नीरज अभी भी शांत था।

    उसने हल्की मुस्कुराहट के साथ कहा, सूरज, मैंने उस महिला को कीचड़ से निकालकर उसी समय वहीं छोड़ दिया था। लेकिन तुम तो उसे अभी तक अपने मन में ढो रहे हो। तुम पूरी यात्रा उसके विचारों में उलझे रहे। तुम्हारा मन उस कीचड़ से भी ज्यादा गंदा हो गया क्योंकि तुम अपने विचारों को शुद्ध नहीं रख पाए। सूरज पत्थर बन गया। उसे एहसास हुआ कि उसने पूरे रास्ते अपने साथी के बारे में संदेह किया और आलोचना भरे

    विचार अपने मन में रखे। जबकि उसका मित्र तो केवल किसी की मदद कर रहा था। धीरे-धीरे उसका सिर झुक गया। उसने विनम्रता से कहा, मित्र, असल में मेरी सोच ही अशुद्ध थी। नीरज मुस्कुराया और बोला गलती करना मनुष्य का स्वभाव है लेकिन उससे सीख लेना ही बुद्ध का मार्ग है। दूसरों की मदद करना पाप नहीं लेकिन गलत सोच रखना सबसे बड़ा पाप

  • भीख से Gold Medal तक की कहानी | Milkha Singh Motivational Story

    खालिक को हरा दिया। रेस पूरी होने के बाद उस वक्त पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खान ने कहा, मिल्खा सिंह तुम तो सच में उड़ते हो। तुम फ्लाइंग सिख हो। और यहीं से उनका नाम इतिहास के पन्नों में अमर हो गया। इसके बाद

    भी उन्होंने कई इंटरनेशनल कंपटीशन में इंडिया का नाम रोशन किया। उन्हें पद्मश्री अवार्ड दिया गया और इंडियन एथलेटिक्स में उन्होंने अपना एक नाम बनाया। रिटायरमेंट के बाद वह युवाओं को सिखाते कि हर दौड़ सिर्फ मैदान में नहीं होती। असली दौड़ तो जिंदगी में होती है

    और उसे जीतने के लिए जुनून और अनुशासन चाहिए होता है। मिल्खा सिंह ने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी। उन्होंने गरीबी, दर्द और असफलता हर किसी को हार दी। उन्होंने हम सबको सिखाया कि अगर इंसान अपना मन बना ले तो कोई दीवार इतनी ऊंची नहीं जो उसे रोक सके।

  • Life Changing Story – पिछले कर्मों को भूल जाओ | Motivational Story

    एक समय की बात है। भारत के एक छोटे से गांव में बिरजू नाम का आदमी रहता था। लोग उसे चोर के नाम से जानते थे। सालों तक उसने गांव और आसपास के इलाकों में चोरी की थी। खेतों से अनाज, घरों से सामान और यहां तक कि कभी-कभी मवेशी तक चुराना उसकी

    आदत बन गई थी। हर दिन वह डर और लालच के बीच जीता। चोरी करने के बाद छिपकर सोना, पुलिस और गांव वालों से बचना यही उसकी जिंदगी थी। लेकिन धीरे-धीरे उसके भीतर अपराध बोध भरने लगा। उसे समझ आने लगा कि यह रास्ता सिर्फ उसे और गहरे अंधेरे में ले जा रहा है। फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उसकी जिंदगी बदल दी। चोरी

    करते हुए वह पकड़ा गया। गांव वालों ने उसे खूब कोसा। अपमानित किया और उसके परिवार तक को ताने दिए। उस रात उसने खुद से वादा किया। अब कभी चोरी नहीं करूंगा। क्योंकि उस रात उसके भीतर इंसानियत जाग उठी थी। उसने तय किया कि मेहनत से जीना होगा। अगले ही दिन उसने गांव के एक किसान के खेत में मजदूरी शुरू कर दी। पसीना बहा

    भूख सही लेकिन मन को पहली बार सुकून मिला। लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। हर जगह लोग उसके अतीत को उसके सामने फेंकते और उसे कहते अरे यह तो वही चोर है। सावधान रहना कहीं जेब ना काट ले। बिरजू कभी सुधर नहीं सकता है। ऐसा कई दिन तक चलता रहा। बिरजू रोज गांव वालों के ताने सुनता। इन तानों ने उसके दिल पर बोझ डाल

    दिया। भले ही उसने चोरी छोड़ दी थी पर उसका अतीत उसकी छाया बनकर उसके पीछे चलता रहा। वह अपने आप से सवाल करता क्या मैं सच में बदल सकता हूं? या मैं हमेशा चोर ही कहलाऊंगा। बिरजू हर समय उदास रहने लगा। तभी एक दिन खेत के किनारे उसे गांव का एक बुजुर्ग मिला। सफेद दाढ़ी, झुकी

    कमर और आंखों में गहरी चमक। उन्होंने बीरजू से पूछा क्यों उदास बैठा है बेटा? बीरजू ने आंसू भरकर अपनी कहानी कह दी। बाबा मैंने चोरी छोड़ दी है। अब मेहनत करता हूं लेकिन लोग मुझे मेरा अतीत बार-बार याद दिलाते हैं। मैं चाहे कितना भी बदल जाऊं मेरे पुराने कर्म मेरा पीछा नहीं छोड़ते। बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, बेटा जब बैल खेत जोतता है तो उसके पैरों के पीछे मिट्टी बिखरती है। अगर वह बार-बार पीछे मुड़कर देखेगा तो आगे बढ़ नहीं पाएगा। जिंदगी भी ऐसी ही है। तेरे कदमों के पीछे तेरा अतीत

    है। पर तुझे देखना आगे है। फिर उन्होंने अपनी हथेली पर थोड़ी मिट्टी उठाई और बोले, “यह देख यह मिट्टी बीते हुए कल की तरह है। अगर इसे मुट्ठी में पकड़े रहोगे, तो यह भारी लगने लगेगी। लेकिन अगर इसे छोड़ दोगे तो हाथ खाली और हल्का हो जाएगा। अपने कल को छोड़ो। तभी जीवन आसान होगा। यह शब्द बीरजू के दिल में उतर गए। उसने महसूस किया कि लोग चाहे जो कहें असली आजादी तब है

    जब इंसान खुद अपने अतीत को ढोना छोड़ दे। उस दिन के बाद बीरजू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने पूरी लगन से खेतों में काम किया। गांव के कामों में हाथ बंटाया और धीरे-धीरे लोग भी उसे सम्मान देने लगे। कुछ सालों बाद वही लोग जो उसे चोर कहते थे अब उसे बीरजू भैया कहकर पुकारने लगे क्योंकि उसने

    अपने कल का बोझ छोड़ दिया था। अपने कल को भूल जाओ अतीत तुम्हें रोकने के लिए है। लेकिन भविष्य तुम्हें आगे बढ़ाने के लिए है। जब तक तुम अपने पुराने कर्मों का बोझ ढोते रहोगे। आज का सुख और आने वाला कल तुम्हारे हाथ से फिसल जाएगा।

  • एक खिलाडी कैसे बना God of Cricket | Sachin Tendulkar Story

    साल था 1989। इंडिया पाकिस्तान के एक मैच के दौरान जब पाकिस्तान के तेज गेंदबाजों ने मैच को इंडिया से छीन ही लिया था तब बैटिंग करने आया एक 16 साल का लड़का और शुरुआत की बॉल पर ही अपनी नाक तुड़वा बैठा। पिच पर डॉक्टर्स आए और उस बच्चे से

    कहने लगे कि चलो तुम जख्मी हो चुके हो। अब तुम्हें आराम करना होगा। लेकिन उस बच्चे ने जो कहा वो इतिहास में दर्ज हो गया। मैं खेलेगा। इतनी सी उम्र में जिसके अंदर क्रिकेट को लेकर ऐसा जज्बा हो वही बन सकता है भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे अच्छा बैट्समैन

    सचिन तेंदुलकर। सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई के एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता एक लेखक थे और उनकी मां एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करती थी। सचिन बचपन से ही बहुत शरारती थे। स्कूल में पढ़ाई लिखाई से ज्यादा वो खेलकूद में दिलचस्पी

    लिया करते थे। कभी अपनी बॉल से किसी के घर का कांच तोड़ दिया तो कभी किसी की दीवार गंदी कर दी। लेकिन सचिन की जिंदगी का असली मोड़ उस वक्त आया जब उनके बड़े भाई अजीत ने उन्हें क्रिकेट खेलते देखा। शायद उन्होंने सचिन के अंदर छुपे हुनर को पहचाना

    और वह सचिन को शिवाजी पार्क ले गए। जहां कोच रमाकांत आचरेकर नेट्स लगवाया करते थे। आचरेकर ने पहली ही बार सचिन की आंखों में वह चमक देख ली। वो जुनून जो किसी भी खिलाड़ी को महान बना सकता है। उन्होंने सचिन से कहा अगर तू दिल से खेलेगा तो एक दिन देश का नाम रोशन कर सकता है।

    और उस वक्त सचिन ने मान लिया कि अब से क्रिकेट ही उनकी जिंदगी है। उस दिन से उनकी सुबह शुरू होती बल्ले से और रात खत्म होती बल्लेबाज बनने के सपने से। धूप में झुलसते, बारिश में फिसलते, क्रिकेट पिच पर गिरते लेकिन कभी रुकते नहीं। कई बार सचिन ट्रेन छूटने के डर से स्कूल का बैग तक छोड़ देते

    लेकिन कभी प्रैक्टिस मिस नहीं करते और इसी तरह सचिन की बैटिंग और बेहतरीन होती गई और उनका इंडियन टीम में सिलेक्शन हो गया और फिर आया साल 1989 जब सिर्फ 16 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ अपना डेब्यू किया। उनके सामने थे वसीम अकरम, इमरान खान और वकार यूनुस जैसे गेंदबाज। हर बॉल जैसे आग उगल रही थी। लेकिन उस नन्हे से चेहरे में एक

    आत्मविश्वास था और उस मैच में बुरी तरह घायल होने के बाद भी 16 साल के बच्चे ने उस हारे हुए मैच को ड्रॉ करा कर इंडिया को बचाया। धीरे-धीरे यह बच्चा बढ़ता गया और दुनिया झुकती गई। उसका हर शॉट एक जवाब था। हर रन एक अलग कहानी थी। वो सिर्फ बल्लेबाज नहीं था। वो इंडिया के लिए एक उम्मीद बन गया था। 1990 में एक सीरीज से लौटते हुए

    एयरपोर्ट पर सचिन की मुलाकात हुई अंजलि से और यहीं से सचिन को अपनी जीवन साथी मिल गई। 1995 में सचिन ने अंजलि से शादी की। 1998 का साल आया और सचिन बन गए शारजा के रेगिस्तान का सम्राट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी डेजर्ट स्टॉर्म इनिंग्स आज भी इतिहास में दर्ज है। रेत उड़ रही थी। आसमान से बिजली गिर रही थी। लेकिन उस वक्त सचिन की बैटिंग ने तूफान को भी मात दे दी थी।

    उन्होंने अकेले अपने दम पर इंडिया को जीत दिलाई और दुनिया ने कहा यह सिर्फ एक बैट्समैन नहीं है। यह क्रिकेट का चमत्कार है। लेकिन सचिन की जिंदगी हमेशा आसान नहीं थी। 2000 के दशक की शुरुआत में उन्हें लगातार इंजरीज होती गई। कभी बैक पेन, कभी टेनिस एल्बो। कई लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अब उनका समय खत्म हो गया। लेकिन सचिन जानते थे कि अब उनके और

    मेहनत करने का समय आ गया है। वो लौटे और ऐसा लौटे कि इतिहास लिख दिया। 2010 में उन्होंने वो किया जो किसी ने नहीं किया था। वन डे में डबल सेंचुरी लगाने वाले फर्स्ट क्रिकेटर बने। पूरा इंडिया झूम उठा और पूरा क्रिकेट इतिहास बदल गया और फिर आया 2011 वर्ल्ड कप। हर खिलाड़ी की आंखों में एक ही सपना था। सचिन के लिए वर्ल्ड कप। मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम सचिन के नारों से गूंज उठा।

    इंडिया ने वर्ल्ड कप जीता और सचिन की आंखों में वह आंसू थे जो एक सदी की मेहनत का प्रतीक थे। सचिन ने 24 इयर्स तक क्रिकेट खेला। 200 टेस्ट, 100 सेंचुरी, 34,000 प्लस रंस। लेकिन असली रन उन्होंने लोगों के दिलों में बनाए। जब उन्होंने वानखेड़े स्टेडियम में आखिरी बार अपना बल्ला घुमाया तो पूरा इंडिया रो पड़ा। उन्होंने अपना सिर झुका कर

    कहा, “मेरा सपना सिर्फ मेरा नहीं था। यह पूरे इंडिया का सपना था।” रिटायरमेंट के बाद भी सचिन रुके नहीं। वह आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं। समाज सेवा करते हैं और अपने काम से सिखाते हैं कि टैलेंट ईश्वर देता है। लेकिन महानता मेहनत से बनती है। सचिन तेंदुलकर सिर्फ एक नाम नहीं एक युग है।

    उन्होंने हमें सिखाया कद छोटा होना कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन तुम्हारा सपना और तुम्हारा विश्वास बड़ा होना चाहिए।

  • प्यार में टूटा… लेकिन बना IAS ऑफिसर / UPSC Motivational Video UPSC Motivation / Study Motivation / IAS Motivational Story

    एक ऐसा लड़का जो जिंदगी से हार चुका था जो आत्महत्या करने के लिए फांसी के फंदे को गले लगाने वाला था। वो कैसे एक आईएएस ऑफिसर बना और जवाब दिया उन लोगों को जिसने उसे दर्द पहुंचाया। आइए जानते हैं अर्जुन की कहानी। दिल्ली के एक मिडिल क्लास घर में रहता था अर्जुन। पढ़ाई में वो ज्यादा अच्छा नहीं था, लेकिन अपने मां-बाप का

    लाडला था। अर्जुन के पिता एक दुकान चलाते थे और उसकी मां ग्रहणी थी। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब अर्जुन कॉलेज जाने लगा था। अर्जुन हमेशा से बस यही सोचता कि पढ़ाई करके कोई छोटी-मोटी सरकारी नौकरी मिल जाए तो जिंदगी बन जाएगी। लेकिन वो यह नहीं जानता था कि जिंदगी ने उसके लिए कुछ और ही सोच रखा है। अर्जुन को कॉलेज

    जाते हुए कई महीने बीत चुके थे और एक दिन उसकी मुलाकात हुई अनन्या से। अनन्या अर्जुन की ही क्लास में थी। लेकिन आज उसने उसे पहली बार देखा था। दोनों को साहित्य और कविताओं में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट था। धीरे-धीरे उन दोनों के बीच बातें बढ़ने लगी और देखते ही देखते वक्त पंख लगाकर उड़ गया। एक दिन लाइब्रेरी में अनन्या ने कहा, “अर्जुन, मैं

    बचपन से आईपीएस अफसर बनने का सपना देखती आई हूं।” विवेक मुस्कुराया और बोला, वाह, बहुत ही बड़ा सपना है। अनन्या ने जवाब दिया और तुम्हारा सपना? अर्जुन ने हंसते हुए कहा, “अभी तक तो कोई नहीं है।” अनन्या बोली, तो फिर आज से तुम्हारा सपना मेरा साथ देना होगा। तुम्हें भी यूपीएससी की तैयारी करनी चाहिए। अर्जुन अनन्या ने जिस तरह

    अर्जुन को यूपीएससी की तैयारी करने के लिए बोला था, अर्जुन बिल्कुल मना नहीं कर पाया। अर्जुन को उसका आत्मविश्वास अच्छा लगा और उसने भी मन बना लिया कि अब उसका लक्ष्य यूपीएससी पास करके अफसर बनना है। लेकिन वो यह नहीं जानता था कि यूपीएससी की परीक्षा उसकी जिंदगी की सबसे मुश्किल परीक्षा होने वाली है। दोनों ने एक साथ पढ़ाई शुरू की। लाइब्रेरी में दिन रात एक कर

    दिए। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती एक अच्छे रिश्ते में बदल गई। और एक दिन अर्जुन ने हिम्मत जुटाकर अनन्या से कहा, “न्या, मुझे तुमसे प्यार हो गया है।” अनन्या मुस्कुराई। उसकी आंखों में भी वही फीलिंग्स थी जो अर्जुन की आंखों में थी। दोनों का रिश्ता अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके सपनों तक फैल गया। कॉलेज खत्म हुआ। अर्जुन और अनन्या दोनों उस कॉलेज के टॉप स्टूडेंट रहे। बस अब उनकी एक मंजिल थी यूपीएससी। उन्होंने तीनों

    एग्जाम्स, प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू की तैयारी एक साथ की। दिनरा पढ़ते, नोट्स बनाते और एक दूसरे का हौसला बढ़ाते। तीनों एग्जाम हो चुके थे। अर्जुन को पूरा विश्वास था कि अनन्या एक बार में ही यह एग्जाम क्लियर कर देगी और इसी विश्वास के बीच वो अपने आप पर विश्वास करना भूल गया था। रिजल्ट का दिन आया। दोनों के दिल जोर से धड़क रहे थे और हाथ कांप रहे थे। पर किस्मत का खेल देखिए। अनन्या ने टॉप रैंक हासिल की और अर्जुन कुछ नंबर से फेल हो गया। वो पल अर्जुन के लिए सबसे भारी था। लेकिन अनन्या ने उसका हाथ पकड़ कर कहा,

    अर्जुन एक बार की हार से कुछ नहीं होता। तुम्हें एक बात और कोशिश करनी चाहिए। मैं हूं तुम्हारे साथ। यह शब्द अर्जुन के अंदर आग की तरह उतर गए। उसने मन बना लिया कि अब उसे या तो मर जाना है या यूपीएससी क्लियर करना है। अर्जुन अपनी पढ़ाई में और डूब गया। दुनिया से यहां तक कि अनन्या से भी दूर हो गया। वह दिन रात बस किताबों में घुल

    गया। उसे नहीं पता था कि अब जिंदगी एक और इम्तिहान लेने वाली है। कुछ महीनों बाद अर्जुन ने सोचा कि अब मुझे अनन्या से मिलना चाहिए। वो उसके घर पहुंचा। दिल में खुशी थी कि अब दोनों एक साथ बैठकर आगे की तैयारी पर बात करेंगे। लेकिन अर्जुन यह नहीं जानता था कि उसकी जिंदगी कोई और मोड़ लेने वाली है। जब वो अनन्या के घर पहुंचा, वहां जो उसे पता चला वो सुनकर वह जैसे पत्थर बन गया। अनन्या के माता-पिता ने बताया कि 2 महीने

    बाद अनन्या की शादी है। अर्जुन के पैरों तले जैसे जमीन ही खिसक गई। वो भागता हुआ अनन्या के कमरे में पहुंचा। अनन्या वहीं थी। पर उसकी आंखों में अब वो चमक नहीं थी जो कभी हुआ करती थी। अर्जुन ने कांपती आवाज में उससे पूछा, “यह सब क्या है अनन्या? शादी?” अनन्या ने शांत आवाज में कहा, हां अर्जुन, मैं अरुण से शादी कर रही हूं। मैं तुम्हें अपनी शादी में जरूर बुलाऊंगी। अनन्या के चेहरे पर ना कोई शर्म थी, ना ही पछतावा। अर्जुन की आंखें नम हो चुकी थी। वो कुछ बोले बिना वहां से चला

    गया। अब तक जो सपना उसके जीने का मकसद था, वो अब उसके लिए बोझ बन चुका था। दिन भर सन्नाटा, रात भर जागना, नदी किनारे बैठकर भी वह अपने आप को घुटा हुआ महसूस कर रहा था। हर बार अपने आप से बस एक ही सवाल करता। क्यों हुआ यह मेरे साथ? एक हफ्ते तक अर्जुन ने अपने आप को कमरे में बंद रखा और फिर एक दिन उसने वो किया जो किसी को नहीं करना चाहिए। वो पंखे से रस्सी बांधकर कुर्सी पर बैठ गया। आंखों में आंसू,

    दिल में खालीपन, अर्जुन को लग रहा था कि वह हार चुका है। लेकिन जैसे ही उसने ऊपर देखा, दीवार पर टंगी अपने माता-पिता की तस्वीर दिखाई दी। उनकी मुस्कान ने जैसे उसे रोक लिया। वो तस्वीर जैसे उसे कुछ बता रही है। अर्जुन, यह जिंदगी सिर्फ तुम्हारी नहीं हमारी भी है। अर्जुन वहीं जमीन पर बैठ गया और जोर-जोर से रोने लगा। उसने रस्सी काठ फेंकी और यह फैसला किया कि अब वह अपने माता-पिता के लिए जिएगा और उन्हें गर्व महसूस कराएगा। उस दिन से उसकी जिंदगी बदल गई। वो अब वो अर्जुन नहीं था जो पहले था। अब उसके अंदर गम नहीं

    जुनून जल रहा था। वो अपनी पढ़ाई में ऐसा डूब गया कि दिन रात एक कर दिए। हर दर्द का जवाब उसने अपनी मेहनत से दिया। दिन बीतते गए महीने गुजर गए और फिर आया वो दिन। यूपीएससी रिजल्ट का दिन। इस बार विवेक ने ना सिर्फ यूपीएससी क्लियर किया बल्कि टॉप रैंक हासिल की। वो अब एक आईएएस अफसर बन चुका था। जब उसने अपने

    माता-पिता को यह खबर दी तो उनकी आंखों में खुशी और गर्व के आंसू थे। उनकी मुस्कुराहट को देखकर अर्जुन को लगा जैसे उसने पूरी दुनिया जीत ली। आज अर्जुन एक ईमानदार आईएएस अधिकारी है। उसकी कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो जिंदगी की मुश्किलों से हार मान लेते हैं। दोस्तों जब जिंदगी हमें दर्द देने पर आती है तो हमें उससे कोई रहम की

    उम्मीद नहीं करनी चाहिए। जिंदगी जब तुम्हें गिरा है तो उसे हार की तरह नहीं सबक की तरह समझो। क्योंकि असली जीत उन्हीं की होती है जो हारने के बाद भी कोशिश करना नहीं छोड़ते। और अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको एक बच्चे की यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

  • पागल बच्चे से Genius बनने की कहानी | Albert Einstein Story

    यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसे बचपन में लोग मंदबुद्धि कहते थे। जिसे उसके स्कूल से निकाल दिया गया। जो बोलना तक देर से सीखा जिसे दुनिया ने हर बार बताया कि वो पागल है। वो कुछ नहीं कर पाएगा। लेकिन उसी लड़के ने आगे चलकर दुनिया की सोच बदल

    दी। यह कहानी उस इंसान की है जिसने ब्रह्मांड के नियम समझे। अल्बर्ट आइंस्टीन। अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14th मार्च 1879 को जर्मनी के एक शहर उल्म में हुआ था। उनका बचपन आम नहीं था। वह कम बोला करते थे और हर चीज को धीरे-धीरे सीखते थे। वे दूसरे बच्चों से हमेशा अलग रहा करते थे। घर में उनके माता-पिता यह चिंता करते क्या यह बच्चा सामान्य है? लेकिन आइंस्टीन के दिमाग में एक ऐसी दुनिया थी जिसे आम इंसान देख ही नहीं सकता था। स्कूल में तो उनका हाल और भी खराब था। उनके टीचर कहते यह बच्चा बेकार है। इससे कुछ नहीं होगा। सख्त

    नियम, रटी हुई शिक्षा। आइंस्टीन को इन सब से नफरत थी। एक दिन तो उनके प्रिंसिपल ने यहां तक कह दिया तुम स्कूल की इज्जत गिराते हो। तुमसे कभी कुछ नहीं होगा। लेकिन यही वो लड़का था जो आगे चलकर फिजिक्स का चेहरा हमेशा के लिए बदल देने वाला था। 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और अपने

    परिवार के पास स्विट्जरलैंड चले गए। वहां भी उन्हें कई रिजेक्शन मिले। यूनिवर्सिटी ने पहले उन्हें स्वीकार नहीं किया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। फिजिक्स और मैथ उनका जुनून थे और इसी जुनून ने उन्हें आगे बढ़ाया। डिग्री पूरी करने के बाद भी उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिल रही थी। इतना महान दिमाग और कोई नौकरी देने को तैयार नहीं। आखिरकार उन्हें एक छोटा सा जॉब मिला। स्विस पेटेंट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी। लेकिन यही वो जगह थी जिसने

    आइंस्टीन का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया। स्विस पेटेंट ऑफिस में बैठकर आइंस्टीन हर किसी के आविष्कार जांचते थे। लेकिन उनके दिमाग में ब्रह्मांड के रहस्य उबल रहे थे। अपना काम पूरा करने के बाद वह देर रात तक कागजों पर समीकरण लिखा करते। समय क्या है? रोशनी कैसे चलती है? ब्रह्मांड कैसे काम करता है? हर कोई अपनी जिंदगी में खोया था। लेकिन आइंस्टीन अपनी कल्पना की दुनिया में खोए रहते थे। और फिर आया सन 1905 और यह साल विज्ञान का चमत्कार वर्ष बन गया। सिर्फ एक साल में उन्होंने ऐसी रिसर्च पब्लिश

    की जो दुनिया को हिला देने वाली थी। यही वो साल था जब इंसानी इतिहास की सबसे मशहूर समीकरण जन्मी e = mc² यानी ऊर्जा और द्रव्य असल में एक ही चीज है। ये समीकरण इतनी शक्तिशाली थी कि आगे चलकर इसी के सिद्धांत पर एटम बम से लेकर न्यूक्लियर वेपन हर चीज बनी। दुनिया हैरान थी एक मामूली पेटेंट क्लर्क ने फिजिक्स का पूरा खेल ही बदल दिया। इसके बाद उन्होंने द थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी दी। एक ऐसी थ्योरी जिसने ब्रह्मांड, स्पेस और ग्रेविटी को समझकर पूरी तरह नया रूप दे दिया। आइंस्टीन कहा करते थे कल्पना ज्ञान से बड़ी होती है और उन्होंने साबित कर

    दिया कि सिर्फ कल्पना से यूनिवर्स के नियम लिखे जा सकते हैं। सन 1920 में आइंस्टीन को नोबेल प्राइज दिया गया। आइंस्टीन जितने महान वैज्ञानिक थे, उतने ही अच्छे इंसान भी। वह युद्ध और हिंसा के खिलाफ थे। लेकिन जब दुनिया दूसरे विश्व युद्ध में जल रही थी तब उन्होंने अमेरिकी सरकार को चेतावनी दी कि जर्मनी एटम बम बना सकता है और उनके इस एक पत्र से मैनहटन प्रोजेक्ट शुरू हुआ जिसने दुनिया का फर्स्ट एटम बम बनाया लेकिन आगे चलकर आइंस्टीन ने इसे अपनी सबसे बड़ी गलती बताया। उनकी जिंदगी में शोहरत भी

    आई और अकेलापन भी। अवार्ड भी मिले और आलोचना भी। लेकिन उन्होंने विज्ञान को जो दिया वो अनमोल है। उनका नाम आज भी जीनियस के तौर पर याद किया जाता है। और 18 अप्रैल सन 1955 को अल्बर्ट आइंस्टीन इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए। लेकिन उनकी सोच, उनका ज्ञान आज भी हमारी हर टेक्नोलॉजी में जीवित है। जीपीएस से लेकर लेजर तक सब में आइंस्टीन छिपे बैठे हैं। आइंस्टीन की जिंदगी हमें सिखाती है।

    दुनिया चाहे आपको 100 बार नालायक बोले पर अगर आपके अंदर जलती हुई जिज्ञासा है, सीखने का जुनून है और हार ना मानने की हिम्मत है तो आप भी ब्रह्मांड के नियम बदल सकते हैं। कभी अपने आप को किसी से कम मत समझो। अगर एक ऐसा बच्चा जिसे बोलना तक नहीं आता वो आगे चलकर इंसानी इतिहास का सबसे महान वैज्ञानिक बन सकता है तो आप कुछ भी कर सकते हो।

  • एक गधे की कहानी- ज़्यादा सीधे बनने का अंजाम – Story of a Fox and Donkey | Moral Story

    एक बार की बात है एक गांव में एक धोबी रहता था जिसके पास एक गधा था। हर दिन बेचारा गधा भारी भरकम कपड़ों के गट्ठर एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाता था। लेकिन धोबी बेहद कंजूस था। वह गधे को ना ठीक से खाना देता था और ना आराम। रात में वह बस उसे खोल देता और उससे कहता जा अपना खाना अपने आप ढूंढ ले। थका हारा गधा रात के अंधेरे में

    यहां से वहां भटकता और अपने लिए खाने की तलाश करता। उसका शरीर इतना कमजोर हो गया था कि उसकी हड्डियां साफ दिखाई देती थी। एक रात जब वह दुखी होकर घूम रहा था तब उसे एक लोमड़ी मिली। लोमड़ी ने उसे देखा और उससे पूछा अरे भाई तुम इतने दुबले और कमजोर क्यों हो? गधे ने दुखी होकर कहा,

    “क्या बताऊं दोस्त? मेरा मालिक मुझसे दिन भर काम करवाता है और रोटी पानी कुछ नहीं देता। रात को मुझे अंधेरे में खुद ही खाना ढूंढना पड़ता है। लोमड़ी बोली, तो अब से तुम्हें यह तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी। आज रात मेरे साथ चलो। पास ही में एक बड़ा सब्जियों का

    बगीचा है। गाजर, मूली सब वहां भरे पड़े हैं। मैंने अंदर जाने का एक गुप्त रास्ता भी बनाया हुआ है। मैं हर रात वहां जाकर पेट भरकर खाती हूं। आज रात तुम भी चलो। फिर से तंदुरुस्त हो जाओगे। गधे की आंखें चमक उठी। उसने कहा, तो चलो। उस रात दोनों चुपके-चुपके उस बगीचे में घुस गए। महीनों बाद उस गधे ने

    अच्छी तरह खाना खाया। वह खुद को फिर से जिंदा महसूस कर रहा था। उस दिन के बाद उन दोनों में दोस्ती हो गई और वह हर रात मिलकर दावत उड़ाने लगे। कुछ ही दिनों में गधे का शरीर मजबूत हो गया। अब उसका बदन चमकने लगा और उसकी चाल में गर्व आ गया। वो अपनी सारी परेशानियां भूल गया था। एक रात भरपेट भोजन के बाद गधे को अजीब सा आनंद

    महसूस हुआ। वह झूमने लगा और आसमान की ओर गर्दन उठाने लगा। लोमड़ी ने चिंतित होकर पूछा, “यह क्या कर रहे हो दोस्त?” गधा मुस्कुरा कर बोला, आज मैं आनंद में हूं। मेरा मन कर रहा है कि मैं गाना गाऊं। अच्छे भोजन के बाद खुशी से गाना तो बनता है। लोमड़ी घबरा गई। अरे नहीं नहीं यह मत करना। हम यहां चोरी से आए हैं। अगर चौकीदारों ने सुन लिया तो हम दोनों पकड़े जाएंगे। लेकिन गधे ने गर्व से कहा। तुम संगीत समझती नहीं हो प्रिय

    लोमड़ी तुम तो जंगल के जीव हो। कला क्या होती है यह तुम क्या जानो। मैं जन्मजात गायक हूं। मेरी आवाज सुनकर तो बगीचे का मालिक भी नाचने लगेगा। लोमड़ी ने हाथ जोड़कर कहा, अरे भाई मेरी बात मानो। तुम चाहे महान गायक हो पर अभी नहीं। अगर तुमने यहां गाया तो हम दोनों की खैर नहीं। गधा गुस्सा हो गया। लोमड़ी आज तुमने मेरी आवाज का मजाक उड़ाया। बस अब तुम देखना दुनिया किस तरह मेरी

    गायकी की तारीफ करती है। लोमड़ी ने समझ लिया कि गधा नहीं मानेगा। उसने कुछ सोचा फिर चालाकी से कहा अच्छा भाई मान लिया तुम महान गायक हो। मैं तुम्हारे लिए फूलों की माला लाती हूं। तुम कुछ देर बाद गाना शुरू करना ताकि मैं समय पर आकर तुम्हारा सम्मान कर सकूं। गधा हंसकर मान गया। जैसे ही लोमड़ी वहां से निकली, गधे ने आंखें बंद की, गर्दन ऊपर उठाई और जोर-जोर से रेकने लगा। बगीचे के चौकीदार एकदम जाग पड़े। वो लाठियां लेकर आवाज की तरफ दौड़े और

    बोले, यही है। यही गधा हमारा बगीचा खराब कर रहा था। और उन्होंने उस गधे को पीटना शुरू करा। वे उसे तब तक पीटते रहे जब तक वह अधमरा होकर जमीन पर नहीं गिर पड़ा। दूर से यह सब देखते हुए लोमड़ी ने अपना सिर हिलाया और धीरे से कहा मूर्ख वही है जो अपने दोस्त की बात नहीं मानते। जब कोई आपको अच्छी सलाह दे खासकर वो इंसान जो आपकी परवाह करता हो तो देर होने से पहले उसे सुन

    लेना चाहिए। अहंकार और घमंड सबसे चतुर दिमाग को भी अंधा कर देते हैं। याद रखो जो अच्छे सुझाव को ठुकराते हैं उन्हें अक्सर दर्द से सीखना पड़ता है। सच्ची समझदारी अपनी आवाज दिखाने में नहीं अनुभव की खामोशी को सुनने में है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको दूसरी कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

    Thankyou

  • क्या आप भी रोज YouTube पर मोटिवेशनल वीडियो देखते हैं|

    क्या आप भी रोज YouTube पर मोटिवेशनल वीडियोस देखते हैं और यह सोचते हैं कि इससे आपकी जिंदगी बदल जाएगी या आप सफल बन जाएंगे तो माफ कीजिए। लेकिन आप भी उन लाखों लोगों में से एक हैं जो सोचते हैं कि सिर्फ मोटिवेशन से वह सफल बन जाएंगे। जब तक आप अपनी जिंदगी में डिसिप्लिन यानी अनुशासन नहीं लाते तब तक मोटिवेशन कुछ

    उखाड़ नहीं सकता। अगर आप इस बात को अच्छी तरह समझना चाहते हैं तो यह कहानी अंत तक सुने। हो सकता है यह कहानी आपकी जिंदगी बदल दे। छोटे से कस्बे में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वो बहुत बड़े सपने देखा करता था। हर दिन वो सोचता मुझे जिंदगी में कुछ ऐसा करना है जिससे लोग मुझे याद रखें। वो रोज मोटिवेशनल वीडियोस देखता, स्टोरीज पढ़ता और सक्सेसफुल लोगों की

    स्पीच सुनता। वो अपने आप से बार-बार कहता कल से मैं रोज इतने घंटे पढ़ाई करूंगा। अब से मैं हर चीज बदल दूंगा। और जब वह सोचता तो अंदर से जोश और एक्साइटमेंट महसूस करता। लेकिन वह जोश ज्यादा देर तक टिकता नहीं था। बस दो या तीन दिन बीतते और वो फिर अपनी आलसी आदतों पर लौट आता। कभी मन नहीं हुआ तो पढ़ाई छोड़ दी। कभी मौसम अच्छा नहीं लगा तो टहलने निकल गया। धीरे-धीरे उसकी जिंदगी बहानों का ढेर बन गई। बार-बार कोशिश करके असफल होने से वह अंदर

    से टूट गया था। उसे लगने लगा कि शायद वह कभी बदल नहीं सकता। एक दिन वो अपने दोस्त विवेक से मिला। विवेक को देखकर आरव हैरान रह गया। विवेक हर सुबह जल्दी उठता, अपनी दिनचर्या का पालन करता, पढ़ाई समय पर करता और हर दिन अपने आप को बेहतर बनाता। आरव ने पूछा, “यार विवेक, तू यह सब कैसे करता है? तू हर दिन इतना मोटिवेटेड कैसे रहता है?” विवेक मुस्कुराया और बोला, “मैं

    मोटिवेशन पर नहीं डिसिप्लिन पर भरोसा करता हूं।” आरव हैरान रह गया और बोला, “क्या? लेकिन सब तो कहते हैं मोटिवेशन ही सक्सेस की कूंजी है। विवेक ने ना सिर हिलाया और बोला कल सुबह सूरज निकलने से पहले मेरे साथ नदी किनारे चलना। मैं तुझे कुछ दिखाना चाहता हूं। अगली सुबह विवेक के साथ आरव नदी किनारे पहुंचा। वहां पर एक बूढ़ा मछुआरा बैठा था। उसके हाथ सख्त थे और आंखों में

    अनुभव की गहराइयां थी। विवेक ने कहा दादा जी क्या आप को वह कहानी सुना सकते हैं जो आपने मुझे सुनाई थी? मछुआरे ने मुस्कुराते हुए आरव को देखा। बेटा क्या तुम इस नदी को देख रहे हो? मैं रोज इसी वक्त यहां पर आता हूं। चाहे सर्दी हो, बारिश हो या धूप। मैं हर दिन अपना जाल डालता हूं और सब्र के साथ मछलियों का इंतजार करता हूं। किसी दिन मुझे अच्छी मछलियां मिलती हैं। किसी दिन बेकार

    मछलियां मिलती हैं और किसी दिन मिलती ही नहीं। लेकिन मैं आना नहीं छोड़ता। जानते हो क्यों? आरव ने सोचा और फिर बोला क्योंकि आपको मछली पकड़ना पसंद है। मछुआरा हल्के से हंसा। नहीं बेटा यह मेरा शौक नहीं है। यह मेरी जिम्मेदारी है। अगर मैं सिर्फ उस वक्त आता जब मेरा मन करता है तो मेरा परिवार भूखा रह जाता। मैं मोटिवेशन का इंतजार नहीं करता। मैं अनुशासन पर यकीन रखता हूं। फिर मछुआरे ने बांस के पेड़ की तरफ इशारा किया और बोला, क्या तुमने बांस के पेड़ की कहानी सुनी है? आरव ने सिर हिलाया नहीं। मछुआरा बोला एक किसान ने एक बार बांस का बीज

    बोया। वो हर दिन उसे पानी देता। धूप देता और उसकी देखभाल करता। एक साल बीता कुछ नहीं हुआ। दूसरा साल बीता फिर भी कुछ नहीं हुआ। तीसरा यहां तक कि चौथा साल भी बीत गया। फिर भी जमीन से कुछ नहीं उगा। लोग उस पर हंसते कि वो अपना समय बर्बाद कर रहा है। लेकिन किसान नहीं रुका। और पांचवें साल अचानक सिर्फ कुछ ही हफ्तों में बांस का पेड़ 90 फीट तक ऊंचा हो गया। क्यों?क्योंकि शुरुआत के 4 साल वो जमीन के अंदर अपनी जड़े मजबूत कर रहा था। अगर किसान हार

    मान लेता तो वह कभी भी उसे बढ़ता हुआ नहीं देख पाता। मछुआरे ने मुस्कुरा कर कहा बेटा डिसिप्लिन भी उसी बांस की तरह है। शुरुआत में कोई नतीजा नहीं दिखता। लेकिन अंदर ही अंदर कुछ बड़ा बन रहा होता है और जब सही समय आता है तो सफलता इतनी तेजी से बढ़ती है कि लोग हैरान रह जाते हैं। आरव के अंदर कुछ बदल गया। उसे एहसास हुआ कि अब तक वो मोटिवेशन के पीछे भाग रहा था। जबकि उसे अनुशासन की जरूरत थी। उसने

    यह तय किया कि अब से वह कोई एक्सक्यूज नहीं करेगा। हर दिन एक समय पर उठेगा। हर दिन पढ़ाई करेगा। व्यायाम करेगा और अपने लक्ष्य पर काम करेगा। चाहे उसका मन हो या ना हो। क्या आप भी आरव की तरह अपने सपनों के लिए तैयार हैं? तो याद रखिए

    मोटिवेशन नहीं डिसिप्लिन ही असली ताकत है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है तो आपको यह दूसरी कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

  • Powerful Motivational Story – खुद को कम मत समझो 👇

    बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में एक साधारण आदमी रहता था। उसका काम था पहाड़ पर जाकर दिनभर पत्थर तोड़ना। यह काम कठिन था, थकाऊ था। लेकिन उस आदमी को अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। वह सुबह काम पर जाता, दिनभर मेहनत करता और शाम को थोड़े बहुत पैसे लेकर लौट आता। उसी पैसे से अपने परिवार का

    गुजारा चलता था। रात को अपने घर आकर वो अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताता और फिर आराम से सो जाता। यही उसकी रोजमर्रा की जिंदगी थी। लेकिन एक दिन काम खत्म करके घर लौटते समय उसके मन में एक विचार आया क्या यही जिंदगी है? सुबह से शाम तक पत्थर तोड़ो और उसके बदले में इतने कम पैसे मिले कि मुश्किल से गुजारा हो पाए। काश मेरे पास कोई ऐसी शक्ति होती कि मैं जो चाहूं वो बन पाता। वो गहरी सोच में डूबा हुआ घर पहुंचा। खाना उसके आगे रखा गया लेकिन उसका ध्यान

    अपने विचार में ही डूबा हुआ था। धीरे-धीरे वह सोने लगा और नींद में चला गया। तभी उसे एक अजीब सपना आया। वो देखता है कि रोज की तरह वो अपने काम से घर लौट रहा है और रास्ते में उसे एक बहुत ही आलीशान मकान दिखा। घर इतना शानदार था कि देखकर उसके मन में ख्याल आया काश यह घर मेरा होता। काश मैं इसका मालिक होता। और जैसे ही उसने यह सोचा पल भर में वही घर उसका हो गया। वह उस घर के अंदर था। उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। सचमुच जो उसने चाहा वो उसे मिल गया। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई।

    अचानक उसने एक शोर सुना। दरवाजे पर जाकर देखा तो उसे एक बहुत बड़ी रैली दिखाई दी। लोग जोर-जोर से नारे लगा रहे थे। बीच में एक नेता खड़ा था और लोग उसके नाम के जयकारे कर रहे थे। वो सोचने लगा मैं इस आलीशान घर का मालिक हूं। लेकिन असली ताकत तो उस नेता के पास है। अगर मैं वह नेता बन जाऊं तो हजारों लोग मुझे देखने के लिए तरसेंगे। बस इतना सोचना था कि वो नेता बन गया। चारों ओर लोगों की भीड़, नारे सब उसके लिए कर रहे थे। वो खुशी से पागल हो गया। लेकिन यह

    खुशी भी ज्यादा देर तक नहीं टिकी। तभी धूप बढ़ने लगी। कड़ी गर्मी और रोशनी से उसका सिर चकराने लगा। पसीने से लथपथ होकर वह बैठ गया और उसे एहसास हुआ इस नेता से भी कोई ताकतवर है और वह है सूरज। असली ताकत तो उसी की है। उसके मन में विचार आया काश मैं सूरज बन जाऊं और पलक झपकते ही वह सूरज बन गया। पूरा संसार अब उसकी रोशनी से जगमगा उठा। उसे लगा कि अब इस दुनिया में उससे ताकतवर कोई नहीं है। लेकिन यह खुशी भी ज्यादा देर तक नहीं रही। कुछ ही देर बाद

    आसमान में बादल खिराए। सूरज की रोशनी पूरी तरह ढक गई। उसने महसूस किया कि बादल तो उससे भी ताकतवर है और सोचने लगा काश मैं बादल बन जाऊं। और इतना सोचते ही वो बादल बन गया और आसमान में उड़ने लगा। उसे लगने लगा कि अब कोई उसकी बराबरी नहीं कर सकता। वो जहां चाहे वहां बरस सकता था और सुनामी ला सकता था। लेकिन अचानक तेज हवाएं चलने लगी और उस बादल को इधर-उधर उड़ाने लगी। उसके मन में ख्याल आया हवा तो बहुत शक्तिशाली है। काश मैं हवा बन जाऊं। और यह बोलते ही वो हवा बन गया। अब वह चाहे तो धीरे-धीरे उड़े या चाहे आंधी बनकर सब कुछ बहा ले जाए। उसे लगा अब सचमुच दुनिया में

    ताकतवर मैं ही हूं। लेकिन तभी उसके सामने एक पत्थर का पहाड़ आया। उसने पूरी ताकत लगाई। आंधी बनकर भी उड़ा लेकिन उसे 1 इंच भी नहीं हिला पाया। उसने हैरानी के साथ सोचा तो इस दुनिया में हवा से भी ज्यादा शक्तिशाली कोई है तो वह है यह पहाड़। काश मैं यह पहाड़ बन जाऊं। और इतना सोचते ही वो मजबूत पहाड़ बन गया। उसे लगने लगा कि अब कोई भी ताकत उसे हिला नहीं सकती। लेकिन अचानक उसे दर्द होने लगा जैसे कोई आदमी उसे चोट पहुंचा रहा हो। उसने देखा कि एक आदमी हथौड़ी लेकर पत्थर तोड़ रहा था। उसे झटका लगा। यह कैसे हो सकता है? पहाड़ जैसे मजबूत को भी

    कोई तोड़ सकता है। आखिर इतनी ताकत किसके पास है? उसके मन में ख्याल आया काश मैं वही इंसान बन जाऊं जो इस पत्थर को तोड़ रहा है। लेकिन इस बार उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई। वो दर्द से तड़पता रहा। तभी उसका सपना टूटा। वो घबरा कर उठा और उसने आईने में अपने आप को देखा। तब उसे समझ में आया। सपने में मैं वह इंसान इसलिए नहीं बन पाया क्योंकि असलियत में मैं वह इंसान ही हूं जो पहाड़ को तोड़ सकता है। मैं वही हूं जिसकी मेहनत से हर कुछ संभव है। उस दिन उसे यह सच्चाई समझ आई। कभी भी अपने आप को कम मत

    समझो। तुम्हारे अंदर ही सबसे बड़ी ताकत है। अगर तुम अपने आप को कम आंकते हो तो दुनिया तुम्हें और भी कम समझेगी। लेकिन अगर तुम अपनी असली ताकत को पहचान लोगे तो तुम्हें कोई रोक नहीं सकता। सबसे बड़ी शक्ति तुम्हारे अंदर ही है। दोस्तों, अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है, तो आपको यह कहानी भी जरूर सुननी चाहिए।

  • सबसे ताकतवर जानवर हाथी को मानते है और जंगल का राजा शेर को क्यो कहते है | Hindi Motivational Stories 👇

    जब भी हम जानवरों की बात करते हैं तो अक्सर हमारे दिमाग में हाथी की ताकत या चीते की रफ्तार का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जंगल का राजा आखिर शेर ही क्यों होता है? असल में शेर के अंदर ऐसे पांच खास गुणन हैं जो ना सिर्फ उसे

    जंगल का राजा बनाते हैं बल्कि अगर हम इंसान भी इन गुणों को अपनी जिंदगी में उतार लें तो हम भी अपने लक्ष्य और जीवन के राजा बन सकते हैं। आइए जानते हैं शेर के वो पांच अद्भुत गुण और यह पांचवा गुण। तो इतना जरूरी है कि उसके बिना कोई भी सफलता अधूरी है। पहला आत्मविश्वास। शेर जब चलता है तो उसके चेहरे पर घमंड नहीं बल्कि एक

    ठहराव और भरोसा होता है। वह जानता है कि वह कौन है और उसे क्या करना है। वो ना तो बिना वजह डरता है और ना ही किसी को डराने की कोशिश करता है। उसका आत्मविश्वास ही उसे सबकी नजर में खास बनाता है। दूसरा स्पष्ट लक्ष्य और फोकस शेयर। जब शिकार करता है तो वह बार-बार कोशिश नहीं करता। वो इंतजार करता है, सही वक्त देखता है और एक

    ही बार में वार करता है। उसका लक्ष्य बिल्कुल साफ होता है। जिंदगी में भी जब तक हम अपना फोकस नहीं तय करेंगे तब तक हम सिर्फ दौड़ते रहेंगे। पहुंचेंगे कहीं नहीं। तीसरा साहस और निर्णय क्षमता। शेर कभी भी पीछे नहीं हटता। भले सामने हाथी ही क्यों ना खड़ा हो वो डर से नहीं। साहस और रणनीति से आगे बढ़ता है। वह सही वक्त पर सही फैसला लेता है और उसी पर कायम रहता है। चौथा जिम्मेदारी शेर अकेला चलता है। लेकिन जब बात अपने समूह की आती है तो वह सबसे पहले खड़ा

    होता है। अपने परिवार की सुरक्षा हो या पूरे इलाके की हिफाजत शेर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता। एक असली राजा वह होता है जो खुद से पहले दूसरों की सोचता है। पांचवा गुण जानने से पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें। पांचवा अनुशासन। शेर की हर दिनचर्या में एक पैटर्न होता है। वो कब उठेगा, कब शिकार करेगा, कब आराम करेगा, सब तय होता है। उसकी ताकत सिर्फ शरीर में नहीं उसके अनुशासन में भी छुपी होती है। जिंदगी में कोई भी बड़ी सफलता हर दिन की मेहनत,

    अनुशासन और निरंतरता से ही मिलती है। यही वह पांच गुण है जो अगर हम अपने जीवन में उतार लें तो हम भी अपने भाग्य, अपने सपनों और अपने लक्ष्य के राजा बन सकते हैं। आपने शेर के यह पांच अनमोल गुण सीख लिए।

    लेकिन क्या आप जानते हैं एक सच्चे दोस्त की क्या पहचान होती है? अगर जानना चाहते हैं तो इसे शेयर करें ताकि नेक्स्ट स्टोरी लेकर आए।